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ऐसी सुरक्षा हो रही है "भाई चारे" की बांग्लादेश में 😭 क्यों आलू-भालू-कालू ???

478,922 просмотров • 2 лет назад •via X (Twitter)

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"देखिए! ये क्या हो रहा है देश में? एक तरफ़ बांग्लादेश में हमारे हिंदू भाइयों-बहनों पर अत्याचार हो रहे हैं, मंदिर तोड़े जा रहे हैं, महिलाओं के साथ ज़ुल्म हो रहा है... और दूसरी तरफ़ यहीं भारत में एक बहन रिद्धिमा शर्मा खुलकर बोल रही है, तो FIR? तो विवाद? अरे ये तो ग़लत है ना! रिद्धिमा ने क्या कहा? उसने कहा कि अगर वे हमारे एक-दो को छेड़ते हैं, तो हम चुप नहीं बैठेंगे! ये तो प्रतिरोध की बात है, ये तो अपनी बहनों की इज़्ज़त बचाने की बात है! मीडिया वाले इसे तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहे हैं, जैसे ये घृणा फैला रही हो... अरे भई, घृणा तो वो फैला रहे हैं जो बांग्लादेश में हिंदुओं का नरसंहार कर रहे हैं! SanataniRiddhi एक सनातनी बहन है, वो अपनी भावनाओं में बोल गई, लेकिन उसका इरादा साफ़ है हिंदू समाज को जागृत करना, अपनी बहनों की सुरक्षा की बात करना! क्या हम औरतों की इज़्ज़त के लिए आवाज़ नहीं उठा सकते? क्या अब बोलना भी अपराध हो गया? कांग्रेस वाले चिल्ला रहे हैं, लेकिन असली मुद्दा देखिए बांग्लादेश में क्या हो रहा है, उस पर कोई बोलता क्यों नहीं? मैं कहती हूँ – #ISupportRiddhima ! क्योंकि ये बहन डरने वाली नहीं है, ये सच बोल रही है! और जो मीडिया इसे घृणा फैलाना बता रहा है, वो पहले बांग्लादेश के हिंदुओं की सुन ले! ये आवाज़ दबने नहीं देंगे! जय श्री राम!"

कल्पना श्रीवास्तव 🇮🇳

23,632 просмотров • 6 месяцев назад

चूरू पुलिस एक दिन पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस करके दावा करती है कि '5400 RPG ग्रुप' से जुड़े 27 संदिग्ध युवकों और 7 लग्ज़री गाड़ियों को पकड़ा गया है। पुलिस के अनुसार, उन्हें आशंका थी कि ये लोग क्षेत्र में दहशत फैलाने या वारदात की फिराक में हो सकते थे। फिर अगले ही दिन प्रशासन की अनुमति से आयोजित 20,000+ लोगों की विशाल जनसभा होती है, जिसमें सांसद हनुमान बेनीवाल के आने की सूचना पहले से थी। सवाल यह है कि सांसद के सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुरूप व्यवस्था क्यों नहीं की गई ? मंच के आसपास पर्याप्त पुलिस बल क्यों नहीं था? मंच से बार-बार माहौल बिगाड़ने की शिकायत होने के बावजूद उपद्रव कर रहे लोगों को तत्काल क्यों नहीं हटाया गया ? यदि पुलिस पहले से सुरक्षा चुनौतियों को लेकर सतर्क थी, तो इस कार्यक्रम में इतनी बड़ी सुरक्षा चूक कैसे हो गई ? यदि आरएलपी कार्यकर्ता उकसावे में आकर प्रतिक्रिया देते, तो हालात कितने गंभीर हो सकते थे, इसका अंदाज़ा लगाना भी मुश्किल है। ऐसे में कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी किसकी होती ? जनता यह जानना चाहती है कि यह केवल प्रशासनिक लापरवाही थी, या सुरक्षा व्यवस्था में हुई ऐसी गंभीर चूक जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

MP Saharan

23,395 просмотров • 19 дней назад