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ओबीसी समाजासह सर्व समाजाने आशीर्वाद दिला, त्यामुळे मुख्यमंत्री पदापर्यंत पोहोचता आले. ओबीसी समाज सहित सभी समाजों से मिले आशीर्वाद से ही मैं मुख्यमंत्री पद तक पहुंच सका। (राष्ट्रीय ओबीसी महासंघाचे 10वे राष्ट्रीय महाअधिवेशन | गोवा | 7-8-2025) #RashtriyaOBCMahasangh #OBC

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क्रोनोलॉजी समझिए विकास, सिस्टम बदलाव के नाम पर दृग्भ्रमित करने वाले पांडे प्रशान्त किशोर की असली दिक्कत ओबीसी समाज से आने वाले मुख्यमंत्री श्री Samrat Choudhary जी से है। आखिर पिछड़ा का बेटा मुख्यमंत्री कैसे बन जाये यह तो पीड़ादायक है इनके लिए। वैसे पाड़े जी बांकीपुर ही नही पटना साहिब, कुम्हरार दीघा ये सभी विधानसभा पिछले तीस वर्षों से BJP के विस्वास पर अपना विधायक चुन रही है। आप चंद लोगो को भ्रमित करके की यहाँ की सीट से मुख्यमंत्री बदला जा सकता है जमानत भी नही बचा पाएंगे। आप बहुत जल्दी भूल गए कि इन्ही बातों के कारण ही विधानसभा चुनाव में एक भी प्रत्यासी की जमानत तक नही बची थी। बांकीपुर की जनता समझदार है क्योंकि आपने पिछले बार की हार में इसी बिहार के महिलाओं के संदर्भ में कहा था कि यहां के लोग तो 10 हज़ार में बिक जाते है मतलब बिकाऊ है। पूरे बिहार से कायस्थ समाज की यह महत्वपूर्ण सीट भी है और यहां से कायस्थ प्रत्यासी नीरज कुमार सिन्हा धरातल से जुड़ा प्रत्यासी है इनकी जीत सुनिश्चित है। अमन सिंह कुशवाहा

अमन सिंह कुशवाहा

25,690 Aufrufe • vor 2 Monaten

BJP राज में ओबीसी आरक्षण पर हमला क्यों? RU में डॉ. अंबेडकर पीठ खत्म क्यों की गई? JNVU जोधपुर से SC/ST सेल खत्म क्यों? Bhajanlal Sharma जी Dr Prem Chand Bairwa जी Ashok Gehlot जी जवाब दो। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा जारी लिपिक ग्रेड–II / कनिष्ठ सहायक (LDC) भर्ती में OBC वर्ग को 21% की बजाय मात्र 15% आरक्षण दिया गया है, जो सीधे-सीधे संविधान की भावना के खिलाफ है और बेरोज़गार युवाओं के भविष्य पर कुठाराघात है। यह कोई एक भर्ती का मामला नहीं है। पूर्व में जारी चतुर्थ श्रेणी भर्ती और वनपाल भर्ती में भी OBC वर्ग को पूरा 21% आरक्षण नहीं दिया गया। इसी तरह RPSC 2nd Grade शिक्षक भर्ती 2024 की संशोधित विज्ञप्ति में गणित विषय के 538 पदों में OBC को मात्र 9% आरक्षण दिया गया। सवाल साफ हैं रोस्टर के नाम पर आरक्षित वर्गों के अधिकार कब तक काटे जाते रहेंगे? SC/ST/OBC युवाओं के भविष्य के साथ यह खिलवाड़ आखिर कब रुकेगा? मुख्यमंत्री भजनलाल जी, यह मुद्दे केवल एक भर्ती, SC/ST वर्ग का नहीं है संवैधानिक न्याय और सामाजिक बराबरी का है। कृपया OBC को उसका पूरा 21% आरक्षण दिलवाएँ। सभी संदिग्ध भर्तियों की निष्पक्ष व उच्चस्तरीय जाँच करवाएँ। उप मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा मंत्री प्रेमचंद बैरवा जी, आप उच्च शिक्षा मंत्री है फिर भी राजस्थान विश्व विद्यालय से डॉ. अंबेडकर पीठ को समाप्त किया गया? JNVU जोधपुर से SC/ST सेल खत्म कर दी गई? यदि आप अपने ही वर्ग के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा नहीं कर सकते, तो नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ना चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री राजस्थान अशोक गहलोत जी, आप OBC वर्ग से आते हैं। तीन बार मुख्यमंत्री रहे तब भी OBC आरक्षण खतरे में था, आज विपक्ष में हैं, तब भी खतरे में है। आप उस समय भी चुप थे आज भी चुप है? #ओबीसी_आरक्षण_बहाल_करों #रोस्टर_प्रकिया_में_सुधार_करों #डॉ_अंबेडकर_पीठ_बहाल_करो #JNVU_SC_ST_सेल_बहाल_करो

Ashok Meghwal

60,546 Aufrufe • vor 8 Monaten

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पंत छात्रावास स्थित समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित आईएएस-पीसीएस प्री एग्जामिनेशन सेंटर छात्रावास में एससी, एसटी एवं ओबीसी वर्ग के छात्रों को अवैध बताकर जबरन छात्रावास खाली कराना, कमरों के ताले तोड़ना तथा बिजली-पानी काटना एनडीए सरकार की बहुजन विरोधी मानसिकता का एक और उदाहरण है। छात्रों का कहना है कि उन्होंने वर्ष 2024 में प्रवेश लिया था तथा 13 सितंबर 2024 को उन्हें छात्रावास आवंटित किया गया। वर्ष 2025 में विश्वविद्यालय ने छात्रावास में नए प्रवेश की प्रक्रिया ही नहीं कराई और न ही नए आवेदन आमंत्रित किए। ऐसे में छात्रों का कहना है कि उनका आवंटन सितंबर 2026 तक वैध है। बांग्लादेश में दलितों की दिखावटी चिंता करने वाले मुख्यमंत्री Yogi Adityanath जी, क्या इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पंत छात्रावास में एससी, एसटी एवं ओबीसी छात्रों के साथ हो रही ज्यादती आपको दिखाई नहीं देती? हम Government of UP से मांग करते हैं कि छात्रों का उत्पीड़न तत्काल बंद किया जाए, छात्रावास की बिजली-पानी की व्यवस्था तुरंत बहाल की जाए, वर्ष 2025 से लंबित छात्रावास प्रवेश प्रक्रिया तत्काल प्रारंभ की जाए तथा पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। दलित, आदिवासी और पिछड़े समाज के छात्रों की शिक्षा और सम्मान पर किसी भी प्रकार का हमला स्वीकार नहीं किया जाएगा। University of Allahabad

Chandra Shekhar Aazad

85,177 Aufrufe • vor 2 Monaten

पीएम मोदी, आप को और आपकी पार्टी को समझाते हैं कि “राष्ट्रीय शर्म” (National Shame) क्या है: 1.पिछले सप्ताहांत मणिपुर के भाजपा विधायक वोंगजिन वाल्ट की 2023 के जातीय संघर्षों में लगी गंभीर चोटों के कारण मृत्यु हो गई और अब तक किसी हमलावर की गिरफ्तारी या अभियोजन नहीं हुआ - ये राष्ट्रीय शर्म है. 2.राजस्थान में एक पूर्व भाजपा सांसद ने मुस्लिम महिलाओं को दिए कंबल वापस ले लिए क्योंकि वे उन्हें वोट नहीं देतीं - ये राष्ट्रीय शर्म है. 3.राष्ट्रीय राजधानी में एक मकान मालकिन ने केवल मुस्लिम उपनाम होने के कारण एक पीएचडी उम्मीदवार को आवास देने से इनकार किया - ये राष्ट्रीय शर्म है. 4.ओडिशा में अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल न भेजने की धमकी देते हैं क्योंकि मध्याह्न भोजन पकाने वाली महिला दलित है - ये राष्ट्रीय शर्म है. 5.राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अरुणाचली महिलाओं के साथ नस्लीय गालियां दी जाती हैं और पूर्वोत्तर के नागरिक बार-बार नस्लीय दुर्व्यवहार के शिकार होते हैं - ये राष्ट्रीय शर्म है. 6.सरकारी अस्पतालों में स्ट्रेचर उपलब्ध न होने के कारण एक युवक को अपने बीमार पिता को कंधे पर उठाना पड़ता है - ये राष्ट्रीय शर्म है. 7.किसी राज्य का मुख्यमंत्री अपने राज्य में बंगाली भाषी मुसलमानों के खिलाफ आर्थिक बहिष्कार का आह्वान करे - ये राष्ट्रीय शर्म है. 8.सोनम वांगचुक को लद्दाख के लोगों की आवाज उठाने पर जेल में डाला जाए - ये राष्ट्रीय शर्म है. 9.कश्मीर घाटी के पत्रकारों को केवल लेख लिखने पर कारावास की धमकी दी जाए - ये राष्ट्रीय शर्म है. 10.प्रदर्शन कर रहे सिख किसानों को तुरंत खालिस्तानी कह दिया जाए - ये राष्ट्रीय शर्म है. 11.फादर स्टैन स्वामी जैसे 80 वर्ष के पादरी को आदिवासी अधिकारों के लिए खड़े होने पर आतंक विरोधी कानूनों में बंद कर स्ट्रॉ सिपर तक से वंचित किया जाए - ये राष्ट्रीय शर्म है. 12.बजरंग दल के कार्यकर्ता क्रिसमस समारोहों पर हमला कर बच निकलें - ये राष्ट्रीय शर्म है. 13.जिम मालिक मोहम्मद दीपक को एक भारतीय मुस्लिम के समर्थन में खड़े होने पर निशाना बनाया जाए - ये राष्ट्रीय शर्म है. 14.बर्बर बलात्कार और हत्या मामले में दोषियों के जेल से निकलते ही वीएचपी द्वारा माल्यार्पण किया जाए - ये राष्ट्रीय शर्म है. 15.राम रहीम को प्रभाव और शक्ति के कारण बार-बार पैरोल मिले - ये राष्ट्रीय शर्म है. 16.कन्हैया लाल जैसे दर्जी की सोशल मीडिया पोस्ट पर कथित ईशनिंदा के आरोप में हत्या कर दी जाए - ये राष्ट्रीय शर्म है. 17.स्टैंड अप कॉमेडियन को शक्तिशाली लोगों का व्यंग्य करने पर गिरफ्तार किया जाए - ये राष्ट्रीय शर्म है. 18.हमारी न्यायपालिका जमानत न कि जेल के अपने सिद्धांत पर न चले - ये राष्ट्रीय शर्म है. 19.महाराष्ट्र में कर्जदार किसान आत्महत्या करें - ये राष्ट्रीय शर्म है. 20.हिट एंड रन मामले में अमीर परिवार का युवक न्यूनतम दंड पाए - ये राष्ट्रीय शर्म है. 21.यौन उत्पीड़न की शिकार महिला न्याय के लिए संघर्ष करती रहे - ये राष्ट्रीय शर्म है. 22.शीर्ष 10% आबादी के पास 58% राष्ट्रीय आय हो और समाज गहरी असमानता में डूबा रहे - ये राष्ट्रीय शर्म है. 🟥 नागरिक राजनीतिक रणनीतियों की आलोचना करने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन ‘आलोचना’ राज्य (प्रशासन) की असंगत कार्रवाई या नैतिक घबराहट का बहाना नहीं बननी चाहिए.

Wg Cdr Anuma Acharya (Retd)

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आरक्षण और यूजीसी को सभी पक्षों के यूट्यूबर्स भूल जाएं. आमदनी के लिए अब दूसरा मुद्दा तलाश लें. इसमें कुछ था नहीं, फिर भी काफी व्यूज और रेवेन्यू इससे निचोड़ा जा चुका है. इनका सारा रस निकल चुका है. अब ये सूख गया है. आरक्षण पर कोई विवाद ही नहीं है. ईडब्ल्यूएस आरक्षण संविधान के आर्टिकल 16 में आने के बाद से अब कोई सामाजिक वर्ग आरक्षण से बाहर नहीं है. एससी-एसटी पर कोई विवाद कभी था नहीं. वो मूल संविधान से निकला है. गरीब ओबीसी को 1993 में और गरीब सवर्ण को 2019 में दे दिया गया है. दोनों पर 8 लाख की लिमिट है. ओबीसी और जनरल दोनों में क्रीमी लेयर बाहर है. नरेंद्र मोदी ऐसे भी राष्ट्रीय आम सहमति के बिना कुछ करते नहीं है. ईडब्ल्यूएस भी कांग्रेस, सपा, तृणमूल, बसपा सबकी सहमति से संविधान में आया. तो अब यही स्थिति बनी रहेगी. 2019 में सब फ्रीज हो चुका है. उसके बाद दो लोकसभा चुनाव हो चुके हैं. आरक्षण पर एकमात्र एक्शन महिलाओं को एमपी-एमएलए बनाने का है. मोदी जी वो जरूर करेंगे. अभी सहमति बना रहे हैं. यूजीसी पर भी यथास्थिति ही है. इस पर कभी कोई एक्ट नहीं बना. कोई कानून न प्रस्तावित था, न है. एक्ट बनने की बात अभी तक आई नहीं है. मंत्रालय में कोई ड्राफ्ट भी नहीं है. किसी ने सोचा भी नहीं है. अफसर लोग कुछ कुछ करते रहते हैं. उन पर कोर्ट और संसदीय समिति का दबाव होता है. लेकिन अफसर कानून थोड़ी न बनाएंगे. एक्ट तो तब बनेगा जब संसद में आएगा, बहस होगी, पास होगा. इसलिए जिनको हमेशा से प्रोटेक्शन मिल रहा था, उनको ही मिलता रहेगा. यूजीसी की न एक्ट बनाने की औकात है, न उसने इसकी कोशिश की है. यूजीसी खुद ही एक एक्ट से बनी संस्था है. यूजीसी भी ज्यादा दिन नहीं रहेगा. नया ढांचा बनने वाला है. जो संशय बना था, कोर्ट के आदेश से वह दूर हो चुका है. ये दोनों विवाद मुख्य रूप से दिल्ली में चलाया जा रहा था और इससे सिर्फ यूपी प्रभावित हो रहा था. पता नहीं क्यों? दक्षिण, पश्चिम और पूर्वी भारत में किसी को पता भी नहीं है ये मुद्दा. आरक्षण पर बिहार के माननीय मुख्यमंत्री को सुना जाए.

Dilip Mandal

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गत पूरा महीना भावनाओं व कर्तव्य के बीच अंतःसंघर्ष का रहा।बेटी के पिता होने के कारण बचपन से आज तक, विवाह को लेकर उसकी उजली पलकों में पले हर सपने को साकार कर पाने की सद्इच्छा ने शरीर और मस्तिष्क दोनों पर अधिकार कर रखा था तो दूसरी ओर मेरी आत्मा के सबसे पवित्र व सबसे विस्तृत अंश की प्रेमधारा के दूसरे किनारे खड़ी उसकी पालकी के बारे में सोच-सोचकर ही रुलाई फूट पड़ती थी। अस्तु मेरे राम ने रीझ-रीझकर अपनी परम-कृपा ऐसी बरसाई कि बिटिया के मन की साध और मेरा पिता होना दोनों परम सार्थक हुए । इस उत्तरदायित्व के निर्वहन में जिन-जिनका भी आशीर्वाद-सहयोग व स्नेह मिला उन सबको सादर कृतज्ञ जय जय सियाराम 🙏। भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री आदरणीय श्री Narendra Modi जी, आदरणीय पूर्व राष्ट्रपति श्री Ram Nath Kovind जी, आदरणीय Vice-President of India श्री जगदीप धनकड जी, आदरणीय श्री Rajnath Singh जी, आदरणीय श्री Nitin Gadkari जी, आदरणीय श्री Amit Shah जी, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार श्री अजीत डोभाल जी, आदरणीय श्री Jagat Prakash Nadda जी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सहसरकार्यवाह आदरणीय श्री दत्तात्रेय जी, मप्र के मुख्यमंत्री भाई श्री Dr Mohan Yadav जी, हरियाणा के मुख्यमंत्री भाई Nayab Saini जी, दिल्ली की मुख्यमंत्री बहन Rekha Gupta जी सहित उनका समस्त मंत्रिमंडल, आदरणीय Manohar Lal जी, कांग्रेस के पंजाब अध्यक्ष भाई Amarinder Singh Raja Warring, पंजाब के नेता प्रतिपक्ष आदरणीय Partap Singh Bajwa जी, वरिष्ठ कांग्रेस नेता आदरणीय रंधावा जी, राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष भाई डोटासरा जी व राजस्थान कांग्रेस के अनेकानेक साथी, मप्र के कांग्रेस अध्यक्ष भाई Jitendra (Jitu) Patwari जी, पूर्व मुख्यमंत्री आदरणीय Kamal Nath जी, बड़े भाई आदरणीय प्रमोद तिवारी जी सहित अनेकों कांग्रेस नेतागण, समाजवादी पार्टी के आदरणीय Prof. Ram Gopal Yadav जी, सांसद भाई राजीव राय जी, प्रिय भतीजे सांसद आदित्य यादव सहित अनेक समाजवादी मित्रगण के साथ-साथ देशभर से पधारे राजनैतिक-सामाजिक-सांस्कृतिक व मीडिया-जगत के महापुरुषों ने बिटिया व दामाद को अपना आशीर्वाद दिया जिसके प्रति मेरा पूरा परिवार कृतज्ञ है। प्रिय भाई सुपर शैफ संजीव कपूर ने इस पूरे उत्सव को अपनी प्रतिभा से स्वादिष्ट बनाकर बिटिया के चाचा की भूमिका सार्थक की। धर्म-जगत की परम आदरणीय विभूतियों ने मेरे परिवार के मंगल-क्षणों को अपने जीवंत आशीर्वाद से दैवीय स्वरूप प्रदान किया । मैं पूज्य Bhaishri Rameshbhai Oza जी, पूज्य आचार्य महामंडलेश्वर Swami Kailashanand Giri Ji जी महाराज, पूज्य आचार्य महामंडलेश्वर बालकानंद गिरी जी महाराज, पूज्य महामंडलेश्वर यतीद्रानंद जी महाराज, पूज्य Acharya Balkrishna जी, पूज्य कल्किपीठाधीश्वर Acharya Pramod जी, परमप्रिय धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री उपाख्य Bageshwar Dham Sarkar (Official), प्रिय अनुजा चित्रलेखा, ममतामयी बड़ी बहन दीदी माँ ऋतम्भरा जी सहित समस्त संत समाज के चरणों में सपरिवार नमन करता हूँ । इस अवसर पर मेरे कवि-कुल के सभी बड़े-समकक्ष व अनुज-अनुजाओं ने जिस प्रकार आतिथेय सँभाला वह भावुक कर गया। समस्त समारोहों में अपने घर के उत्सव की ही भांति अपनी अकूत व जगत्ज्ञापित प्रतिभा से सुर-सज्जित करने वाले प्रिय भाई सागर भाटिया, मेरे ह्रदयाँश भाई सोनू निगम, गुणी भाई कैलाश खेर, रामधुनलीन प्रिय अनुज कन्हैया मित्तल, लोकप्रिय अनुज हनी सिंह, बी प्राक, रसराज जी सहित अनेक अत्यंत प्रतिभाशाली गायक-गायिकाओं को वर्धापन। बहुत से महनीय नाम शेष रह गए हैं जो मेरे कृतज्ञ कंठ व अश्रुवाष्पित दृष्टि में मुखर है। मेरे राघवेंद्र सरकार की कृपा जीवंत व दिग्दिगंत है यह इस पूरे महीने पुनः उद्घोषित हुआ । जय जय सियाराम

Dr Kumar Vishvas

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यूजीसी रोलबैक 15,000 किलोमीटर जनजागरण, जनचेतना एवं आमंत्रण वाहन यात्रा 23 अगस्त 2026, दोपहर 1:15 बजे, शाह ऑडिटोरियम, नई दिल्ली में आयोजित होने वाली यूजीसी रोलबैक सवर्ण आक्रोश महापंचायत राष्ट्रीय कार्यक्रम के जनजागरण, जनचेतना और आमंत्रण हेतु 15,000 किलोमीटर वाहन यात्रा का शुभारंभ श्री महाराणा प्रताप जी की पावन भूमि मेवाड़ एवं भगवान एकलिंगनाथ जी के आशीर्वाद से राजसमंद से किया जा रहा है। यह यात्रा 5 अगस्त से 7 अगस्त तक राजसमंद, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, सलूम्बर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर तथा उदयपुर के अन्य जिलों में जनसंपर्क करेगी। इसी क्रम में 7 अगस्त को दोपहर 12:00 बजे उदयपुर में संभाग स्तरीय “सवर्ण आक्रोश महापंचायत” का आयोजन किया जाएगा। मेवाड़ संभाग के सभी स्वर्ण समाज के संगठन, सामाजिक संस्थाएँ एवं हमारे जिला अध्यक्ष आपसी समन्वय से इस अभियान को सफल बनाएँ। प्रत्येक जिले में: एक विशाल प्रेस वार्ता आयोजित की जाए। एक जिला स्तरीय सम्मेलन/पंचायत आयोजित की जाए। यात्रा के दौरान प्रतिदिन 3 से 4 जिलों में जनसंपर्क एवं कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सभी जिला अध्यक्षों एवं सामाजिक संगठनों से अनुरोध है कि वे स्थानीय स्तर पर आवश्यक व्यवस्थाएँ सुनिश्चित करें तथा अधिक से अधिक लोगों की सहभागिता सुनिश्चित करें। यह केवल एक आंदोलन नहीं, बल्कि सामान्य वर्ग के छात्र-छात्राओं के भविष्य से जुड़ा जनअभियान है। यदि आज हम जागरूक नहीं हुए, तो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य प्रभावित होगा। इसलिए समाज के प्रत्येक जागरूक नागरिक की भागीदारी आवश्यक है। यूजीसी के निर्णय दिल्ली से लागू हुए हैं, इसलिए उनका समाधान और रोलबैक भी दिल्ली से ही होगा। हमारा लक्ष्य स्पष्ट है—23 अगस्त को अधिक से अधिक संख्या में नई दिल्ली पहुँचना और अपनी लोकतांत्रिक आवाज़ बुलंद करना। आइए, बच्चों के भविष्य, शिक्षा में समान अवसर और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए इस जनजागरण अभियान से जुड़ें। 23 अगस्त 2026 दोपहर 1:15 बजे शाह ऑडिटोरियम, नई दिल्ली आपकी सहभागिता ही इस अभियान की सबसे बड़ी शक्ति है।

Dr Raj Shekhawat

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लोक सभा में आज संविधान 131 वा संशोधन विधेयक 2026, संघ राज्यक्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक 2026 तथा परिसीमन विधेयक 2026 पर हो रही चर्चा में भाग लेते हुए मैंने यह स्पष्ट किया कि हमारी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी,महिला आरक्षण के पक्ष में है और महिला वर्ग को सम्मान मिले, महिलाओ को उचित राजनैतिक प्रतिनिधित्व मिले यह हमारी विचारधारा भी है | मैंने सदन में कहा कि हम महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, लेकिन इस तरह के मनमानी वाले और दलित, आदिवासियों और ओबीसी वर्ग तथा कमजोर राजनैतिक प्रतिनिधित्व वाले मुस्लिम समाज को नुकसान पहुंचाने वाले परिसीमन का विरोध करते है, इस विधेयक की चर्चा में मैने संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव अंबेडकर जी का स्मरण करते हुए उनके सिद्धांतों का जिक्र किया वहीं मान्यवर कांशीराम जी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी’ यानी राजनीतिक प्रतिनिधित्व जनसंख्या के आधार पर होना चाहिए | परिसीमन के प्रस्तावों को लेकर देशभर से कई गंभीर चिंताएं सामने आई हैं, असम और जम्मू-कश्मीर में जिस तरह से परिसीमन किया गया है, वह दिखाता है कि इन विधेयकों का असली उद्देश्य और विषय-वस्तु छल-कपट से भरी है, और इनका प्रभाव बेहद व्यापक और नुकसानदेह है । संविधान संशोधन कोई साधारण विधायी प्रक्रिया नहीं होती। यह देश की मूल भावना, संविधान निर्माताओं के विज़न और जनता के विश्वास को प्रभावित करती है। लेकिन आज जो 131वां संशोधन विधेयक लाया गया है, उसमें कई ऐसे प्रावधान हैं जिनसे यह आशंका पैदा हो रही है कि सामाजिक न्याय की नींव,विशेषकर ओबीसी, एससी और एसटी वर्गों के अधिकार कमज़ोर किए जा सकते हैं,मैंने यह भी कहा कि लोकतंत्र केवल बहुमत का नाम नहीं है, यह सहमति, संवेदनशीलता और संतुलन का नाम है,आज देश में यह धारणा बन रही है कि महत्वपूर्ण संवैधानिक बदलाव बिना व्यापक चर्चा और बिना जन- सहमति के किए जा रहे हैं जो बहुत बड़ी चिंता का विषय है क्योंकि हम विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के नागरिक भी है | मैं यह भी स्पष्ट रूप से कहा कि लोकतंत्र “नंबर गेम” नहीं है ,लोकतंत्र “विश्वास” का नाम है और एनडीए की सरकार के पिछले कुछ वर्षो के कार्यकाल को देखे तो यह सरकार उसी विश्वास को तोड़ने का काम कर रही है,जिस विश्वास के साथ देश की जनता ने उन्हें बहुमत दिया | मैंने सदन में कहा कि भारत में बड़ा हिस्सा ओबीसी की आबादी का , ओबीसी का आरक्षण भी है ,अगर जातिगत जनगणना के बाद सरकार कुछ करती तो सरकार का संदेश सकारात्मक जाता लेकिन सरकार ऐसा नहीं कर रही है | मैने सरकार से यह भी कहा कि चर्चा, संवाद लोकतंत्र का हिस्सा है,मगर न राज्यों से संवाद, न सभी दलों से सहमति,न जनता से राय ,क्या आपका यही वो तरीका है जिसे आप लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा बता रहे हो ? मैंने राजस्थान के संदर्भ में सरकार से प्रश्न पूछते हुए कहा कि 2011 की जनगणना के अनुसार राजस्थान की जनसंख्या 6.85 करोड़ थी,इसलिए राजस्थान में 6.85 करोड़ को 14.20 लाख की जनसंख्या प्रति लोकसभा से विभाजित करने पर 48 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र बनते हैं, परंतु यदि सभी राज्यों में लोकसभा की सीटों की एक समान 50% की बढ़ोतरी होती है तो राजस्थान में केवल 38 सीटें बनती हैं और फार्मूले से राजस्थान में 10 लोकसभा की सीटों का नुकसान होगा इसलिए सरकार जब जवाब दे तो इस विषय पर सरकार की मंशा स्पष्ट करे ताकि राजस्थान की जनता सरकार की मंशा को जान सके | मैं यह सवाल भी सदन में किये - 1- क्या इन विधेयको को लाने से पहले पर्याप्त पब्लिक कंसल्टेशन क्यों नही लिया गया ? 2-बिल को जल्दबाजी में लाया गया, जिससे सांसदों को अध्ययन का समय नहीं मिला ? आपने ऐसा क्यों किया ? 3-देश की जनता के मन में प्रश्न है की क्या यह बिल संविधान के मूल अधिकारों का उल्लंघन करता है ? 4- कई राज्यों की बड़ी शंका है की सरकार का यह कदम क्या यह संघीय ढांचे को कमजोर करता है ? 5.क्या सरकार दक्षिण भारत और अन्य संतुलित जनसंख्या वाले राज्यों के हितों की रक्षा करेगी ? 6.क्या यह सुनिश्चित किया जाएगा कि संसद में प्रतिनिधित्व का संतुलन बिगड़े नहीं ? 7.परिसीमन आयोग में Judicial Review की सीमा क्या होगी और इस आयोग के निर्णयों पर संसद की क्या भूमिका होगी ? आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चुनाव है,वहां आचार संहिता भी लगी हुई है ऐसे में चुनावों के मध्य केंद्र सरकार ने यह बिल लाकर स्पष्ट कर दिया कि NDA की सरकार केवल दिखावा करने में भरोसा रखती है | सरकार को जातिगत जनगणना के बाद विधानसभा व लोक सभा में OBC वर्ग को आरक्षित करते हुए SC,ST की सीटों को बढ़ाती तो सरकार का संदेश सकारात्मक जाता मगर सरकार की मंशा को अब देश की जनता समझ चुकी है | #RLP #MPNagaur

HANUMAN BENIWAL

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की दो दिवसीय बैठक का हुआ शुभारंभ मथुरा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की वार्षिक अखिल भारतीय कार्यकारी मण्डल की दो दिवसीय बैठक का शुभारंभ शुक्रवार (25 अक्टूबर) को दीनदयाल गौ विज्ञान अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र, गऊ ग्राम, परखम, फरह के नवधा सभागार में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूजनीय सरसंघचालक डॉ. मोहन जी भागवत एवं माननीय सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी के द्वारा भारत माता के चित्र पर पुष्पार्चन अर्पित कर किया गया। बैठक के प्रारम्भ में हाल ही में दिवंगत हुए पूज्य राघवाचार्य महाराज (जयपुर), प्रसिद्ध उद्योगपति पद्मविभूषण रतन टाटा, पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री श्री बुद्धदेव भट्टाचार्य, ईनाडु और रामोजी फ़िल्म सिटी के संस्थापक श्री रामोज़ी राव, कम्युनिस्ट नेता सीताराम येचुरी, पूर्व विदेश मन्त्री के. नटवर सिंह, बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री श्री सुशील मोदी, एडमिरल (सेनि) रामदास तथा दिवंगत अन्य प्रमुख लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। बैठक के प्रारंभ में मार्च 2024 की अ. भा. प्रतिनिधि सभा की बैठक की कार्यवाही का अनुमोदन किया गया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेन्द्र कुमार ने बताया कि बैठक का समापन 26 अक्टूबर सायं 6:15 बजे होगा। बैठक में विजयादशमी के पावन पर्व पर पूजनीय सरसंघचालक जी द्वारा प्रस्तुत विचारों तथा उनके उद्बोधन में उल्लेखित महत्वपूर्ण विषयों के अनुवर्तन हेतु योजनाओं तथा देश में वर्तमान समय चल रहे समसामयिक विषयों पर व्यापक चर्चा होगी। साथ ही प्रतिनिधि सभा में निर्धारित वार्षिक योजना की समीक्षा तथा संघ कार्य के विस्तार का वृत्तांत भी लिया जाएगा। बैठक में संघ के शताब्दी वर्ष में कार्य विस्तार की योजना सहित अभी तक किए गए कार्यों की समीक्षा और पंच परिवर्तन (सामाजिक समरसता, कुटुम्ब प्रबोधन, पर्यावरण, ‘स्व’ आधारित जीवन शैली और नागरिक कर्तव्य) को समाज में लेकर जाने पर चर्चा होगी। सभी कार्यकर्ता इसी गऊग्राम परिसर में निवास कर रहे हैं। बैठक में संघ रचना के सभी 11 क्षेत्रों तथा 46 प्रांतों के माननीय संघचालक, सह संघचालक, कार्यवाह तथा प्रचारक सहित कुल 393 कार्यकर्ता प्रतिभाग कर रहे हैं। जम्मू कश्मीर से केरल तथा पूर्वोत्तर के अरूणाचल, मणिपुर, त्रिपुरा आदि प्रांतो से भी कार्यकर्ता उपस्थित हैं। बैठक में प्रांतो के विशेष कार्यों का तथा परिस्थितियों का निवेदन होगा। आगामी मार्च 2025 तक की विस्तृत योजना पर भी विचार विमर्श होगा। बैठक में संघ के पूजनीय सरसंघचालक डॉ. मोहन जी भागवत, माननीय सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी तथा सह सरकार्यवाह डा. कृष्ण गोपाल जी, श्री मुकुन्दा जी, अरूण कुमार जी, रामदत्त चक्रधर जी, आलोक कुमार जी, अतुल लिमये जी सहित अन्य अखिल भारतीय कार्य विभाग प्रमुख एवं कार्यकारिणी के सदस्य भाग ले रहे हैं।

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कांग्रेस नेता #PawanKheda ने प्रधानमंत्री मोदी के मुख्य मीडिया सलाहकार #Hiren_Joshi पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. असल खबर ये है कि दो दिनों पहले ही हिरेन जोशी को #PMO से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है. पीएमओ के आंतरिक ज्ञापन में दो दिनों पहले ही हीरेन जोशी के सारे काम अश्विनी वैष्णव और नीरव नाम के पीएमओ अधिकारी को सौंप दिए गए थे. पवन खेड़ा जिस बेटिंग ऐप के बारे में ज़िक्र कर रहे हैं, उस ऐप का मालिक रवि तिहारवाला है जो दुबई में रहता है. एक कथित आरोप यह भी है कि इन्होंने सतनाम सिंह संधू से राज्यसभा सीट के लिए 30 करोड़ रुपये लिए हैं. इनके बेटे ने रिलायंस इंडस्ट्रीज से सालाना 3 करोड़ रुपये कमाए हैं. एक महिला हैं हिमानी सूद. जो चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी की प्रो वाइस चांसलर भी हैं और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की भी करीबी हैं. फिर ये हिरेन जोशी की खास बनीं. हिरेन ने इनके लिए एक #India_Minorities_Fedration बनाया. इस फेडरेशन में सभी इस्लामिक देशों के राजदूतों को जोड़ा गया. कुछ पावरफुल क्रिश्चियन सिख, बौद्धिस्ट,पारसी,मुस्लिम धर्म गुरुओं को इसका सदस्य बनाया गया. हिमानी सूद ने उनका प्रतिनिधित्व किया और 5 फरवरी 2024 को इन सभी को मोदी जी से मिलवाने ले गईं. इसके बाद हिमानी सूद को वेटिकन सिटी के पोप Lui XIV से भी मिलवाया गया. जहां हिमानी मोदी जी की तस्वीर के कर गई थीं ताकि तस्वीर के जरिए पोप मोदी जी को 2024 के लोकसभा चुनावों में जीत का आशीर्वाद दे सकें. प्रधानमंत्री की कई विदेश यात्राओं में हिमानी सूद को ले जाया गया. बहुत बड़े बड़े लोगों से मिलवाया गया. 25 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री की 75 वीं सालगिरह पर हिमानी सूद ने मोदी जी की लीडरशिप के नाम "मैं हूं भारत" नाम से एक अभियान की घोषणा भी की है. एक इफ्तार पार्टी का आयोजन हुआ जिसमें भारत में स्थित सभी इस्लामिक देशों के राजदूतों ने शिरकत की और उसे होस्ट भारत के विदेश मंत्रालय और हिमानी सूद ने किया. हिमानी सूद को हिमाचल प्रदेश से ना सिर्फ टिकट दिलाने बल्कि मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाने के लिए जोशी जी, JP Nadda से मिलने के गए और बात यहीं से बिगड़ गई. JP Nadda ने जोशी की कारस्तानी अमित शाह को बता दी. शाह जी ने मोदी जी से बात की और फिर जोशी जी प्रधानमंत्री कार्यालय से बाहर हो गए. हिरेन जोशी वही हैं जो पिछले 11 सालों से देश की मीडिया के तानाशाह रहे हैं. न्यूज चैनलों का बड़े से बड़ा संपादक, मालिक और न्यूज ऐंकर इनके सामने नतमस्तक रहे हैं. हर चैनल पर इनके ही निर्देश के मुताबिक शब्दशः गोदी खबरें चलती रही हैं. प्रधानमंत्री मोदी की आँख और कान माने जाने वाले जोशी 2008 से मोदी के साथ काम करते रहे हैं .

Ruby Arun रूबी अरुण

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Super Exclusive- (यूपी के राजनीतिक हलकों में तूफ़ान लाने वाली ख़बर) योगी आदित्यनाथ के सूचना विभाग में सेक्सुअल हैरेसमेंट!! मुख्यमंत्री के लिए काम करने वाली लड़की का उत्पीड़न। बड़े और महत्वपूर्ण पद पर काम कर चुकी पीड़िता ने कैमरे पर आकर खोली सूचना विभाग की पोल। यौन उत्पीड़न से लेकर सूचना में जारी राजनेताओं के भयावह चरित्र हनन की आँखों देखी गवाही! Target killing करने वाले सूचना के सारे अड्डे उसकी ज़ुबान पर। अखिलेश यादव पर किस तरह की आपत्तिजनक AI क्लिप्स उसने देखीं! उन्होंने केशव मौर्या तक को नहीं बख़्शा!! विशाल सिंह इस कैंपेन के मास्टर माइंड!! विशाल सिंह ने कहा, वो सांपों के साथ सोती है!! "उन्होंने ये बात बोली। किसी महिला के बारे में कहना कि कि वो सांपों के साथ सोती है, ये बहुत ही वीभत्स बात है। इस पद पर बैठे किसी व्यक्ति से ये बात नहीं expect कर सकती हूं।" अब सुनते जाइए- योगी आदित्यनाथ के लिए काम करने वाली सूचना की टीम का हिस्सा रही इस लड़की ने टॉप सीक्रेट से जो कहा- 1- "मैं इस बात से हैरान हूं कि मैं मुख्यमंत्री के लिए काम करने वाली एक लड़की के साथ ये हो रहा है। 2- वो भी उस यूपी में जहां महिला सशक्तिकरण की इतनी सारी बातें होती हैं।" 3- उसने ऑन रिकॉर्ड बताया कि कैसे यूपी का सूचना विभाग अखिलेश यादव के लिए बेहद आपत्तिजनक AI क्लिप्स बनवाता है। 4- "उन्हें (अखिलेश को) लोग गाली दे रहे हैं। उनको दौड़ा रहे हैं। भगा रहे हैं मारने के लिए। 5- इस तरह की क्लिप्स थीं। मैने देखीं, अपनी आंख से।” 6- "विशाल सिंह को बेहद पसंद हैं ये AI क्लिप्स। वे ही मास्टरमाइंड।" 7- "बीजेपी के अपनों को भी टारगेट किया जाता है।" 8- केशव मौर्या को टारगेट करने की भी ऑन कैमरा, ऑन रिकार्ड गवाही। 9- सीएम सूचना की Creatives एजेंसी Famous innovations के लिए काम करने वाली लड़की की कैमरे पर आपबीती। 10- पीड़िता के मुताबिक उसे टच करने की कोशिश की गई, आपत्तिजनक बातें कही गईं। विरोध करने पर नौकरी से निकाला गया। 11- कहा गया कि ये विशाल सिंह का डिसीजन है, कुछ भी कर लो। कुछ नहीं होगा। 12- उसने पॉलिटिकल टारगेटिंग करने वाले सूचना के सभी दफ्तरों का खुलासा किया। 13- राजभवन के नजदीक वाले ऑफिस से लेकर गोमती नगर में सीएमएस वाले ऑफिस तक। 14- "गोमती नगर में सूचना के पैसों पर 50-60 लोगों की ऐसी टीम बिठा रखी है जो पॉलिटिकल वेंडेटा (राजनीतिक दुश्मनी) निकालने का काम ही हैंडल करते हैं।" सनसनीख़ेज़ गवाही। सारे सबूत, सारे दस्तावेज़ ऑन कैमरा। (टीज़र यहां।पूरा इंटरव्यू Top Secret के यूट्यूब चैनल पर और साथ ही कमेंट बॉक्स में)

abhishek upadhyay

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📍जोजिला सुरंग पूर्वी पोर्टल, मीनामार्ग (कारगिल), लदाख 🇮🇳 भारत के 🛣️ इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास के इतिहास में ऐतिहासिक दिन! एशिया की सबसे लंबी सुरंग 'जोजिला टनल' परियोजना आज एक ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनी है। जोजिला के मुख्य सुरंग में आज जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के उपराज्यपाल श्री Manoj Sinha जी, मुख्यमंत्री श्री Omar Abdullah जी, सांसद गण, लोक प्रतिनिधि तथा अधिकारी और उपस्थित गणमान्य के साथ ऐतिहासिक ब्रेकथ्रू का साक्षी बना। मुख्य सुरंग में यह ब्रेकथ्रू केवल निर्माण कार्य की प्रगति नहीं, बल्कि भारत की तकनीकी दक्षता, इंजीनियरिंग क्षमता और अदम्य संकल्प का प्रतीक है। जोजिला टनल परियोजना जम्मू- कश्मीर और लदाख के बीच ऑल-वेदर कनेक्टिविटी का और इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास यात्रा का महत्वपूर्ण अध्याय बनकर उभर रही है। राष्ट्रीय राजमार्ग-1 पर बालटाल से मीनामार्ग तक निर्मित की जा रही लगभग 14 किमी लंबाई की द्विदिशीय जोजिला टनल 6,800 करोड़ रुपए की लागत से विकसित हो रही भारत की सबसे महत्वाकांक्षी पर्वतीय अवसंरचना परियोजनाओं में से एक है। 2900 मीटर से 3310 मीटर की उँचाई के बीच निर्मित यह परियोजना विश्व के सबसे चुनौतीपूर्ण भूभागों में भारतीय इंजीनियरिंग क्षमता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत कर रही है। अत्यधिक हिमपात, कठिन मौसम और जटिल भूगर्भ परिस्थितियों के बावजूद भारत के इंजीनियरों और श्रमिकों ने इस चुनौतीपूर्ण कार्य को वास्तविकता में बदल दिया है। इस परियोजना से जुड़े सभी इंजीनियरों, श्रमिकों, कन्सल्टंट्स, कॉन्ट्रॅक्टर्स, संपूर्ण एनएचआईडीसीएल टीम और स्टेकहोल्डर्स को बधाई और उनका अभिनंदन! सुरंग में यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए आधुनिक वेंटिलेशन सिस्टम, ऑटोमैटिक फ़ायर डिटेक्शन, एडवांस्ड CCTV सर्विलांस सिस्टम, पैदल यात्रियों के लिए क्रॉस पैसेज सुविधा उपलब्ध होगी। साथ ही स्नो लोड और जियोलॉजिकल खतरों से सुरक्षा के लिए 8 कट-एंड-कवर सेक्शन, 4 पुल, 40 पुलिया, स्नो गैलरी, कैच डैम और एवलॉन्च प्रोटेक्शन स्ट्रक्चर, हिम स्खलन सुरक्षा संरचनाएँ, संपर्क मार्ग और अत्याधुनिक सुरक्षा व्यवस्थाएं इसे विश्वस्तरीय इन्फ्रास्ट्रक्चर का स्वरूप प्रदान करती है। जोजिला टनल केवल एक सुरंग नहीं, बल्कि विकास का एक द्वार है। इस सुरंग के निर्माण के बाद सोनमर्ग से मिनामार्ग तक की लगभग 2 घंटे की यात्रा घटकर मात्र 30 मिनट रह जाएगी। इससे समय और ईंधन की बचत होगी। दुर्घटनाएं एवं हिम स्खलन की जोखिम में कमी आएगी। क्षेत्र में पर्यटन और व्यापार को नई गति मिलेगी तथा सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंच और अधिक सुदृढ़ होगी। राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से भी यह परियोजना गेम चेंजर साबित होगी। वर्ष भर संपर्क उपलब्ध होने से भारतीय सेना की आवाजाही तथा सेना सामग्री, उपकरणों और रसद की आपूर्ति अधिक तेज, सुरक्षित और प्रभावी बन सकेगी, जिससे देश की सामरिक तैयारियों को नई मजबूती मिलेगी। यह परियोजना स्थानीय लोगों के लिए रोजगार, आर्थिक अवसर और बेहतर जीवन गुणवत्ता का आधार भी बनेगी। साथ ही यह परियोजना ऑल-वेदर कनेक्टिविटी स्थापित कर क्षेत्रीय विकास और राष्ट्रीय एकीकरण को नई शक्ति प्रदान करेगी। आदरणीय प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi जी के दूरदर्शी नेतृत्व में बर्फ से ढके हिमालय के मध्य आकार लेती यह सुरंग केवल पहाड़ों को नहीं, बल्कि संभावनाओं को जोड़ रही है। यह उस नए भारत की पहचान है, जो चुनौतियों को विकास की नई उँचाईयों में बदल देता है। आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण से जम्मू-कश्मीर और लदाख के समग्र विकास के लिए हम प्रतिबद्ध है। #ZojilaTunnel #AllWeatherRoad #TunnelBreakthrough #PragatiKaHighway #GatiShakti #BuildingTheNation

Nitin Gadkari

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नमस्कार साथियों, सबसे पहले, मैं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री राहुल गांधी, संचार विभाग के महासचिव श्री जयराम रमेश जी, मीडिया और प्रचार विभाग के अध्यक्ष श्री पवन खेड़ा जी, और इस आयोजन में शामिल सभी वक्ताओं का धन्यवाद करता हूं। यह कार्यशाला केवल एक कार्यक्रम नहीं है, यह हमारे विचार और संघर्ष की निरंतरता है। आज जब देश जातीय न्याय की बात कर रहा है, तब कांग्रेस पार्टी का यह दायित्व बनता है कि वह इस विमर्श को दिशा दे, उसे नारे से नीति तक ले जाए, और जितनी आबादी उतना हक को केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय संकल्प बनाए। साथियों, हम सभी जानते हैं कि जातिगत जनगणना का मुद्दा कोई नया नहीं है। कांग्रेस पार्टी ने इसे लगातार उठाया है, हमारे घोषणापत्रों में, संसद में, सड़कों पर, और हर उस मंच पर जहाँ सामाजिक न्याय की बात होनी चाहिए । मैंने स्वयं अप्रैल 2023 में प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर यह मांग दोहराई थी कि जाति जनगणना को तत्काल शुरू किया जाए। उस पत्र में मैंने साफ कहा था, जब तक हमारे पास सही आंकड़े नहीं होंगे, तब तक कोई भी सरकार यह दावा नहीं कर सकती कि वह सबको न्याय दिला रही है। आज हमें यह पूछना है, OBC, दलित और आदिवासी समुदायों की देश के सत्ता-संरचनाओं में भागीदारी क्या है? क्या वे मीडिया में, नौकरशाही में, न्यायपालिका में, कॉर्पोरेट सेक्टर में, और उच्च शिक्षा संस्थानों में अपनी आबादी के अनुपात में प्रतिनिधित्व रखते हैं? अगर नहीं, तो इसका कारण क्या है? और समाधान क्या है? इसका समाधान है सच्चाई को सामने लाना, आंकड़ों को सार्वजनिक करना, और फिर नीतियों का पुनर्निर्माण करना। यही कारण है कि जाति जनगणना को हम केवल एक आँकड़ों की कवायद नहीं मानते, बल्कि यह भारतीय लोकतंत्र का नैतिक दायित्व है। साथियों, हमें यह भी स्पष्ट रूप से मांग करनी है कि संविधान के अनुच्छेद 15(5) को तुरंत लागू किया जाए, जिससे OBC, दलित और आदिवासी छात्रों को निजी शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण मिले। आज जब शिक्षा का बड़ा हिस्सा निजी क्षेत्र में केंद्रित हो गया है, तब इन समुदायों को उस पहुँच से वंचित रखना एक प्रकार का शोषण है। कांग्रेस का मानना है कि शिक्षा में समान अवसर के बिना कोई भी समाज बराबरी का नहीं हो सकता। हमें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि 50% आरक्षण की सीमा पर अब नए आंकड़ों के आलोक में पुनर्विचार हो। जब सामाजिक वास्तविकताएं बदल चुकी हैं और आंकड़े नई तस्वीर पेश कर रहे हैं, तो हमारी नीतियों में भी उसी अनुरूप परिवर्तन होना चाहिए। आरक्षण की वर्तमान सीमा को आंकड़ों और न्याय दोनों के संतुलन से देखा जाना चाहिए, ताकि OBC, दलित और आदिवासी समुदायों को उनका वास्तविक हक मिल सके। तेलंगाना में जो जाति सर्वेक्षण हुआ, उसने एक मॉडल प्रस्तुत किया, जिसमें समाज, विशेषज्ञ और सरकार सभी की भागीदारी रही। हम चाहते हैं कि केंद्र सरकार भी ऐसा ही जन-संवादी और पारदर्शी मॉडल अपनाए। हम इस प्रक्रिया में सहयोग करने को तैयार हैं। साथियों, आप सभी हमारे पार्टी के प्रवक्ता हैं, हमारे विचारों की आवाज़ हैं। आज जब देश जाति जनगणना को लेकर जागरूक हो रहा है, तब यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम तथ्यों के साथ, संवेदनशीलता के साथ, और निडर होकर इस विषय को जनता के बीच ले जाएं। यह न केवल सामाजिक न्याय की लड़ाई है, बल्कि संविधान की आत्मा की रक्षा की लड़ाई है। मैं आपसे अपील करता हूं कि इस अभियान को केवल चुनावी मुद्दा न समझें, यह हमारी वैचारिक प्रतिबद्धता है। आज का यह संवाद, इस दिशा में हमारी एकजुटता का प्रमाण है। आप सभी को इस ऐतिहासिक प्रयास के लिए मेरी ओर से शुभकामनाएं। आइए, हम मिलकर एक ऐसा भारत बनाएं जहाँ हर नागरिक की पहचान, गरिमा और अधिकार को समान रूप से सम्मान मिले। जय हिन्द , जय कांग्रेस, जय संविधान !

Mallikarjun Kharge

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मैं आज राज्यसभा में कार्यकाल पूरा कर रहे साथियों की विदाई के अवसर पर कुछ बातें रखना चाहता हूं। आज यहां से विदा ले रहे कुछ सांसद वापस इस सदन में आएंगे, वहीं कुछ लोगों को किसी कारण ये मौका नहीं मिल पाएगा। राज्यसभा एक स्थायी सदन है। यहां सांसद 6 साल के लिए चुनकर आते हैं और हर दो साल में एक तिहाई सांसद रिटायर हो जाते हैं। आज यही क्रम दोहराया जा रहा है, लेकिन राजनीति में रहने वाले लोग कभी रिटायर नहीं होते। मैं खुद अपने लंबे राजनीतिक जीवन में पहली बार इस सदन का सदस्य बना हूं और जल्द ही इस सदन से मेरा कार्यकाल पूरा होने जा रहा है। इस दौरान राज्यसभा के विद्वान सांसद साथियों के साथ मैंने जो अनुभव हासिल किया, वह सबसे अलग और महत्वपूर्ण है। अपने पूरे संसदीय जीवन में मैंने सदन में नियमित रूप से उपस्थित रहने और चर्चाओं में हिस्सा लेने की पूरी कोशिश की है। मैंने अपनी जिम्मेदारी निभाने के साथ ही सभी पक्षों की बातों को सुनना और अच्छी बातों को सीखकर व्यवहार में लाने की कोशिश की है। उच्च सदन में मेरा बहुत सारा खट्टा-मीठा अनुभव रहा है। इस सदन को और सार्थक बनाने के लिए नए प्रयासों की जरूरत है। एचडी देवगौड़ा जी प्रधानमंत्री समेत कई बड़े पदों पर रहे। मैं उन्हें 54 साल से जानता हूं। मैंने उनके साथ काम किया है। उन्होंने मोहब्बत हमारे साथ की लेकिन शादी नरेंद्र मोदी के साथ कर ली। शरद पवार जी एक राष्ट्रीय नेता हैं। उनके साथ हमारा दशकों का जुड़ाव रहा है। मुझे खुशी है कि वे दोबारा इस सदन का मार्गदर्शन करेंगे। DMK के साथी संसदीय मामलों के गहन जानकार तिरुचि सिवा जी अगले 6 साल सदन की कार्यवाही में फिर भाग लेंगे। रामदास आठवले जी हमेशा मोदी जी का ही गुणगान गाते रहते हैं। वो जो भी कविता लिखते हैं, वो सिर्फ मोदी के बारे में लिखते हैं, उन्हें कोई दूसरी कविता ही नहीं आती। उम्मीद है- अब वो मोदी का गुणगान कम करेंगे। दिग्विजय सिंह जी को पूरा देश जानता है। एक दशक तक मुख्यमंत्री के रूप में मध्य प्रदेश में उनका बहुत अच्छा योगदान रहा। राज्यसभा सांसद और शिक्षा संबंधी संसदीय स्थाई समिति के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने उल्लेखनीय काम किया और उसकी रिपोर्ट भी उन्होंने आज आपके सामने पेश की। के टी एस तुलसी जी और अभिषेक मनुसिंघवी जी ने संसदीय वाद-विवाद को गरिमा दी। नागरिक स्वतंत्रता, न्यायिक स्वतंत्रता और विभिन्न मुद्दों पर उनके भाषणों ने गहरी छाप छोड़ी। हमारे मुखर साथी शक्ति सिंह गोहिल जी और नीरज डांगी जी की बातें करते हुए मैं भावुक हो रहा हूूं, क्योंकि अपनी योग्यता और क्षमता के साथ उन्होंने सराहनीय योगदान दिया है। सदन के साथ-साथ संसदीय समितियों में भी उन्होंने अच्छा काम किया है। श्रीमती रजनी पाटिल जी समाज कल्याण, महिलाओं और बच्चों के मुद्दों पर लगातार मुखर रही हैं। श्रीमती फूलो देवी नेताम को 6 साल का मौका और मिला है। मुझे भरोसा है कि वे कमजोर तबकों की बातों को सदन में आगे भी मजबूती से रखेंगी। श्रीमती फौजिया खान जी और श्रीमती प्रियंका चतुर्वेदी जी के योगदान को ये सदन याद रखेगा, क्योंकि वो हमेशा हर विषय पर अपने विचार रखती थीं। साकेत गोखले भी विद्वान और युवा हैं, उन्होंने भी खूब योगदान दिया है। राज्यसभा के उप-सभापति हरिवंश जी शालीन और शिष्ट व्यवहार वाले नेता हैं। मैं उन्हें शुभकामनाएं देता हूं। जब भी अच्छा कानून बनता है तो उसमें सत्ता पक्ष की ही नहीं, विपक्ष की भी बराबर की भूमिका होती है। हमें सहयोग की भावना से काम करना चाहिए, ना कि नफरत की भावना से... क्योंकि अगर ऐसा होगा तो हमेशा संदेह की स्थिति बनी रहेगी। सदन की सिटिंग्स बढ़े और जनता के मुद्दों पर गंभीर चर्चा हो। जब सत्र लंबा होता है तो मुद्दों पर अच्छे से चर्चा हो पाती है। सत्र में ज्यादा दिन होंगे तो हम बिलों को ज्यादा समय दे पाएंगे। उम्मीद है- प्रधानमंत्री इस बात पर ध्यान देंगे। गरीबों, कमजोर तबकों, किसानों और मजदूरों के मुद्दों पर बात होनी चाहिए, लेकिन सत्ता पक्ष इसे अपनी आलोचना मान लेता है। फिर बिना बात सुने खंडन करने लगता है, जबकि सरकार को जनता के मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिए। सीमित अवसरों पर सांसद अपनी बात रखते हैं तो कई बार उनकी बातें कार्यवाही से हटा दी जाती हैं। मेरा भी अनुभव रहा है कि कई बार मेरे भाषण के अंश हटा दिए जाते हैं, जिससे उनका अर्थ ख़त्म हो जाता है। इस बारे में कई बार मैंने पत्र भी लिखे हैं। मेरा मानना है कि समय-समय पर राज्यसभा की प्रक्रिया और नियमों की भी समीक्षा होनी चाहिए। समय अपनी गति से चलता रहता है, संस्थाएं कायम रहती हैं, लोगों के चेहरे बदलते रहते हैं। जो साथी दोबारा चुनकर आ रहे हैं और जो यहां से रिटायर होकर जा रहे हैं, वे सार्वजनिक जीवन में अपना योगदान जारी रखेंगे। विदाई तो है दस्तूर जमाने का पुराना... पर जहां भी जाना, अपनी छाप कुछ ऐसे छोड़ जाना कि हर कोई गुनगुनाए तुम्हारा ही तराना इन्हीं शब्दों के साथ मैं यहां से रिटायर हो रहे सभी साथियों को भविष्य के लिए शुभकामनाएं देता हूं। जय हिंद 🇮🇳 : कांग्रेस अध्यक्ष व राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री Mallikarjun Kharge

Congress

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कांग्रेस अधिवेशन में कांग्रेस महासचिव Sachin Pilot जी ने 'न्याय पथ' प्रस्ताव को अनुमोदन के लिए रखा। आज से ठीक 100 साल पहले महात्मा गांधी जी ने कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष पद संभाला था, उसी के साथ ये सरदार पटेल की 150वीं जयंती है। देश में जो हालात बने हैं, वो सबके सामने हैं। पिछले दस साल में महंगाई, बेरोजगारी, आर्थिक असमानता और धार्मिक ध्रुवीकरण ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दी हैं। इसलिए कांग्रेस अब नफरत, नकारात्मकता और निराशा के वातावरण को बदलकर न्याय और संघर्ष के रास्ते पर चलने के लिए प्रतिबद्ध है। जो लोग राष्ट्रवाद का चोला ओढ़कर वोट बटोरने का काम करते हैं, मैं उन्हें बता दूंं कि कांग्रेस पार्टी का जन्म देश की आजादी के लिए हुआ था। कांग्रेस पार्टी के इतिहास में हमारे नेताओं ने जो कुर्बानियां दी हैं, ऐसा कोई दूसरा उदाहरण पूरी दुनिया में नहीं है। कांग्रेस के नेताओं ने देश को अखंड रखने के लिए छाती पर गोलियां खाई हैं- ये कांग्रेस का राष्ट्रवाद है। कांग्रेस का राष्ट्रवाद देश को जोड़ने का है, BJP का का राष्ट्रवाद देश को तोड़ने का है। कांग्रेस का राष्ट्रवाद देश की अनेकता को एकता में मिलाने का है और BJP का राष्ट्रवाद अनेकता को खत्म करने का है। अब समय आ गया है कि धर्म-जाति, भाषा, क्षेत्रवाद, पहनावा और खानपान की दुहाई देकर सत्ता को हथियाने वालों को कड़ा जवाब दिया जाए, आईना दिखाया जाए। जो लोग आज कांग्रेस मुक्त भारत बनाने की बात करते हैं, मैं उन्हें बता दूं कि राजीव गांधी जी जब प्रधानमंत्री बने थे, तब कांग्रेस के पास 400 से ज्यादा सांसद थे.. लेकिन हमने उन्हें ये बोलते हुए कभी नहीं सुना कि वे विपक्ष मुक्त देश बनाना चाहते हैं। कांग्रेस की जड़ें गुजरात के साथ ही पूरे देश में बहुत गहरी हैं। वे याद रखें कि 400 पार का नारा देने वालों को देश ने आईना दिखा दिया। देश का सद्भाव सर्व धर्म समभाव सरदार वल्लभभाई पटेल जी ने 1948 में जयपुर के अधिवेशन में कहा था कि कांग्रेस और कांग्रेस की सरकार इस बात के लिए प्रतिबद्ध हैं कि भारत एक सच्चा धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र हो। हमारी अलग-अलग पृष्ठभूमि है, संस्कृति एवं वेशभूषा है, लेकिन जो लोग उत्तर-दक्षिण के राग में धर्म, जाति, गोत्र के नाम पर बांटना चाहते हैं उन लोगों से हमें सावधान रहना पडे़गा। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस प्रतिबद्ध है कि धार्मिक, भाषाई और जातिगत व क्षेत्रीय बंटबारे को आखिरी दम तक लड़ते रहेंगे। हमारा नारा है- नफरत छोड़ो- भारत जोड़ो आधी आबादी और पूरा हक काग्रेस का हक है, एनीबेसेंट जी, सरोजनी नायडू जी, नेली सेन गुप्ता जी, इंदिरा गांधी जी एवं सोनिया गांधी जी ने महिलाओं के अधिकारों को पहली पंक्ति में लाने का काम किया है। पिछले एक दशक में भारत में अपराध इतने बढ़ गए हैं कि भारत मां की आत्मा छलनी हो गई है। केंद्र की भाजपा सरकार के आदेश पर महिला पहलवानों को सड़कों पर घसीटा गया, मणिपुर में महिलाओं को सार्वजनिक तौर पर निर्वस्त्र कर घुमाया गया, हाथरस से लेकर उन्नाव तक भारत मां के सीने पर ऐसे हजारों घाव हैं। देश की बेटियों के बारे में BJP के मुख्यमंत्री, सांसद और नेता जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल करते हैं, उसका हमें विरोध करना पड़ेगा। हमने संकल्प लिया है कि किसानों को MSP पर उनका कानूनी अधिकार देंगे और 50% से ऊपर समर्थन मूल्य किसानों को मिलेगा। श्वेत क्रांति, हरित क्रांति, MSP ये सब कांग्रेस सरकार की देन है। किसान विरोधी BJP सरकार तो तीन काले कानून लेकर आई जिसके बाद किसानों ने लंबा आंदोलन किया, 700 किसान शहीद हुए, इसके बाद इस BJP सरकार ने तीन कानून वापस लिए। जमीन अधिग्रहण को लेकर राहुल गांधी जी ने भट्टा पारसौल में आंदोलन किया जिसके बाद जमीन अधिग्रहण का कानून बना। डॉ. मनमोहन सिंह जी की सरकार में 10 साल में 27 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर उठाया गया, 8% की GDP ग्रोथ हुई। आज 1% अमीर लोगों के पास देश की 40% संपत्ति है, जो निचले 50% लोग हैं उनके पास मात्र 6.5% संपत्ति है। आज का संकल्प है- इस अधिवेशन की आवाज पूरे देश के हर गांव में पहुंचे। जिस मजबूती के साथ राहुल गांधी जी मोदी सरकार को चुनौती देने के लिए बढ़ रहे हैं, उनके साथ कंधे से कंधे मिलाकर हमें राजनीतिक विजय प्राप्त करनी पड़ेगी जिसके लिए हमें संगठन को मजबूत करना बहुत जरूरी है। न्याय का संकल्प संघर्ष का पथ हम सभी कार्यकर्ता मजबूती के साथ कांग्रेस की असीम संगठनात्मक क्षमता, दक्षता और कार्यकुशला के आधार पर अधिक से अधिक विस्तार करें और भारतवासियों के लिए न्याय के संकल्प को साकार करें। ये संघर्ष रंग लाएगा और विजय दिलाएगा। चले संघर्ष आठों याम तुमसे, करेंगे अन्त तक संग्राम तुमसे। हमारे न्याय की संकल्पना साकार होगी कांग्रेस की फिर जय-जयकार होगी

Congress

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(18-08-2005) मनरेगा कानून जब संसद से पास किया गया, उस वक्त श्रीमती सोनिया गांधी जी का लोकसभा में दिया गया वक्तव्य - मैं 'नेशनल रूरल एंप्लॉयमेंट गारंटी बिल' का समर्थन करने के लिए खड़ी हुई हूं। मैं समझती हूं कि ये एक ऐतिहासिक अवसर है। आज हम 2004 के कांग्रेस पार्टी के घोषणा पत्र का सबसे महत्वपूर्ण वादा पूरा कर रहे हैं। आज हम अपनी UPA सरकार के नेशनल कॉमन मिनिमम प्रोग्राम का सबसे महत्वपूर्ण संकल्प पूरा कर रहे हैं। जो लोग देश के ग्रामीण इलाकों में रहते हैं या फिर उन क्षेत्रों का दौरा करते हैं, उन्हें अच्छी तरह से मालूम है कि वहां ऐसे लोगों की कितनी बड़ी संख्या है, जिन्हें रोजगार की जरूरत है और वे सार्थक काम की खोज में किस तरह से भटक रहे हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर की कितनी कमी है और वह कमी बिल्कुल साफ दिखाई देती है। नेशनल रूरल एंप्लॉयमेंट गारंटी के इस महत्वपूर्ण विधेयक के जरिए हम इन दोनों मुद्दों का समाधान खोज रहे हैं और अपने गांव में एक बुनियादी परिवर्तन लाने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि हमें एहसास है कि हमारे दो-तिहाई भाई-बहन उन्हीं गांवों में रहते हैं। इस विधेयक के जरिए हम उन्हें उनका अधिकार और उनका जायज हक देने की शुरूआत कर रहे हैं, जिससे वे भविष्य में एक बेहतर जिंदगी जी सकें। हमने नेशनल रूरल एंप्लॉयमेंट गारंटी प्रोग्राम के मौजूदा स्वरूप पर पहली बार 2002 में गुवाहाटी में मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में विचार विमर्श किया था। इसके बाद माउंट आबू और श्रीनगर के सम्मेलन में इस पर चर्चा हुई थी। हम सब ने महसूस किया कि रोजगार की सुरक्षा देना और ग्रामीण इलाकों में मूलभूत ढांचे को बढ़ाना बहुत ही अनिवार्य है। इस तरह से ऐसा विधेयक हमारी पार्टी के 2004 के घोषणा पत्र का एक केंद्रीय मुद्दा बना। 1970 के दशक में जब महाराष्ट्र में सूखे का संकट आया था, तब उस समय मुख्यमंत्री श्री वसंतराव नाइक जी ने इंदिरा जी के समर्थन से महाराष्ट्र में एक एंप्लॉयमेंट गारंटी स्कीम को लागू किया था। आने वाले वर्षों में इस योजना को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने का प्रयास हुआ, लेकिन किसी न किसी वजह से यह संभव नहीं हो सका। मुझे याद है कि 1980 में इंदिरा जी ने एक रूरल लैंडलेस एंप्लॉयमेंट गारंटी प्रोग्राम शुरू किया था। 1987 में राजीव गांधी ने जवाहर रोजगार योजना का आरंभ किया था और फिर 1993 में जब डॉ. मनमोहन सिंह जी, श्री पीवी नरसिम्हा राव के मंत्रिमंडल में वित्त मंत्री थे, उस समय 120 पिछड़े जिलों में एंप्लॉयमेंट एश्योरेंस स्कीम शुरू हुई। इन सारे कार्यक्रमों में बुनियादी सिद्धांत रोजगार की एग्जीक्यूटिव गारंटी तक सीमित था, लेकिन हमारा नेशनल रूरल एंप्लॉयमेंट गारंटी प्रोग्राम महाराष्ट्र की एंप्लॉयमेंट गारंटी स्कीम की तरह लीगल गारंटी के सिद्धांत पर आधारित है, यानी यह कानून की तरह लागू होगा। यह बिल सामाजिक कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवी संस्थाओं, अनुभवी प्रशासकों और खुद ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के साथ व्यापक विचार विमर्श के बाद तैयार हुआ है। स्टैंडिंग कमेटी और अन्य मंत्रालय ने भी इस पर गंभीरता से विचार किया है, वहीं इस पर बारीकी से पब्लिक डिबेट भी हुई थी। राजनीतिक भेदभाव के बगैर समाज और सरकार के बीच आपस में किस तरह सहयोग के साथ काम हो सकता है, मैं समझती हूं कि यह विधेयक उसकी जीवंत मिसाल है। इसे सदन में पेश होने में 14 महीने लगे, लेकिन मैं समझती हूं कि इस समय का पूरा और सही इस्तेमाल हुआ है। एक तरह से नेशनल रूरल एंप्लॉयमेंट गारंटी प्रोग्राम की शुरुआत के तौर पर UPA सरकार ने काम के बदले अनाज का राष्ट्रीय कार्यक्रम देश के 150 सबसे पिछड़े जिलों में लागू किया था। काम के बदले अनाज के कार्यक्रम की चर्चा करते हुए, मैं सदन को यह याद दिलाए बगैर नहीं रह सकती कि आज से 3 साल पहले हमारा अनाज का भंडार 60 मिलियन टन से भी ज्यादा था और उस समय अनेक राज्य खासतौर से वे राज्य जहां कांग्रेस की सरकार थी लगातार सूखे की मार झेल रहे थे। उस समय हमारी पार्टी ने NDA सरकार से बार-बार आग्रह किया था कि नेशनल एंप्लॉयमेंट गारंटी स्कीम के वादे के तौर पर देश में काम के बदले अनाज कार्यक्रम शुरू किया जाए, जिससे लाखों लोगों की जिंदगी बचाई जा सके। हमारे गोदाम अनाज से भरे हुए थे, मगर लोग भूख से बेहाल थे। NDA सरकार ने लगातार आग्रह को अनसुना कर दिया। इसलिए आज हम सबको, इस बात का गर्व है, बहुत संतोष है कि इस विधेयक के जरिए हम उन करोड़ों लोगों की मदद करने की कोशिश कर रहे हैं, जिन्हें उनकी सचमुच जरूरत है। महोदय, मैं बहुत संक्षेप में महाराष्ट्र की एंप्लॉयमेंट गारंटी स्कीम के कुछ फायदे गिनाना चाहती हूं। इसके लागू होने से खेत-मजदूर को ज्यादा वेतन मिला और उनकी जिंदगी में खास तौर से महिलाओं की जिंदगी में काफी सुधार हुआ। कुछ आंकड़े बताते हैं कि वहां एंप्लॉयमेंट गारंटी स्कीम में काम करने वाले लोगों में 40% से 50% तक महिलाएं हैं। जहां सिंचाई के साधन नहीं हैं, वहां भी उत्पादन बढ़ा है और एक बात की जानकारी शायद काफी लोगों को नहीं है कि 1990 के दशक में इस एंप्लॉयमेंट गारंटी स्कीम के जरिए करीब 10 लाख हेक्टेयर जमीन को बागवानी के लायक बनाया गया था। There are numerous significant features in this Bill, but to my mind there are three vital ones which I would like to highlight. First, elected panchayat institutions have been given a pivotal role. This programme would therefore lead to the financial and administrative empowerment of panchayat bodies as well. Second, the Bill goes beyond traditional civil works. It includes watershed development, renovation of water bodies, desilting of tanks, afforestation, and wasteland restoration. And for the first time, irrigation works can be taken up on lands owned by members of the Scheduled Castes and Scheduled Tribes. Also, women labourers will be given priority. Third, the Bill clearly prohibits—and I think this is a very important aspect—it clearly prohibits the engagement of contractors for the execution of works. Now, apart from these significant features, the most important thing to keep in mind is that this Act is coming into force against the background of the UPA Right to Information Act, passed in this House three months ago. This is an Act far more progressive than the previous one. The new Right to Information Act will therefore enable social audits and greater public scrutiny of the programme. It will ensure greater accountability of panchayat bodies and district administrations as well. For example, muster rolls will no longer be kept secret, and budgets and works will have to be made public. All this together will ensure that only those who really need work will be employed, and only those schemes required by the community will be taken up. Employment guarantee programmes are no substitute for sustained economic growth. We see economic growth and employment guarantee programmes going hand in hand. We also do not see, as some do, such programmes as handouts, as dole, or as populist giveaways. We see this Act as the human face of economic reforms, making the process of economic growth more inclusive and more equitable. This Act is part of the Congress Party and UPA agenda for social transformation. It is part of an agenda which, in the last 14 months, has seen unprecedented increases in public expenditure on elementary education, mid-day meals, public health, and women and child development. It is an agenda to which all of us in the UPA are firmly committed. Our country is full of success stories which inspire us, but there is still widespread destitution which pains us and challenges us. Our country has touched great heights of endeavour, which we of course acclaim, yet there is still vast deprivation which we must all strive to eliminate. We all know only too well how inequitable, how unjust the lives of the poor are, especially when we compare them to the excesses and waste that we see all around us these days. This National Rural Employment Guarantee Act is a response to the needs of crores of Indians, whose right it is to a better life for themselves and for their children. A time will come—and I hope not too far in the future—when there will be no need for such extensive programmes. But until such a time, I believe we cannot just sit idly by and hope that economic reforms alone will create adequate employment opportunities in rural India. I would like to say a few words on the financial implications of this legislation, because there have been some critical comments. I believe that an economy which is growing at 7 per cent per year can and should find the resources for such a crucial intervention. While it is for the Central Government to find the bulk of the resources, the States too have a key—indeed, a critical—role to play in its monitoring and implementation. I also feel that we must use this momentous occasion to effect fundamental changes in government expenditure to better support larger social goals. We need to consolidate many schemes and programmes. We now have an opportunity to use the employment guarantee, for instance, for irrigation and rural roads, which are very much part of the UPA Government’s Bharat Nirman programme. As someone who has implicit faith in this Bill, I also acknowledge that there has been some cynicism and concern about it. These doubts, I feel, cannot simply be dismissed; they have to be addressed. Let us be frank with ourselves. Our programmes do not always work out the way they are planned or intended to. The benefits do not always reach the poor. Delivery systems often claim too large a share of the outlays. While the Central and State Governments must bring about innovations in delivery systems, political parties cutting across party lines—all of us—must play a more proactive role in monitoring and mobilisation. Above all, I believe we need to rid ourselves of the 'Sab Chalta Hai' attitude. Before I conclude, I want to personally thank our Prime Minister, under whose leadership this Bill is being introduced. For his steadfast support to it and to its objectives, he has had to balance various considerations. But in standing firmly behind this Bill, he is standing up for crores and crores of our people whose lives depend on its success. We are today passing a truly radical law—a law with far-reaching and profound consequences. But the real challenge begins now: in making sure that the legislation works in the manner it is meant to, in a manner that will tangibly impact the lives of our brothers and sisters in rural India. To this, I am personally committed. To this, the Congress Party is committed. To this, the UPA Government is committed.

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If a leader like Indira Gandhi were alive today, she would have banned a party like the BJP: If the country has to be saved, if the nation's democracy has to be saved, then I must say that the dangerous atmosphere prevailing in the country today is unlike anything I have seen in my 50 years of political life. All of you senior people sitting here would agree with this. I am saying with full responsibility that the atmosphere today is extremely dangerous. If the country still does not wake up, then the people of this country themselves will suffer the consequences later. Our younger generation will have no future left, and the situation will become extremely serious. That is why the responsibility of the younger generation is the greatest today, because history will not forgive them either. Tomorrow they will be asked what they were doing as young people when all this was happening in the country. The Congress is the party of Mahatma Gandhi, Pandit Nehru, Sardar Patel, Maulana Abul Kalam Azad and Babasaheb Ambedkar's era. It is because of the Constitution framed by them that the country is functioning today. Indira Gandhi laid down her life, but did not allow Khalistan to be created. Rajiv Gandhi was martyred because he wanted to establish peace across the entire subcontinent, including Sri Lanka. He gave his life, but kept the country united and intact. But what is the thinking of the people in power today? Their thinking is weakening the country. They are deliberately carrying out religious polarisation. There are 403 Assembly seats in Uttar Pradesh, but you do not give even a single seat to a Muslim candidate, and yet call yourselves a national political party! At least you could have given five seats just to show the people of the country. But you want to project that 'we are a purely Hindutva party.' Poor Mukhtar Abbas Naqvi defended the BJP so effectively for such a long time; Shahnawaz Hussain was a minister, but today you have made all of them sit at home. Those whose thinking is simply to provoke Hindutva supporters and rule ,if a towering leader like Indira Gandhi were alive today, she would have imposed a ban on a party like the BJP. Will you run a party solely on the agenda of Hindutva? Do you want to do politics only in the name of Hindus? What is written in our Constitution? The Constitution on which you took your oath speaks of respecting all religions, all castes and all sections of society. You cannot do politics in the name of religion, but today this is happening openly. I remember that when Bhairon Singh Shekhawat contested an election from Bali, a few words regarding the Ram Temple slipped out of his mouth. He won the election and later became Chief Minister, but someone filed a case against him in the High Court. The case was so serious that he could have lost his Assembly membership. Later, he stopped the main witness on a bus during the journey, explained things to him with police assistance, or did whatever was done, and only then was he able to get out of trouble. What I want to say is that there was a time when even merely invoking religion during an election was prohibited; you could not bring religion into it. And look at the present times, when even the role of the Election Commission is being questioned. Today, people are being openly incited in the name of religion across the country. Now neither does anyone speak about this misuse of religion, nor is anyone approaching the courts over it. Everyone has seen that the country's system and thinking have changed. The country is now moving along this path.If a leader like Indira Gandhi were alive today, she would have banned a party like the BJP: If the country has to be saved, if the nation's democracy has to be saved, then I must say that the dangerous atmosphere prevailing in the country today is unlike anything I have seen in my 50 years of political life. All of you senior people sitting here would agree with this. I am saying with full responsibility that the atmosphere today is extremely dangerous. If the country still does not wake up, then the people of this country themselves will suffer the consequences later. Our younger generation will have no future left, and the situation will become extremely serious. That is why the responsibility of the younger generation is the greatest today, because history will not forgive them either. Tomorrow they will be asked what they were doing as young people when all this was happening in the country. The Congress is the party of Mahatma Gandhi, Pandit Nehru, Sardar Patel, Maulana Abul Kalam Azad and Babasaheb Ambedkar's era. It is because of the Constitution framed by them that the country is functioning today. Indira Gandhi laid down her life, but did not allow Khalistan to be created. Rajiv Gandhi was martyred because he wanted to establish peace across the entire subcontinent, including Sri Lanka. He gave his life, but kept the country united and intact. But what is the thinking of the people in power today? Their thinking is weakening the country. They are deliberately carrying out religious polarisation. There are 403 Assembly seats in Uttar Pradesh, but you do not give even a single seat to a Muslim candidate, and yet call yourselves a national political party! At least you could have given five seats just to show the people of the country. But you want to project that 'we are a purely Hindutva party.' Poor Mukhtar Abbas Naqvi defended the BJP so effectively for such a long time; Shahnawaz Hussain was a minister, but today you have made all of them sit at home. Those whose thinking is simply to provoke Hindutva supporters and rule ,if a towering leader like Indira Gandhi were alive today, she would have imposed a ban on a party like the BJP. Will you run a party solely on the agenda of Hindutva? Do you want to do politics only in the name of Hindus? What is written in our Constitution? The Constitution on which you took your oath speaks of respecting all religions, all castes and all sections of society. You cannot do politics in the name of religion, but today this is happening openly. I remember that when Bhairon Singh Shekhawat contested an election from Bali, a few words regarding the Ram Temple slipped out of his mouth. He won the election and later became Chief Minister, but someone filed a case against him in the High Court. The case was so serious that he could have lost his Assembly membership. Later, he stopped the main witness on a bus during the journey, explained things to him with police assistance, or did whatever was done, and only then was he able to get out of trouble. What I want to say is that there was a time when even merely invoking religion during an election was prohibited; you could not bring religion into it. And look at the present times, when even the role of the Election Commission is being questioned. Today, people are being openly incited in the name of religion across the country. Now neither does anyone speak about this misuse of religion, nor is anyone approaching the courts over it. Everyone has seen that the country's system and thinking have changed. The country is now moving along this path. अगर इंदिरा गाँधी जैसी नेता आज होतीं, तो भाजपा जैसी पार्टी पर बैन लगा देतीं: "अगर देश को बचाना है, देश के लोकतंत्र (डेमोक्रेसी) को बचाना है... तो आज देश के भीतर जो खतरनाक माहौल है, ऐसा माहौल मैंने अपनी जिंदगी के 50 साल के राजनीतिक करियर में कभी नहीं देखा। यहाँ बैठे आप सभी वरिष्ठ (सीनियर) लोग भी इस बात से सहमत होंगे। मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूँ कि आज बेहद खतरनाक माहौल है। अगर देश अब भी नहीं संभला, तो बाद में देशवासी खुद इसका खामियाजा भुगतेंगे। हमारी युवा पीढ़ी का कोई भविष्य नहीं बचेगा और हालात बेहद गंभीर हो जाएँगे। इसीलिए आज युवा पीढ़ी की जिम्मेदारी सबसे ज़्यादा है; क्योंकि इतिहास उन्हें भी माफ़ नहीं करेगा। कल को उनसे पूछा जाएगा कि जब देश में यह सब हो रहा था, तब वे युवा के रूप में क्या कर रहे थे? कांग्रेस महात्मा गांधी, पंडित नेहरू, सरदार पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद और बाबासाहेब अंबेडकर के जमाने की पार्टी है। उन्हीं के बनाए संविधान की बदौलत आज देश चल रहा है। इंदिरा गांधी जी ने शहादत दे दी, पर खालिस्तान नहीं बनने दिया। राजीव गांधी जी शहीद हो गए, क्योंकि वे श्रीलंका सहित पूरे उपमहाद्वीप में शांति स्थापित करना चाहते थे। उन्होंने अपनी जान दे दी, पर देश को एक और अखंड रखा। लेकिन आज सत्ता में बैठे लोगों की सोच क्या है? इनकी सोच से देश कमजोर हो रहा है। ये लोग जानबूझकर धार्मिक ध्रुवीकरण कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में विधानसभा की 403 सीटें हैं), लेकिन आप एक भी सीट किसी मुस्लिम उम्मीदवार को नहीं देते, और खुद को एक राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी कहते हैं! अरे, आप देशवासियों को दिखाने के लिए ही सही, पाँच सीटें दे देते। लेकिन आप तो यह जताना चाहते हैं कि 'हम शुद्ध रूप से हिंदुत्ववादी पार्टी हैं।' वो बेचारे मुख्तार अब्बास नकवी इतने लंबे समय तक भाजपा की कितनी शानदार पैरवी करते थे; शाहनवाज हुसैन मंत्री थे, लेकिन आज आपने सबको घर बैठा दिया। अरे, जिनकी सोच ही यह हो कि केवल हिंदुत्ववादियों को भड़काओ और राज करो—अगर आज इंदिरा गांधी जैसी कद्दावर नेता होतीं, तो भाजपा जैसी पार्टी पर प्रतिबंध (बैन) लगा देतीं। क्या आप सिर्फ हिंदुत्व के एजेंडे पर पार्टी चलाएंगे? क्या आप सिर्फ हिंदुओं के नाम पर राजनीति करना चाहते हैं? हमारे संविधान में क्या लिखा है? आपने जिस संविधान की शपथ ली है, उसमें सभी धर्मों, सभी जातियों और सभी वर्गों का सम्मान करने की बात कही गई है। आप धर्म के नाम पर राजनीति नहीं कर सकते, लेकिन आज खुलेआम यही सब हो रहा है। मुझे याद है, भैरों सिंह शेखावत जी जब बाली से चुनाव लड़े, तो उनके मुँह से राम मंदिर को लेकर कुछ शब्द निकल गए थे। वे चुनाव तो जीत गए और बाद में मुख्यमंत्री भी बन गए, लेकिन किसी ने हाईकोर्ट में उनके खिलाफ केस कर दिया। वह केस इतना संगीन था कि उनकी विधानसभा सदस्यता भी जा सकती थी। बाद में उन्होंने मुख्य गवाह को रास्ते में बस में रोककर, पुलिस के सहयोग से समझाइश की या जो भी किया, तब जाकर वे बच पाए। मैं यह कहना चाहता हूँ कि एक वो दौर था, जब चुनाव में धर्म का सिर्फ नाम लेने मात्र पर पाबंदी थी; आप धर्म को बीच में नहीं ला सकते थे। और आज का दौर देखिए, जहाँ चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। आज पूरे देश के अंदर धर्म के नाम पर लोगों को खुलेआम भड़काया जा रहा है। अब धर्म के इस दुरुपयोग पर न तो कोई बात करता है और न ही कोई कोर्ट जा रहा है। सबने देख लिया है कि देश की व्यवस्था और सोच बदल चुकी है। आज देश इसी ढर्रे पर चल रहा है, इसलिए मैं अपनी बात को और लंबा नहीं खींचना चाहता।" and therefore I do not wish to prolong my remarks any further. "अगर देश को बचाना है, देश के लोकतंत्र (डेमोक्रेसी) को बचाना है... तो आज देश के भीतर जो खतरनाक माहौल है, ऐसा माहौल मैंने अपनी जिंदगी के 50 साल के राजनीतिक करियर में कभी नहीं देखा। यहाँ बैठे आप सभी वरिष्ठ (सीनियर) लोग भी इस बात से सहमत होंगे। मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूँ कि आज बेहद खतरनाक माहौल है। अगर देश अब भी नहीं संभला, तो बाद में देशवासी खुद इसका खामियाजा भुगतेंगे। हमारी युवा पीढ़ी का कोई भविष्य नहीं बचेगा और हालात बेहद गंभीर हो जाएँगे। इसीलिए आज युवा पीढ़ी की जिम्मेदारी सबसे ज़्यादा है; क्योंकि इतिहास उन्हें भी माफ़ नहीं करेगा। कल को उनसे पूछा जाएगा कि जब देश में यह सब हो रहा था, तब वे युवा के रूप में क्या कर रहे थे? कांग्रेस महात्मा गांधी, पंडित नेहरू, सरदार पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद और बाबासाहेब अंबेडकर के जमाने की पार्टी है। उन्हीं के बनाए संविधान की बदौलत आज देश चल रहा है। इंदिरा गांधी जी ने शहादत दे दी, पर खालिस्तान नहीं बनने दिया। राजीव गांधी जी शहीद हो गए, क्योंकि वे श्रीलंका सहित पूरे उपमहाद्वीप में शांति स्थापित करना चाहते थे। उन्होंने अपनी जान दे दी, पर देश को एक और अखंड रखा। लेकिन आज सत्ता में बैठे लोगों की सोच क्या है? इनकी सोच से देश कमजोर हो रहा है। ये लोग जानबूझकर धार्मिक ध्रुवीकरण कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में विधानसभा की 403 सीटें हैं), लेकिन आप एक भी सीट किसी मुस्लिम उम्मीदवार को नहीं देते, और खुद को एक राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी कहते हैं! अरे, आप देशवासियों को दिखाने के लिए ही सही, पाँच सीटें दे देते। लेकिन आप तो यह जताना चाहते हैं कि 'हम शुद्ध रूप से हिंदुत्ववादी पार्टी हैं।' वो बेचारे मुख्तार अब्बास नकवी इतने लंबे समय तक भाजपा की कितनी शानदार पैरवी करते थे; शाहनवाज हुसैन मंत्री थे, लेकिन आज आपने सबको घर बैठा दिया। अरे, जिनकी सोच ही यह हो कि केवल हिंदुत्ववादियों को भड़काओ और राज करो—अगर आज इंदिरा गांधी जैसी कद्दावर नेता होतीं, तो भाजपा जैसी पार्टी पर प्रतिबंध (बैन) लगा देतीं। क्या आप सिर्फ हिंदुत्व के एजेंडे पर पार्टी चलाएंगे? क्या आप सिर्फ हिंदुओं के नाम पर राजनीति करना चाहते हैं? हमारे संविधान में क्या लिखा है? आपने जिस संविधान की शपथ ली है, उसमें सभी धर्मों, सभी जातियों और सभी वर्गों का सम्मान करने की बात कही गई है। आप धर्म के नाम पर राजनीति नहीं कर सकते, लेकिन आज खुलेआम यही सब हो रहा है। मुझे याद है, भैरों सिंह शेखावत जी जब बाली से चुनाव लड़े, तो उनके मुँह से राम मंदिर को लेकर कुछ शब्द निकल गए थे। वे चुनाव तो जीत गए और बाद में मुख्यमंत्री भी बन गए, लेकिन किसी ने हाईकोर्ट में उनके खिलाफ केस कर दिया। वह केस इतना संगीन था कि उनकी विधानसभा सदस्यता भी जा सकती थी। बाद में उन्होंने मुख्य गवाह को रास्ते में बस में रोककर, पुलिस के सहयोग से समझाइश की या जो भी किया, तब जाकर वे बच पाए। मैं यह कहना चाहता हूँ कि एक वो दौर था, जब चुनाव में धर्म का सिर्फ नाम लेने मात्र पर पाबंदी थी; आप धर्म को बीच में नहीं ला सकते थे। और आज का दौर देखिए, जहाँ चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। आज पूरे देश के अंदर धर्म के नाम पर लोगों को खुलेआम भड़काया जा रहा है। अब धर्म के इस दुरुपयोग पर न तो कोई बात करता है और न ही कोई कोर्ट जा रहा है। सबने देख लिया है कि देश की व्यवस्था और सोच बदल चुकी है। आज देश इसी ढर्रे पर चल रहा है।

Ashok Gehlot

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