Loading video...

Video Failed to Load

Go Home

जब पीड़ा से मन...!

35,324 views • 2 years ago •via X (Twitter)

2 Comments

Anil Singh's profile picture
Anil Singh2 years ago

@24681Rekha Waah lahjawab

Priti Bhilware's profile picture
Priti Bhilware2 years ago

Wah

Related Videos

बलात्कार एक शब्द न होकर नारी की आत्मा को तार तार करके रख देने वाला वह नासूर है । जिसे वह जब तक जीवित रहती उस पीड़ा के विकराल तूफान से रोज मन ही मन लड़ती और टूटती रहती। जिस मर्द को उसने जन्म दिया उसी ने यह पीड़ा दिया जब यह मर्द को जन्म दी तब की पीड़ा तो सह जाती यह सोचकर मेरा लाल मेरा नाम रोशन करेगा । लेकिन वही मर्द बड़ा होने पर इतना कूरूर हो जायेगा सारी हदें पार करके यह पीड़ा दे देगा।जिसका कोई औरत अपने लाल से इस घिनौने काम को करेगा सोचती तक नही है।वह मर्द यह भूल जाता है उसके द्वारा किया गया घिनौना काम बलात्कार जिसे कोई भी औरत मृत्यु होने के साथ ही इस बलात्कार की दंश को दुनिया से जब जाती है तभी वह पीड़ा भी उसकी जाती है। लेकिन समाज मे वह बलात्कार की परछाई हमेशा पत्थर की लकीर की तरह हर औरत के जेहन मन में एक खौफ डर का एहसास हमेशा कराती रहेगी उन मर्दों के लिए जो राक्षसी रूप कब कैसे धारण कर लेते है और समाज में घूमते रहते है।ये इंसान कब कहाँ राक्षस के रूप मे मिल जाये कोई नही जानता। ऐसे राक्षसों को ऐसी सजा हो की नाजीर बने समाज मे ख़ौफ़ न रहे किसी औरत के मन मे।
1:55

Sensitive content

बलात्कार एक शब्द न होकर नारी की आत्मा को तार तार करके रख देने वाला वह नासूर है । जिसे वह जब तक जीवित रहती उस पीड़ा के विकराल तूफान से रोज मन ही मन लड़ती और टूटती रहती। जिस मर्द को उसने जन्म दिया उसी ने यह पीड़ा दिया जब यह मर्द को जन्म दी तब की पीड़ा तो सह जाती यह सोचकर मेरा लाल मेरा नाम रोशन करेगा । लेकिन वही मर्द बड़ा होने पर इतना कूरूर हो जायेगा सारी हदें पार करके यह पीड़ा दे देगा।जिसका कोई औरत अपने लाल से इस घिनौने काम को करेगा सोचती तक नही है।वह मर्द यह भूल जाता है उसके द्वारा किया गया घिनौना काम बलात्कार जिसे कोई भी औरत मृत्यु होने के साथ ही इस बलात्कार की दंश को दुनिया से जब जाती है तभी वह पीड़ा भी उसकी जाती है। लेकिन समाज मे वह बलात्कार की परछाई हमेशा पत्थर की लकीर की तरह हर औरत के जेहन मन में एक खौफ डर का एहसास हमेशा कराती रहेगी उन मर्दों के लिए जो राक्षसी रूप कब कैसे धारण कर लेते है और समाज में घूमते रहते है।ये इंसान कब कहाँ राक्षस के रूप मे मिल जाये कोई नही जानता। ऐसे राक्षसों को ऐसी सजा हो की नाजीर बने समाज मे ख़ौफ़ न रहे किसी औरत के मन मे।

Satish yadav

418,991 views • 1 month ago