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उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ गोवा दौरे पर हैं. आज जब उपराष्ट्रपति गोवा एयरपोर्ट पर पहुंचे तो बारिश हो रही थी, इस दौरान उन्होंने बारिश से बचने के लिए खुद ही छाता संभाल लिया. अब उपराष्ट्रपति के इस कदम की हर तरफ तारीफ हो रही है. बता दें कि उपराष्ट्रपति के...

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माननीय उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ जी के खिलाफ मुख्यमंत्री Ashok Gehlot जी ने राजनीति से प्रेरित होकर जो टीका-टिप्पणी की है, वो दुर्भाग्यपूर्ण एवं निंदनीय है। मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर आसीन गहलोत जी को उपराष्ट्रपति के बारे में ऐसे बयान शोभा नहीं देते हैं। लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं की आये-दिन दुहाई देने वाले गहलोत जी अब राजनीतिक आरोप लगाने में इतने निम्न स्तर की राजनीति पर उतारू हो गये हैं कि उन्होंने संवैधानिक पद पर आसीन उपराष्ट्रपति महोदय पर अमर्यादित टिप्पणी करके ना केवल पद की गरिमा का हनन किया है बल्कि प्रदेशवासियों की भावनाओं को भी ठेस पहुंचाया है। जबकि श्री जगदीप धनखड़ जी ने उपराष्ट्रपति पद पर आसीन होकर राज्य का मान समूचे देश में बढाया है, हर राजस्थानी उनका अभिनंदन करता है वहीं मुख्यमंत्री जी उनके कार्यक्रमों और दौरों को लेकर जिस प्रकार की सोच रखते हैं, यह लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विपरीत है।

Rajendra Rathore

10,105 views • 2 years ago

मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा जी तथा पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे जी की दिल्ली यात्रा को लेकर प्रश्न के उत्तर में : ये अंदरूनी पार्टी के मामले हैं जबसे धनखड़ साहब का एपिसोड हुआ है तब से गवर्नमेंट खुद डिफेंस में भी आ गई है । इस संवैधानिक पद पर बैठा हुआ व्यक्ति धनखड़ साहब ने, धनखड़ साहब से शिकायत कांग्रेस की बहुत रही है विपक्ष की रही है, विपक्ष की भी रही है पार्टियों की, परंतु धनखड़ साहब को जिस रूप में मजबूर किया गया या वो खुद इस्तीफा दिया उन्होंने, इस्तीफा दिलवाया गया ये तमाम बातें रहस्य बनी हुई हैं तो संवैधानिक पदों पर जो बैठते हैं एक पार्लियामेंट के मेंबर भी इस्तीफा देता है या कोई ऐसी बात बोलना चाहता है, या वो पार्टी की ही पार्टी का है, किसी पार्टी की बात करता है वो भी स्पष्टीकरण देता हो उसके अंदर स्पष्टीकरण देता है और उपराष्ट्रपति जी का इस्तीफा हो गया देश के अंदर आज इतने दिन हो गए हैं अभी तक भी न तो वो कोई बोले न उन्होंने प्रेस से बात करी है न सरकार ने कोई बताया है कि हमारे उपराष्ट्रपति चुने हुए थे वो किन कारणों से इस्तीफा दिया , क्या सरकार नाराज़ थी नइत्तफाकी थी मंत्रियों के बीच में या प्राइम मिनिस्टर के बीच में या धनखड़ साहब के बीच में क्या किसी को नहीं मालूम और वो अभी मौन धारण किए हुए हैं तो ये घटना मामूली नहीं है , संवैधानिक पद पर आप किसी को अगर मजबूर कर देंगे, राष्ट्रपति को कल कर देंगे, जो सुनते हैं हम लोग मजबूर होकर इस्तीफा दिया या इस्तीफा दिलवाया गया जो भी है किसी को नहीं मालूम है सुनी सुनी बाते हैं तो संवैधानिक पद पर राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्राइम मिनिस्टर, लोकसभा स्पीकर, सीजेआई ये सभी लोग होते हैं बड़े बड़े पदों पर ये संवैधानिक पदों पर होते हैं उनके इस्तीफे ऐसे नहीं होते हैं उनके लिए स्पष्टीकरण देश को देना पड़ता है कि क्यों हम ने इस्तीफा दिया पूरे मुल्क को बताना पड़ता है क्या घनखड़ साहब को अवसर दिया गया क्या ?

Ashok Gehlot

50,315 views • 1 year ago