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इसलिए आदिवासी नक्सली बनते है !
32,274 次观看 • 1 年前 •via X (Twitter)
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इस देश में गाय और कुत्ते को सुविधा और सम्मान मिल सकता है, लेकिन आदिवासी जानवर से भी बद्तर ज़िंदगी जीने को मजबूर है।

आदिवासियों को नक्सली बनने के लिए मजबूर किया जाता है क्योंकि उनके हक़ जमीन, जंगल, और सम्मान छीने जाते हैं। सदियों से उनका शोषण हुआ, उनके संसाधनों को लूटा गया, और उनकी आवाज़ को दबाया गया। संविधान उन्हें अधिकार देता है, लेकिन व्यवस्था अक्सर उनके साथ अन्याय करती है। आदिवासियों के हक़ में खड़ा होना ज़रूरी है। उनके लिए शिक्षा, रोज़गार, और न्याय सुनिश्चित करें, ताकि उन्हें हथियार नहीं, बल्कि अपने अधिकारों की ताकत मिले।

आदिवासी प्रकृति प्रेमी और जल, जंगल, जमीन पर इनका अधिकार है| भारत सरकार को इनका अधिकार देना चाहिए |

सिस्टम के खिलाफ लोग है वो, उनकी बात को सुन जाए ओर समझा जाए तो वो गलत तरीका नहीं लेंगे, उनको सुना नहीं जा रहा तो गलत रस्ते ओर तरीके अपना रहे है, ओर ये कोई नहीं समझ रहा ,क्योंकि सबकी नजर संपत्ति पर है

बहुत अमानवीय कृत्य जब किसी असहाय को सताया जाता है तो फिर उसके अंदर से इंसानियत मर जाती है

आदिवासी व किसान के पास वही जीवन और रोजी रोटी होती है वे प्राकृतिक वातावरण से जुड़े हैं उनके पहले पूर्वज भारत निवासी होने के बावजूद उनका धीरे धीरे नरसंहार किया जा रहा है और गोभी उन दफन लोगों के ऊपर उगा अमित शाह दिखाते हैं कि कितना बड़ा फूल आया है यह जीने के अधिकारियों के खिलाफ है

कितना दर्द दिया होगा कि पूरा गांव रो रहा हैं।

असली आतंकवादी तो ये घर उजाड़ने वाले लोग हैं

अगर कोई इंसान नक्सली या आतंकवादी बनता है तो उनको सिस्टम और राशूक दार लोग की अत्याचार शोषण मजबूर करता है
