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अरावली बचाने के लिए जयपुर में पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास पैदल मार्च कर रहे हैं, अंबेडकर सर्किल पर मौन सत्याग्रह भी हो रहा है। सवाल ये है कि कांग्रेस के बड़े दिग्गज नेता कहां हैं? क्या विपक्ष का धर्म सिर्फ सोशल मीडिया पर एक ट्वीट तक सीमित रह...

13,092 次观看 • 9 个月前 •via X (Twitter)

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फिर विपक्ष की क्या ज़िम्मेदारी है? कि वो सरकार की ढोलक और मंजीरा पकड़े और बजाते रहे? लोकतंत्र का मतलब क्या है? लोकतंत्र में विपक्ष की आवाज़ जनता की आवाज़ मानी जाती है। आज अगर जनता लाइन में लग रही है, बेहोश हो रही है, फिर बीजेपी के कोई नेता आ जाएंगे और कह देंगे कि देशभक्त हैं कतार में, लगी है भारी भीड़ — यह नोटबंदी की लाइन पर कहा गया था। फिर ऑक्सीजन सिलेंडर की लाइन लगी। अब एलपीजी गैस सिलेंडर की लाइन लगी है। जब लाइनें लग रही हैं, लोग बेहोश हो रहे हैं, हफ्तों तक सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं, तो विपक्ष क्या करेगा? सवाल नहीं पूछेगा क्या? क्या यह नहीं पूछेगा कि हिंदुस्तान की आम जनता को यह सब क्यों देखना पड़ रहा है, जब आप विश्वगुरु बन रहे हैं? जब बीजेपी कहती है कि देश आज प्रगति कर रहा है आप दाम भी बढ़ा रहे हैं, जनता को कतारों में भी लगा रहे हैं, और विपक्ष सवाल भी न करे? कांग्रेस राष्ट्रीय प्रवक्ता Dolly Sharma

M G

14,738 次观看 • 6 个月前

बीजेपी की तरफ झुके हुए पत्रकारों ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए 38 सेंकड की क्लिप शेयर की और फिर वैलेंसवादी पत्रकारों ने उसी क्लिप को शेयर करना शुरू कर दिया कि राहुल गांधी को ऐसा नहीं करना चाहिए...मुझे समझ नहीं आता कि राहुल गांधी की जब भी आलोचना की जाती है तो सिर्फ कुछ सेकंड की क्लिप ही क्यों शेयर की जाती है पूरी बात शेयर क्यों नहीं की जाती जबकि पूरी बात सिर्फ 1 मिनट 38 सेकंड में पूरी हो गई है। आप भी सुनिए और खुद फैसला कीजिए कि राहुल गांधी ने क्या गलत कहा...और मौसमी जो बेहद काबिल रिपोर्टर हैं लेकिन उनके सवाल पर भी गौर करने की जरूरत है... मौसमी कहती हैं कि कई बार जेपीसी की मांग करते हैं तो संसद ठप्प हो जाती है जनता का पैसा बर्बाद होता है तो क्या जेपीसी के अलावा सड़क का रास्ता अपना सकते हैं? अब सोचिए अगर विपक्ष सड़क पर आवाज उठाता है तो यही लोग कहते हैं कि आप सांसद हैं संसद में आवाज उठाइए...सड़क पर आम जनता को परेशानी हो रही है मतलब बस विपक्ष पर सवाल उठाना है? अब राहुल गांधी का जवाब भी सुनना चाहिए...राहुल गांधी इस फिजूल सवाल पर जवाब देते हैं कि अब संसद में हालात बदल गए हैं अब हमारी संख्या ज्यादा है इसलिए जेपीसी की मांग कर रहे हैं इसमें जनता का पैसा बर्बाद करने की बात कहां से आ गई? जनता का पैसा तो सत्ता पक्ष भी बर्बाद कर रहा है संसद में चर्चा ना करके उस पर सवाल कौन पूछेगा? लगता है बैलेंसवादी पत्रकारों को बहुत जल्दी रहती है राहुल गांधी की आलोचना करने की तो जैसे ही कुछ मिला तुरंत शुरू हो जाते हैं फिर चाहे वो 38 सेकंड की अधूरी क्लिप ही क्यों ना हो...

Saurabh

229,101 次观看 • 2 年前

प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर पेट्रोल, डीज़ल, खाने के तेल की खपत कम करने की अपील की है। एक साल सोना न ख़रीदें, ये भी कहा है सरकारी और प्राइवेट दफ़्तर के साथ साथ स्कूलों को भी वर्चुअल करने की सलाह दी है। सारी बातें ठीक हैं आगे एकजुट हो कर परिस्थितियों का सामना करने के लिए भी जनता तैयार है पर कुछ सवाल भी हैं पश्चिम एशिया का युद्ध तो 28 फ़रवरी से चल रहा है दो-चार दिन में अचानक कुछ नहीं हो गया है, युद्ध तो लंबा खिंच गया है ये तो मार्च में ही सामने आ गया आख़िर सरकार इतनी देर से क्यों जागी है? विपक्ष का सवाल है कि सारा फ़ोकस और संबोधन चुनावी रैलियों पर था और अब टाइम मिला है इस मुद्दे पर आने को? पीएम मोदी का भाषण विदेशी मुद्रा भंडार की तरफ़ काफ़ी कुछ संकेत दे रहा है और गोल्ड रिज़र्व की तरफ़ भी सरकार को इस पर पारदर्शिता से सामने आना चाहिए, जनता को वस्तुस्थिति समझाने में मदद मिलेगी अगर ऐसी विकट स्थिति की आशंका, जो अब नज़र आ रही है, इसे लेकर देश की जनता को मार्च में ही सचेत किया होता तो अब तक उसका लाभ भी नज़र आता। ऐसा क्यों नहीं किया गया?

Umashankar Singh उमाशंकर सिंह

36,390 次观看 • 4 个月前

ब्रेकिंग न्यूज 🚨 कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के अपमान पर अब एनडीए के अंदर से भी विरोध के स्वर उठने लगे हैं। एनडीए के सहयोगी चिराग पासवान ने कहा कि , “ खड़गे साहब आज भी कहीं जाते हैं तो उस जगह का शुद्धीकरण कराया जाता है। वहीं बड़े बड़े नेता मंत्री परिवार के साथ जाते हैं तो मंदिरों को धुलवाया जाता है। ऐसे में अगर इस व्यवस्था को कोई हाथ लगाने की सोचा भी तो देश की एक बड़ी आबादी सड़क पर आ जाएगी। उसके बाद उसको संभालना मुश्किल हो जाएगा इसीलिए आरक्षण पर समीक्षा तो दूर की बात चर्चा भी संभव नहीं है,, एनडीए के अंदर ये जो डर है वो लोकसभा नेता विपक्ष राहुल गांधी का डर है क्यूंकि राहुल गांधी इस मुद्दे पर पहले से ही मुखर हैं।

I.N.D.I.A गठबन्धन

189,668 次观看 • 28 天前

संपत के इस्तीफ़े पर कल से देख रहा हूँ कुछ हुड्डा विरोधी खूब हिला रहे हैं। ज़रा संपत का इतिहास जान लो पहले, संपत सिंह कई बार इनेलो में मंत्री रह चुका है, यहाँ तक कि वित्त मंत्री भी रहा। जब पार्टी विपक्ष में रही तो नेता प्रतिपक्ष बनाया गया। फिर 2009 में जब लगा कि इनेलो खत्म हो गई है तो काँग्रेस में कूद गया। जब लगा काँग्रेस नहीं आएगी तो भाजपा में भागा। फिर जब काँग्रेस का माहौल दिखा तो किसान आंदोलन का बहाना बनाकर वापस काँग्रेस में आ गया। अब जब सरकार नहीं बनी तो इनेलो के ज़रिए अनौपचारिक रूप से भाजपा में ही जाना चाह रहा है। जब ये इनेलो छोड़कर आया था, तब भी इसका यही पत्र था, शब्द टू शब्द वही। क्या विचारधारा है संपत की? पैसा, पद और पावर? एक इंसान के विरोध में लोग इतने पागल हो गए हैं कि किसी का भी वैलिडेशन लेने को तैयार हैं।

Omniscient Chautala

12,016 次观看 • 10 个月前