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खेती की बात खेत पर, अब यह लखनऊ के सचिवालय में बैठकर नहीं, किसान के खेत में बैठकर हम करेंगे...

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जब बारिश होती है, तो किसान को तो खेत में भीगना ही पड़ता है। मैं भी अपने खेत को देखने आया हूँ। खेत में मैंने मल्चिंग की है और अब हम यहाँ आधे हिस्से में टमाटर तथा आधे हिस्से में शिमला मिर्च लगाने वाले हैं। उसकी तैयारी चल रही है। तैयारी में कोई कसर न रहे, मल्चिंग ठीक हो, यह भी किसान को अपनी आँखों से और अपने हाथों से देखना पड़ता है। यह मल्चिंग ठीक हुई है, कहीं-कहीं फट जरूर गई है। जब ट्रैक्टर से मल्चिंग करते हैं और यह पन्नी बिछाते हैं, तो कहीं-कहीं फटने का खतरा रहता है। सब्जियों की खेती थोड़ी मेहनत की खेती है, लेकिन यह प्रॉफिट की खेती भी है। मेरी कोशिश यह है कि एक किसान के नाते खेती को गंभीरता से करूँ और खुद इस पर ध्यान दूँ। इसलिए मैं समय-समय पर अपने खेत में आता हूं और खेती देखता हूं।

Shivraj Singh Chouhan

50,283 Aufrufe • vor 1 Monat

आज विदिशा में अपने खेत पर एक नए संकल्प के साथ आया हूं... हमारे देश में ड्रैगन फ्रूट (कमलम), एवोकाडो जैसे फल हम लगभग 5 हज़ार करोड़ रुपये के आयात करते हैं। यह पैसा हमारे किसानों की जेब में जा सकता है, यदि हम इन फसलों की खेती अपने देश में ही करें। बैंगलुरु स्थित ICAR-IIHR ने कमलम, कटहल और एवोकाडो जैसी फसलों पर महत्वपूर्ण अनुसंधान किए हैं। बैंगलोर में इसके सफल प्रयोग हुए हैं, लेकिन अब ज़रूरत है कि देशभर में यह पहल आगे बढ़े। इसी दिशा में मैं स्वयं अपने खेत में ड्रैगन फ्रूट, एवोकाडो और जैक फ्रूट की खेती का प्रयोग कर रहा हूं ताकि किसान देखें, समझें और आत्मविश्वास के साथ इस दिशा में आगे बढ़ें।

Shivraj Singh Chouhan

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