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Ana Sayfaya Dön

जब आख़िरी खेजड़ी काट दी जाएगी, आख़िरी ओरण-गोचर की ज़मीन पर कब्ज़ा हो जाएगा और हमारी आख़िरी नाड़ी भी सूख जाएगी… तब सत्ता की कुर्सियों पर बैठे हाकिमों को समझ आएगा कि तिजोरियों में भरे काग़ज़ के नोट न तो #मारवाड़ की प्यास बुझा सकते हैं, न ही अकाल...

16,277 görüntüleme • 7 ay önce •via X (Twitter)

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प्रेमानंद महाराज की मांग का संतों ने किया समर्थन, फलाहारी महाराज ने लिखा मुख्यमंत्री को पत्र.. ब्रज चौरासी कोस यात्रा में अंडा,मांस, मदिरा बेचने पर रोक लगाने के लिए फलाहारी महाराज ने लिखा मुख्यमंत्री को पत्र फलाहारी महाराज ने पत्र में लिखा है कि आप सनातन हिंदुओं के गौरव हैं और गोरक्ष पीठ के पीठाधीश्वर भी हैं ,आप ही बृजवासियों की भावना को समझ सकते हैं ,आप ही वह वीर पुरुष हैं जो इस महत्वपूर्ण कार्य को कर सकते हैं, आपसे प्रार्थना है संपूर्ण ब्रज भूमि क्षेत्र में अंडा , मांस,शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की कृपा करें जिससे आने वाले यात्रीयों की भावना आहत न हो, यहां पर भगवान श्री राधा कृष्ण ने अपनी बाल लीलाएं की हैं ,माखन चोरी लीला की है, महारास किया है ।यदि ब्रजभूमि में मांस , मदिरा बिकेगी तो स्वर्ग में बैठे हुए देवता भी नाराज हो जाएंगे ,गौ माता दुखी हो जाएगी, प्रेमानंद महाराज जी और बृज भूमि की साधु संत भी नहीं चाहते कि बृज भूमि के अंदर अंडा , मांस,शराब की बिक्री हो ,क्योंकि उनकी भजन साधना में विघ्न होता है ,शराब पीकर यहां पर लोग क्राइम करते हैं, साध्वी इंदुलेखा, महामंडलेश्वर रामदास जीमहाराज सहित सभी साधु संत चाहते हैं कि ब्रजभूमि क्षेत्र मास , मदिरा मुक्त हो

Dr. Siddhartha Bhattacharya

14,324 görüntüleme • 4 ay önce

उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के थाना सुरीर क्षेत्र में हुए गोलीकांड के घायलों का हाल जानने गाँव भगत नगरिया पहुचने के रास्ते में, मुझ पर और हमारे साथियों पर पथराव व हमला किया गया। इस हमले की भयावहता का अंदाजा वीडियो से लगाया जा सकता है, जो दर्शाता है कि जातिवादी आतंकियों ने किस तरह से सुनियोजित तरीके से इस हमले की तैयारी की गई थी। यह हमला केवल हम पर नहीं, बल्कि संविधान, बाबा साहब के विचारों और बहुजन समाज के स्वाभिमान पर हमला है। उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पर हो रहे निरंतर हमलों को देखते हुए यह स्पष्ट है कि जातिवादी गुंडों को सत्ता का संरक्षण प्राप्त है। प्रशासन अगर निष्पक्ष होता तो न गोलीकांड होता, न आज हम पर पुलिस की मौजूदगी में यह हमला होता। उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज के खिलाफ हो रहे हमले कोई संयोग नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा हैं। हमारी बारातों को रोका जाता है, हमारे बेटों को मारा जाता है, हमारी बेटियों पर अत्याचार होते हैं, और जब हम न्याय मांगते हैं तो हम पर ही हमले होते हैं। लेकिन अब बहुत हो चुका! Government of UP से मांग करते हैं कि:- 1. मामले की न्यायिक जाँच हो और दोषी पाये जाने वाले लोगों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाये। 2. पीड़ित परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए। 3. उत्तर प्रदेश सरकार जातिगत हिंसा पर अपनी चुप्पी तोड़े और अपराधियों को संरक्षण देना बंद करे। अगर सरकार न्याय देने में नाकाम रहती है, तो याद रखे—हम अपने हक और सम्मान के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। हम संविधान में विश्वास रखते हैं, लेकिन अगर अन्याय और अत्याचार यूँ ही जारी रहा, तो हम अपना न्याय खुद लेना जानते हैं। जिनको लगता है कि इस तरह के कायराना हमले से हमारी न्याय के लिये लड़ने की हिम्मत टूट जाएगी तो वो गलतफहमी में है। हम न डरेंगे, न झुकेंगे, न रुकेंगे! यह लड़ाई सिर्फ मथुरा की नहीं, यह लड़ाई पूरे बहुजन समाज के भविष्य की है। हम बाबा साहब के सिपाही हैं, अगर कोई हमें रोकने की कोशिश करेगा, तो वह खुद मिट जाएगा - लेकिन बहुजन समाज रुकेगा नहीं! इंकलाब होगा! न्याय होगा! और सत्ता की कुर्सियाँ हिलेंगी!

Chandra Shekhar Aazad

70,937 görüntüleme • 1 yıl önce

सवाल: मुख्यमंत्री जी की चौपाल के संबंध में आपका क्या कहना है? जवाब: मैंने पहले भी कहा है कि असली 'चौपाल' का मतलब होता है कि पहले गाँव में बाकायदा सूचना दी जाए कि आज इतने बजे मुख्यमंत्री जी की चौपाल होने वाली है। गाँव के सभी लोग, जिनकी परेशानियाँ हैं, तकलीफ़ें हैं, समस्याएँ हैं, वे सब वहाँ खुलकर आएँ। कोई ज्ञापन दे रहा हो, कोई अपनी बात बता रहा हो और मुख्यमंत्री वहीं अधिकारियों को समाधान के निर्देश दे रहे हों; इसे कहते हैं असली चौपाल। लेकिन वहाँ तो चुनिंदा (Selected) लोगों को बुलाया जा रहा है, जो न तो कोई सवाल पूछ सकते हैं, न कोई ज्ञापन दे सकते हैं, न अपनी समस्याओं पर चर्चा कर सकते हैं और न ही कोई ज़मीनी फीडबैक दे सकते हैं। असली चौपाल का मकसद ही यह होता है कि गाँव के लोग सरकार और नीतियों के बारे में क्या सोचते हैं, उनकी क्या समस्याएँ हैं और उन्हें कैसे दूर किया जा सकता है, इसका पता चले। अगर मुख्यमंत्री के पास सीधे जनता से ऐसा फीडबैक आता है, तभी प्रदेश और गाँव का भला हो सकता है। ग्रामीण जनता को यह भरोसा होना चाहिए कि 'हमने मुख्यमंत्री से बात की, उन्होंने तुरंत आदेश दिया और हमारा काम हो गया।' आज धरातल पर वैसी चौपालें नहीं हो रही हैं, यही मेरी मुख्य शिकायत है।

Ashok Gehlot

33,503 görüntüleme • 3 ay önce