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संपत के इस्तीफ़े पर कल से देख रहा हूँ कुछ हुड्डा विरोधी खूब हिला रहे हैं। ज़रा संपत का इतिहास जान लो पहले, संपत सिंह कई बार इनेलो में मंत्री रह चुका है, यहाँ तक कि वित्त मंत्री भी रहा। जब पार्टी विपक्ष में रही तो नेता प्रतिपक्ष बनाया...

12,016 просмотров • 10 месяцев назад •via X (Twitter)

Комментарии: 7

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Ankit10 месяцев назад

Kuchh to baat h @BhupinderShooda saab me warna party se lekar vipaksh tak peechhe pada hua h….jo tut gye wo bhag gye jinme himmat h wo sath h

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Banke & Bihari10 месяцев назад

जो बातें लिखी है उनमें कहीं न कहीं तो सच्चाई है ही। एक इंसान के समर्थन में लोग इतने पागल हो गए हैं कि किसी की भी बात नहीं सुन रहे हैं।

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ankit10 месяцев назад

कोई बात नहीं भाई सारे नेता बुरे हैं बस हुड्डा अच्छा नेता है। ठीक?

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Lalit dureja10 месяцев назад

@bishnoikuldeep @kharge

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Vikram Chahar10 месяцев назад

2009 में इनैलो की सत्ता में वापसी ना होने के सिर्फ दो कारण थे एक संपत सिंह और दूसरा कुछ सीटों पर अजय सिंह द्वारा गलत टिकट वितरण।।

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bishnoi10 месяцев назад

उसके पुत्र को कांग्रेस टिकट दे देती तो पार्टी ठीक थी परंतु ऐसा नहीं हुआ तो कांग्रेस परिवार वादी हो गई 😄

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Real Tadka Official10 месяцев назад

संपत सिंह पक्का दलबदलु है।

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कानपुर में भाजपा के भ्रष्टाचार की परत का परदा जब उठ गया तो उनके विधायक जी का नाटक शुरू हो गया। भाजपा की ये पुरानी आदत है कि पहले सफ़ेदपोश बनकर चुपचाप भ्रष्टाचार करती है और जब पोल खुल जाती है तो उसका ठीकरा अधिकारियों के सिर पर फोड़ देती है। इसका अर्थ ये हुआ कि सरकार का अधिकारियों पर कोई नियंत्रण नहीं है मतलब सराकर नाकाम भी है और निष्प्रभावी भी। जनता पूछ रही है कि सरकार की लगाम क्या अधिकारियों के हाथ में है? सच तो ये है कि भाजपा का हर निर्माण भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है। भाजपा के लिए कोई भी निर्माण विकास का विषय नहीं बल्कि भ्रष्टाचार करने का उपाय है।

Akhilesh Yadav

226,296 просмотров • 1 год назад

3 साल पहले, जब यही डी फार्मर कंसंट्रेट इस्तेमाल हुआ था, तब भारतीय जनता पार्टी के नेता प्रवेश वर्मा ने कैमरे के सामने खड़े होकर कहा था — "यमुना में ज़हर मिलाया जा रहा है!" और उस वक्त खूब ड्रामा किया गया, जनता को गुमराह किया गया। आज, दिल्ली में भाजपा सरकार है, और वही प्रवेश वर्मा मंत्री हैं। अब फिर वही डी फार्मर कंसंट्रेट यमुना में डलवाया जा रहा है। तो सवाल उठता है अगर यह जहर है, तो अब क्यों डाला जा रहा है? और अगर यह जहर नहीं था, तो फिर तब झूठ क्यों बोला गया? सच्चाई साफ़ है — भारतीय जनता पार्टी का दोहरा चरित्र और उनके नेताओं का प्रोपेगंडा एक बार फिर जनता के सामने बेनकाब हो गया है।

Sanjeev Jha

198,852 просмотров • 11 месяцев назад

जब बच्चे तक न उठा सकते आवाज़ तो कैसे कहें कि ये वतन है आज़ाद? आज भाजपा के कट्टर समर्थक भी शर्मिंदा हैं और पश्चाताप और प्रायश्चित की आग में जल रहे हैं, उनका भी तो परिवार है और परिवार में बच्चे भी हैं, और उन बच्चों का भी वर्तमान और भविष्य है। अब कोई भाजपा से भविष्य की क्या उम्मीद करे, जब वर्तमान में ही जनता भाजपा से पूरी तरह नाउम्मीद हो गई है। आज हर उम्र के लाखों लोगों ने बेख़ौफ़ होकर जिस तरह भाजपा के विरोध में एकजुटता दिखाई है, सच तो ये है कि उस जन-आक्रोश को देखकर भाजपाई और उनके संगी-साथी बेहद डर गये हैं। ये वो आम जनता है जिसे सरकार की किसी भी एजेंसी का भय नहीं है। भाजपा ख़त्म!

Akhilesh Yadav

352,017 просмотров • 2 месяцев назад

भारत के हर नागरिक को वोट देने का अधिकार है, लेकिन ये अधिकार घुसपैठियों को नहीं है। लेकिन आज इन्हीं घुसपैठियों का वोट सभी इंडी गठबंधन के दलों को चाहिए। जब भी हम घुसपैठिया बोलते हैं तो इंडी गठबंधन वाले इसे सीधा मुसलमानों से जोड़ देते हैं। इनकी इसी सोच के कारण देश का भी नुकसान हो रहा है और मुसलमानों का भी। रही बात घुसपैठ की, तो घुसपैठियों के आने की व्यवस्था 1983 में इंदिरा जी की सरकार के समय शुरू होती है, जब एक कानून लाया गया था IMDT एक्ट। इस एक्ट में यह प्रावधान था कि अगर आपको लगता है कि आपके आस-पास कोई बांग्लादेशी व्यक्ति रह रहा है तो उसकी जिम्मेदारी नहीं है यह साबित करना कि वह भारत का नागरिक नहीं है, बल्कि अगर आपको शिकायत है तो यह आपकी जिम्मेदारी है कि आप साबित करें कि वह बांग्लादेश का नागरिक है। इस एक्ट के खिलाफ हमारे नेता सर्वानंद सोनोवाल सुप्रीम कोर्ट गए और 2006 में, इनकी सरकार के समय, इसे रद्द किया गया। बतौर गृह राज्य मंत्री, श्रीप्रकाश जायसवाल का 2006 का बयान है कि भारत में ढाई से तीन करोड़ बांग्लादेशी घुसपैठिए हैं। इसके अलावा, 2012 में मुंबई के आजाद मैदान में बांग्लादेशी घुसपैठियों का नाम आया था या नहीं? जयपुर ब्लास्ट में बांग्लादेशी घुसपैठियों का नाम आया था या नहीं? इसीलिए, जब हमारी सरकार आई और जांच की बात की, NRC लाने की बात की, तो ये लोग धरने पर बैठ गए। अब S.I.R का उद्देश्य भी सही वोटर की जांच करना है, लेकिन घुसपैठिया तो साइड इफेक्ट में अपने आप सामने आ रहा है। इसीलिए मैं कहता हूं कि विपक्ष का एकमात्र एजेंडा है कि "कोई सूरत बदलना मेरा मकसद नहीं है, मेरा मकसद है हंगामा होना चाहिए।"

Dr. Sudhanshu Trivedi

29,866 просмотров • 1 год назад

राजस्थान में राज RSS वाले कर रहे, ये खाली मुखौटे हैं जोधपुर में आज मीडिया से बातचीत की: अशोक गहलोत का जवाब: देखिए राजनीति में जो है, झूठे आरोप नहीं लगाए जाते हैं। अगर आपके पास तथ्य है, तो उस पर बात करो। किरोड़ी मीणा जी जब सरकार में नहीं थे, तब भी वो लगातार आरोप लगाते थे। उनकी जो प्रकृति में है कि वो, आंदोलन करते रहते हैं लगातार, आप देखते हो उनको 15-20 साल से। तो एक अलग किस्म का प्राणी हैं वो। वो पहले भी आरोप लगाते थे अब भी लगा रहे हैं, अनावश्यक है। पार्टी के जो अध्यक्ष होते हैं उनकी एक अलग प्रतिष्ठा होती है। उस पे आप बार-बार चोट कर रहे हो। आरोप लगा रहे हो बिना तथ्यों के। तो आप बताइए कि पार्टी में रिएक्शन होगा? हमारी पार्टी में रिएक्शन है। डोटासरा जी को खुद को लगता है भाई ये क्या आरोप लगा रहा है वो भी बिना तथ्यों के। हम सब को लगता है। ये किरोड़ी मीणा जी को खुद को सोचना चाहिए, वो क्या किस प्रकार की उनकी अप्रोच है काम करने की है। छापे डाल रहे हैं और छापे के साथ जो जाते हैं लोग उनके, वसूली करते हैं वो। ये तो प्रूव हो गया है। जब प्रूव हो गया है तो कहते हैं कि एसीबी भी दबाव में काम कर रही है। तो भाई एसीबी तो दबाव में जब से डीजी साहब आए हैं, पहले मैंने कहा ये आदमी तो भला है डीजी। वो पूरी तरह सीएमओ के और सीएम के दबाव में है ये। और इनके जो नीचे अधिकारी है, वो भी इनकी बात नहीं मानते हैं। वो इनको उल्टा दबाते हैं। तो मुझे लगता है कि एसीबी का जो डीजी है, वो खुद परेशान होगा, मेरे ख्याल से जहां तक मैं समझता हूँ या जहाँ तक मेरे पास वहां से रिपोर्ट आती है। वहाँ के जो काम करने वाले अधिकारी कहते हैं ना कि भाई क्या हो रहा है हमारे यहाँ? स्थिति एसीबी की बहुत भयानक खराब है। दबाव में काम हो रहे हैं। मुख्यमंत्री जी को ऑबलाइज करने के लिए फैसले हो रहे हैं। आईओ कह रहा भाई ये मुल्जिम नहीं बनता हमारा। और ऊपर से कहते हैं डीजी साहब और जो दबाव आता है उनके ऊपर, नहीं आप इनको अरेस्ट करो। ऐसा मैंने आज तक कभी देखा नहीं। तीन-तीन बार हम भी मुख्यमंत्री रहे हैं। एसीबी में कोई पंचायत नहीं करनी चाहिए किसी को भी। यहाँ पंचायतें नहीं हो रही हैं। आईओ कह रहा भाई ये अरेस्ट नहीं हो सकता है क्योंकि इसमें कोई केस नहीं बनता। आप इसको अरेस्ट कीजिए। अरेस्ट हुए भी हैं, जिनमें महेश जोशी भी हैं। आईओ ने मना किया। वो ऑलरेडी द्वारा वैसे ही केस में अरेस्ट हो चुके थे। यहाँ वापस अरेस्ट कर लिया, क्या मजाक बना रखी है? क्या मुख्यमंत्री को दिखता नहीं है कि ये क्या हो रहा है? उनका खुद का नाम आता है कि दबाव आता है। शायद आरएसएस वालों का आता होगा। आरएसएस के दबाव होने के बाद में मुख्यमंत्री हथियार डाल देते हैं। राज आरएसएस कर रहा है ये तो मुखौटे हैं खाली। मुझे लगता है कि राजस्थान के अंदर आजकल जो ये लोग राज करते हैं ये मुखौटे बने हुए हैं। राज आरएसएस वाले कर रहे हैं। ट्रांसफर, पोस्टिंग, करप्शन सब वहीं से डायरेक्शन आते हैं। हालात बड़े गंभीर हैं राजस्थान के। ऐसी इनकी स्थिति बनेगी इस बार राजस्थान की, जनता जो है वो जागरूक है। ये कुछ भी कर लें, ये मुख्यमंत्री बदल देंगे ना, तब भी कुछ नहीं होने वाला है, अगली बार सरकार बदल के रहेगी। थैंक यू।

Ashok Gehlot

56,840 просмотров • 3 месяцев назад

फिर विपक्ष की क्या ज़िम्मेदारी है? कि वो सरकार की ढोलक और मंजीरा पकड़े और बजाते रहे? लोकतंत्र का मतलब क्या है? लोकतंत्र में विपक्ष की आवाज़ जनता की आवाज़ मानी जाती है। आज अगर जनता लाइन में लग रही है, बेहोश हो रही है, फिर बीजेपी के कोई नेता आ जाएंगे और कह देंगे कि देशभक्त हैं कतार में, लगी है भारी भीड़ — यह नोटबंदी की लाइन पर कहा गया था। फिर ऑक्सीजन सिलेंडर की लाइन लगी। अब एलपीजी गैस सिलेंडर की लाइन लगी है। जब लाइनें लग रही हैं, लोग बेहोश हो रहे हैं, हफ्तों तक सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं, तो विपक्ष क्या करेगा? सवाल नहीं पूछेगा क्या? क्या यह नहीं पूछेगा कि हिंदुस्तान की आम जनता को यह सब क्यों देखना पड़ रहा है, जब आप विश्वगुरु बन रहे हैं? जब बीजेपी कहती है कि देश आज प्रगति कर रहा है आप दाम भी बढ़ा रहे हैं, जनता को कतारों में भी लगा रहे हैं, और विपक्ष सवाल भी न करे? कांग्रेस राष्ट्रीय प्रवक्ता Dolly Sharma

M G

14,738 просмотров • 6 месяцев назад

प्रदेश के वर्तमान हालात पर मीडिया से 49 सिविल लाइंस पर बातचीत की : दिक्कतें ही दिक्कतें हैं चारों ओर। सरकार बनते ही ऐसा कभी इतिहास में नहीं हुआ कि दो चार महीने के अंदर ही लोग कहने लगे गवर्नेंस नहीं हो रही, शासन नहीं हो रहा। कुशासन चल रहा है और मैं बराबर आग्रह करता हूं मुख्यमंत्री जी से, वो इसे लेते आलोचना और हम चाहते हैं कि सुधार हो जिससे कि पब्लिक को फायदा मिले। अगर सरकार इन्हीं को रहनी है मान लीजिए इनकी मेजॉरिटी है तो शासन तो यही करेंगे। मगर कुशासन होगा तो पब्लिक में काम नहीं होंगे। आप कल्पना कीजिए कि क्या हालत बने, करप्शन की हदें पार हो गई। चाल, चेहरे, चरित्र एक्सपोज हो गए इनके पर उसके अलावा भी जिस प्रकार से पेमेंट नहीं हो रहे हैं कोई डिपार्टमेंट के अंदर तो फिर क्या हो रहा है? शिक्षा में, स्वास्थ्य सेवाएं तो चरमरा गई है। आप बताइए जिस प्रकार से शिक्षा की स्थिति बनी है, वो तो बड़ी अजीब सी बन गई है। स्कूलें बंद हो रही है, टीचर्स नहीं है और साथ में आपका यह स्वास्थ्य, RGHS का पता ही नहीं है। लोग खुद दुखी हो गए तो चारों ओर से आकर शिकायतें करते जो आप बात पूछ रहे थे हैं वही उसी बात। तो कहने का मतलब है कि हम बार बार कहते हैं मुख्यमंत्री जी को कि कानून व्यवस्था की स्थिति चौपट, रेप अलग हो रहे हैं, डकैती अलग हो जाती है, फायरिंग करके मार देते हैं ज्वेलर्स को या किसी को। एक के बाद एक घटना, इतने सारे मुद्दे एक साथ हो गए हैं कि विपक्ष की पार्टी भी क्या क्या मुद्दा उठाए? सरकार जब तक खुद आगे नहीं आएगी, पूरा मंत्रिमंडल जब तक उस ढंग से बिहेव नहीं करेगा, जनता के साथ में डिपार्टमेंट की पकड़ नहीं करेंगे, मजबूती से डिपार्टमेंट को कसेंगे नहीं वो, तो नीचे तक जो हालात होते हैं वो बदलेंगे नहीं और नुकसान क्या होगा पब्लिक का। हमें चिंता पब्लिक की है। बाकी तो देखिए शासन तो आते जाते रहते हैं, उन्नीस बीस तो देखो हर शासन में होता है करप्शन तो यह मैं दावा नहीं कर सकता, लेकिन कांग्रेस शासन होते तब नहीं होता है, होता है, पूरे देश में होता है, सब जगह होता है। पर जो इस बार जो जिस रूप में हो रहा है ना तो आम जनता से पूछ लीजिए, मालूम पड़ेगा। स्थिति बड़ी नाजुक है। मैं चिंता कर रहा हूं कि वो ठीक होनी चाहिए।

Ashok Gehlot

43,716 просмотров • 1 месяц назад

भाजपा के अंदर आपस में ‘विचारों का विलय’ नहीं हो रहा है और दावे दुनिया भर के। आप तो लखनऊ की कुर्सी पर ध्यान दें, जिसे दिल्लीवाले विलय ही नहीं, विलीन भी करनेवाले हैं। एक मुख्यमंत्री होने के नाते वैसे भी ये विषय आपके अधिकार क्षेत्र का नहीं है। ऐसा लगता है कि ये सुझाव देने के लिए आपको दिल्लीवालों ने मिलने का समय नहीं दिया तभी आप माइक पर बोलने को मजबूर हैं, नहीं तो ये बात तो आप भी समझते ही हैं कि जब आपस में खटास हो तो एक-दूसरे के अधिकार-क्षेत्र में अतिक्रमण और भी खलता है। ध्यान रखिएगा कहीं ऐसा न हो कि इस अतिक्रमण के ख़िलाफ़ कोई तोड़क कार्रवाई हो जाए, बुलडोज़र तो दिल्लीवालों के पास भी है।

Akhilesh Yadav

152,411 просмотров • 2 лет назад

आज अखबार में मुख्यमंत्री जी का आर्टिकल प्रकाशित होने और प्रदेश के हालातों पर : दूसरा जो है, आज आर्टिकल आया है मुख्यमंत्री महोदय का, आर्टिकल आया अच्छी बात है। पांच साल बनाम डेढ़ साल, कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं पूरे प्रदेशवासियों और प्रदेश के गांव गांव में तो ऐसी सरकार का निकम्मापन नाकारापन मैने कभी नहीं सुना किसी सरकार का। सरकारें बीजेपी की भी रही हैं सरकारें राजस्थान में कांग्रेस की भी बनी हैं बीजेपी की भी रही हैं इतना निकम्मा नकारापन मैंने कही देखा नहीं,और इतने कम समय के अंदर, आप बताइए तीन साल बाद में सरकार के बारे में लोग प्रतिक्रिया देते हैं काम नहीं हो रहे हमारे, करप्शन बहुत है सुनवाई नहीं हो रही है किस के पास जाएं सब बातें बोलते हैं लोग तीन साल के बाद में। यही सरकार ऐसी है 6 महीने में ही लोगों को समझ पड़ गया पूत के पांव पालने में होते हैं न वो कहावत चरितार्थ हुई है तो राजस्थान में हुई है। अरे ये क्या हो गया हम ने ये क्या कर दिया, चुनाव तो, सरकार तो पहले वाली चली गई कांग्रेस की पर नई सरकार में ये क्या हो रहा है जिसके पास जाएं, वो सरकार का मुख्या अगर दावा करे तो मैं ये बार बार कहता हूं ये उनका बहुत बड़ा साहस है हिम्मत है कि वो ये मुकाबला कर रहे हैं। और आज ही जिस अखबार में आर्टिकल लिखा गया कम से कम सीएमओ को चाहिए था डीआईपीआर को चाहिए था मैनेज करते आज तो उनके खिलाफ न्यूज नहीं आती। आज भास्कर के अंदर आर्टिकल भी आया है और मुख्यमंत्री के दावे को खोखला साबित कर रहे हैं वो ऐसी ऐसी घटनाएं आज आई हैं उसके अंदर कानून व्यवस्था की हो या अन्य घटनाएं हों तो आज तो मैनेज करना चाहिए था कम से कम। मैनेजमेंट भी नहीं किया आर्टिकल की खुद की धज्जियां उड़ गईं उसके अंदर ही। पत्रिका में क्या आता है अलग बात है और अखबारों में क्या आता है वो तो लंबी चौड़ी बाते हैं लगातार आ रही हैं।

Ashok Gehlot

13,496 просмотров • 1 год назад