Video wird geladen...
Video konnte nicht geladen werden
जब हद से गुज़र जाता है नाइंसाफ़ तो हौसला ही बन जाता है आवाज़
669,906 Aufrufe • vor 2 Monaten •via X (Twitter)
28 Kommentare

Reel me Kidwai nagar Police Outpost ,Kanpur likha hua hai इन पुलिस वालों पर एक्शन लीजिए सर

भाभी जी को सुने आप सभी भी

शर्म करो एक विकलांग व्यक्ति की गाड़ी को प्रचार वाहन बना दिया?

@MPDharmendraYdv

हतो मुझे क्रेडिट लेना है 🤣😂

जब कानून से टकरा जाता है जुलूस तो पुलिस ही बन जाती है आवाज़ अखिलेश जी, नाइंसाफी का पाठ तो आपकी सरकार में लिखा गया था जब गुंडागर्दी कानून बन जाती थी और पुलिस मूकदर्शक रहती थी। आज योगी सरकार में कानून सर्वोपरि है। शेर की सवारी अब सड़क जाम करने का लाइसेंस नहीं।

लोकतंत्र ख़त्म

समाजवादी पार्टी विकलांग व्यक्ति को भी नहीं छोड़ रही हैं विकलांग व्यक्ति की गाड़ी को भी सपा का प्रचार वाहन बना दिया शर्म आनी चाहिए

देखिए कैसे एक विकलांग बुजुर्ग व्यक्ति अपने बेटों बेटियों की आवाज बुलंद करने के लिए इस सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। धन्यवाद दादा जी 🙏🙏

अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी को आत्मचिंतन करना चाहिए। दिव्यांगजन किसी दल की राजनीति का उपकरण नहीं हैं। उनकी पीड़ा पर राजनीति करना, कैमरे के सामने घटनाओं को उछालकर सरकार को बदनाम करने की कोशिश करना और फिर उसे राजनीतिक अभियान में बदल देना बेहद शर्मनाक है।

कुछ तो शर्म करो एक विकलांग व्यक्ति की गाड़ी को ही अपने प्रचार का साधन बना लिया

जैसे तुम्हारे प्रिय आतंकी नेता अतीक अहमद नाइंसाफ़ी कर रखी थी फिर उसे कुते की मौत मारा

टोंटी चोर और उसके भाड़े के समर्थक अपनी ही imaginary दुनिया में मस्त हैं reality से कोई लेना देना नही..💀😹

आलीशेख कुछ तो शर्म कर...

समाजवादी पार्टी की हिम्मत को करोड़ों सलाम है

कायर लोग दड़बों में हैं, शेरदिल सड़कों पे हैं

ये प्रोटेस्ट है या सपा का प्रचार किया जा रहा है I

हद से गुज़रना तो आपकी पुरानी आदत है लेकिन अब नाइंसाफ़ी का शोर उन लोगों के मुँह से अच्छा नहीं लगता जिनके शासनकाल में कानून खुद अपने ही घर में बेबस था। जब हौसला कानून तोड़ने और दंगा फैलाने में लगता हो तो उसे आवाज़ नहीं अराजकता कहते हैं। उत्तर प्रदेश अब उस दौर से बाहर आ चुका है जहाँ अपराधियों का हौसला बुलंद होता था अब यहाँ केवल विकास की गूंज सुनाई देती है न कि आपके पुराने नाइंसाफ़ी वाले शोर की।

पहले छात्रों की आड़ में राजनीति अभी विकलांगों के आड़ में भी राजनीति सपा की गिरी हुई राजनीति का स्तर दर्शा रही है यह सब का हताश है कैमरा चालू और जो वीडियो ग्राफी सफा करवा रही है उसको जनता समझ रही है।

वीडियो में साफ दिख रहा है कि पुलिस शांति से सड़क पर बैठे व्यक्ति से बात कर रही है, झुककर समझा रही है। कोई लाठी-डंडे की मारपीट नहीं, कोई ज्यादती नहीं। सड़क जाम कर वाहन खड़ा करना और यातायात रोकना नाइंसाफी नहीं, कानून तोड़ना है। पुलिस का काम व्यवस्था बनाए रखना है, न कि आपकी राजनीति के लिए चुप बैठना। आपके शासन में लूट-मार, गैंगवार चरम पर थे, अब UP में कानून का राज है। दिव्यांग या आम आदमी को सड़क पर बैठाकर वीडियो बनवाकर “हौसला” का नाटक करना बंद कीजिए। ये नाइंसाफी नहीं, आपकी पुरानी नौटंकी है। जनता अब समझ चुकी है।

Tonti chor ko malum hai ki fir se yogi ji anewale hai 😂😂😂

कैमरा चालू है, रिकॉर्डिंग चल रही है और पूरा घटनाक्रम ऐसा पेश किया जा रहा है मानो मकसद समाधान नहीं, बल्कि किसी भी तरह सरकार को बदनाम करना हो। जनता अब केवल वायरल वीडियो नहीं देखती, बल्कि उसके पीछे की मंशा भी समझती है। पहले छात्रों के मुद्दे को राजनीतिक हथि,यार बनाया गया, अब दिव्यांगों की आड़ लेकर वही पुरानी पटकथा दोहराई जा रही है। ऐसा लगता है कि समाजवादी पार्टी के लिए हर संवेदनशील मुद्दा सिर्फ राजनीतिक प्रचार का माध्यम बन चुका है। जिन लोगों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता होना चाहिए, उन्हें कैमरे और राजनीति का हिस्सा बनाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी को आत्मचिंतन करना चाहिए। दिव्यांगजन किसी दल की राजनीति का उपकरण नहीं हैं। उनकी पीड़ा पर राजनीति करना, कैमरे के सामने घटनाओं को उछालकर सरकार को बदनाम करने की कोशिश करना और फिर उसे राजनीतिक अभियान में बदल देना बेहद शर्मनाक है। जनता अब समझ चुकी है कि यह संवेदना नहीं, बल्कि सुनियोजित राजनीतिक अभियान है। बार-बार अलग-अलग वर्गों की आड़ लेकर केवल सरकार को घेरने की कोशिश करना सपा की राजनीति की दिशा और सोच दोनों को उजागर करता है। जनता ऐसे राजनीतिक नाटकों और अवसरवादी राजनीति को पहचान चुकी है।

जब देश शांति पूर्ण तरीके से आगे बढ़ रहा है तो लाल टोपी को कैसे हो बर्दास्त 🤣

सत्ता क्या छूटी तुम तो सनक गए शायरी का शौक अच्छा है, लेकिन आँखों का इलाज उससे भी ज़्यादा ज़रूरी है वीडियो में पुलिस अधिकारी झुककर सड़क पर बैठे व्यक्ति से आराम से बात कर रहा है, उसे समझा रहा है और आपको इसमें नाइंसाफ़ी दिख गई?

अखिलेश जी आँखो का इलाज करवा लीजिए वीडियो में साफ दिख रहा है पुलिस वाले व्यक्ति को झुककर आराम से बात कर रहे है। विकलांग व्यक्ति को राजनीति में घसीट रहे हो।बीच सड़क पर बैठा यातायात को प्रभावित करना गलत है पुलिस उसका समझा रही है प्यार से।

और आप लोगों का काम क्या रह गया है अपंग विकलांग और हैंडिकैप्ड व्यक्तियों को आप लोग ढाल बनाना शुरू कर दिए हैं,,,,, शर्मानाक समाजवाद

सत्ता जाते ही आपकी नज़र भी हकीकत से हट गई लगती है। वीडियो में पुलिस अधिकारी समझाइश देता दिख रहा है, लेकिन आपको हर जगह अन्याय ही नज़र आता है।

समाजवादी कार्य कर्ता की समाज सेवा और समाज के लिए आवाज उठाते है न भाजपा की pुलिस से डरते है
