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Ana Sayfaya Dön

गद्द!री इनके ख़ू N में है....

36,883 görüntüleme • 3 ay önce •via X (Twitter)

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रेगिस्तान री रेत रै कण- कण मांय एक नवी-जूनी कहानी उकैरीज्योडी है। जैसलमेर रै मनभावन धोरां में ओ कहानी क़ैद करी है फ्रेडरिक फौजिया (frédéric fougea) जिका फ्रांसीसी लेखन, निर्देशक और फिल्म बनावण रो काम करै है। इण डॉक्यूमेंट्री में रेतीले धोरों रे बिच्चै ऊँटपालणिया रै जीवन रौ संघर्ष अर पशुआ रै प्रेम नै सामी राख्यौ है। चरवाहा कीकर मस्त- मगन होय खुशमिजाजी सूं जीवन जी रिया है। इणमें जैसलमेर री लोक संस्कृति, पशुपालन माथै निर्भर अर्थव्यवस्था री भी झलक दिखै है। इणमें रेवासियों री जियाजूण रौ संघर्ष अर जिजीविषा री कहानी जीवंत व्है जावै है। डॉक्यूमेंट्री में ऊंटपालकों रै धार्मिक रिवाजों अर इष्ट रै प्रति आस्था नै भी बतायो गयो है । तेजी सूं बदलते वक्त अर तरै- तरै री तकनीकां सूं सोरो व्हेतै मानख़ै में आ डॉक्यूमेंट्री संघर्ष भरै जीवन, आपसी प्रेम, एक- दूजे री मदद रो पाठ पढ़ावे। Video Credit: Best Documentary YT

Chaitanya Raj Singh

14,114 görüntüleme • 1 yıl önce

तेज़बीर सिंह अर वाल्मीकि थापर री अगुवाई में 1974 में बनायी एक डॉक्यूमेंट्री “द सिटी देट जैसल बिल्ट” जिण में कैद है पाँच दशक पेल रौ जैसलमेर… वो शांत रेत, सोने रे ज्यों चमकतो किलो, हवेलियां री बेजोड़ नक्कासी अर सादगी भरो जनजीवन। लारले 50 बरसां में जैसलमेर विकास री नवीं ऊँचाइयाँ छुई है, पण आज भी पुरानी परम्परावां, संगीत री राग, शहर री गलियां, अर शहरवासीयां री जदोजहद रा नजारा मन ने छू जावै। आपणा पूर्वजां रो त्याग, बलिदान अर कठोर परिश्रम जैसलमेर ने दुनिया रे नक्शा माथे अमिट पहचान दीधी है। आज जद शहर बदल रियो है, आगै बध रियो है, ऐड़ी टेम में जरूरत है कि आपा अपनी कला, संगीत, स्थापत्य अर रीति-रिवाज ने सम्हाळकै राखां, अर पूर्वजां रे प्रति कृतज्ञ रेवां। कोशिश ऐड़ी होवणी चाइजे जिण में कृतज्ञता रे भाव साथे अतीत ने नमन करै अर भविष्य री दिशा में जिम्मेदारी सूं आगै बधै। Hindi Version तेज़बीर सिंह और वाल्मीकि थापर के निर्देशन में 1974 में बनी एक डॉक्यूमेंट्री "The City That Jaisal Built" जिसमें कैद है पांच दशक पहले के जैसलमेर की..... वो शांत रेत, सोने सा चमकता किला, हवेलियों की अद्वितीय नक्काशी और सादगी भरा जनजीवन…हर दृश्य आज भी मन को गहराई तक छू जाता है। पिछले 50 वर्षों में जैसलमेर ने विकास की नई ऊँचाइयों को छुआ है, मगर आज भी पुरातन परंपराएं, संगीत की राग, शहर की गलियां, शहरवासियों का जुझारू जीवन हमारी आत्मा से जुड़ा है। हमारे पूर्वजों के त्याग, बलिदान और परिश्रम ने जैसलमेर को विश्व मानचित्र पर अमिट पहचान दी है। आज जब शहर आधुनिकता की ओर अग्रसर है, आगे बढ़ रहा है, ऐसे में आवश्यकता है कि हम अपनी कला, स्थापत्य, संगीत और परंपराओं को संजोए रखें। कृतज्ञता के साथ अतीत को नमन करते हुए, विवेक के साथ भविष्य की ओर प्रस्थान ही हमारे पूर्वजों और हमारी गौरवशाली विरासत का सम्मान है।

Chaitanya Raj Singh

18,167 görüntüleme • 1 yıl önce