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‘गोरखपुर मॉडल’ की पोल खोलते-खोलते तुलना के रूप में ‘गुजरात मॉडल’ की घपलेबाज़ी की बात भी सामने आ गई। दोनों में जो बातें कॉमन हैं वो ये हैं कि दोनों जगह भाजपाई सरकार है और भाजपाई महा-भ्रष्टाचार भी। आपसी टकराहट ने तो ‘डबल इंजन’ को ‘ट्रबल इंजन’ बना दिया है।

201,053 просмотров • 25 дней назад •via X (Twitter)

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जब भाजपाई विधायक जी को नहीं मिला हिस्सा, तब ही खुला किस्सा! भ्रष्टाचार की परतों में छिपी भाजपाई चोरी तभी खुलती है जब बँटवारे को लेकर झगड़ा होता है। भाजपाइयों ने हर विभाग को, ऊपर से लेकर नीचे तक, भ्रष्टाचार के जाल में फँसा रखा है। जो ईमानदार बाबू या अधिकारी हैं वो भाजपाई मेगा-करप्शन के इस मेगा-नेटवर्क में बहुत घुटन महसूस कर रहे हैं। जो भाजपाई विधायक बड़े मासूम बनकर कह रहे हैं कि ये सिर्फ़ छोटे कर्मचारियों की मिलीभगत से संभव नहीं है, बड़े अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए, तो उन्हें अपनी बात पूरी करते हुए ये भी कहना चाहिए कि ये गोरखधंधा सिर्फ़ भाजपाई विधायक के स्तर पर संभव नहीं है, इसमें भाजपाई सांसद, मंत्री और मुख्यमंत्री के विरुध्द भी ‘काग़ज़ी सड़क’ बनाने की कार्रवाई होनी चाहिए। जिनमें ख़ुद दाग-दोष वो बन रहे सफ़ेदपोश देखते हैं ये मामला जाँच और दंडात्मक कार्रवाई से सुलझता है या शांतिपूर्ण गुप्त बँटवारे से। वैसे ये तो वो मामला है जो खुल गया, बाक़ी का क्या। साहसी पत्रकार से हमारा आग्रह है कि जब ‘6 करोड़’ की सड़क के भ्रष्टाचार का भंडाफोड़ किया है तो ‘6000 करोड़’ से ज़्यादा के गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे के महा-भ्रष्टाचार का महा-भंडाफोड़ भी करें। 6 करोड़ का घोटाला तो 6000 करोड़ से अधिक के महाघोटाले के आगे एक प्रतिशत का दसवाँ हिस्सा भी नहीं है। इस भ्रष्टाचार का लिंक तो गोरखपुर से लखनऊ होते हुए न जाने कहाँ तक रहा होगा। ये डबल इंजन नहीं, डबल करप्शन की सरकार है। ईमानदार कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!

Akhilesh Yadav

174,239 просмотров • 1 год назад

ये शासन-प्रशासन-प्रबंधन की ऊँची कुर्सियाँ पर बैठे लोगों के भ्रष्टाचार की काली धूल है जो स्टेडियम की कुर्सियाँ पर जाकर बैठ गयी है। भाजपाई ख़ुद तो कुछ नहीं बनाते, कुछ बनाकर उन्हें दे भी दो तो उसे बचा-चला नहीं पाते हैं। सरकार ये कहकर पल्ला नहीं छुड़ा सकती कि प्रबंधन किसी और के हाथ में है क्योंकि समझा जाए तो क्रिकेट के उच्चतम पदों के तार भी इन्हीं भाजपाइयों से जुड़े हैं, ये तो दरअसल डबल इंजन से बढ़कर ‘ट्रिपल इंजन’ की नाकामी का मामला है। अब ‘ट्रिपल इंजन’ का क्या मतलब हुआ ये जनता बख़ूबी समझती है। यही कारण है कि भाजपा की काली करतूतों की काई पूरे प्रदेश में फैल गयी है। घोर निंदनीय!

Akhilesh Yadav

129,048 просмотров • 8 месяцев назад

जिनको जगह तक न मिली इश्तहार में उनकी क्या अहमियत बची सरकार में जनता पूछ रही है कि उप्र भाजपा सरकार में ‘उप मुख्यमंत्री’ के दोनों पद समाप्त कर दिये गये हैं क्या? आश्चर्य की बात ये है कि विज्ञापन में कनिष्ठ मंत्रियों के नाम तो दिख रहे हैं लेकिन डिप्टी सीएम साहब लोगों के नहीं! कहीं यहाँ भी ‘हाता नहीं भाता’ या ‘प्रभुत्ववादी सोच’ तो हावी नहीं हो गयी। एक तरफ़ डबल इंजन की लड़ाई में कोई एक ऐतिहासिक कार्यक्रम में किसी को साइड में बैठाकर ऐतिहासिक अपमान कर देता है तो वो महानुभाव आज अपने विज्ञापन में उनको साइड में खड़ा दिखाकर हिसाब बराबर करते दिख रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ़ ‘मुख्य’ जी उसी विज्ञापन में अपने ‘उप’ लोगों का ज़िक्र तक नहीं करते हैं। भाजपा में डबल इंजन ही नहीं, इंजन से डबल डिब्बे भी टकरा रहे हैं। भाजपा सरकार ने अयोध्या के पीडीए सांसद जी को दीपोत्सव में न बुलाकर जो कृत्य किया है उससे संपूर्ण पीडीए समाज बेहद आहत हुआ है। उस भाजपा से क्या उम्मीद करना, जो वर्चस्ववादी सोच के अंहकार में डूबी है और अपनों की ही सगी नहीं है। अबकी बार, डिप्टी सीएम बाहर!

Akhilesh Yadav

142,038 просмотров • 10 месяцев назад

भाजपा और मुख्यमंत्री आदित्यनाथ को एक्सपोज करता हुआ ये भाजपाई इसकी बात सुनो। इसके पहले भाजपा विधायक नंद किशोर गुर्जर भी आदित्यनाथ बिष्ट और भाजपा सरकार को एक्सपोज कर चुके हैं और शंकराचार्य जी ने भी इस भाजपा सरकार की सच्चाई जनता के सामने रख दी और मुख्यमंत्री आदित्यनाथ बिष्ट की पोल खोल दी है। ये नकली हिंदू लोग भाजपा की सरकार में बैठे हैं, हिंदुत्व के नाम पर सरकार बना ली है इन्होंने और जमीन कब्जा, अवैध खनन, भ्रष्टाचार, अपराधियों को संरक्षण दे रहे हैं मुख्यमंत्री आदित्यनाथ और भाजपा के नेतागण। नोट - हम इस उपद्रवी के उपद्रव से सहमत नहीं हैं लेकिन भाजपा की पोल खोलता ये वीडियो भाजपा समर्थकों को अवश्य सुनना चाहिए।

Samajwadi Party Media Cell

29,215 просмотров • 5 месяцев назад

भाजपा में ये क्या हो रहा है? - ⁠यूपी के डिप्टी सीएम के नाम सीएम को हटाने की साज़िश में आ रहे हैं। - ⁠यूपी के भाजपाई मंत्री अपनी ही पार्टी की सरकार के छापों पर खुलकर नाराज़गी दिखा रहे हैं। - ⁠भाजपाइयों के नाम बेहद आपत्तिजनक फाइल्स में आ रहे हैं। - ⁠इनके आयोजन दुनियाभर में नाक कटा रहे हैं। - ⁠एक पूरब तो दूसरे पश्चिम जा रहे हैं। - भाजपाई एक-दूसरे की आर्थिक नाल कटवा रहे हैं। - परिषद और वाहिनी भिड़े जा रहे हैं। - तथाकथित डबल इंजन आमने-सामने टकरा रहे हैं। - ⁠भाजपाई डिब्बे पटरी छोड़कर इधर-उधर जा रहे हैं। - ⁠भाजपा के संगी-साथी अपने ही समर्थकों के विरोध से डरे जा रहे हैं। - ⁠भाजपाई समर्थक ‘भाजपा किसी की सगी नहीं है’ ये सोच-सोचकर घबरा रहे हैं। - ⁠भाजपाई मुख्यमंत्री जी दिन पर दिन सजातीयों पर और भी नरम और विजातियों पर और भी गरम होते जा रहे हैं। - ⁠भाजपाई विधायकों की बैठक पर भाजपाई मुख्यमंत्री जी धमका रहे हैं। - ⁠प्रदेश के भाजपाई अध्यक्ष नोटिस भेजकर एक विशेष समूह के विधायकों को हड़का रहे हैं। - ⁠भाजपाई पाँच बार के वर्चस्ववादी विधायक को राष्ट्रीय अध्यक्ष और सात बार के पीडीए के सांसद को राज्य तक ही सीमित कर अपनी भेदभावपूर्ण सोच दर्शा रहे हैं। - ⁠… और एक मुख्यमंत्री जी अपने उच्चतम वर्तमान अधिकारी को अपने उच्चतम भूतपूर्व अधिकारी के कहने पर प्रदेश में ही छोड़कर अकेले पर्यटन पर जा रहे हैं। कुल मिलाकर ये साफ़ है कि अब भाजपाई जा रहे हैं।

Akhilesh Yadav

132,615 просмотров • 6 месяцев назад