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उप्र में क़ानून-व्यवस्था पर ही बुलडोजर चल गया है।
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पुलिसवाले ने एकदम सही कहा कि लड़ना है तो बॉर्डर पर जाकर लड़ो लेकिन यहां शांत खड़े रहो।

where space meets sound

तेरी नाक पर भी बुलडोजर चला दे?

सही बोले है अंकल जी....

कानून व्यवस्था तो तब थी जब सीएम मुलायम सिंह यादव अतीक से कहते थे, अतीक तुम्हें मेरी जान की कसम पुलिस वाले को मत मारना, फिर भी वह हत्या करके DGP को फोन करता था, उठा ले जाओ, और याद रखना यह अतीक का इलाका है!

यह सब होता रहेगा सरकार बादलों आराम पाओ नहीं तो परेशान होकर रह जाओ

इतना भी प्रैक्टिस करके नही बुलवाना चाहिए की साफ साफ पता चल जाये नाटक कंपनी वाले हैं😂 जब गुंडों को टिकट और अपराधियों को मंच मिले तो क़ानून-व्यवस्था पर बुलडोजर ही चले!

अखिलेश यादव की बातों में विरोधाभास साफ़ झलकता है। जिनकी सरकार में गुंडाराज चरम पर था, अब वे क़ानून-व्यवस्था की दुहाई दे रहे हैं। सपा के कार्यकाल में अपराधियों को संरक्षण मिला, अब जब बुलडोज़र चला, तो दर्द सपा को हो रहा है।

रामगोपाल यादव पर आपकी क्या राय है जिन्होंने मोजुदा युद्ध में अपनी काबलियत दिखाने वाली सैनिक महिला को जातिसूचक शब्दों से नवाजा। इस तरह की जातिवादी मानसिकता के लोग कब तक रखोगे अपने साथ

जब यूपी में अखिलेश यादव की सरकार थी, तब गुंडे-बलात्कारी-वसूलीबाज खुलेआम सत्ता की छाया में पलते थे। थानों में अपराधी बैठते थे, पीड़ित दर-दर भटकता था। गुंडों की लिस्ट तैयार होती थी लेकिन कार्रवाई नहीं होती थी क्योंकि ज़्यादातर खुद ‘समाजवादी’ झंडा लेकर घूमते थे। आज जब योगी आदित्यनाथ ने गुंडों की गुंडागर्दी पर बुलडोजर चलाया, माफिया के महल ढहाए, गैंगस्टरों की संपत्तियाँ जब्त कीं, तो अखिलेश यादव का दर्द जाग गया? सच ये है कि अखिलेश के लिए अपराधी वोटबैंक हैं, और जब उन पर कार्रवाई होती है, तो उसे कानून-व्यवस्था पर हमला बताया जाता है। दरअसल बुलडोजर कानून-व्यवस्था पर नहीं, समाजवादी जंगलराज और तुष्टिकरण की राजनीति पर चला है। जनता अब सब समझ चुकी है—यूपी अब गुंडों का नहीं, क़ानून का राज है।

ये वीडियो देखा क्या अखिलेश जी @yadavakhilesh
