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Prakhar Shrivastava

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पत्रकार Aman Chopra को झारखंड पुलिस ने नाश्ते की टेबल से उठाकर डिटेन कर लिया है… अमन की कवरेज से घबरा गई हेमंत सोरेन की सरकार… आप लोगो को अब समझ आ गया होगा की मीडिया की आज़ादी में भारत 157 वे नम्बर पर क्यों है?

पत्रकार Aman Chopra को झारखंड पुलिस ने नाश्ते की टेबल से उठाकर डिटेन कर लिया है… अमन की कवरेज से घबरा गई हेमंत सोरेन की सरकार… आप लोगो को अब समझ आ गया होगा की मीडिया की आज़ादी में भारत 157 वे नम्बर पर क्यों है?

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बॉलीवुड के लीजेंड सिंगर अभिजीत अपनी यात्रा के दौरान ‘हे राम’ पुस्तक पढ़ रहे हैं... उम्मीद करता हूं सर आपको ये पुस्तक अवश्य पसंद आएगी... और हां, पुस्तक पढ़ने के बाद अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दीजिएगा... एक बार फिर आपको धन्यवाद #AbhijeetBhattacharya #Hey_Ram Jansabha जनसभा

बॉलीवुड के लीजेंड सिंगर अभिजीत अपनी यात्रा के दौरान ‘हे राम’ पुस्तक पढ़ रहे हैं... उम्मीद करता हूं सर आपको ये पुस्तक अवश्य पसंद आएगी... और हां, पुस्तक पढ़ने के बाद अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दीजिएगा... एक बार फिर आपको धन्यवाद #AbhijeetBhattacharya #Hey_Ram Jansabha जनसभा

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नेहरू की विदेश नीति का नायाब नमूना थीं उनकी “अनपढ़” बहन विजयलक्ष्मी पंडित विदेश नीति से नेहरू-गांधी परिवार का पुराना नाता है... नेहरू से लेकर राहुल-प्रियंका तक... सब खुद को विदेश नीति का एक्सपर्ट समझते हैं... कई बार तो ऐसा लगता है कि नेहरू-गांधी परिवार के बच्चे स्कूल में एडमिशन नहीं लेते… बल्कि वो सीधे यूनाइटेड नेशन्स में पढ़ने चले जाते हैं... जहां वो A फॉर America… B फॉर Britain और C फॉर China सीखते हैं... नेहरू की ‘अनपढ़’ बहन विजय लक्ष्मी पंडित भी ऐसी ही हाईली टैलेंटेड थीं... जिसे नेहरू ने सोवियत संघ, अमेरिका और ब्रिटेन में भारत का राजदूत / हाई कमिश्नर बनाया... वो “अनपढ़” बहन जिसने कॉलेज तो छोड़िये, स्कूल का भी मुंह नहीं देखा था, फिर भी उसे यूपी में मंत्री बनाया, महाराष्ट्र का राज्यपाल बनाया और सांसद भी बनाया !!! इस “अनपढ़” बहन को 8 करोड़ लाशों पर खड़ा चीन का तानाशाह माओ-त्से-तुंग अहिंसा के पुजारी गांधी की तरह लगता था!!! वो “अनपढ़” बहन जिसने भारत को सुरक्षा परिषद की स्थायी सीट मिलने में अडंगा डाला !!! ये कहानी ज़रा लंबी है, लेकिन सुनना बहुत ज़रूरी है। वो इसलिए क्योंकि जब इस देश में अनपढ़ नेताओं, नेताओं की फर्जी डिग्री और न जाने क्या-क्या चर्चा चल रही है तो आपको पता होना चाहिए कि परिवारवाद का वो काला सच जिसमें एक अनपढ़ इंसान सारी ऊंचाइयां पा लेता है, क्योंकि उसका जन्म आनंद भवन में हुआ था। जवाहरलाल नेहरू की छोटी बहन विजयलक्ष्मी पंडित बचपन में कभी स्कूल नहीं गईं... घर में ही इन्हें एक अंग्रेज़ आया (केयर टेकर) जेन हूपर ने इन्हें अक्षर ज्ञान और थोड़ी बहुत शिक्षा दे दी। आप कहेंगे कि इसमें बुराई क्या है... ठीक बात है पहले कई लोग घर में ही शुरुआती शिक्षा लेते थे, लेकिन वो उसके बाद कॉलेज और यूनिवर्सिटी भी जाते थे... लेकिन विजयलक्ष्मी ने कभी कॉलेज और यूनिवर्सिटी का मुंह नहीं देखा... वैसे भी जब आप नेहरू खानदान के चश्मों चिराग हो तो फिर किसी डिग्री की क्या ज़रूरत है? अब इनका करियर ग्राफ और इनके कारनामे देखिये – सोवियत संघ (वर्तमान रूस) में भारत की प्रथम राजदूत 1947 में जब भारत आज़ाद हुआ तो नेहरू ने अपनी बहन विजय लक्ष्मी पंडित को भारत का राजदूत बना कर भेज दिया। ये 1949 तक इस पद पर रहीं और बेहद नाकाम साबित हुईं। तानाशाह स्टालिन पूरे दो साल तक नेहरू की इस अनपढ़ बहन से नहीं मिला। भारत और सोवियत संघ के संबंधों का ये सबसे ठंडा दौर था। मास्को में रहने के दौरान इनकी वजह से भारत को काफी बदनामी झेलनी पड़ी। आरोप है कि इन्होंने अपने सरकारी घर के लिये मास्को के बजाय स्वीडन के स्टॉकहोम से महंगा फर्नीचर खरीदा। जिस पर सोवियत संघ सरकार ने आपत्ति जताई। गांधी ने भी विजय लक्ष्मी पंडित की इस फिजूलखर्ची पर आलोचना की थी, इस पर नेहरू को सफाई देनी पड़ी। अमेरिका में भारत की राजदूत जब विजय लक्ष्मी पंडित की दाल स्टालिन के सामने नहीं गली तो इन्हें इनके जवाहर भैया ने 1949 में वाशिंगटन में भारत का राजदूत बना कर भेज दिया। यहां भी इन्होंने बंटाधार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अमेरिका और ब्रिटेन चाहते थे कि संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में चीन की बजाय भारत को स्थायी सीट दी जाये... इस प्रस्ताव की जानकारी जब विजयलक्ष्मी को मिली तो उन्होंने अपने भाई प्रधानमंत्री नेहरु को 24 अगस्त 1949 को एक पत्र और बताया कि – अमेरिकी विदेश मंत्रालय में भारत को सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट मिलने की चर्चा चल रही और भारत के पक्ष में माहौल बनाया जा रहा है। लेकिन मैंने सलाह दी है कि इस मामले में धीमे चलें क्योंकि भारत इसे पसंद नहीं करेगा। जवाब में पंडित नेहरू ने अपनी बहन को लिखा कि - हम चीन के बदले ये जगह नहीं ले सकते। ये बुरी बात होगी। ये चीन का अपमान होगा। हमारे चीन से संबंध बिगड़ जाएंगे। हम यही प्रयास करेंगे कि चीन को स्थायी सदस्यता मिले। ... मतलब भारत के हाथ में इतना बड़ा मौका आ रहा था और भाई-बहन की इस जोड़ी ने इसे ठुकरा दिया। (नोट – किसी को ये शक है कि ऐसा नहीं हुआ था, तो भैया-बहिन के ये सारे पत्र "नेहरू म्यूज़ियम एंड लाइब्रेरी"... यानी "प्राइम मिनिस्टर म्यूज़ियम एंड लाइब्रेरी" में Vijaya Lakshmi Pandit Papers, 1st Installment - Pandit 1, File No. 59 में पड़े हुए हैं। तीन मूर्ति भवन में जाकर चेक कर लेना।) 'अनपढ़' बहन को फिर चीन भेजा नेहरू ने चीन के तानाशाह माओ त्से तुंग और चाऊ एन लाइ का मन टटोलने के लिए 1952 में अपनी लाड़ली बहन विजयलक्ष्मी पंडित को बीजिंग भेजा। इस यात्रा में क्या हुआ इसका संपूर्ण वर्णन लिबरू गैंग के प्रिय वामपंथी इतिहासकार कॉमरेड रामचंद्र गुहा ने अपनी पुस्तक "भारत – गांधी के बाद" के पेज नंबर 212 पर लिखते हैं – विजय लक्ष्मी पंडित ने अपने भाई नेहरू को पत्र में लिखा कि - "माओ बहुत कम बोलते हैं लेकिन उनमें गज़ब का सेंस ऑफ ह्यूमर है। जब वो जनता के बीच होते हैं तो वो गांधी की तरह लगते हैं। महात्मा गांधी की तरह जनता न केवल उनकी प्रशंसा करती है बल्कि उनकी पूजा करती है। उन्हे देखना बड़ा ही भावनात्मक पल है।" वाह... 8 करोड़ इंसानी लाशों पर खड़ा चीन का ये शैतान तानाशाह माओ-त्से-तुंग इस अनपढ़ बहन को गांधी की तरह दिख रहा था। अब देखिए नेहरू की ये लाडली बहन चीन के एक और नेता चाउ एन लाई के लिए क्या लिखती है... विजय लक्ष्मी का ये पत्र भी कॉमरेड रामचंद्र गुहा ने अपनी पुस्तक में छापा है, अनपढ़ बहन लिखती है - “चाउ एन लाई लोगों को हंसने पर मजबूर कर देते हैं और खुद भी अक्सर हंसते रहते हैं। हम लोगों ने बेहतरीन शराब पी और स्वादिष्ट खाना खाया। वो आगे लिखती हैं कि मास्को की तरह यहां लोगों पर अत्याचार नहीं किया जा रहा और चीन में हर आदमी खुश लगता है।” चीन में आठ करोड़ लोग मार दिये गये और इस अनपढ़ महिला को सब खुश दिख रहे थे। नेहरू ने विजयलक्ष्मी पंडित की सलाह पर अमल किया और चीन से दोस्ती की राह पर आगे चल निकले और बाद में इसी माओ और चाऊ की जोड़ ने 1962 में भारत की पीठ पर खंजर भोंक दिया। तो ये था परिवारवाद का दंश... ये था अनपढ़ों के हाथ में शक्ति देने का पाप !!! #Nehru #Congress #Rahul_Gandhi #Italy

Prakhar Shrivastava

33,389 görüntüleme • 1 gün önce

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सच यही है कि 1947 में नेहरू 'इलेक्टेड' प्राइम मिनिस्टर नहीं बल्कि 'एक्सीडेंटल' प्राइम मिनिस्टर थे... इसीलिए उनका असली कार्यकाल 1952 से ही माना जाना चाहिए... वीडियो में कही गई बातों का स्रोत निम्नलिखित हैं :- 1. सरदार पटेल: एक समर्पित जीवन, राजमोहन गांधी, पृष्ठः 378 to 381 2. गांधी हिज लाइफ ऐंड थॉट्स, आचार्य कृपलानी, पृष्ठः 248 to 251 3. सेलेक्टेड वर्क्स ऑफ जवाहर लाल नेहरू, सीरीज 2, खंड 15, पृ. 457 4. संपूर्ण गांधी वांग्मय, खंड 84, पृष्ठ 408 5. सरदार पटेल्स कॉरेस्पॉन्डेंट, वॉ. 10, पृ. 38 6. सरदार पटेल्स कॉरेस्पॉन्डेंस, वॉ. 3, पृ. 153 7. आजादी की कहानी, मौलाना आजाद, पृष्ठः 146 8. इंडिया फ्रॉम कर्जन टू नेहरू एंड आफ्टर, दुर्गा दास, पृ. 237

Prakhar Shrivastava

26,718 görüntüleme • 2 ay önce

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"एक दुखियारी माँ का श्राप" आज डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि है... कश्मीर की तत्कालीन शेख अब्दुल्ला सरकार की कैद में डॉ. मुखर्जी की रहस्यमयी मौत हो गई थी... नेहरू सरकार पर भी आरोप लगे थे... लेकिन कोई जांच न हुई... श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मां जोगमाया देवी ने अपने बेटे की रहस्यमयी मौत के बाद नेहरू को जो पत्र लिखा था उसे आज विशेष तौर पर पढ़ा जाना चाहिए... क्योंकि इस पत्र में एक मां का करुण क्रंदन है... एक प्रतिज्ञा है... और एक “श्राप” भी है… "नेहरू जी, मैंने अपने बेटे की रहस्यमयी मृत्यु पर एक निष्पक्ष जांच की मांग की थी ना कि आपका कोई निष्कर्ष मांगा था। आखिर आपको एक खुली और निष्पक्ष जांच से दिक्कत क्या है? मेरे पास पक्के सबूत हैं जिनसे काफी कुछ साबित हो सकता है। लेकिन आपने उन्हें जानने या समझने की कोई कोशिश नहीं की। आप सबूतों का सामना करने से डरते हैं। मैं जम्मू कश्मीर की सरकार को अपने बेटे की मौत का जिम्मेदार मानती हूं और ये आरोप भी लगाती हूं कि आपकी सरकार भी इसमें शामिल थी। मैं चाहती हूं कि भारत के लोगों को पता चले कि इस दुखद घटना के असली कारण क्या हैं, जिसे एक "स्वतंत्र देश" में अंजाम दिया गया और जिसमें आपकी सरकार ने भी एक भूमिका अदा की। लेकिन एक दिन सच सामने आएगा, एक दिन आपको भारत के लोगों को और स्वर्ग में भगवान को भी जवाब देना होगा।" - जोगमाया देवी (डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मां) दिनांक - 9 जुलाई 1953

Prakhar Shrivastava

21,281 görüntüleme • 1 ay önce

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जो नेहरू नहीं कर पाए... वो आज के कांग्रेसी क्या खाक कर लेंगे? RSS के खिलाफ तीन नेताओं ने मोर्चा खोल दिया है... प्रियांक खड़गे, वीडी सतीशन और गहलोत जी तीनों आरएसएस के खिलाफ लगे पड़े हैं... यही दुस्साहस नेहरू ने भी किया था... वो अपने पत्रों में संघ को खतरा बताते थे, लेकिन जिन्ना की मुस्लिम लीग को क्लीन चिट देते थे... कांग्रेस का ये मुस्लिम लीग वाला प्यार आज भी केरल में दिखता है... केरल के सीएम नाराज़ हैं कि तीन वाइस चांसलर्स संघ के कार्यक्रम में क्यों गये... बोल रहे हैं कि इन तीनों को माफी मांगना चाहिए... कुछ ऐसा ही नेहरू भी करते थे... एक बार सर्वपल्ली राधाकृष्णन (जो बाद में राष्ट्रपति बने) संघ की शाखा में चले गये थे... तब नेहरू उनसे नाराज हो गये थे... और पत्र लिखकर बोले कि “हमारी समस्या यह नहीं है कि पाकिस्तान क्या करता है… बल्कि हमारी समस्या यह है कि हमारे अपने बहुत से लोग क्या करते हैं।”... यानी नेहरू की नज़र में पाकिस्तान से भी खतरनाक था संघ!!! नेहरू तो गांधी की हत्या से एक महीने पहले से ही संघ के खिलाफ प्लानिंग और प्लॉटिंग में जुट गये थे... हत्या हुई तो मौका हाथ लग गया... प्रतिबंध लगा दिया... लेकिन साबित कुछ नहीं हुआ... नतीजा संघ का कुछ नहीं बिगाड़ पाये... संघ 100 वर्ष का हो गया... कांग्रेस चार राज्यों में सिमट गई... अब आप बताइये जो दुरुह कार्य नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी नहीं कर पाये... क्या वो ये तीन लोग कर पाएंगे?

Prakhar Shrivastava

22,082 görüntüleme • 2 ay önce

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जिस टीपू सुल्तान ने अपने 8 और 5 साल के बेटों को अंग्रेजो के पास गिरवी रख दिया था... ऐसे ‘सौदेबाज़’ टीपू के बारे में ओवैसी का कहना है कि टीपू सुल्तान ने वीर सावरकर की तरह अंग्रेजों को लव लेटर नहीं लिखे... दरअसल ओवैसी को थर्ड एंग्लो-मैसूर वार के बारे में कुछ पता नहीं है... इस युद्ध में जब अंग्रेज सेना ने टीपू सुल्तान की राजधानी श्रीरंगपट्टनम को घेर लिया था... तब टीपू ने गवर्नर लॉर्ड कॉर्नवालिस को पत्र लिखकर युद्ध रोकने, शांति और संधि करने की गुहार लगाई थी... जिसे अंग्रेजों ने स्वीकार किया... युद्ध के बाद हुई श्रीरंगपट्टनम संधि में टीपू ने बड़े ही शर्मनाक तरीके से समझौता करते हुए अपने दो बेटों को अंग्रेजों के पास गिरवी रख दिया। #TipuSultanControversy #TipuSultan

Prakhar Shrivastava

44,175 görüntüleme • 6 ay önce

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"बंगाल का कसाई, नेहरू का भाई!" क्या आपको पता है कि आजादी के बाद नेहरू ने बंगाल के कसाई सुहरावर्दी का 50 लाख का इनकम टैक्स माफ कर दिया। कैसे हिंदुओं के "भक्षक" के "रक्षक" बने थे नेहरू? आज कोलकाता के सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर गोपाल मुखर्जी मार्ग कर दिया गया है। ये तो सब जानते हैं कि 16 अगस्त 1946 के डायरेक्ट एक्शन डे में सुहरावर्दी ने कैसे हिंदुओं का नरसंहार करवाया था... लेकिन भारत की आजादीके बाद सुहरावर्दी कहां गया और उसका क्या हुआ... ये कोई नहीं जानता... तो सुनिए... आजादी के बाद सुहरावर्दी पाकिस्तान नहीं गया, भारत में ही रहा... उसने गांधी और नेहरू का दामन थाम लिया... वो बदला नहीं था, बल्कि वो कोलकाता में अपने बिजनेस को बचाना चाहता था... आखिरकार नेहरू ने दिसंबर 1948 में सुहरावर्दी का 50 लाख रुपये का टैक्स माफ करवा दिया... बस फिर क्या था... मार्च 1949 पाकिस्तान चला गया और 1956 में जाकर पाकिस्तान का प्रधानमंत्री भी बन गया...

Prakhar Shrivastava

16,754 görüntüleme • 1 ay önce

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पहले भारत में रहकर पाकिस्तान के लिये वोट डाला...भारत में रहकर पाकिस्तान की नींव रखी... भारत में रहकर देश का बंटवारा करवाया... और फिर पूरी बेशर्मी के साथ यहीं रह गये... सोचिये, पाकिस्तान बनाने के बाद भी पाकिस्तान नहीं गये... और जब पाकिस्तान के पीड़ित हिंदुओं को नागरिकता देने की बात हो रही है तो ये इसमें भी कुछ लोग फच्चर फंसा रहे हैं... ध्यान से देखिये ये वीडियो... और समझिये कैसे 1945-46 के चुनावों में इन्होंने जिन्ना, मुस्लिम लीग और पाकिस्तान के पक्ष में एकतरफा बंपर वोट दिया और जब पाकिस्तान जाने की बारी आई तो सिर्फ और सिर्फ 72 लाख ही पाकिस्तान गये... बाकी यहीं रह गये... ये नारा लगाने के लिये कि – सभी का खून शामिल है यहां कि मिट्टी में !!! इनके कुकर्मों की सज़ा भुगत रहे पाकिस्तान के हिंदुओं को लेकर इन्हें कोई चिंता नहीं है... गज्जब बेशर्मी है !!! #CAA #Pakistan #CitizenshipAmendmentAct Vaad Arihant

Prakhar Shrivastava

150,222 görüntüleme • 2 yıl önce

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नेहरू से सोनिया तक... सोमनाथ से अयोध्या तक... वही सनातन धर्म और हिंदू पुनरुत्थान से घृणा... पीढ़ियां बदल गईं, लेकिन नेहरू-गांधी परिवार की हिंदू विरोधी सोच नहीं बदली। जैसा कि तय था सोनिया गांधी ने श्रीराम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में शामिल होने से इनकार कर दिया... सोनिया जी नेहरू के ही पदचिन्हों पर चल रही हैं... नेहरू ने भी यही किया था... उन्हें 1951 में सोमनाथ मंदिर की प्राणप्रतिष्ठा में आमंत्रित किया गया था... लेकिन नेहरू ने सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट का अपमान करते हुए इस आमंत्रण को ठुकरा दिया था... नेहरू ने तर्क दिया था कि वो इस हिंदू पुनरुत्थान से बहुत परेशान हैं। सौजन्य - The Jaipur Dialogues Sanjay Dixit ಸಂಜಯ್ ದೀಕ್ಷಿತ್ संजय दीक्षित #Ayodhya #AyodhyaRamTemple #RamMandir #Sonia_Gandhi #Nehru #Somnath #Congress

Prakhar Shrivastava

134,739 görüntüleme • 2 yıl önce