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जोधपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत जोधपुर एयरपोर्ट के नए भवन को लेकर पूछे प्रश्न का उत्तर : जोधपुर एयरपोर्ट का नया भवन बना है पर पहली बरसात में ही पानी भर गया तो लोगों में बहुत चर्चा रही इसकी। एयरफोर्स से संबंधित झगड़ा जो दो साल से झगड़ा...

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Комментарии: 30

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Dhruv mali25 дней назад

नई संसद से लेकर राजस्थान हाईकोर्ट और अब जोधपुर एयरपोर्ट तकहर नए प्रोजेक्ट में पहली ही बारिश में छतें टपक रही हैं। यह सिर्फ पानी नहीं बल्कि निर्माण एजेंसियों और ठेकेदारों को दिए गए सरकारी संरक्षण का भ्रष्टाचार टपक रहा है।

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rohit Chanwariya25 дней назад

जुडिशरी और प्रशासन पर ज्ञान देने से पहले गहलोत जी ज़रा डांगावास के फैसले पर भी बोल दीजिए जोधपुर एयरपोर्ट और हाई कोर्ट की बिल्डिंग पर दुख जताने वाले पूर्व सीएम साहब, 5 दलितों के में आपकी सरकार की नाकामी पर आपका दुख किस कोने में सो गया था?

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Manisha25 дней назад

नई बिल्डिंग में पहली बारिश में पानी आने पर जिम्मेदारी फिक्स करने की बात कर रहे हैं गहलोत जी। जयपुर में मनीष सोनी की हत्या हो गई, आरोपी आजम हिरासत में है आमेर में बवाल है — इस पर जिम्मेदारी कौन फिक्स करेगा? हर मुद्दे पर बोलने वाले इस हत्या पर शर्म से चुप हैं क्या?

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flashbeat25 дней назад

गहलोत जी इस पर क्या बोलोगे ?

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Tanisha Sharma25 дней назад

गहलोत जी इस पर कब बोलोगे ?

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SARITA_BISHNOI25 дней назад

अशोक गहलोत जी आपके कार्यकाल को राजस्थान के युवा बेरोजगार, किसान, मजदूर, शोषित, पीड़ित याद कर रहे है।

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pooja saini25 дней назад

नई बिल्डिंग, पहली बारिश और पानी भर गया—सवाल सिर्फ निर्माण का नहीं, जवाबदेही का है। गहलोत सरकार ने जोधपुर एयरपोर्ट के लिए एयरफोर्स से जुड़े वर्षों पुराने विवाद को सुलझाने में बड़ी भूमिका निभाई थी।

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Vijay Singh25 дней назад

गहलोत जी, नई बिल्डिंग में पहली बारिश में पानी भरना गंभीर विषय है, लेकिन सिर्फ सवाल उठाने से जिम्मेदारी खत्म नहीं होती। आपके कार्यकाल में जोधपुर एयरपोर्ट से जुड़े वर्षों पुराने विवाद को सुलझाने का काम भी भाजपा सरकार ने आगे बढ़ाया। अब जरूरत है कि निर्माण की गुणवत्ता पर सख्ती हो और जिम्मेदार ठेकेदारों की जवाबदेही तय हो।

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Jyoti Verma25 дней назад

गहलोत जी इस घटना पर क्या कहना चाहेगे ?

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Vishal banna24 дней назад

अपनी नाकामियों पर पर्दा डालने के लिए गहलोत जी संसद और हाईकोर्ट जैसी संवैधानिक संस्थाओं को बीच में ला रहे हैं। कांग्रेस सरकार के भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण कार्य के कारण ही जोधपुर एयरपोर्ट की नई बिल्डिंग पहली ही बरसात में डूब गई।

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Shivam kumar24 дней назад

ji ab nhi kroge kya aap tweet jab aaoki sarkar thi tab to aapne kudh aakr 1 karod dilvaa diye tha or aaj aapki ase nobat aa gayi ki ak tweet bhi nhi kiya jaa raha hai aap se.... asee too app sabhi piddit parivaro se milte ho or aaj haal chaal hi nhi pucha jaa raha hai aap se ......?

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Rahul Sharma24 дней назад

गहलोत जी कही ये सब आपके कहने पर तो नहीं हो रहा है ?

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Jagdish T Bishnoi25 дней назад

प्रदेश की जनता इस भ्रष्ट BJP सरकार और पर्ची मुख्यमंत्री से परेशान हैं, और बदलाव का मूड बना चुकी हैं। इन निकाय चुनाव में BJP को बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ेगा यह पर्ची मुख्यमंत्री को पता है इसलिए वो खुद प्रचार में उतर आए हैं, लेकिन जनता अपना मन बना चुकी हैं, कांग्रेस पार्टी ही जीतेगी।

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sejal saini25 дней назад

गहलोत जी आमेर में टूरिस्ट गाइड मनीष सोनी की हत्या पर आप मौन क्यों हैं पुलिस कस्टडी में आरोपी आपकी राजनीति के चेहरे को बेनकाब करता है क्या यह सच नहीं है कि आपके कांग्रेसी नेता रफ़ीक ख़ान और अमीन कागज़ी के राजनीतिक संरक्षण के कारण ही क्षेत्र में अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं

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Adesh Rawat25 дней назад

जमीन का आवंटन कांग्रेस ने कराया, सालों पुराना एयरफोर्स का पेच कांग्रेस सरकार ने सुलझाया-तब जाकर जोधपुर को नया एयरपोर्ट टर्मिनल मिला। लेकिन मौजूदा व्यवस्था में पहली ही बारिश ने निर्माण की गुणवत्ता की पोल खोल दी। जनता के टैक्स के पैसे से बनने वाली इमारतों में ऐसी लीपापोती अक्षम्य है। सरकार तुरंत ऑडिट कराए और सख्त एक्शन ले!

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Rahul kumar25 дней назад

गहलोत जी, कांग्रेस सामाजिक सम्मान और समानता की बात करती है। फिर अपने ही पूर्व मंत्री की ऐसी टिप्पणी पर आपकी चुप्पी क्यों? क्या किन्नर समाज के सम्मान के लिए कांग्रेस कोई स्पष्ट रुख अपनाएगी?

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Deepika sharma25 дней назад

गहलोत जी अपनी 5 साल की प्रशासनिक नाकामी को छिपाने के लिए संवैधानिक संस्थाओं और न्यायपालिका के निर्माण कार्यों पर उंगली उठाना बेहद हास्यास्पद है जोधपुर में जमीनी स्तर पर नगर निगम और स्थानीय निकायों को 5 साल तक पंगु बनाकर रखने का नतीजा है कि आज ड्रेनेज व्यवस्था ध्वस्त है।

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sachin prajapat(SP)25 дней назад

नई संसद भवन में पहली बारिश में पानी टपकने की तस्वीरें पूरे देश ने देखीं। इसके बाद राजस्थान हाईकोर्ट के नए भवन और अब जोधपुर एयरपोर्ट पर ऐसी ही स्थिति बनी है। यह स्पष्ट करता है कि बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स में ठेकेदारों और निर्माण एजेंसियों पर सरकारी स्तर पर आवश्यक नियंत्रण और कड़ा अंकुश नहीं है।

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garima meena Meena25 дней назад

पुराने समय में हाईकोर्ट या निचली अदालतों के भवन सरकार के PWD विभाग बनाते थे और फिर न्यायपालिका को हैंडओवर करते थे-जिससे सरकारी स्तर पर सीधी 'अकाउंटेबिलिटी' फिक्स होती थी। आज प्रशासनिक निगरानी के अभाव में ठेकेदार बेलगाम हैं। जोधपुर एयरपोर्ट और हाईकोर्ट जैसी प्रतिष्ठित इमारतों की यह दुर्दशा देखकर दुख होता है। निर्माण कार्य तकनीकी विभागों के पास ही होने चाहिए ताकि कमियों पर सवाल पूछे जा सकें और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो सके।

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Satish Kaka25 дней назад

जोधपुर एयरपोर्ट के नए भवन में पहली ही बारिश में पानी भरना भ्रष्टाचार की पोल खोलता है। 2 साल से अटका एयरफोर्स और नगर निगम का जमीन विवाद कांग्रेस सरकार ने सुलझाया था। भाजपा राज में गुणवत्ता की अनदेखी से जनता परेशान हो रही है।

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Kishan Tanwar (Mali) Bikaner (Rajasthan)24 дней назад

Jai ho jannayak Ashokji Gehlot

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Dau Ram Solankiyatala24 дней назад

आपका बहुत-बहुत स्वागत और अभिनन्दन है जननायक श्री @ashokgehlot51 जी

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it's me Vikram25 дней назад

गहलोत जी , आपके कहने पर राफिक खान ने मनीष सोनी को 50 लाख का मुवावजा क्यों दिया जबकी मु#स्लिम लड़के की हत्या हुई थी तब उसके परिवार को 1 करोड़ का मुवावजा मिला था ओर हिन्दू लड़के को सिर्फ 50 लाख का मुवावज दे रहे है क्यों जवाब दो गहलोत जी

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रामेश्वर 🇮🇳24 дней назад

ये कैसा फुफा है

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Kamla Bai25 дней назад

गहलोत जी आपको हर बात पर ट्ववीट करने का टाइम है पर आपको आमेर में हुई मनीष सोनी की हत्या पर एक ट्वीट करने तक का टाइम नहीं मिला है या फिर मारने वाले विशेष समुदाय से है इसलिए आपकी आवाज नहीं निकल रही है

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Shyam lal Katriya23 дней назад

Congress Lao desh bachao Ashok Gehlot jindabad jindabad

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raj kumar sharma25 дней назад

गहलोत जी , आपके कहने पर ही तो रफीक खान ने आमेर मे दंगा करवाया था , और गाइड मनीष सोनी की हत्या हुई थी | आपने इस मामले मे क्यों कुछ नहीं बोला जवाब दीजिए गहलोत जी आप चुप क्यों है ..?

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Suresh Gehlot25 дней назад

Jodhpur Airport se to achha jodhpur ka roadways bus stand hai aapka banaya hua 👍⚡

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Kumar Koyal25 дней назад

नवनिर्मित सार्वजनिक भवनों में लीकेज और जलभराव होना ठेकेदारों पर ढीले अंकुश का नतीजा है। सरकार भ्रष्ट ठेकेदारों और अधिकारियों की जवाबदेही तय करे तथा घटिया निर्माण करने वाली कंपनियों को तुरंत ब्लैकलिस्ट कर कानूनी कार्रवाई करे।

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Bharat Bafna25 дней назад

फूफा जी बारिश के पानी से भी नाराज हो जाते हैं अब उनकी नाराजगी कैसे दूर करें इनको मालूम होना चाहिए कि पश्चिम में राजस्थान में अगर बारिश अच्छी होती है तो पानी की समस्या कम और खुद मुख्यमंत्री रहे हुए कैसी छोटी-छोटी बातें करने लग गए हैं दिमागी संतुलन तो सही है ना

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प्रदेश के वर्तमान हालात पर मीडिया से 49 सिविल लाइंस पर बातचीत की : दिक्कतें ही दिक्कतें हैं चारों ओर। सरकार बनते ही ऐसा कभी इतिहास में नहीं हुआ कि दो चार महीने के अंदर ही लोग कहने लगे गवर्नेंस नहीं हो रही, शासन नहीं हो रहा। कुशासन चल रहा है और मैं बराबर आग्रह करता हूं मुख्यमंत्री जी से, वो इसे लेते आलोचना और हम चाहते हैं कि सुधार हो जिससे कि पब्लिक को फायदा मिले। अगर सरकार इन्हीं को रहनी है मान लीजिए इनकी मेजॉरिटी है तो शासन तो यही करेंगे। मगर कुशासन होगा तो पब्लिक में काम नहीं होंगे। आप कल्पना कीजिए कि क्या हालत बने, करप्शन की हदें पार हो गई। चाल, चेहरे, चरित्र एक्सपोज हो गए इनके पर उसके अलावा भी जिस प्रकार से पेमेंट नहीं हो रहे हैं कोई डिपार्टमेंट के अंदर तो फिर क्या हो रहा है? शिक्षा में, स्वास्थ्य सेवाएं तो चरमरा गई है। आप बताइए जिस प्रकार से शिक्षा की स्थिति बनी है, वो तो बड़ी अजीब सी बन गई है। स्कूलें बंद हो रही है, टीचर्स नहीं है और साथ में आपका यह स्वास्थ्य, RGHS का पता ही नहीं है। लोग खुद दुखी हो गए तो चारों ओर से आकर शिकायतें करते जो आप बात पूछ रहे थे हैं वही उसी बात। तो कहने का मतलब है कि हम बार बार कहते हैं मुख्यमंत्री जी को कि कानून व्यवस्था की स्थिति चौपट, रेप अलग हो रहे हैं, डकैती अलग हो जाती है, फायरिंग करके मार देते हैं ज्वेलर्स को या किसी को। एक के बाद एक घटना, इतने सारे मुद्दे एक साथ हो गए हैं कि विपक्ष की पार्टी भी क्या क्या मुद्दा उठाए? सरकार जब तक खुद आगे नहीं आएगी, पूरा मंत्रिमंडल जब तक उस ढंग से बिहेव नहीं करेगा, जनता के साथ में डिपार्टमेंट की पकड़ नहीं करेंगे, मजबूती से डिपार्टमेंट को कसेंगे नहीं वो, तो नीचे तक जो हालात होते हैं वो बदलेंगे नहीं और नुकसान क्या होगा पब्लिक का। हमें चिंता पब्लिक की है। बाकी तो देखिए शासन तो आते जाते रहते हैं, उन्नीस बीस तो देखो हर शासन में होता है करप्शन तो यह मैं दावा नहीं कर सकता, लेकिन कांग्रेस शासन होते तब नहीं होता है, होता है, पूरे देश में होता है, सब जगह होता है। पर जो इस बार जो जिस रूप में हो रहा है ना तो आम जनता से पूछ लीजिए, मालूम पड़ेगा। स्थिति बड़ी नाजुक है। मैं चिंता कर रहा हूं कि वो ठीक होनी चाहिए।

Ashok Gehlot

43,758 просмотров • 2 месяцев назад

आज अखबार में मुख्यमंत्री जी का आर्टिकल प्रकाशित होने और प्रदेश के हालातों पर : दूसरा जो है, आज आर्टिकल आया है मुख्यमंत्री महोदय का, आर्टिकल आया अच्छी बात है। पांच साल बनाम डेढ़ साल, कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं पूरे प्रदेशवासियों और प्रदेश के गांव गांव में तो ऐसी सरकार का निकम्मापन नाकारापन मैने कभी नहीं सुना किसी सरकार का। सरकारें बीजेपी की भी रही हैं सरकारें राजस्थान में कांग्रेस की भी बनी हैं बीजेपी की भी रही हैं इतना निकम्मा नकारापन मैंने कही देखा नहीं,और इतने कम समय के अंदर, आप बताइए तीन साल बाद में सरकार के बारे में लोग प्रतिक्रिया देते हैं काम नहीं हो रहे हमारे, करप्शन बहुत है सुनवाई नहीं हो रही है किस के पास जाएं सब बातें बोलते हैं लोग तीन साल के बाद में। यही सरकार ऐसी है 6 महीने में ही लोगों को समझ पड़ गया पूत के पांव पालने में होते हैं न वो कहावत चरितार्थ हुई है तो राजस्थान में हुई है। अरे ये क्या हो गया हम ने ये क्या कर दिया, चुनाव तो, सरकार तो पहले वाली चली गई कांग्रेस की पर नई सरकार में ये क्या हो रहा है जिसके पास जाएं, वो सरकार का मुख्या अगर दावा करे तो मैं ये बार बार कहता हूं ये उनका बहुत बड़ा साहस है हिम्मत है कि वो ये मुकाबला कर रहे हैं। और आज ही जिस अखबार में आर्टिकल लिखा गया कम से कम सीएमओ को चाहिए था डीआईपीआर को चाहिए था मैनेज करते आज तो उनके खिलाफ न्यूज नहीं आती। आज भास्कर के अंदर आर्टिकल भी आया है और मुख्यमंत्री के दावे को खोखला साबित कर रहे हैं वो ऐसी ऐसी घटनाएं आज आई हैं उसके अंदर कानून व्यवस्था की हो या अन्य घटनाएं हों तो आज तो मैनेज करना चाहिए था कम से कम। मैनेजमेंट भी नहीं किया आर्टिकल की खुद की धज्जियां उड़ गईं उसके अंदर ही। पत्रिका में क्या आता है अलग बात है और अखबारों में क्या आता है वो तो लंबी चौड़ी बाते हैं लगातार आ रही हैं।

Ashok Gehlot

13,500 просмотров • 1 год назад

आज जयपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत में अंतर्राष्ट्रीय स्थिति को लेकर अपने विचार साझा किए : देखिए, एक तो अंतर्राष्ट्रीय स्थिति बड़ी नाजुक है। एक तरफ तेल और गैस को लेकर जो स्थिति बनती जा रही है, तो राहुल गांधी ने पहले ही वॉर्न किया था कि ये स्थिति बनेगी। हमेशा सरकार लेट कर देती है। तैयारी समय पर करनी चाहिए, क्योंकि वॉर हो गया है, तो वॉर के कारण ही ये स्थिति बनी है। तो आपके पास जस्टिफाई करने का कारण है, खाली इतना ही कि आप जनता को विश्वास में लो कि भाई देखिए, वॉर हो गया, हमारी मजबूरी है, और यहाँ ये कमियाँ रह गईं या नहीं रही हैं, हम प्रयास कर रहे हैं कि जनता को कोई तकलीफ नहीं आए, कम से कम तकलीफ आए। अब जो प्रधानमंत्री ने हाउस में बोला, वो तैयारी उस ढंग से नहीं की। आलोचना के शिकार भी हुए। ये पूरा अंतर्राष्ट्रीय युद्ध की जो स्थिति बनी है, अब किस दिशा में जाएगा, कोई नहीं जानता। और दूसरा, हमारे ट्रंप जो हैं, मिस्टर ट्रंप, पता नहीं जिस प्रकार उनका व्यवहार है मोदी जी के प्रति,कभी कहते हैं मेरे वो दोस्त हैं, कभी कहते हैं कि वो मुझे खुश करने में लगे हुए हैं, कभी कहते हैं कि मैं उनका पॉलिटिकल करियर खत्म कर सकता हूँ। आज तक मैंने किसी भी राष्ट्रपति को दूसरे देश के प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति के बारे में ऐसे कमेंट करते नहीं सुना। वो वेनेजुएला के प्रेसिडेंट को किडनैप कर सकता है एक राष्ट्र दूसरे राष्ट्र के प्रेसिडेंट को किडनैप कर ले और दुख इस बात का रहा कि दुनिया के किसी मुल्क ने निंदा नहीं की, कंडेम नहीं किया, दुख प्रकट नहीं किया। ये दुनिया के लिए बहुत-बहुत बुरा संकेत है। जो हुआ है, सब जानते हैं। अब जो स्थिति बनी है, उसमें पाकिस्तान पंचायती कर रहा है। मतलब आप बताइए, पाकिस्तान की क्या हैसियत है? हमारे देखते हुए भी हमने देखा—65 के वॉर में क्या थी, 71 में क्या थी, कारगिल में क्या थी हमेशा मुँह की खानी पड़ी। वो आज जिस प्रकार से ऑपरेशन सिंदूर के अंदर भी, तुर्की उनका साथ दे रहा था, हमारे साथ कोई नहीं था। इस प्रकार के हालात में देश चल रहा है। समझना चाहिए, कहाँ पाकिस्तान और कहाँ हिंदुस्तान है। उसके बावजूद भी वो समझौते की बात कर रहा है, डायलॉग वो करवाएंगे। और दुर्भाग्य से हमारे विदेश मंत्री जो हैं, उनका ये कहना कि वो दलाली का काम कर रहा है, ये बहुत ही गलत है। मैं समझता हूँ कि कोई विदेश मंत्री किसी मुल्क के लिए ऐसी भाषा काम में नहीं ले सकता। दलाली क्या होती है, पता नहीं। मैं तो मानता हूँ कि हो सकता है उनके मुँह से स्लिप ऑफ टंग हुआ हो। अगर ऐसा हुआ है तो अलग बात है, उनको सॉरी फील करना चाहिए, नहीं तो मैं समझता हूँ कि देश के अंदर उनकी बहुत आलोचना होनी चाहिए। आप कैसे कह सकते हो कि दलाली कर रहा है? दलाली होता क्या है? अगर दुनिया के मुल्कों में शांति स्थापित होती है हिंसा तो हिंसा ही होती है तो मुल्क कहाँ जाएगा? तीसरे विश्व युद्ध के रूप में जाएगा? थर्ड वर्ल्ड वॉर के रूप में जाएगा? कहाँ जाएगा, कोई नहीं जानता। ऐसे खतरनाक हालात में, जब दुनिया में आग लगी हुई है, वहाँ शांति स्थापित करने के लिए हर वर्ग को, हर मुल्क को प्रयास करना चाहिए। और उसके अंदर आप कह रहे हो कि दलाली कर रहा है ये बात मुझे समझ में नहीं आई। ऐसे हालात में देश चल रहा है। और लोग सब चिंतित हैं कि हमारी स्थिति कहाँ थी और कहाँ पहुँच गई। कहाँ इंदिरा गांधी का जमाना था—90 हजार से अधिक सैनिकों को, जनरल, कर्नल, मेजर को यहाँ अरेस्ट करके इंडिया में ले आए थे। 90 हजार से अधिक लोगों को, लगभग एक लाख लोगों को। और आज देश की हमारी स्थिति क्या है, आपके सामने है। ये जो अंतर्राष्ट्रीय स्थिति हुई है।

Ashok Gehlot

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देश- प्रदेश में पेट्रोल - डीजल और सीएनजी के बढ़ते दामों एवं ख़राब होती स्थिति पर मीडिया को आज प्रतिक्रिया दी : विपक्ष मांग क्या कर रहा है? राहुल जी क्या मांग कर रहे हैं? आप देशवासियों को बताओ कि स्थिति यह है, हमारी मजबूरी है, अंतरराष्ट्रीय स्थिति बन गई उसके कारण मजबूरी है और आने वाले वक्त में हमें यह कदम उठाने पड़ सकते हैं। अभी तो खाली मोदी जी ने देशवासियों को आह्वान किया कि आपको क्या-क्या कदम उठाने हैं। वो कदम उठाने के लिए जो कहा गया उसके बाद सब मुख्यमंत्रियों का उन राज्यों में जहां बीजेपी की सरकारें हैं, उनके मंत्रियों का नाटक हुआ, कोई रिक्शा में गए, कोई पैदल गए, कोई इलेक्ट्रिक वैन में गए और वो का वो तमाशा हो रहा है अभी भी। तमाशे से पब्लिक में मैसेज नहीं जाता है। अगर आप हकीकत में कुछ त्याग करते हो, उसका मैसेज सीधा उतरता गले के अंदर ,पर ये खाली तमाशे कर रहे हैं। अब कल परसों और बढ़ा दिए आज सीएनजी के बढ़ा दिए, ये क्या मजाक है। आप खुल के कहो भई ये हमारी मजबूरी है। लोग लाइक करेंगे उस बात को और वो भी समझेंगे कि नेता प्रतिपक्ष का सम्मान किया है, उन्होंने जो मांग की है उसका जवाब दिया है सत्ता पक्ष ने, एनडीए गवर्नमेंट ने, प्रधानमंत्री मोदी जी ने और अमित शाह जी ने। तो ये तो हुई कायदे की बात। ये जो कर रहे हैं वो बिल्कुल ही ऐसे काम कर रहे हैं जिससे कि लोगों में गलतफहमी पैदा हो और लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि अब कल कितना बढ़ेगा। इस चिंता में लोग तकलीफ में हैं। पेट्रोल पंप पर लाइनें लग रही हैं ये स्वीकार नहीं कर रहे। मुझे आश्चर्य होता है कि जो हकीकत है कि पेट्रोल वाले कहते हैं एक हजार का पेट्रोल लो और कोई कोटा से आएगा, जयपुर, जोधपुर से आएगा, भरतपुर से आएगा, तीन बार रुक के उसको पेट्रोल भरवाना पड़ता है रास्ते में। तो ये जो प्रैक्टिकल हकीकत है उसको ये सरकार हमारे जो मुख्यमंत्री जी और इनके नेता हैं, यहां के जो हमारे मदन राठौड़ साहब हैं उनके अध्यक्ष हैं, इनका काम ही यही है, झूठ बोलो, बार बार असत्य बोलो और नकार दो कि हो ही नहीं रहा है। अरे भाई पब्लिक दुखी हो रही है। पेट्रोल डीजल मिल नहीं रहा है। लाइनें लगी हुई है। LPG नहीं मिलता दस से पंद्रह दिन तक, ये तो गांव गांव से खबर आ रही है। लोहावट से खबर आ गई, ओसियां से खबर आ गई। स्थिति ऐसी बिगड़ी हुई है। जो एजेंसी वाले हैं LPG वाले वो खुद हमें कहते हैं हमारी स्थिति ऐसी हो गई है, टेंशन होता है क्योंकि पब्लिक को जवाब क्या दें हम लोग? वो इसलिए हो रहा है क्योंकि भारत सरकार स्थिति स्पष्ट नहीं करती। स्थिति स्पष्ट करती तो गांव गांव में मैसेज होता तो जो एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर है, पेट्रोल पंप के मालिक भी हैं, उनको जनता के आक्रोश का सामना नहीं करना पड़ता। गलती केंद्र की है और राज्य सरकार की।

Ashok Gehlot

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पत्रकार का प्रश्न : सर जगन गुर्जर की अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में हत्या हुई है। जवाब : देखिए कानून को तोड़ के कोई हत्या करता है, वह तो हत्यारा होता है। चाहे जेल के अंदर हो, चाहे फील्ड में हो, चाहे कहीं हो। इसलिए मुझे इसकी जानकारी तो है नहीं, मीडिया में खबर आई है, तो यह तो इनकी लापरवाही तो है, कि जेल के अंदर कैसे तो मतलब ऐसी स्थिति बन गई और पहले बीकानेर में भी ऐसी घटनाएं हुई हैं। जगह-जगह घटनाएं होती हैं तो दुख होता है, कि जेल के अंदर कैसे तो हथियार पहुँच जाते हैं, कैसे हत्याएं होती हैं, कैसे मोबाइल पहुँच जाते हैं। तो यह तो जेल के जो हमारे अधिकारी हैं और सरकार है, उनको चाक-चौबंद होना चाहिए जिससे कि ऐसी घटनाएं नहीं हों। कानून अपना काम करे। कानून चाहे जगन गुर्जर हो चाहे कोई हो, अपना काम करे। परंतु इस प्रकार से अगर हत्याएं होती हैं आपस के अंदर ही, तो कल उसने मारा कल उसको और कोई मार देगा मान लीजिए। तो यह चलता रहेगा क्या सिलसिला? तो यह अच्छी बात थोड़ी है। यह कोई जाट, गुर्जर और किसी जाति की बात नहीं है। यह बात है कि आप किस प्रकार से हत्या हो जाती है जेल के अंदर, तो आपस में हत्याएं होने लग गईं। तो यह कोई सिलसिला रुकेगा ही नहीं। तो यह चिंता सरकार को होनी चाहिए। पत्रकार का प्रश्न : सर, यह कोई पैरामेडिकल जो एग्जाम्स थीं, उसको भी निरस्त करने का फैसला किया गया है, गड़बड़ी के चलते। जवाब : यह कल आए थे बच्चे मेरे पास में, बहुत तकलीफ में थे बेचारे कि साहब हमने इतनी मेहनत करी, एग्जाम का वक्त आया और पेपर लीक हो गया। अब यह किस मुँह से हमें दोष दे रहे थे? इनके वक्त में तो ओएमआर शीट भी और यह पेपर लीक हो रहे हैं और यह पूरे देश में हो रहे हैं। नीट का पेपर तो केंद्र सरकार, एनटीए की देखरेख में हो रहा था। तो यह जो है, इनके पास कोई जवाब तो है नहीं। हमें बदनाम करने का पूरा इन्होंने षड्यंत्र किया था चुनाव में, उसमें कामयाब हो गए थे। अब जनता के सामने एक्सपोज हो गए हैं, यह बोलने की स्थिति में नहीं रहे हैं।

Ashok Gehlot

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आज जोधपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बात की : राज्य सरकार द्वारा जोधपुर की उपेक्षा किए जाने पर मेरी प्रतिक्रिया : देखिए सबसे बड़ी बात है कि 12 साल पूरे हो गए तो अलग बात है कि 12 साल में कोई उपलब्धि नहीं रही है। धर्म के नाम पर राजनीति हुई और उसमें वो पूरी तरह कामयाब रहे। अब नतीजे क्या निकलेंगे आने वाले फ्यूचर के अंदर वक्त बताएगा, अभी उस पर कहने की आवश्यकता नहीं है। पर धर्म के नाम पर राजनीति करना एक अलग बात है और पब्लिक समस्याओं से रूबरू होना दूसरी बात है। आज हर क्षेत्र में, जोधपुर की बात करें, तो पीने के पानी का संकट पैदा हो गया जोधपुर में, जिसके लिए हमने 20 साल मेहनत करी होगी जब इंदिरा गांधी कैनाल का पानी लिफ्ट करके 50 दौरे मैंने किए होंगे नहर पर तब पानी आया और तीसरा फेस जो है अभी वो 1500 करोड़ लगभग हम लोग विदेश से ऋण ले रहे थे। देरी हो रही थी तो मैंने स्टेट बजट से 1400 करोड़ रुपए मैंने मंजूर कर दिए कि जोधपुर और आसपास के गांव प्यासे नहीं रहने चाहिए। वो काम भी धीमे चल रहा है। सरकार चली गई तो मॉनीटरिंग करने का कोई हिसाब ही नहीं है यहां पर तो। मुख्यमंत्री को पता ही नहीं पड़ता कि जोधपुर लिफ्ट थर्ड बला क्या है। अब जिस मुख्यमंत्री को नहीं पता था हो तब वो कैसे उसकी मॉनिटरिंग करेंगे, वो इंटरेस्ट ले ही नहीं रहे हैं। अभी मैंने उनसे बात करी, मेरी बर्थडे पर उनका फोन आया था तो मैंने कहा जो प्रोजेक्ट जोधपुर में बन रहे हैं या बन गए हैं, सुमेर पब्लिक लाइब्रेरी बन गई। स्पोर्ट्स का कॉम्प्लेक्स बन गया, 90 करोड़ रुपए की लागत से, और जो काम हो गए हैं, मेडिकल यूनिवर्सिटी बन रही है। लंबी लिस्ट है मेरे पास। आप बताइए नई सड़क पार्किंग का ये हो गया और चार जगह शानदार बिल्डिंग खड़ी हैं, प्रताप नगर, मंडोर हॉस्पिटल , दिगाडी के अंदर, चौपांकी, शानदार बिल्डिंग हैं बाहर के लोग देख के आश्चर्य होता है कि इतनी शानदार बिल्डिंग है। पड़ी पड़ी खराब हो जाएगी। ना इक्विप्मेंट है ना डॉक्टर है। इस सरकार को क्या करें? पूरे राजस्थान में हाहाकार मचा हुआ है। मेरा दावा है , मीडिया वालों मैंने कहा था जयपुर में मेरा दावा कोई मीडिया वाला हम खर्चा देंगे, आप जहां चाहो राजस्थान के किसी गांव में किसी भी गांव में जाओ,आप सरकार की हकीकत से रुबरु हो जाओगे। सरकार नाम की चीज है क्या? हमारे वक्त की योजनाओं को आज लोग याद कर रहे हैं, कोई थैला लेकर चल रहा है, कोई पेंशन नहीं मिल रही पाँच छह महीने से, वो सरकार को कोस रहा है, दवाएं मिलनी बंद हो गई हैं, RGHS भी लगभग बंद हो गया, प्राइवेट अस्पताल वाले पैसे वसूल करने लग गए हैं, कागजों में चिरंजीवी योजना लागू है तब भी प्राइवेट वालों ने हड़ताल कर दी, 40 दिन हो गए, मैने सुना कल परसों खोल रहे हैं उसको, तो 40 दिन तक इलाज नहीं हुआ और जेब से पैसा देना पड़ा। क्या सरकार भरपाई करेगी ? वादा भी किया लोगों से कि अभी देना पड़ेगा आपको, पैसा मिल जाएगा तो हम आपको वापस दे देंगे। तो सरकार सुनिश्चित करें ऐसे मेकेनिजम डेवलप करे जिससे कि पैसा दिलाए उन लोगों को सरकार, वो पैसे उनको वापस मिले तब जाकर ही हमारी जो स्कीम बनाई थी चिरंजीवी योजना वो लागू मानी जाएगी, ये मेरा मानना है। तो कहने को बातें बहुत सारी है। मैंने बताया कि लिफ्ट कैनाल की कोई लापरवाही हो रही है। अब क्लोजर होता है, हर साल होता है पंजाब से, हमारे वक्त में भी हुआ था, पर हमने एडवांस में मैनेजमेंट किया, वहां की सरकार से बातचीत करी, चीफ सेक्रेटरी से बातचीत करी और ये नौबत नहीं आने दी कि कोई संकट ही पैदा हो जाए, आज देखिए क्या हो रहा है। पीने के पानी के लिए जो राजस्थान में हिंदुस्तान के अंदर नंबर वन होना चाहिए था जोधपुर, इतना पानी आ चुका है कायलाना के अंदर भरा पड़ा है सारा पानी। अब पानी आगे सेआएगा नहीं तो ये क्या करेंगे? तो मेरा कहने का मतलब यह सरकार की लापरवाही आपके सामने है, जोधपुर की उपेक्षा हो रही है, मुख्यमंत्री जी पाँच बार दस बार आ चुके, पता नहीं कितनी बार आए होंगे मुझे पता नहीं, आपको ज्यादा मालूम है। ( मीडिया पांच साल जल मंत्री के जोधपुर आने पर मीडिया के जिक्र पर) कितनी बार आए हैं वो? पता नहीं कितनी बार आए हो, गिनती नहीं है मतलब। तो आप बताइए उसके बाद में ये मैंने कहा मुख्यमंत्री को जो मैंने पाँच छह नाम गिनाए, बिल्डिंग बन चुकी है, फिनटेक इंस्टीट्यूट हिंदुस्तान में एक मात्र ऐसा होगा जो अलग से टेक्निकल है वो, फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी के साथ जोड़कर के इंस्टीट्यूट बन रहा है,इस प्रकार की जगह बहुत कम बनी होगी, दुनिया की मैं नहीं कह सकता पर हिंदुस्तान में बहुत कम बने होंगे वो हमने बनाया है। 1/2.

Ashok Gehlot

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रियांबड़ी में बजरी माफिया के आतंक पर : देखिए मैं कह चुका हूं बजरी में सरकार पर माफिया हावी हो गए हैं, बजरी बहुत महंगी मिल रही है, हमारे वक्त में भी तकलीफ थी लोगों को मैं स्वीकार करता हूं हमारे वक्त में भी थी पर हमनें पूरा रोकने की कोशिश करी, पुलिस प्रशासन, जिला प्रशासन को पाबंद किया, आज इतना बड़ा नेक्सस बन गया ये कि नीचे से ऊपर तक ऐसा सिस्टम बन गया बना दिया अब इन लोगों ने कि कितने लोग कुचल कर मारे जा रहे हैं, पुलिस पर हमले हो रहे हैं, कई लोगों को कुचल देते हैं लोग जो इनके गैंग में शामिल नहीं होते हैं , इतनी घटनाएं हो रही हैं उसके ऊपर रोक नहीं लग रही है इस बात का दुख है और इसलिए ये बढ़ता ही जा रहा है बढ़ता ही जा रहा है,बढ़ता ही जा रहा है, और लूट मचा रही है इन लोगों ने यह स्थिति है और मुख्यमंत्री को मैं कहना चाहूंगा आप ध्यान क्यों नहीं दे पा रहे हो ? भई घूमना अच्छी बात है, अगर दौरे करते हैं मैं उसको बुरा नहीं मानता, कितने दौरे करो, पर दौरे करने के साथ साथ में गवर्नेंस भी तो करो शासन भी तो करो भई, और जो प्रॉब्लम बर्निंग प्रोब्लम आपकी है जैसे कानून व्यवस्था की स्थिति होती है घटनाएं रेप की हो रही हैं डकैती की हो रही हैं चोरी हो रही है, रोज हो रही हैं ये प्रायोरिटी पर होना चाहिए उनकी,बजरी अपने आप में ही प्रायोरिटी पर होनी चाहिए क्योंकि बजरी जब इतना, एक मध्यम क्लास का व्यक्ति भी वो मकान छोटा मोटा बनाता है उसको बजरी इतनी महंगी मिलती है कि वो बेचारा क्या मकान बनाएगा, तो तकलीफ मध्यम परिवार के लोगों को हो रही है सबको हो रही है उस पर ध्यान मुख्यमंत्री जी को देना चाहिए। मुख्यमंत्री जी की बहुत बड़ी ऑथोरिटी होती है, है, भजनलाल जी के पास में आज इतनी बड़ी पावर है उसको यूज करने की आवश्यकता है खाली उनको और कुछ नहीं करना है, प्रमोशन हो गए आईपीएस के, वहीं बैठे हुए हैं एसपी के रूप में जो डीआईजी बन गए, पहले आईएएस की यह स्थिति थी अब जा के लिस्ट निकली है तो इनको कौन रोक रहा है ? अब तो नए डीजी बन गए हैं , नए डीजी बनने के बाद में अब क्या तकलीफ आ रही है ? हो सकता है उनको कोई सलाह लेनी होगी, रुक गया होगा मान लो अब क्या दिक्कत है उनको ? तो ये जो जिस प्रकार गवर्नेंस हो रही है न उससे नुकसान इन्हीं को हो रहा है इन्हीं को हो रहा है।

Ashok Gehlot

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स्व. श्री भैरोंसिंह शेखावत की मूर्ति अनावरण कार्यक्रम को लेकर पूछे गए प्रश्न का जवाब : जोधपुर की बात छोड़ो, मेरे संबंध उनसे अच्छे हो गए थे। वो बत्तीस पर आ गए, मैं 156 पर आ गया। तब भी हमारा उस वक्त से ही संबंध अच्छे रहे। सीधा मैं शपथ लेकर उनके घर गया। वो लंबी कहानी छोड़ दो। मैं कह चुका हूं। मीडिया द्वारा पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों को डिले करने को लेकर पूछे गए प्रश्न का जवाब: आज फिर खबर पढ़ी मैंने कि OBC का जो रिकमेंडेशन है उसके लिए तो अपने हिसाब से करेंगे। नीयत खराब है, हाईकोर्ट दो बार कह चुका, इस सरकार को भंग करने लायक सरकार है ये। मैंने पहले भी कहा, ऐसी सरकार जो संविधान की पालना नहीं कर रही है। हमने प्रयास किया, नहीं माना स्ट्राइक के वक्त में हमें चुनाव करवाने पड़े। हम भी कोई बहाना ढूंढ लेते। आज ये चुनाव नहीं कराने के बहाने ढूंढते हैं। इतनी घबराई हुई है कि साफ हो जाएंगे हम नगर निकायों में, पंचायतों में। को-ऑपरेटिव में चुनाव नहीं करवा रहे। कल आए को-ऑपरेटिव वाले मेरे पास में। राजस्थान के अंदर स्थिति बड़ी गंभीर है, हर वर्ग असंतुष्ट है। ऐसी सरकार आजादी के बाद में कभी आई नहीं होगी, यह मैं कह सकता हूं। ये मंत्री जी हैं न आपके जो इनको मैं कहना चाहूंगा अगर आप ये दस साल में मेरे साथ दो-तीन बार चाय पी लेते तो इनको कम से कम मैं सुझाव देता काम कैसे कराए जाते हैं। ब्रॉड गेज आ गई जोधपुर के अंदर, दो ट्रेन चलती थी, अब पचास चलती होंगी। हिंदुस्तान भर में जुड़ गए हम लोग, पानी लेकर हम आ गए। क्या-क्या काम उस वक्त नहीं हुआ बताइए आप। एयरपोर्ट भी उस वक्त बना था। सब कुछ हमारे वक्त में काम हुए और काम भी इस प्रकार से हो गए जो लोग कल्पना नहीं करते थे। लोग मांग नहीं करते थे, उसके पहले काम हो जाते थे। यह हमारी अप्रोच थी। अब यह पता नहीं अपने को तीस मार खां समझते होंगे कि सब अक्ल मेरे में ही है इसलिए किसी को सलाह करते नहीं हैं। अरे हम भी यहां के एमपी रहे हुए हैं। हमसे बातचीत करते, बैठ के बातचीत करते, चाय पर बुलाते, चाय पर आते, कुछ करते तो हम भी अपने जो अनुभव थे, शेयर करते हम लोग। हो सकता है राजस्थान का या जोधपुर का भला ज्यादा होता। ये अपनी भूमिका पूरे राजस्थान में निभा सकते थे। पर ये तो ये तो यही हैं। बड़ी-बड़ी मीठी बातें करते रहते हैं और काम पास कर रहे हैं। तो भाई इनको समझाओ कम से कम जोधपुर में आपकी बारह साल में क्या उपलब्धि है। बारह साल हो गए मोदी जी को, बारह साल इनको हो गए। इनको बताओ एक उपलब्धि, बताएं कि मेरे वक्त में उपलब्धि हो गई। ये ओवर ब्रिज बन रहा है, पता नहीं कब बनेगा, वो भी मैंने गडकरी जी को कह करके इसको सेंक्शन करवाया। ठीक है वो केंद्रीय मंत्री हैं तो मुझे एतराज नहीं है। पर मेरा सुझाव था क्योंकि मैंने कहा स्टेट गवर्नमेंट से एक हज़ार करोड़ के मैंने सेंक्शन कर दिए इसके लिए, तो मुझे पता था कि ये जो आपका एरिया है, क्या बिल्डिंग का नाम क्या है, हैदर बिल्डिंग, यहां हमें तकलीफ आएगी क्योंकि अंडर ब्रिज बन सकता है ओवर ब्रिज भी हो सकता है, तो मैंने कहा ये काम, ये एक्सपर्टाइज़ करते हैं गडकरी जी और इनका डिपार्टमेंट। वो बनाएं इस बात को लेकर, डीपीआर करवा दी और मेरे ख्याल से मोदी जी ने शिलान्यास भी कर दिया, मैंने सुना है। पता नहीं आगे काम कितना बढ़ रहा है।

Ashok Gehlot

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आज जोधपुर सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत की : हालात बड़े गंभीर हैं और सरकार की तरफ से पूरी तरह से जोधपुर जिले की और संभाग की उपेक्षा हो रही है। कोई ध्यान देने वाला नहीं है। यह बहुत दुर्भाग्य है। सरकार बदलती है, पर हमने कभी भी सरकार आने के बाद में ये नहीं सोचा कि पूर्व मुख्यमंत्री का जिला हो या उनका क्षेत्र हो या संभाग हो, उसकी उपेक्षा की जाए। कभी नहीं सोचा। सोचा ही नहीं हम लोगों ने। और ये लोग पता नहीं इनके सोच में क्या ऐसा है, इसलिए हम बार बार कहते हैं कि इनका लोकतंत्र में यकीन नहीं है। यह बार बार दबाव देकर के सरकार चलाते हैं, तंग करते हैं, कांग्रेस की जो विचारधारा के लोग हैं उनको, ट्रांसफर पोस्टिंग करते हैं अनावश्यक, उनके क्षेत्र में काम नहीं करते हैं और तो और जो प्रोग्राम होते हैं तो लोकल MLA, MP को बुलाते नहीं हैं। यह इनका अलग ही सोच है। उससे कोई अच्छी परंपरा नहीं रहती। राजस्थान में परंपराएं कई मायने में अच्छी रही है। पूरे देश के तुलना में राजस्थान में कई परंपराएं अच्छी रही। हमारे जो पुराने नेता थे चाहे कांग्रेस के थे या बीजेपी के थे, उन्होंने उस वक्त में निभाया इस बात को, आना जाना भी था आपस के अंदर, सरकार बनने के बाद में भी, पर अब तो बिल्कुल ही शक की दृष्टि से देखते हैं। कोई पास बैठ जाए, वरिष्ठ नेता भी, उसके मन में चिंता रहती है कि पता नहीं कोई मुझे देख लेगा तो क्या होगा। ऐसी घटना हुई जयपुर के अंदर भी मैं देख रहा था, तो स्थिति बड़ी अजीब है कि वह कोशिश करता है चला जाऊं कि पता नहीं मेरा नंबर नहीं कट जाए। यह तो स्थिति राजस्थान के अंदर है। सरकार नाम की कोई चीज नहीं है। पूरा त्राहि त्राहि कर रहे हैं राजस्थान वाले। पेमेंट हो नहीं रहे किसी डिपार्टमेंट के, पेंशन तक नहीं हो रही हैं। मरने वालों को 5 लाख मिलते हैं, वो ढाई हजार रुके पड़े हैं। मुझे विश्वास ही नहीं होता है। स्थिति क्यों नहीं स्पष्ट करती है सरकार ? मुख्यमंत्री जी खुद क्यों नहीं स्पष्ट करते कि नहीं आपका जो फिगर आपके पास आए वो गलत आंकड़े हैं। यह क्यों नहीं कहते? एक हज़ार पांच सौ लोग हैं जिनके तो वापस भेज दिए कि आप उनको वापस जांच करके भेज दीजिए और डिले हो जाता है। तो इस स्थिति में सरकार चल रही है। कल मैं सिलिकोसिस के मरीजों से मिलने गया। मैंने सोशल मीडिया में डाला भी उसको। अब सरकार को चाहिए कि सोशल मीडिया में हम क्या डालते हैं विपक्ष वाले उनको देखें, डीआईपीआर में टीम बनाएं, वो उनको ब्रीफ करें कि भाई यह आजकल विपक्ष वाले बोल रहे हैं। उसमें हमें पब्लिक इंटरेस्ट में क्या फैसला करना है, कोई परवाह नहीं इनको। यह क्या इनके दिमाग में मानवता के बारे में। वो कोई बीजेपी, कांग्रेस के लोग नहीं है जो बीमार है। सिलिकोसिस होने के बाद तो पता नहीं वह कब तक जिंदा रहेगा। ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं मिल रहे उन लोगों को, कहां जाएं, कैसे कोशिश करें, कब एक्स रे होगा। सारे ब्लॉक कर दिए पहले वाले, नए खोल नहीं रहे। कोई करप्शन हो गया। मैंने सुना कोई दौसा की दो तीन डॉक्टर पकड़े गए होंगे गलत सर्टिफिकेट देने में। तो यह तो होता रहता है। यह किस स्कीम में नहीं होता है? करप्शन किस डिपार्टमेंट में नहीं होता? सब जगह कोई एक घटना दो घटना हो जाए, इसका मतलब यह नहीं कि पूरे उसको रोक दो। वो बेचारे तड़प रहे हैं, वो लोग तड़प रहे हैं। जिसकी सांस नहीं आती है, घरों में भी दमा वालों को, उन पर क्या बीतती है ? उनके तो परमानेंट दमा हो गया। बिना ऑक्सीजन के जिंदा रह नहीं सकते, उन हालातों में वो लोग हैं। मैं सिकंदरा गया हूं, भरतपुर गया, मुख्यमंत्री का जिला है वो और यहां मैं कल जा के आया हूं सूरसागर। अब मैं करौली जाऊंगा एक बार, वहां भी बहुत भयंकर स्थिति है। अब जब मैं जाने लगा हूं तो और जिले से रिपोर्ट आने लगी है। बालेसर वाले आ गए रात को कि हमारे यहां बहुत स्थिति खराब है। उमेश सिंह जी और अन्य सब लोग आए थे। कहने का मतलब यह कि स्थिति नाजुक है और आज जो हेडलाइन बनी थी, आपके जमीनों के कब्जा करने की, पता नहीं जैसे कोई देखता है, कभी जिंदगी में कभी सरकार वापस आएगी नहीं हमारी। अभी जो विधायकों का जो है यहां पर, वह तो मुझे लगता है कि ऐसा व्यवहार कर रहे हैं बीजेपी विधायक भी, पहले पकड़े गए थे जब भास्कर ने स्टिंग ऑपरेशन किया था। यही महाशय जी पकड़े गए थे, खींवसर वाले ही पकड़े गए थे। कोई जवाब नहीं आज तक इनका और विधायक पकड़े गए। जमीनों पर कब्जा और कर लिया आज जो खबर आई थी और तो और जो आपके केंद्रीय मंत्री जी है अजमेर वाले 90 लाख उठा लिए सब्सिडी के। वहां पर जमा करने से कोई थोड़ी क्राइम खत्म होता है। जमा करवा दिए तो कराने ही थे, पार्लियामेंट में इश्यू बन गया तो कराने ही थे। तो कितनी जगह की घटनाएं सामने आ रही है।

Ashok Gehlot

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कोटा में प्रसूताओं की मौत के सम्बन्ध में मीडिया से बातचीत की : देखिए बहुत ही गंभीर स्थिति है। जिस रूप में यह 4 मई से आने लगे अब आप सोच सकते हो कि 4 मई, 4 जून, लगभग डेढ़ महीना हो गया। तो इनमें से जो चार की डेथ हो गई है। और अभी तक उनका एफ़.एस.एल. वगैरह की रिपोर्ट आती है, अभी तक आई नहीं है। अब डॉक्टर कहते हैं चार-छह महीने लगते हैं। तो मालूम करना पड़ेगा वास्तव में चार-छह महीने लगते हैं या कम, या इमरजेंसी में और कहीं भेज के हम करवा सकते हैं क्या रिपोर्ट? राजस्थान के अलावा भी, यह तो हमें मालूम करना पड़ेगा, हमें मालूम नहीं। बाकी जो पाँच पेशेंट भर्ती हैं, उनकी किडनी की स्थिति में थोड़ा-बहुत फ़र्क है। किसी की ज़्यादा, किसी की कम पर सबकी किडनी डैमेज है। ठीक है? डायलिसिस किसी की तीन बार होता है सप्ताह में, किसी की दो बार, किसी की एक बार होता है। ये स्थिति बनी हुई है। परिवार वाले करीब-करीब ये सब गरीब हैं। एक भी परिवार ऐसा नहीं मिला जो कि यह सब कुछ करने के लिए सक्षम हो। एक बेटा मान लो टैक्सी ड्राइवर था, वो टैक्सी बंद हो गई, ये सेवा कर रहा है वो। ये स्पेशल केस है, ये मामूली केस नहीं है कि किन कारणों से ये प्रसव के बाद में स्थिति बनी है, ये बताने के लिए कोई तैयार नहीं है। डॉक्टर भी कहते हैं हमें नहीं मालूम। टीमें आई हैं, एम्स की भी आई हैं और स्टेट गवर्नमेंट की भी आई है, उसका तो मैं स्वागत करता हूँ कि कम से कम टीमें आई हैं, एम्स की भी और स्टेट गवर्नमेंट की भी। उनकी रिपोर्ट क्या है? यह यहाँ के डॉक्टरों को मालूम नहीं है और यह स्थिति इतनी सीरियस है, ऐसी बातें पब्लिक से भी शेयर करनी चाहिए कि भाई, कुछ कमी रह गई थी दवाओं में? या इलाज में? देखभाल में? ये नौबत क्यों आई? क्योंकि प्राइवेट हॉस्पिटल में दवाएं वही है कह रहे हैं। यहाँ के डॉक्टर कह रहे हैं प्राइवेट अस्पताल में दवाएं वही थी, वहाँ ये स्थिति नहीं बनी है। तो वहाँ नहीं बनी फिर यहाँ ही क्यों बनी? जेके के अंदर भी दो डेथ हुई। तो जेके में दो डेथ हुई, यहाँ चार डेथ, यहाँ दो? तीन डेथ। तीन डेथ, यहाँ आ गए, वो यहाँ आ गए शिफ्ट हो गए थे। यहाँ भी, आप ठीक कह रहे हैं। तो ये स्थिति है। मेरी मांग मुख्यमंत्री जी से और स्वास्थ्य मंत्री जी यह रहेगी कि इस केस को आप स्पेशल मानो। खाली इलाज फ्री हो गया, उसमें भी क्या है? कई लोग समझते नहीं हैं। दवाएं जैनरिक दी जा रही है मान लो। हमने खुद ने फैसला किया 10 साल पहले जैनरिक दवाओं का, डायलिसिस फ्री किया हम लोगों ने। परंतु कई लोगों को भ्रम रहता है, कई लोग कहते हैं ब्रांडेड दवाएं दो तो ज़्यादा से जल्दी ठीक हो जाते हैं। कुछ लोगों ने शिकायत करी, तो उनको भी तसल्ली दिलानी चाहिए कि जैनरिक दवाएं और ब्रांडेड में कोई फ़र्क नहीं है। फिर भी मान लो, क्योंकि स्पेशल केस है, तो मान लो पाँच मरीजों के लिए आप ब्रांडेड दवाएं देकर इनको खुश कर सकते हैं। कॉन्फिडेंस बिल्ड कर सकते हैं, तो करना चाहिए। बात छोटी सी होती है। कुछ इनको इमदाद मिलनी चाहिए। किसी के निधन पर इमदाद करते हैं लोगों की। उनकी तो ऐसी स्थिति है जो डेढ़-डेढ़ महीने से भुगत रहे हैं बेड पर। डीमोरलाइज हैं, ठीक होंगे तो बाद में हमारा क्या होगा? किडनी हमारी खराब हो गई तो डायलिसिस रोज कौन करेगा? यहाँ आने देंगे क्या? ये उनको भ्रम था तो मैंने डॉक्टर से बात करी और उनको विश्वास दिलाया कि आपको कोई मना नहीं करेगा। आप आएं, डायलिसिस करवाएं। पर जिंदगी में डायलिसिस पे जिंदा रहे आदमी, वो ही बहुत बड़ी बात है ना? अगर आपकी किडनियां खराब हो गई है, इलाज के अभाव में या गलत दवाओं से या किन कारणों से, तो सरकार का सबसे पहला काम है कि इसकी तह में जाना चाहिए कि ये हुआ क्यों है? लोग मरे क्यों हैं और क्यों भुगत रहे हैं? ये मालूम जब तक नहीं होगा, तब तक आगे बात बढ़ेगी ही नहीं। ये हम कह के आए है। 1/2 ,

Ashok Gehlot

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क्या सरकार इंतज़ार कर रही है कि यूपी अग्निकांड की तरह घटना यहाँ पर हो? कोचिंग हब क्यों नहीं कर रहे शुरू? अशोक गहलोत का बयान: जो घटना हुई है कल लखनऊ में, 15 बच्चे मर गए। यह घटना भी कोई मामूली नहीं है। क्या हमारी सरकार इंतज़ार कर रही है क्या ऐसी घटना का? मैं सरकार को कहना चाहूँगा, हमने क़रीब ₹400-500 करोड़ खर्च करके जयपुर में कोचिंग हब बना दिया है 240 इंस्टिट्यूशंस के लिए। 140 लोगों ने जमा करा दिए पैसे। इस सरकार की बेवकूफ़ी से 100 लोगों ने पैसे वापस ले लिए। हम तो आईआईटी का वहाँ ब्रांच खोलेंगे वहाँ पर, मज़ाक बना रखी है इन्होंने। आईआईटी की अगर आपको एक यूनिट खोलनी है वहाँ पर, नया भवन बना दीजिए उनके लिए। पर जो हमने काम किया कि जो क़रीब 1 लाख बच्चे तो गोपालपुरा बायपास पर पढ़ रहे होंगे। घटना हो चुकी है दिल्ली में, बच्चे मर चुके हैं पानी के अंदर डूब करके अंडरग्राउंड में। गोपालपुरा में गैस से 25-30 बच्चे घायल हो गए। तो क्या सरकार इंतज़ार कर रही है कि यूपी की तरह घटना यहाँ पर हो? क्या चाहती है सरकार? क्यों उसको बंद कर रखा है? पड़ी-पड़ी बिल्डिंग टूट जाएगी, उसमें लाइब्रेरी भी है उसके अंदर, सारी सुविधाएँ हैं, फ़ूड कोर्ट भी है बच्चों के लिए, अच्छे माहौल में बच्चे पढ़ सकते हैं, अच्छा माहौल उनको मिलेगा सब तरह से। समझ के परे है कि क्यों इस प्रकार की हरकतें कर रही है? हरकतें वहाँ ही नहीं कर रही है, जोधपुर में चार अस्पताल बिल्डिंग खड़ी पड़ी है। सुमेर पब्लिक लाइब्रेरी की बिल्डिंग बन चुकी है, वहाँ पड़ी है। स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट पड़ा हुआ है। मैंने मुख्यमंत्री खुद को रिक्वेस्ट करी, टेलीफ़ोन पर बात करके, जब मेरे बर्थडे पर बात हो रही थी। मैंने कहा, "श्रीमान जी, आप आइए, हम स्वागत करेंगे आपका वहाँ। आप इनका क्यों नहीं फीता काट देते हो?" कि "नहीं, मैं जल्दी करूँगा।" वो जल्दी आज तक नहीं आई है। कल मुझे किसान मिले, 2025 का मुआवज़ा अभी तक नहीं मिला उन किसानों को। पहले 23-24 का रुका हुआ था। यह आपके लूणी के जो हमारे मंत्री महोदय हैं, इनके क्षेत्र का ही था वो। और भी कई जगह से शिकायत आ रही थी। पर सरकार मुआवज़ा टाइम पर दे नहीं पा रही है और तमाम डिपार्टमेंट के पेमेंट रुके पड़े हैं। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि हमारी फाइनेंशियल स्थिति बहुत ही नाज़ुक है, हम पेमेंट नहीं कर पाएँगे 6 महीना, साल भर, कुछ तो कहे। सारे डिपार्टमेंट में पेमेंट रुक गए, ₹2 करोड़ के चेक नहीं कट रहे हैं। डबल इंजन सरकार है, दिल्ली में इनकी खुद की सरकार है, इनको एक्स्ट्रा इमदाद मिल सकती है, मिल भी रही होगी। पर मैनेजमेंट ऐसा बकवास कर दिया है, कोई डिपार्टमेंट का पेमेंट नहीं है। बर्बाद हो गए लोग-बाग, दुखी हो गए हैं। समझ नहीं पड़ रही है पेंशन टाइम पर नहीं मिलती, कुछ नहीं हो रहा है। मतलब यह स्थिति बनी है। ख़बर है गंगानगर, हनुमानगढ़ के अंदर और भी कई जगह कि गेहूँ की ख़रीद नहीं हो रही है। वहाँ हड़तालें चल रही हैं, लोग दुखी हैं, बारदाना नहीं आ रहा है। जो टारगेट फिक्स करते हैं, वो पूरा ख़रीद भी नहीं पा रही सरकार उनको और टाइम जो है पहले 30 जून तक का होता था ख़रीदारी का, इस बार 31 मई कर दिया, उसके कारण से अब बार-बार आगे बढ़ा रहे हैं और 30 जून भी आ जाएगा। तो किसान बर्बाद हो रहा है राजस्थान का, यह मैं कहना चाहूँगा।

Ashok Gehlot

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कांग्रेस की एकजुटता पर बार बार सवाल उठाने वालों को जवाब : कांग्रेस एकजुट है। राजस्थान में कोई गुटबाजी नहीं है, देश में कोई गुटबाजी नहीं है। कांग्रेस एकजुट है और अगर किसी को ये कन्फ्यूजन है तो हट जाना चाहिए, बार बार ये क्वेश्चन करते हैं लेकिन इसमें कोई दम नहीं है। भाजपा में गुटबाजी को लेकर प्रतिक्रिया : हमने तो कभी आरोप लगाया नहीं,कभी उनके उनके फैसलों को लेकर कुछ कहा क्या ? हमने कहा क्या कि अभी चुनाव हुए राज्यसभा के, आपने राजेंद्र राठौड़ को टिकट क्यों नहीं दिया? मैंने कही क्या यह बात ? भाजपा के बारे में कहने की बातें बहुत हो सकती हैं। हम तो बोलते नहीं लेकिन वो बोलते रहते हैं हमारे पार्टी के बारे में। पंचायती राज और स्थानीय निकाय चुनाव का इंतजार बढ़ते जाने कर पत्रकार के सवाल का जवाब : सबको मालूम है कि इतने घबराए हुए हैं कि चुनाव के अंदर साफ हो सकते हैं। हाई कोर्ट सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद में भी दुस्साहस देखिए कि ये उसके बाद भी चुनाव नहीं करवा रहे। केंद्र में सरकार इनकी है इसलिए किसको कहें? वरना यह तो बर्खास्त करने लायक सरकार है। गवर्नर को रिपोर्ट देनी चाहिए राष्ट्रपति के पास में कि क्यों नहीं चुनाव करवा रहे हैं? संविधान में जो कानून पास किया हुआ है, आप धज्जियां उड़ा रहे हो। जब वर्ष 98 में हमारी सरकार थी और कर्मचारियों की स्ट्राइक चल रही थी तो हमने कहा कि चुनाव कैसे होंगे, हड़ताल चल रही है। तब भी हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि चाहे स्ट्राइक हो चाहे कुछ भी हो आपको टाइम पर चुनाव करवाने पड़ेंगे, इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है। आज आप देख लीजिए बार बार हाई कोर्ट सुप्रीम कोर्ट कह रहे हैं। उसके बाद भी स्थिति बनी हुई है। मुख्यमंत्री जी द्वारा माउंटआबू में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को लेकर बयानबाजी पर पत्रकार के सवाल का जवाब : अब देखिए भजन लाल जी की बातों को मुझे कहना पड़ेगा कि गंभीरता से नहीं लेना चाहिए। गंभीरता से मत लो, क्योंकि वो जब से मुख्यमंत्री बने हैं, उनकी पार्टी के लोग ही उनके बारे में बातें बोल रहे हैं जो मैं कह रहा हूं कि हमारे काम होते नहीं है, हमारे मंत्री कोई बात करें तो सुनते नहीं हैं और मंत्री भी ऐसे ऐसे हैं जो गाली गलौज कर देते हैं थानों में जाकर के, कोई कलेक्टर को धमका देते हैं। किरोड़ीलाल मीणा जी तो कह रहे कि एसीबी दबाव में काम कर रही है, मेरे खिलाफ मुकदमा झूठा बना रही है। एसीबी तो मुख्यमंत्री के पास है तो किस पर आरोप लगा रहे हैं वो ? जिस सरकार की ऐसी स्थिति हो, उनके मुख्यमंत्री के बारे में क्या कमेंट करूं? वो आपसे मिल लिए बड़ी बात है। मीडिया को आज तक तो उन्होंने कोई जवाब दिया नहीं है। उन्होंने आज तक मीडिया के क्वेश्चन का कोई जवाब नहीं दिया है। ज्यादा से ज्यादा वो कभी बोल गए होंगे मीडिया के सामने, बोलकर रवाना हो गए होंगे। उनको मीडिया को फेस करना चाहिए, क्वेश्चन का जवाब देना चाहिए। उससे उनको ही फायदा है। कई बातें मीडिया वाले बताएंगे। जमीनी हकीकत क्या है? फायदा किसको होता है? सरकार को होता है पर ये इनकी फितरत में नहीं है।

Ashok Gehlot

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धरना दे रहे आनंदीलाल पोद्दार मूक बधिर विद्यालय के विद्यार्थियों से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत की : लोकसभा का मेंबर बना पहला काम मैंने किया, यह जो बच्चे हैं, डेफ एंड डम्ब ( मूक-बधिर), तो मैंने उन्हीं के लिए गांधी बधिर विद्यालय खोला था। आज इस बात को करीब 40 साल से ज्यादा हो गया। अब वो बढ़ते-बढ़ते कॉलेज बन गई है जोधपुर के अंदर। इस प्रकार से मेरे को उस वक्त से मालूम है कि डेफ एंड डम्ब बच्चों की प्रॉब्लम क्या रहती है। आजकल तो बहुत ही आधुनिक तकनीकें आ गई हैं। हमारी गवर्नमेंट ने ही शुरू की थी देश के अंदर, बाद में भारत सरकार ने शुरू किया। 7 साल- 8 साल तक के बच्चों को जो है कॉकलियर इंप्लांट लग जाते हैं। बच्चे का अगर बचपन में सरकार ऑपरेशन करवा देती है जैसे मैंने शुरू किया राजस्थान के अंदर, मेरे दूसरे कार्यकाल के अंदर, साढ़े 6-7 लाख का खर्चा आया। हमने जो भी बच्चा आया, सबका कॉकलियर इंप्लांट लगाया तो वो बच्चे उसके बाद में बोलना और सुनना सीख जाते हैं। जब सुनना सीखेंगे तो बोलना सीख जाते हैं। प्रॉब्लम आती है सुनने में। अगर पैदाइश से ही वो सुन नहीं सकता, तो ये बोलेगा क्या? जब सुनाई ही नहीं देता है तो कौन क्या बोल रहा है। तो ये जो नई तकनीक आई है, बहुत ही कारगर है। अब मैंने सुना भारत सरकार ने भी इसके ऊपर ध्यान दिया है। तो राजस्थान तो वो राज्य है। अभी बच्चों की प्रॉब्लम यही थी, एक तो टीचर्स जो हैं, ये साइन लैंग्वेज होती है, बिना साइन लैंग्वेज के जो टीचर लगे हुए हैं अधिकांश, वो क्या पढ़ाएंगे जब उनको साइन लैंग्वेज खुद को नहीं आती है, इनको क्या पढ़ाएंगे? और ये तमाम बच्चे बड़े एक्सपर्ट बन गए हैं, काफी लोग, जो साइन लैंग्वेज से बातचीत कर सकते हैं सब।तो इनकी उस संबंध में समस्याएं हैं। फिर व्यवहार क्या है टीचर्स का, इनके नियम-कायदे फॉलो होते हैं कि नहीं होते हैं, सरकार सुविधाएं देती है वो इन तक पहुंचती हैं कि नहीं पहुंचती हैं, बिल्डिंग जर्जर हालत में है, बाथरूम गंदे पड़े हैं, गंदगी साफ नहीं होती है, जनरल समस्याएं इन्होंने बताई हैं। तो मैं मुख्यमंत्री को खुद लिखूंगा डी.ओ. लेटर, बताऊंगा कि मैं जाके आया हूँ और मेरा खुद का बैकग्राउंड इन्हीं की सेवाओं से शुरू हुआ है। मैं उनको अहसास करवाने की कोशिश करूँगा कि आप भी ध्यान दें। ये लड़के-लड़कियाँ यहाँ पर करीब 300 के लगभग पढ़ रहे हैं यहाँ पर। तो जब बोल नहीं सकते, सुन नहीं सकते, आप सोच सकते हो क्या बीत रही होगी। साइन लैंग्वेज ही है जिससे अपना वो जीवन बसर कर सकते हैं। ये बच्चे बड़े उम्र के हैं, इनका वो ऑपरेशन भी नहीं हो सकता है। ये स्थिति है। तो इसलिए मैंने जान-बूझकर उचित समझा कि मैं खुद जाऊँ। अभी मिस्टर जूली साहब आके गए थे, वो विपक्ष के नेता हैं, वो भी उठाएंगे असेंबली में भी। वो भी लिखेंगे मुख्यमंत्री जी को, हम दोनों बात करेंगे आपस के अंदर। और जो भी हो सकता है। ये संस्थान बहुत शानदार संस्थान है । पोद्दार जी के नाम से बनी है, 50 साल पहले बनी होगी, इसका अपना अलग महत्व है राजस्थान के अंदर। बाकी तो धीरे-धीरे पनपती हैं, सात हैं, आठ हैं, जो भी संस्थान हैं। दुर्भाग्य है प्रदेश का कि मैंने जो बाबा आमटे विश्वविद्यालय खोला यहाँ निशक्तजनों के लिए, उसमें डेफ एंड डम्ब भी आते हैं, ब्लाइंड भी आते हैं, हैंडीकैप्ड भी आते हैं। वो विश्वविद्यालय कागजों के अंदर है। वीसी को बिठा रखा है ये शिक्षा संकुल के अंदर। सरकार की ये स्थिति है, ढाई साल से वो वीसी बिठा रखा है वहाँ पर। अब रिटायरमेंट हो गया उनका। कुछ सेक्टर ऐसे होते हैं जहाँ राजनीति बीच में नहीं आती। उसमें तो सरकार को चाहिए चाहे कोई पार्टी के बच्चे पढ़ते हों, किसी परिवार के कोई, किसी पार्टी का कोई मतलब नहीं है। ये तो सेवा का काम है। इनकी सेवा करना, ईश्वर की सेवा करना है।

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राजस्थान में राज RSS वाले कर रहे, ये खाली मुखौटे हैं जोधपुर में आज मीडिया से बातचीत की: अशोक गहलोत का जवाब: देखिए राजनीति में जो है, झूठे आरोप नहीं लगाए जाते हैं। अगर आपके पास तथ्य है, तो उस पर बात करो। किरोड़ी मीणा जी जब सरकार में नहीं थे, तब भी वो लगातार आरोप लगाते थे। उनकी जो प्रकृति में है कि वो, आंदोलन करते रहते हैं लगातार, आप देखते हो उनको 15-20 साल से। तो एक अलग किस्म का प्राणी हैं वो। वो पहले भी आरोप लगाते थे अब भी लगा रहे हैं, अनावश्यक है। पार्टी के जो अध्यक्ष होते हैं उनकी एक अलग प्रतिष्ठा होती है। उस पे आप बार-बार चोट कर रहे हो। आरोप लगा रहे हो बिना तथ्यों के। तो आप बताइए कि पार्टी में रिएक्शन होगा? हमारी पार्टी में रिएक्शन है। डोटासरा जी को खुद को लगता है भाई ये क्या आरोप लगा रहा है वो भी बिना तथ्यों के। हम सब को लगता है। ये किरोड़ी मीणा जी को खुद को सोचना चाहिए, वो क्या किस प्रकार की उनकी अप्रोच है काम करने की है। छापे डाल रहे हैं और छापे के साथ जो जाते हैं लोग उनके, वसूली करते हैं वो। ये तो प्रूव हो गया है। जब प्रूव हो गया है तो कहते हैं कि एसीबी भी दबाव में काम कर रही है। तो भाई एसीबी तो दबाव में जब से डीजी साहब आए हैं, पहले मैंने कहा ये आदमी तो भला है डीजी। वो पूरी तरह सीएमओ के और सीएम के दबाव में है ये। और इनके जो नीचे अधिकारी है, वो भी इनकी बात नहीं मानते हैं। वो इनको उल्टा दबाते हैं। तो मुझे लगता है कि एसीबी का जो डीजी है, वो खुद परेशान होगा, मेरे ख्याल से जहां तक मैं समझता हूँ या जहाँ तक मेरे पास वहां से रिपोर्ट आती है। वहाँ के जो काम करने वाले अधिकारी कहते हैं ना कि भाई क्या हो रहा है हमारे यहाँ? स्थिति एसीबी की बहुत भयानक खराब है। दबाव में काम हो रहे हैं। मुख्यमंत्री जी को ऑबलाइज करने के लिए फैसले हो रहे हैं। आईओ कह रहा भाई ये मुल्जिम नहीं बनता हमारा। और ऊपर से कहते हैं डीजी साहब और जो दबाव आता है उनके ऊपर, नहीं आप इनको अरेस्ट करो। ऐसा मैंने आज तक कभी देखा नहीं। तीन-तीन बार हम भी मुख्यमंत्री रहे हैं। एसीबी में कोई पंचायत नहीं करनी चाहिए किसी को भी। यहाँ पंचायतें नहीं हो रही हैं। आईओ कह रहा भाई ये अरेस्ट नहीं हो सकता है क्योंकि इसमें कोई केस नहीं बनता। आप इसको अरेस्ट कीजिए। अरेस्ट हुए भी हैं, जिनमें महेश जोशी भी हैं। आईओ ने मना किया। वो ऑलरेडी द्वारा वैसे ही केस में अरेस्ट हो चुके थे। यहाँ वापस अरेस्ट कर लिया, क्या मजाक बना रखी है? क्या मुख्यमंत्री को दिखता नहीं है कि ये क्या हो रहा है? उनका खुद का नाम आता है कि दबाव आता है। शायद आरएसएस वालों का आता होगा। आरएसएस के दबाव होने के बाद में मुख्यमंत्री हथियार डाल देते हैं। राज आरएसएस कर रहा है ये तो मुखौटे हैं खाली। मुझे लगता है कि राजस्थान के अंदर आजकल जो ये लोग राज करते हैं ये मुखौटे बने हुए हैं। राज आरएसएस वाले कर रहे हैं। ट्रांसफर, पोस्टिंग, करप्शन सब वहीं से डायरेक्शन आते हैं। हालात बड़े गंभीर हैं राजस्थान के। ऐसी इनकी स्थिति बनेगी इस बार राजस्थान की, जनता जो है वो जागरूक है। ये कुछ भी कर लें, ये मुख्यमंत्री बदल देंगे ना, तब भी कुछ नहीं होने वाला है, अगली बार सरकार बदल के रहेगी। थैंक यू।

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आज पीसीसी मुख्यालय पर मीडिया से बातचीत 'वोट चोर गद्दी छोड़ ' हर गांव तक बात पहुंच गई, हर गांव तक बात पहुंच गई कि भई वोटों की चोरी हो रही है इसलिए चुनाव जीते जा रहे हैं, ये बहुत खतरनाक है, डेमोक्रेसी के लिए खतरनाक है, डेमोक्रेसी में सबसे पहला काम होता है चुनाव आयोग का वो निष्पक्ष चुनाव करवाए ,कोई पार्टी जीते कोई उम्मीदवार जीते अलग बात है, फिर जिस प्रकार का व्यवहार किया गया, राहुल गांधी जी ने एक क्वेश्चन रेज़ किया कि भई आप हमें मशीन रीडेबल दे नहीं रहे हो आप वर्ना हम फटाफट इस काम को कर सकते थे तो आप जो है हमें मजबूरी में छह महीने लगे, छह महीने में हमने नतीजे पर पहुंचे हम लोग, लगभग एक लाख फर्जी वोट निकले अगर इलेक्शन कमीशन जांच करवा देता उस वक्त, इलेक्शन कमीशन जांच करवा देता उस वक्त तो उसमें कितने वोट कहां गड़बड़ हुई कहां नहीं हुई स्पष्ट हो जाता, और कायदा ये होता आजतक आजादी के वक्त में जब आपको मालूम है हिंदुस्तान पाकिस्तान बना था तब कितने लोग हिन्दुस्तान आए होंगे कितने लोग पाकिस्तान गए होंगे तब भी इलेक्शन कमीशन ने चुनाव करवा दिए जबकि शिक्षा नहीं थी वक्त में, लोग चिन्ह को नहीं समझते थे पढ़ नहीं सकते उस से लगाकर आज तक का इतिहास है,चुनाव लगातार हो रहे हैं, चुनाव आयोग के जो चेयरमैन हैं न और उनके जो मेंबर हैं उनकी गलतियों से उनके व्यवहार से ये स्थिति बनी है देश के अंदर और ये इतना सीरियस प्वाइंट बन गया ,पहले शक था ईवीएम पर देशवासियों को क्योंकि अब अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी जापान सब जगह वोट बैलेट से होता है, पहले वहां भी मशीनें थी वो शक था ही पहले से ही, सुप्रीम कोर्ट तक लोग गए तो उन्होंने कहा वीवीपेट लगा दो, ये चल रहा था अब ये जो नया जो सर्वे हुआ है इधर आप दो महीने पहले चुनाव के आप एसआईआर करवा रहे हो ये डेढ़ साल पहले होता अगर आपको इंटेंसिव ये करना था आपको ये सर्वे वोटर लिस्ट का कम से कम एक डेढ़ साल पहले शुरू होता इतना बड़ा काम ये है, आपने दो महीने पहले डेढ़ महीने पहले ये शुरू कर दिया असंभव है कोई गलती बताए भी, उसकी अपील भी होती है, प्रोसेस पूरा होता है उसमें आप वो काम कर नहीं सकते,कब तो अपील करोगे, कब क्या करोगे कुछ पता नहीं पड़ता है ऐसी स्थिति में चलता है तो ऐसी स्थिति जब हम लोग इश्यू प्रारंभ हुआ है तो उसके अंदर तमाम तरह की गड़बड़ियां पैदा हुईं शक शुभा पैदा हुआ पूरे देश के अंदर और पता नहीं एसआईआर में क्या क्या करेंगे 65 लाख वोट काट दिए हैं कब तो उनकी अपील हो, कब अपील में सुनवाई हो तो डेढ़ महीने पहले चुनाव में एसआईआर करवाते हैं क्या , ये बेवकूफियों से सब कुछ हो रहा है इसलिए राहुल गांधी जी ने खड़गे साहब ने कहा है प्रदेश कांग्रेस कमेटियों को आप तमाम लोगों से मीटिंग करो और आप सबसे साइन करवाओ कि वोट की चोरी किस प्रकार हो रही है और अगर वोट की चोरी होगी निष्पक्ष चुनाव कभी हो नहीं पाएंगे , निष्पक्ष चुनाव नहीं होंगे तो डेमोक्रेसी को खतरा है देश के अंदर मुख्य बात ये है और डेमोक्रेसी को बचाना हर नागरिक का अधिकार है क्योंकि अधिकार नहीं है कर्तव्य है, अगर वोट चोरी नहीं रुकी निष्पक्ष चुनाव नहीं हुए चुनाव आयोग के तो आप बताइए वोट का अधिकार चला जाएगा। आम आदमी की जिम्मेदारी है अपने वोट के अधिकार को बचाने के लिए इस अभियान में हिस्सेदारी करे और वोट चोरी जो एक कैंपेन चल रहा है वो कामयाब करे।

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आज एयरपोर्ट पर मीडिया से बात की- राज्य सरकार के गुजरात में प्रशिक्षण के लिए जाने के संदर्भ में पूछे गए सवाल के जवाब में : ये देखिए पूरी सरकार तमाम मंत्रिमंडल ही नहीं मुख्यमंत्री सहित दोनों डिप्टी सीएम,तमाम विधायक सत्ता पक्ष के,पूरा खाली कर दिया राजस्थान को, वैसे राजस्थान की स्थिति ऐसी बन गई है यहां हत्याएं हो रही हैं लगातार एक के बाद एक, एफआईआर दर्ज नहीं करते हैं आत्महत्याएं हो रही हैं ,इस माहौल में राजस्थान चल रहा है। गर्मी बढ़ने लग गई है तो पानी की किल्लत हो रही है, बिजली की मांग हो रही है, समस्याओं से घिरा हुआ राजस्थान है मेरे हिसाब से तो,और करप्शन की तो हदें पार हो गई हैं। करप्शन की हदें पार हो गई हैं अगर 10 करोड़ रुपए की कोई रिश्वत दे रहा है इसके मायने हैं कि वहां कितना अवैध खनन हो रहा होगा। अगर 10 करोड़ की ऑफर की हुई है, बारगेनिंग हुई है कम ज़्यादा की, सच्चाई क्या है वो तो एसीबी जाने, पर 10 करोड़ की रिश्वत का अगर लेन देन होने का अगर मान लीजिए वहां पर सौदा हुआ है इसका मतलब कितना बड़ा अवैध खनन हो रहा है, कितना नुकसान हो रहा है राजस्थान सरकार को रेवेन्यू को लेके। तो चारों ओर की स्थिति ऐसी बन गई है उस में आप जा रहे हो वहां पर प्रशिक्षण लेने के लिए देने के लिए, डेढ़ साल के बाद में ! डेढ़ साल तक इसका मतलब आपकी सरकार निकम्मी साबित हुई,नकारा रही, कुछ काम नहीं किया। इसलिए आप जो है डेढ़ साल के बाद में अब आप प्रशिक्षण लेंगे वहां पर। वो क्या तुक है वहां पर ? डेढ़ साल में बिल्कुल किए ही नहीं हैं आपने कुछ भी नहीं किए हैं तो अब प्रशिक्षण ले रहे हो आप इसलिए मैने कहा कि ये क्या हो रहा है। मेरी आलोचना जो है वो आलोचना के साथ साथ सलाह भी होती है : मेरी आलोचना जो है वो आलोचना के साथ साथ सलाह भी होती है। मेरा अपना अनुभव है तो मेरी ड्यूटी बनती है कि मैं चाहे सत्ता पक्ष हो चाहे विपक्ष हो, अगर मैं बात कहूं खाली आलोचना करने के लिए नहीं कहूं बल्कि उसमें सलाह भी होती है। अब समझने वाला समझता है अलग बात है डिपेंड करता है कि वो क्या समझते हैं वो उनके ऊपर है पर मेरी इच्छा कि मैं कोई बात कहूं आलोचना करूं, तो साथ में कुछ सलाह भी दूं मैं। मैं कम से कम 100 साल जिंदा रहना चाहता हूं राजस्थान प्रदेशवासियों की सेवा करने के लिए इसलिए मैंने कहा। अब मुख्यमंत्री जी ने शायद लिखा है कि मेरे मानसिक संतुलन बिगड़ गया है, मेरा कोई मानसिक संतुलन नहीं बिगड़ा है, मैं मुख्यमंत्री जी को,प्रधानमंत्री मोदी जी को, विश्वास दिलाता हूं मेरा मानसिक संतुलन बिल्कुल नहीं बिगड़ा है, बल्कि, गांधी जी ने तो कहा था कि मैं 125 साल जिंदा रहना चाहता हूं, गांधी जी ने कहा था मैं 125 साल जिंदा रहना चाहता हूं सेवा करने के लिए, और मैं कह रहा हूं मैं कम से कम सौ साल जिंदा रहना चाहता हूं राजस्थान प्रदेशवासियों की सेवा करने के लिए। जिसकी भावना इतनी बड़ी हो कि मुझे सौ साल तक सेवा करनी है उसका मानसिक संतुलन हमेशा कायम रहेगा ये मेरा कहना है मुख्यमंत्री भजनलाल जी को। गृह मंत्रालय के 7 तारीख को मॉक ड्रिल को लेकर एडवाइजरी जारी करने तथा सरकार के गुजरात में होने के सवाल पर : उस पे मेरा कोई कमेंट नहीं हो सकता क्योंकि वो तो पहलगाम के बाद में जिस प्रकार से विचार आ रहे हैं रक्षा मंत्री जी के, प्रधानमंत्री जी के, और पूरा देश एकजुट है, विपक्ष कह चुका है कि हम आपके साथ में हैं। राहुल गांधी जी कह चुके हैं ,तो मेरा मानना है कि ऐसे मामले के अंदर एक बार जब विपक्ष भी एकजुट है सरकार के साथ में, अब किसी को भी कमेंट नहीं करना चाहिए उसके बारे में क्योंकि जो फैसला करना है सरकार को करना है और सरकार को भी फैसला सोच समझ कर करना है। ऐसे फैसले कोई जल्दबाजी में नहीं होते हैं ऐसे फैसले कोई अति उत्साह समझ लिए अति प्रतिक्रिया समझ लीजिए उसमें नहीं होता है , ये फैसले बहुत सोच समझ के देश हित में क्या है हमारे, हमारे मुल्क के हित में क्या है उसको देख कर करने पड़ेंगे, ये पूरी छूट प्रधानमंत्री मोदी जी को, और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को होनी चाहिए। उसमें बार बार कमेंट नहीं करना चाहिए मेरा मानना है। हां ये बात जरूर है कि लोग पूछते हैं कि आप बड़ी बड़ी बातें तो करते हो, पर आपके बारह दिन हो गए हैं आप क्या जवाब दे रहे हो जनता को।

Ashok Gehlot

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