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Ana Sayfaya Dön

आंगन में पहुंचने पर यह स्वागत गीत मेरे मन को बहुत भाया !! पाश्चात्य सभ्यता के प्रभाव से विलुप्त हो रही परम्पराओं को जीवित रखने का मेरी बहन-बेटियों का यह प्रयास सराहनीय और वंदनीय है।

39,796 görüntüleme • 3 yıl önce •via X (Twitter)

8 Yorum

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Kamal rawat3 yıl önce

आपने कांग्रेस के द्वारा मुल्ला-मौलवियों को दिया जा रहा वेतन दुगना कर दिया। सनातन संस्कृति से संरक्षण और संवर्धन के लिए आपने क्या किया ??

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Ajay Maurya3 yıl önce

मन की कार्यक्रम में हमें हिस्सा लेना चाहिए प्रधानमंत्री आज काफी कुछ बातें बताएंगे और सुनाइये

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Sunil Sahrawat3 yıl önce

#hssc_group_d_promotion

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arjun yadav3 yıl önce

#hssc_group_d_promotion 💫

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babakaluwala🇮🇳3 yıl önce

ताऊ खट्टर आज भात भरण जा रहा है के किते 🙏🙏

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Manish Dahiya3 yıl önce

#hssc_group_d_promotion

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arjun yadav3 yıl önce

#hssc_group_d_promotion

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Dheeraj Pal3 yıl önce

#हरियाणा #India #ReturnofCulture बस यही परंपरा को हमे अपने बच्चो को और पूरे प्रदेश और भारत में वापिस फैलाना होगा। 👍

Benzer Videolar

मिट्टी की खुशबू को महसूस कीजिए... जैसे मछली को समुद्र से, मोरों को कंगूरों से, हंसों को सरोवर से, शेरों को पर्वतों से, कबूतरों को कुएं से, योद्धाओं को रणक्षेत्र से प्रेम होता है और जिस प्रकार महिलाओं को अपना पीहर प्यारा होता है और हमेशा उसकी याद आती है वैसे ही मुझे मेरे प्यारे मरुधर देश से अथाह प्रेम है... यह इस गीत के मुखड़े का भावार्थ है। बाड़मेर जिले के गांव झणकली के अप्रतिम कवि और गीतकार भंवरदान जी बारहठ ने राजस्थान की महिमा, सुंदरता, विविधता और समृद्ध विरासत को दर्शाता यह मधुर गीत कोई पचास साल से भी पहले रचा था। भले ही यह गीत ज्यादा लोकप्रिय नहीं हो पाया हो, लेकिन यह गीत चूरू जिले के सुजानगढ़ के कवि-गीतकार कन्हैया लाल जी सेठिया के राजस्थानी गीत "आ तो सुरगां नै सरमावै, इण पर देव रमण नै आवै, इण रो जस नर नारी गावै, धरती धोरां री..." की टक्कर का ही है और उतना ही लोकप्रिय होने का हकदार भी है। कई बार कुछ रचनाएं बाहर नहीं आ पाती, कई बार कुछ रचनाएं बाहर आकर भी दबी रह जाती हैं लेकिन उनमें जो मिठास होती है, वह सदैव बनी रहती है। इस गीत को भंवरदान जी बारहठ के गांव झणकली के ही हिंगलाज दान बारहठ मेरे आग्रह पर गा रहे हैं। हिंगलाज राजस्थान लेखा सेवा के अधिकारी हैं और अपनी मिट्टी से, अपनी जड़ों से बहुत गहरे से जुड़े हुए हैं। यह और भी ज्यादा सुखद इसलिए है क्योंकि हिंगलाज महज 25 साल के हैंं। यह उम्र बाहर की हवा लगने वाली होती है लेकिन हिंगलाज ने खुद को बाहरी हवा से काफी हद तक बचा कर रखा है। किसी भी क्षेत्र के गीत, संगीत, साहित्य और संस्कृति के सबसे अच्छे ब्रांड एंबेसडर उस क्षेत्र के युवा ही हो सकते हैं और हिंगलाज इस जिम्मेदारी को बहुत अच्छे से निभा रहे हैं। मैंने कुछ महीनों पहले यही गीत गाते हुए हिंगलाज का एक वीडियो सोशल मीडिया पर देखा था और तभी से मेरी इच्छा थी कि मैं कभी उनसे यह गीत सुनूंगा और अभी जयपुर आने पर हिंगलाज ने मेरी यह इच्छा पूरी की। उम्मीद है यह गीत किसी दिन अपने स्थान को जरूर प्राप्त करेगा। आप फिलहाल आनंद लीजिए। Hinglaaj Dan #Barmer

Arvind Chotia

20,605 görüntüleme • 2 yıl önce

यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि मेरा बेटा जीत और बहू दिवा अपने वैवाहिक जीवन की शुरुआत एक पुण्य संकल्प से कर रहे हैं। जीत और दिवा ने प्रति वर्ष 500 दिव्यांग बहनों के विवाह में प्रत्येक बहन के लिए 10 लाख का आर्थिक सहयोग कर ‘मंगल सेवा’ का संकल्प लिया है। एक पिता के रूप में यह ‘मंगल सेवा’ मेरे लिए परम संतोष और सौभाग्य का विषय है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि इस पावन प्रयास से अनेकों दिव्यांग बेटियों व उनके परिवारों का जीवन सुख, शांति और सम्मान से आगे बढ़ेगा। मेरी प्रभु से यही प्रार्थना है कि वह जीत और दिवा को सेवा के इस पथ पर निरंतर आगे बढ़ने का आशीर्वाद और सामर्थ्य दें। #SevaHiSaadhnaHai

Gautam Adani

596,778 görüntüleme • 1 yıl önce