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जो जन हित के लिए संघर्ष करेगा, वही बढ़ेगा!
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यह सब कैमरा जीवी प्रजाति के जानवर लोग हैं कैमरा देखकर नौटंकी करते हैं अगर आपको इतना जनहित की चिंता होती तब आप सत्ता में रहने के दौरान सैफई में शराब शबाब और कबाब में नहीं डूबे रहते तब आप जनता के लिए कोई काम करते एक तरफ मुजफ्फरनगर के भीषण दंगों के बाद डेढ़ लाख लोग टेंट में ठंड से ठिठुर कर मर रहे थे जहां टेंट का पूरा कैम्प लगा था वहां कॉलरा हैजा डिप्थीरिया टाइफाइड जैसी बीमारी से सैकड़ो बच्चे मर रहे थे और आपकी पूरी सरकार पूरी कैबिनेट सैफई में मुजरा देख रही थी और जब आप 10 साल से सत्ता से खदेड़ दिए गए हैं तब आपको जनहित याद आ रहा है ?? जब सत्ता में थे तब क्या करते थे आप यह वीडियो देख लीजिए

जनहित के मुद्दे सपा लगातार उठा रही है।

अखिलेश यादव, सपा के मुखिया, अपने मुख्यमंत्री काल में उत्तर प्रदेश को अराजकता में धकेल दिया। कानून-व्यवस्था चरमरा गई, महिलाओं की सुरक्षा दांव पर लगी, मुजफ्फरनगर जैसे सांप्रदायिक दंगे हुए। भ्रष्टाचार और माफिया राज फला-फूला। विकास की जगह परिवारवाद और तुष्टिकरण की राजनीति चली। बेरोजगारी और गरीबी बढ़ी। आज विपक्ष में बैठकर वे केंद्र सरकार की हर अच्छी योजना की आलोचना करते हैं, लेकिन खुद कुछ नहीं कर पाए। उनकी राजनीति वंशवाद, जातिवाद और वोट बैंक तक सीमित है। 2017 और 2022 के चुनावों में जनता ने उन्हें खारिज कर दिया। अखिलेश जी, यूपी अब प्रगति की राह पर है, आपकी नकारात्मक और विभाजनकारी राजनीति अब नहीं चलेगी।

पहाड़ों की ऊँचाइयाँ गवाह हैं हमारे हौसलों की, हवाएँ भी आज कहानी कह रही हैं अरमानों की। उम्मीदों का सफ़र जारी है, कारवाँ बढ़ता जाएगा, समाजवादी सोच का संदेश हर दिल तक पहुँचता जाएगा। @samajwadiparty ज़िंदाबाद। @yadavakhilesh जिन्दाबाद

सपा जनहित के लिए नहीं अपने हित के लिए संघर्ष कर रही है ताकि सात में आए और मिलबांट कर देश को खाये।

Sun रहे हो न बिनोद 😂

जनहित का संघर्ष? नाले में बैठकर? अरे भाई, जब आपकी सरकार थी तब तो पूरा उत्तर प्रदेश ही नाले जैसा बना दिया था माफिया राज, भ्रष्टाचार, अराजकता और महिलाओं की सुरक्षा का सवाल। अब विपक्ष में बैठकर एक नाले में उतरकर जनता की सेवा? ये संघर्ष नहीं, सस्ता ड्रामा है। असली जनसेवा तो बिना कैमरे, बिना नाटक के होती है सड़क बनाकर, नाले साफ़ करके, विकास करके। जनता अब ये सब समझ चुकी है। जो ड्रामा करेगा, वो सत्ता में नहीं बढ़ेगा!

इटावा की गलियों एवं क्षेत्र में कुछ नेताओं की गाड़ियाँ तो खूब दिखती हैं लेकिन जनता के बीच उनका चेहरा कम ही दिखाई देता है अगर गाड़ी से उतरकर दो मिनट लोगों का हाल पूछ लें तो शायद जनता को भी लगे कि उन्होंने सिर्फ वोट नहीं प्रतिनिधि चुना है!

ओर जनता की जिम्मेदारी के पढ़ पर बैठके खुद की सोचेगा और अपने फायदे के फैसला लेगा उसे जनता वापस उसी हालात में लाके फेंकेगी जिस हालातों से वो आया था चाहे कितना भी बड़ा लीडर क्यों न हो।

Jai Samajwad

अखिलेश यादव जी, चुनाव आते ही सपा के टिकटार्थियों का ऐसे नाटक जनता बखूबी समझती है इन नेताजी को न तो खुद सफाई करनी है और न ही प्रशासन को करने देना है सिर्फ कैमरे के सामने 'संघर्ष' का ढोंग रचना है। अगर जनहित की इतनी ही चिंता थी, तो समर्थकों के साथ खुद गांधीगीरी दिखाते हुए सफाई में हाथ बंटाते, न कि सरकारी काम में टांग अड़ाते। अखिलेश यादव, आप ऐसी राजनीति को बढ़ावा देना बंद कीजिए! इसे "जनहित का संघर्ष" नहीं, बल्कि "टिकट का स्टंट" कहते हैं। आपके ये नेता न तो खुद कोई रचनात्मक काम कर रहे हैं और न ही व्यवस्था को काम करने दे रहे हैं। संघर्ष और चुनावी ड्रामे में फर्क होता है। जो नेता जमीन पर काम करने के बजाय प्रशासन के काम में टांग अड़ाए, वो जनता का भला क्या करेगा? अच्छा होता अगर ये नेताजी नारेबाजी छोड़कर खुद सफाई अभियान शुरू करते। अखिलेश यादव, आप भी इस तरह के पब्लिसिटी स्टंट को अपनी वॉल पर जगह देकर आप सिर्फ अराजकता को बढ़ावा दे रहे हैं।

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जनहित के नाम पर केवल फोटो-ऑप और Stunt करने से शहर की व्यवस्थाएं नहीं सुधरतीं सड़क से मलबा हटाने के लिए प्रशासनिक प्रक्रियाएं और काम करने की नीयत होनी चाहिए, न कि कैमरे के सामने नाले में उतरकर ड्रामा जब प्रशासनिक काम अपनी गति से चल रहा हो तो वहां पहुंचकर सस्ती लोकप्रियता बटोरने के लिए तमाशा शुरू अगर इतनी ही चिंता जनता की होती तो अपने शासनकाल में उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढांचे को भ्रष्टाचार और माफियाराज के गर्त में न धकेला होता भाजपा सरकार धरातल पर बिना किसी भेदभाव और बिना किसी ड्रामे के विकास कार्य और साफ सफाई सुनिश्चित कर रही है जनता अब इस तरह की राजनीतिक नौटंकी और संघर्ष के नाम पर किए जा रहे ढोंग को अच्छी तरह समझती है।

@pappuKhan160295

बहुत ही सुंदर , जमीनी नेता

जो GST चोरी करेगा वो जेल जाएगा

अखिलेश यादव जी, चुनाव नज़दीक आते ही आपकी पार्टी के कई टिकटार्थियों का यह संघर्ष अचानक कैमरों के सामने क्यों शुरू हो जाता है? जनता अब ऐसे चुनावी नाटकों को अच्छी तरह समझती है। अगर वास्तव में जनहित की चिंता होती, तो ये नेता सफाईकर्मियों और प्रशासन के साथ मिलकर सफाई अभियान में हाथ बंटाते, न कि सरकारी काम में बाधा डालकर कैमरों के सामने राजनीतिक प्रदर्शन करते। विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन जनहित के नाम पर सिर्फ सुर्खियां बटोरना राजनीति नहीं, अवसरवाद है। इसे "जनहित का संघर्ष" नहीं, बल्कि "टिकट का स्टंट" कहना अधिक उचित होगा। जो नेता खुद कोई रचनात्मक काम न करे और प्रशासन को भी काम न करने दे, वह जनता की सेवा का दावा किस आधार पर करता है? अखिलेश यादव जी, ऐसे पब्लिसिटी स्टंट को अपनी वॉल पर प्रचारित करना आपकी राजनीति की प्राथमिकताओं को भी उजागर करता है। जनता अब नारेबाजी नहीं, ज़मीन पर काम करने वालों को पहचानती है।

😱😱

Ye kun sa sanghars hai?

शानदार काम, अखिलेश जी आप भी कभी जनता के बीच आएं.. लखनऊ , इटावा छोड़कर बाकी यूपी में...

चंदे पर 980फोन करने में जब नाम आने लगा तो, बात को घूमा ने की कोशिश करने लगा! लेकिन यह योगी जी हैं, चंदा चोरों के मुख्या तक जांच जारी रखेंगे! हिन्दूओं की बंगाल में एकजुटता देखकर भाजपा विरोधीयों की नींद उड़ती देखकर मजा आ रहा है!

जहां पहले मुल्लाहीत था •• जनहित के कारण ही आज उत्तरप्रदेश में प्रयागराज से मेरठ तक गंगा एक्सप्रेसवे बन सका है जहां पहले सपा नीत कांग्रेस शासनकाल में पूर्वांचल से रोड के रास्ते मेरठ पहुँचना अब तक बहुत मुश्किल काम था। 12 ज़िलों, 518 गाँवों से होता हुआ 594 किलोमीटर का अद्भुत सफ़र इन सभी गाँवों और ज़िलों की अर्थव्यवस्था पर बहुत अच्छा प्रभाव डालेगा एक्सप्रेसवे पर शाहजहांपुर में साढ़े तीन किलोमीटर की एयरस्ट्रिप भी है 🙏

बहुत अच्छा कार्य कर रहे है लगे रहिए ,फल की चिता मत करिए।

जय समाजवाद

नहीं चाहिए भाजपा 🙏

अखिलेश यादव जी, चुनाव आते ही सपा के टिकटार्थियों का ऐसे नाटक जनता बखूबी समझती है। इन नेताजी को न तो खुद सफाई करनी है और न ही प्रशासन को करने देना है सिर्फ कैमरे के सामने 'संघर्ष' का ढोंग रचना है। अगर जनहित की इतनी ही चिंता थी, तो समर्थकों के साथ खुद गांधीगीरी दिखाते हुए सफाई में हाथ बंटाते, न कि सरकारी काम में टांग अड़ाते। अखिलेश यादव, आप ऐसी राजनीति को बढ़ावा देना बंद कीजिए! इसे "जनहित का संघर्ष" नहीं, बल्कि "टिकट का स्टंट" कहते हैं। आपके ये नेता न तो खुद कोई रचनात्मक काम कर रहे हैं और न ही व्यवस्था को काम करने दे रहे हैं। संघर्ष और चुनावी ड्रामे में फर्क होता है। जो नेता जमीन पर काम करने के बजाय प्रशासन के काम में टांग अड़ाए, वो जनता का भला क्या करेगा? अच्छा होता अगर ये नेताजी नारेबाजी छोड़कर खुद सफाई अभियान शुरू करते। अखिलेश यादव, आप भी इस तरह के पब्लिसिटी स्टंट को अपनी वॉल पर जगह देकर आप सिर्फ अराजकता को बढ़ावा दे रहे हैं।

Isko insaf milna chahiye

सपा नेता पंकज यादव की शानदार पहल 🙏 समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता पंकज यादव अपने क्षेत्र में लंबे समय से जाम पड़े नाले की सफाई की मांग कर रहे थे। आरोप है कि कई बार शिकायत और मांग के बावजूद नगर निकाय या प्रशासन ने नाले की सफाई नहीं कराई। इसके विरोध में पंकज यादव स्वयं नाले में उतर गए और सफाई शुरू कर दी। कुछ देर बाद पुलिस मौके पर पहुंची और उन्हें नाले से बाहर निकाला।

जो मुस्लिमप्रस्ति की बात करेगा वहीं सपा मे राज करेगा मुस्लिमों की आड़ मे हिन्दू जाए भाड़ मे

जनता को भ्रमित करना हो झूठ बोलना हो और जनता को सामने देखते ही फोटोग्राफी एवं वीडियो की नॉरेटिव सेट करना हो तो सपा के लोग खासकर अखिलेश के सजाती इस मामले में नौटंकी करने में स्पेशलिस्ट है, जो अपने घर की साफ सफाई नहीं करते आज टीआरपी प्राप्त करने के लिए झूठी राजनीति दिखाने के लिए जनता को भ्रमित करने के लिए सिर्फ कैमरा बाजी कर रहे हैं, उत्तर प्रदेश ही नहीं पूरे भारत में जबरदस्त बारिश हो रही है मानसून है, कहीं कोई समस्या है तो समस्या के समाधान के लिए कार्रवाई भी हो रही है साथ-साथ विकास कार्य भी हो रहा है, तो सपा के युवा नेता टिकट पाने के लालच में ऐसे ही दिखा करके जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं, उत्तर प्रदेश में कौन विकास कर रहा है और कौन जनता को भ्रमित कर विकास कार्य को अवरुद्ध कर रहा है जनता जनार्दन अच्छी तरीके से जान रही है,

वाह वाह यादमुल्ले

जो हमेशा अब्दुल के वोट के लिए संघर्ष करेगा, सदैव वही घटेगा.....😂😂😂

