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जो नेहरू नहीं कर पाए... वो आज के कांग्रेसी क्या खाक कर लेंगे? RSS के खिलाफ तीन नेताओं ने मोर्चा खोल दिया है... प्रियांक खड़गे, वीडी सतीशन और गहलोत जी तीनों आरएसएस के खिलाफ लगे पड़े हैं... यही दुस्साहस नेहरू ने भी किया था... वो अपने पत्रों में संघ...

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"बंगाल का कसाई, नेहरू का भाई!" क्या आपको पता है कि आजादी के बाद नेहरू ने बंगाल के कसाई सुहरावर्दी का 50 लाख का इनकम टैक्स माफ कर दिया। कैसे हिंदुओं के "भक्षक" के "रक्षक" बने थे नेहरू? आज कोलकाता के सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर गोपाल मुखर्जी मार्ग कर दिया गया है। ये तो सब जानते हैं कि 16 अगस्त 1946 के डायरेक्ट एक्शन डे में सुहरावर्दी ने कैसे हिंदुओं का नरसंहार करवाया था... लेकिन भारत की आजादीके बाद सुहरावर्दी कहां गया और उसका क्या हुआ... ये कोई नहीं जानता... तो सुनिए... आजादी के बाद सुहरावर्दी पाकिस्तान नहीं गया, भारत में ही रहा... उसने गांधी और नेहरू का दामन थाम लिया... वो बदला नहीं था, बल्कि वो कोलकाता में अपने बिजनेस को बचाना चाहता था... आखिरकार नेहरू ने दिसंबर 1948 में सुहरावर्दी का 50 लाख रुपये का टैक्स माफ करवा दिया... बस फिर क्या था... मार्च 1949 पाकिस्तान चला गया और 1956 में जाकर पाकिस्तान का प्रधानमंत्री भी बन गया...

Prakhar Shrivastava

16,754 просмотров • 2 месяцев назад

कल JNU में नेहरू जी की पुण्य तिथि पर राजीव गांधी स्टडी सर्किल द्वारा आयोजित कार्यक्रम में हिस्सेदारी का वीडियो। हमारी पीढ़ी आभारी है प्रधानमंत्री मोदी और उनके संगठन की, जिन्होंने उस जवाहरलाल नेहरू से हमें फिर से मिलवा दिया, जिन्होंने वाक़ई देश बना कर दिखाया था। वो नेहरू जिनके लिए शिक्षा मात्र रोज़गार का नहीं, ज़ंजीरें तोड़ने का माध्यम थी। वो नेहरू जो वैज्ञानिक सोच की बात इसलिए करते थे कि भारत का युवा critical सोच वाला और सोचने समझने वाला बने। लेकिन साथ साथ भारत की कला, फिलोसफी को भी पुनर्स्थापित कर गए। वो नेहरू, जो अभिव्यक्ति की आज़ादी केवल इसलिए नहीं मानते थे कि सरकारों का विरोध करना उसका एकमात्र उद्देश्य हो। वो विचारों को इंसान की निजी सम्पत्ति मानते थे, और उस पर हर इंसान का निजी अधिकार मानते थे। वो नेहरू, जो भारत के विभाजन में करीब बीस लाख लोगों के मारे जाने के बावजूद भारत को धर्म निरपेक्ष बनाने के लिए बेख़ौफ़ संकल्प लेते हैं और भारत के लोगों का अपार समर्थन भी प्राप्त कर लेते हैं। नेहरू स्वप्न दृष्टा थे, नैतिक थे, फिलोसफर थे, प्लानर थे, लेकिन साथ साथ वो दिलेर थे, बहुत दिलेर थे। Dr.Chayanika Uniyal

Gurdeep Singh Sappal

10,198 просмотров • 3 месяцев назад

यह वीडियो देखने से लगता है कि, देश में कितना खतरनाक तंत्र काम कर रहा है। सरकार नहीं बदली होती तो संघ प्रमुख से लेकर पूरे संघ को आतंकवादी बना दिया जाता। आज भी यह बात मुझे नहीं समझ आती कि, गांधी जी की हत्या से संघ पर प्रतिबंध लगा और हमेशा के लिए संघ को गलत तरीके से चित्रित किया जाता रहा तो गांधी जी की हत्या से लाभ किसको हुआ। यह कुछ प्रश्न ऐसे हैं, जिनका उत्तर सीधे तौर पर नहीं मिलता, लेकिन इतना अवश्य दिखता है कि, हमारे देश पर अप्रत्यक्ष रूप से किसका शासन चल रहा है और इसके लिए, “लोकतंत्र में कांग्रेस के अलावा सत्ता का विकल्प नहीं है”, का सिद्धांत गढ़ा गया। इसे पूरा सुनिए और सोचिए

हर्ष वर्धन त्रिपाठी 🇮🇳Harsh Vardhan Tripathi

27,656 просмотров • 1 год назад

राजस्थान में राज RSS वाले कर रहे, ये खाली मुखौटे हैं जोधपुर में आज मीडिया से बातचीत की: अशोक गहलोत का जवाब: देखिए राजनीति में जो है, झूठे आरोप नहीं लगाए जाते हैं। अगर आपके पास तथ्य है, तो उस पर बात करो। किरोड़ी मीणा जी जब सरकार में नहीं थे, तब भी वो लगातार आरोप लगाते थे। उनकी जो प्रकृति में है कि वो, आंदोलन करते रहते हैं लगातार, आप देखते हो उनको 15-20 साल से। तो एक अलग किस्म का प्राणी हैं वो। वो पहले भी आरोप लगाते थे अब भी लगा रहे हैं, अनावश्यक है। पार्टी के जो अध्यक्ष होते हैं उनकी एक अलग प्रतिष्ठा होती है। उस पे आप बार-बार चोट कर रहे हो। आरोप लगा रहे हो बिना तथ्यों के। तो आप बताइए कि पार्टी में रिएक्शन होगा? हमारी पार्टी में रिएक्शन है। डोटासरा जी को खुद को लगता है भाई ये क्या आरोप लगा रहा है वो भी बिना तथ्यों के। हम सब को लगता है। ये किरोड़ी मीणा जी को खुद को सोचना चाहिए, वो क्या किस प्रकार की उनकी अप्रोच है काम करने की है। छापे डाल रहे हैं और छापे के साथ जो जाते हैं लोग उनके, वसूली करते हैं वो। ये तो प्रूव हो गया है। जब प्रूव हो गया है तो कहते हैं कि एसीबी भी दबाव में काम कर रही है। तो भाई एसीबी तो दबाव में जब से डीजी साहब आए हैं, पहले मैंने कहा ये आदमी तो भला है डीजी। वो पूरी तरह सीएमओ के और सीएम के दबाव में है ये। और इनके जो नीचे अधिकारी है, वो भी इनकी बात नहीं मानते हैं। वो इनको उल्टा दबाते हैं। तो मुझे लगता है कि एसीबी का जो डीजी है, वो खुद परेशान होगा, मेरे ख्याल से जहां तक मैं समझता हूँ या जहाँ तक मेरे पास वहां से रिपोर्ट आती है। वहाँ के जो काम करने वाले अधिकारी कहते हैं ना कि भाई क्या हो रहा है हमारे यहाँ? स्थिति एसीबी की बहुत भयानक खराब है। दबाव में काम हो रहे हैं। मुख्यमंत्री जी को ऑबलाइज करने के लिए फैसले हो रहे हैं। आईओ कह रहा भाई ये मुल्जिम नहीं बनता हमारा। और ऊपर से कहते हैं डीजी साहब और जो दबाव आता है उनके ऊपर, नहीं आप इनको अरेस्ट करो। ऐसा मैंने आज तक कभी देखा नहीं। तीन-तीन बार हम भी मुख्यमंत्री रहे हैं। एसीबी में कोई पंचायत नहीं करनी चाहिए किसी को भी। यहाँ पंचायतें नहीं हो रही हैं। आईओ कह रहा भाई ये अरेस्ट नहीं हो सकता है क्योंकि इसमें कोई केस नहीं बनता। आप इसको अरेस्ट कीजिए। अरेस्ट हुए भी हैं, जिनमें महेश जोशी भी हैं। आईओ ने मना किया। वो ऑलरेडी द्वारा वैसे ही केस में अरेस्ट हो चुके थे। यहाँ वापस अरेस्ट कर लिया, क्या मजाक बना रखी है? क्या मुख्यमंत्री को दिखता नहीं है कि ये क्या हो रहा है? उनका खुद का नाम आता है कि दबाव आता है। शायद आरएसएस वालों का आता होगा। आरएसएस के दबाव होने के बाद में मुख्यमंत्री हथियार डाल देते हैं। राज आरएसएस कर रहा है ये तो मुखौटे हैं खाली। मुझे लगता है कि राजस्थान के अंदर आजकल जो ये लोग राज करते हैं ये मुखौटे बने हुए हैं। राज आरएसएस वाले कर रहे हैं। ट्रांसफर, पोस्टिंग, करप्शन सब वहीं से डायरेक्शन आते हैं। हालात बड़े गंभीर हैं राजस्थान के। ऐसी इनकी स्थिति बनेगी इस बार राजस्थान की, जनता जो है वो जागरूक है। ये कुछ भी कर लें, ये मुख्यमंत्री बदल देंगे ना, तब भी कुछ नहीं होने वाला है, अगली बार सरकार बदल के रहेगी। थैंक यू।

Ashok Gehlot

56,795 просмотров • 2 месяцев назад

नेहरू जी, साल 1960 में जिस टेक्नोलॉजिकल सोसाइटी और सिविलाइजेशन और उससे उत्पन्न होने वाली आध्यात्मिक शून्यता (Spiritual Emptiness) की बात कर रहे थे, वह आज हमारे सामने कई गुना अधिक विकराल रूप में मौजूद है। • AI, मनुष्य की क्रिएटिविटी की जगह लेने के दावे कर रही है। आज Deepfake के तमाशे हम चारों ओर देख रहे हैं • गांधी जी की जो आशंका थी कि यंत्र मनुष्य को मुक्त करने के स्थान पर अपना गुलाम भी बना सकते हैं, वहीं आज हमारे सामने सच्चाई के रूप में सामने आ रही है • बहुत से लोगों को यह गलतफहमी है और दुर्भाग्य से इस गलतफहमी का खूब प्रचार भी किया गया कि नेहरू मटेरियलिस्ट थे, उनका आध्यात्म और धार्मिकता से कोई लेना-देना नहीं था • असलियत ये है कि नेहरू जी भारतीय परंपरा की इस विज्डम को जानते थे कि स्पिरिचुअलिटी और मटेरियल रियलिटी, इनके बीच में विरोध का नहीं, बल्कि एक तरह का द्वन्द्वात्मक संबंध है महात्मा गांधी जी से सीखते हुए और अपनी खुद की सोच के चलते जवाहरलाल नेहरू जी ने इस बात को समझा कि आध्यात्मिक शून्यता (Spiritual Emptiness) को दूर करने के लिए जरूरी है कि समाज में एक बुनियादी 'न्याय और समता' संभव करने वाली व्यवस्था हो। : The Nehru Centre के उद्घाटन कार्यक्रम में Purushottam Agrawal जी 📍 नई दिल्ली

Congress

17,289 просмотров • 8 месяцев назад

कांग्रेस का विदेशी कनेक्शन कुछ नया नहीं है। यह बहुत पुराना और बहुआयामी है । भारत का कौन सा बड़ा नेता है, जो कभी ऐसा नहीं होता कि मौसम बदले और वह हर एक ऋतु में एक बार विदेश न चला जाए। हर पार्लियामेंट सत्र के बाद विदेश चले जाते हैं। क्या करने जाते हैं, यह भी बताना चाहिए। बहुत सारी चीजें रहस्यमयी हैं। अभी कुछ दिन पहले मलेशिया गए थे और लौटकर आए तो कहा कि हाइड्रोजन बम फोड़ेंगे। फिर कोलंबिया में लेक्चर देने जाते हैं। भारत में आपको कोई यूनिवर्सिटी क्यों नहीं बुलाती? बीजेपी शासित राज्य छोड़िए, कांग्रेस शासित राज्य के विश्वविद्यालय भी क्यों नहीं बुलाते? क्या आपने कभी सुना है कि जब हम विपक्ष में थे तब भारत के विपक्ष के किसी नेता का बयान विदेश ने भारत के खिलाफ प्रयोग किया हो? पर अब पाकिस्तान ने कांग्रेस और राहुल गांधी का बयान UN में भारत के खिलाफ इस्तेमाल किया है। हाफिज सईद का वीडियो है कि ये नरेंद्र मोदी और बीजेपी वाले इतना खिलाफ बोलते हैं, लेकिन कांग्रेस पार्टी ने तो मुतालबा कर दिया है कि पाकिस्तान पर खामखा इल्ज़ाम लगा रहे हैं। कांग्रेस के बारे में KGB के एक रिटायर्ड ऑफिसर ने अपनी किताब मित्रोखिन आर्काइव में यहां तक आरोप लगाया था कि कांग्रेस पार्टी को KGB से पैसा आता था। 1977 में कांग्रेस की हार के बाद क्रेमलिन में गंभीर बैठक हुई।

Dr. Sudhanshu Trivedi

17,496 просмотров • 9 месяцев назад

आज अखबार में मुख्यमंत्री जी का आर्टिकल प्रकाशित होने और प्रदेश के हालातों पर : दूसरा जो है, आज आर्टिकल आया है मुख्यमंत्री महोदय का, आर्टिकल आया अच्छी बात है। पांच साल बनाम डेढ़ साल, कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं पूरे प्रदेशवासियों और प्रदेश के गांव गांव में तो ऐसी सरकार का निकम्मापन नाकारापन मैने कभी नहीं सुना किसी सरकार का। सरकारें बीजेपी की भी रही हैं सरकारें राजस्थान में कांग्रेस की भी बनी हैं बीजेपी की भी रही हैं इतना निकम्मा नकारापन मैंने कही देखा नहीं,और इतने कम समय के अंदर, आप बताइए तीन साल बाद में सरकार के बारे में लोग प्रतिक्रिया देते हैं काम नहीं हो रहे हमारे, करप्शन बहुत है सुनवाई नहीं हो रही है किस के पास जाएं सब बातें बोलते हैं लोग तीन साल के बाद में। यही सरकार ऐसी है 6 महीने में ही लोगों को समझ पड़ गया पूत के पांव पालने में होते हैं न वो कहावत चरितार्थ हुई है तो राजस्थान में हुई है। अरे ये क्या हो गया हम ने ये क्या कर दिया, चुनाव तो, सरकार तो पहले वाली चली गई कांग्रेस की पर नई सरकार में ये क्या हो रहा है जिसके पास जाएं, वो सरकार का मुख्या अगर दावा करे तो मैं ये बार बार कहता हूं ये उनका बहुत बड़ा साहस है हिम्मत है कि वो ये मुकाबला कर रहे हैं। और आज ही जिस अखबार में आर्टिकल लिखा गया कम से कम सीएमओ को चाहिए था डीआईपीआर को चाहिए था मैनेज करते आज तो उनके खिलाफ न्यूज नहीं आती। आज भास्कर के अंदर आर्टिकल भी आया है और मुख्यमंत्री के दावे को खोखला साबित कर रहे हैं वो ऐसी ऐसी घटनाएं आज आई हैं उसके अंदर कानून व्यवस्था की हो या अन्य घटनाएं हों तो आज तो मैनेज करना चाहिए था कम से कम। मैनेजमेंट भी नहीं किया आर्टिकल की खुद की धज्जियां उड़ गईं उसके अंदर ही। पत्रिका में क्या आता है अलग बात है और अखबारों में क्या आता है वो तो लंबी चौड़ी बाते हैं लगातार आ रही हैं।

Ashok Gehlot

13,496 просмотров • 1 год назад

इस्लाम के राजनीतिक तेवर को नेहरू और गांधी कभी नहीं समझ पाए. जिन लोगों को खुश करने के लिए नेहरू ने 1937 में वंदे मातरम को बुरे तरीके से काट दिया, वे लोग कटा हुआ वंदे मातरम भी कहां गा रहे हैं? नेहरू को लोगों के धार्मिक-राजनीतिक व्यवहार के बारे में इतनी कम जानकारी क्यों थी? वे इतने भोले और अबोध क्यों थे? नेहरू ने सोचा कि मूल गीत से शक्ति की उपासना, प्राचीन भारत का गौरव, मंदिर और दुर्गा का जिक्र काट देंगे तो मुसलमान वंदे मातरम गाने लगेंगे और मुस्लिम लीग पाकिस्तान की मांग छोड़ देगी. ऐसा नहीं होता है भाई. उन्होंने न सिर्फ पाकिस्तान लिया, बल्कि भारत में भी अपना अलग पर्सनल लॉ, वक्फ कानून, चार शादी करने की कानूनी आजादी, कम उम्र की लड़कियों से शादी करने की छूट और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के लिए सरकारी बजट लिया. मदरसों की सरकारी फंडिंग ली. पहली कैबिनेट में शिक्षा मंत्रालय लिया. वे आज भारत में सबसे तेजी से बढ़ते धार्मिक समूह बन गए हैं. इतिहास ने नेहरू को गलत साबित किया. और जिस साल नेहरू मुस्लिम तुष्टिकरण कर रहे थे, उससे दो साल पहले कांग्रेस ने बाबा साहब के लिए कोई कंसेसन नहीं दिया और धमकी देकर पूना पैक्ट साइन करवाया. आखिर बाबा साहब के लोग ही भारत में टिके. जबकि जिनका तुष्टिकरण हुआ, वे यानी जिन्ना और लियाकत यहां से चले गए. 1946 के चुनाव में यूपी, बिहार, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, बंगाल हर जगह के मुसलमानों ने मुस्लिम लीग के कैंडिडेट को जिताया, जबकि वे जानते थे कि उनको पाकिस्तान जाना नहीं है. पाकिस्तान के मुसलमानों ने पाकिस्तान नहीं बनाया. ये काम हमारे यहां रहे गए लोगों ने किया था. मुस्लिम लीग से जीते 28 लोग तो भारत की संविधान सभा के मेंबर भी बने. वंदे मातरम पूरा ही गाया जाना चाहिए.

Dilip Mandal

37,380 просмотров • 9 месяцев назад

नेहरू की विदेश नीति का नायाब नमूना थीं उनकी “अनपढ़” बहन विजयलक्ष्मी पंडित विदेश नीति से नेहरू-गांधी परिवार का पुराना नाता है... नेहरू से लेकर राहुल-प्रियंका तक... सब खुद को विदेश नीति का एक्सपर्ट समझते हैं... कई बार तो ऐसा लगता है कि नेहरू-गांधी परिवार के बच्चे स्कूल में एडमिशन नहीं लेते… बल्कि वो सीधे यूनाइटेड नेशन्स में पढ़ने चले जाते हैं... जहां वो A फॉर America… B फॉर Britain और C फॉर China सीखते हैं... नेहरू की ‘अनपढ़’ बहन विजय लक्ष्मी पंडित भी ऐसी ही हाईली टैलेंटेड थीं... जिसे नेहरू ने सोवियत संघ, अमेरिका और ब्रिटेन में भारत का राजदूत / हाई कमिश्नर बनाया... वो “अनपढ़” बहन जिसने कॉलेज तो छोड़िये, स्कूल का भी मुंह नहीं देखा था, फिर भी उसे यूपी में मंत्री बनाया, महाराष्ट्र का राज्यपाल बनाया और सांसद भी बनाया !!! इस “अनपढ़” बहन को 8 करोड़ लाशों पर खड़ा चीन का तानाशाह माओ-त्से-तुंग अहिंसा के पुजारी गांधी की तरह लगता था!!! वो “अनपढ़” बहन जिसने भारत को सुरक्षा परिषद की स्थायी सीट मिलने में अडंगा डाला !!! ये कहानी ज़रा लंबी है, लेकिन सुनना बहुत ज़रूरी है। वो इसलिए क्योंकि जब इस देश में अनपढ़ नेताओं, नेताओं की फर्जी डिग्री और न जाने क्या-क्या चर्चा चल रही है तो आपको पता होना चाहिए कि परिवारवाद का वो काला सच जिसमें एक अनपढ़ इंसान सारी ऊंचाइयां पा लेता है, क्योंकि उसका जन्म आनंद भवन में हुआ था। जवाहरलाल नेहरू की छोटी बहन विजयलक्ष्मी पंडित बचपन में कभी स्कूल नहीं गईं... घर में ही इन्हें एक अंग्रेज़ आया (केयर टेकर) जेन हूपर ने इन्हें अक्षर ज्ञान और थोड़ी बहुत शिक्षा दे दी। आप कहेंगे कि इसमें बुराई क्या है... ठीक बात है पहले कई लोग घर में ही शुरुआती शिक्षा लेते थे, लेकिन वो उसके बाद कॉलेज और यूनिवर्सिटी भी जाते थे... लेकिन विजयलक्ष्मी ने कभी कॉलेज और यूनिवर्सिटी का मुंह नहीं देखा... वैसे भी जब आप नेहरू खानदान के चश्मों चिराग हो तो फिर किसी डिग्री की क्या ज़रूरत है? अब इनका करियर ग्राफ और इनके कारनामे देखिये – सोवियत संघ (वर्तमान रूस) में भारत की प्रथम राजदूत 1947 में जब भारत आज़ाद हुआ तो नेहरू ने अपनी बहन विजय लक्ष्मी पंडित को भारत का राजदूत बना कर भेज दिया। ये 1949 तक इस पद पर रहीं और बेहद नाकाम साबित हुईं। तानाशाह स्टालिन पूरे दो साल तक नेहरू की इस अनपढ़ बहन से नहीं मिला। भारत और सोवियत संघ के संबंधों का ये सबसे ठंडा दौर था। मास्को में रहने के दौरान इनकी वजह से भारत को काफी बदनामी झेलनी पड़ी। आरोप है कि इन्होंने अपने सरकारी घर के लिये मास्को के बजाय स्वीडन के स्टॉकहोम से महंगा फर्नीचर खरीदा। जिस पर सोवियत संघ सरकार ने आपत्ति जताई। गांधी ने भी विजय लक्ष्मी पंडित की इस फिजूलखर्ची पर आलोचना की थी, इस पर नेहरू को सफाई देनी पड़ी। अमेरिका में भारत की राजदूत जब विजय लक्ष्मी पंडित की दाल स्टालिन के सामने नहीं गली तो इन्हें इनके जवाहर भैया ने 1949 में वाशिंगटन में भारत का राजदूत बना कर भेज दिया। यहां भी इन्होंने बंटाधार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अमेरिका और ब्रिटेन चाहते थे कि संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में चीन की बजाय भारत को स्थायी सीट दी जाये... इस प्रस्ताव की जानकारी जब विजयलक्ष्मी को मिली तो उन्होंने अपने भाई प्रधानमंत्री नेहरु को 24 अगस्त 1949 को एक पत्र और बताया कि – अमेरिकी विदेश मंत्रालय में भारत को सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट मिलने की चर्चा चल रही और भारत के पक्ष में माहौल बनाया जा रहा है। लेकिन मैंने सलाह दी है कि इस मामले में धीमे चलें क्योंकि भारत इसे पसंद नहीं करेगा। जवाब में पंडित नेहरू ने अपनी बहन को लिखा कि - हम चीन के बदले ये जगह नहीं ले सकते। ये बुरी बात होगी। ये चीन का अपमान होगा। हमारे चीन से संबंध बिगड़ जाएंगे। हम यही प्रयास करेंगे कि चीन को स्थायी सदस्यता मिले। ... मतलब भारत के हाथ में इतना बड़ा मौका आ रहा था और भाई-बहन की इस जोड़ी ने इसे ठुकरा दिया। (नोट – किसी को ये शक है कि ऐसा नहीं हुआ था, तो भैया-बहिन के ये सारे पत्र "नेहरू म्यूज़ियम एंड लाइब्रेरी"... यानी "प्राइम मिनिस्टर म्यूज़ियम एंड लाइब्रेरी" में Vijaya Lakshmi Pandit Papers, 1st Installment - Pandit 1, File No. 59 में पड़े हुए हैं। तीन मूर्ति भवन में जाकर चेक कर लेना।) 'अनपढ़' बहन को फिर चीन भेजा नेहरू ने चीन के तानाशाह माओ त्से तुंग और चाऊ एन लाइ का मन टटोलने के लिए 1952 में अपनी लाड़ली बहन विजयलक्ष्मी पंडित को बीजिंग भेजा। इस यात्रा में क्या हुआ इसका संपूर्ण वर्णन लिबरू गैंग के प्रिय वामपंथी इतिहासकार कॉमरेड रामचंद्र गुहा ने अपनी पुस्तक "भारत – गांधी के बाद" के पेज नंबर 212 पर लिखते हैं – विजय लक्ष्मी पंडित ने अपने भाई नेहरू को पत्र में लिखा कि - "माओ बहुत कम बोलते हैं लेकिन उनमें गज़ब का सेंस ऑफ ह्यूमर है। जब वो जनता के बीच होते हैं तो वो गांधी की तरह लगते हैं। महात्मा गांधी की तरह जनता न केवल उनकी प्रशंसा करती है बल्कि उनकी पूजा करती है। उन्हे देखना बड़ा ही भावनात्मक पल है।" वाह... 8 करोड़ इंसानी लाशों पर खड़ा चीन का ये शैतान तानाशाह माओ-त्से-तुंग इस अनपढ़ बहन को गांधी की तरह दिख रहा था। अब देखिए नेहरू की ये लाडली बहन चीन के एक और नेता चाउ एन लाई के लिए क्या लिखती है... विजय लक्ष्मी का ये पत्र भी कॉमरेड रामचंद्र गुहा ने अपनी पुस्तक में छापा है, अनपढ़ बहन लिखती है - “चाउ एन लाई लोगों को हंसने पर मजबूर कर देते हैं और खुद भी अक्सर हंसते रहते हैं। हम लोगों ने बेहतरीन शराब पी और स्वादिष्ट खाना खाया। वो आगे लिखती हैं कि मास्को की तरह यहां लोगों पर अत्याचार नहीं किया जा रहा और चीन में हर आदमी खुश लगता है।” चीन में आठ करोड़ लोग मार दिये गये और इस अनपढ़ महिला को सब खुश दिख रहे थे। नेहरू ने विजयलक्ष्मी पंडित की सलाह पर अमल किया और चीन से दोस्ती की राह पर आगे चल निकले और बाद में इसी माओ और चाऊ की जोड़ ने 1962 में भारत की पीठ पर खंजर भोंक दिया। तो ये था परिवारवाद का दंश... ये था अनपढ़ों के हाथ में शक्ति देने का पाप !!! #Nehru #Congress #Rahul_Gandhi #Italy

Prakhar Shrivastava

38,564 просмотров • 15 дней назад