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जयपुर में करोड़ो का बजट खर्च करके हो रहे खेलो इंडिया गेम्स में न दर्शक आ रहे हैं न ही खिलाड़ी। 400 मीटर महिला दौड़ में कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी की मनीषा अकेले दौड़ी।फाइनल राउंड में सलेक्ट होने के बावजूद खिलाड़ी नहीं पहुंचे। पुरुषों की 400 मीटर हर्डल्स रेस के फाइनल...

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हेडलाइट की रोशनी में अंतिम संस्कार आपने स्ट्रीट लाइट की रोशनी में बच्चों को पढ़ते देखा होगा और ऑपरेशन थिएटर्स में मोमबत्ती और टाॅर्च की रोशनी में ऑपरेशन होते देखे होंगे। भरतपुर में कार की हेडलाइट की रोशनी में अंतिम संस्कार किया जा रहा है। दरअसल, सोमवार को मोरी चार बाग निवासी 70 वर्षीय अशोक का निधन हो गया। शाम करीब 7 बजे परिजन अंतिम संस्कार के लिए बी-नारायण गेट स्थित श्मशान पहुंचे। वहां पहुंचते ही परिजनों को गहरा झटका लगा। पूरे श्मशान परिसर में घना अंधेरा पसरा हुआ था। न रोशनी की कोई व्यवस्था थी और न ही कोई कर्मचारी मौजूद था। अंधेरे के बीच परिजनों और रिश्तेदारों ने मोबाइल फोन की रोशनी में अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू कीं, लेकिन यह रोशनी नाकाफी साबित हुई। मजबूरी में वाहनों की हेडलाइट जलाकर रोशनी की गई। कारों की रोशनी में किसी तरह अंतिम संस्कार की रस्में पूरी की गईं। ये हाल तब हैं जब राजस्थान पत्रिका के अभियान के बाद नगर निगम आयुक्त ने हाल ही में श्मशान का निरीक्षण भी किया था और व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश भी दिए थे। लेकिन हुआ कुछ भी नहीं।

Arvind Chotia

15,387 次观看 • 8 个月前

पश्चिम बंगाल की अलग-अलग विधानसभाओं में हजारों लोगों के नाम हटाए गए हैं। मालदा जिले के अलग-अलग विधानसभाओं में लाखों वोटर Judicial review की प्रक्रिया में हैं। सुजापुर में सबसे ज्यादा 1,34,518 वोटर हैं। यानी SIR की प्रक्रिया में टारगेट करके वोटरों के नाम लिस्ट से हटाए जा रहे हैं। कांग्रेस का सवाल है: • जब तक इन वोटर्स की किस्मत का फैसला न हो, तब तक चुनाव की घोषणा न हो • जो आवेदन अंडर रिव्यू हैं, उन्हें मौका ही नहीं दिया जाएगा तो चुनाव कराने का कोई मतलब नहीं होगा • अगर चुनाव आयोग ऐसा नहीं करता हैं, तो साफतौर पर ये 'वोट चोरी' होगी हमारी कोशिश रहेगी कि किसी भी व्यक्ति का वोट न कटे। कांग्रेस पार्टी पूरी ताकत, क्षमता के साथ मुद्दों पर पश्चिम बंगाल में चुनाव लड़ेगी। : पश्चिम बंगाल कांग्रेस के प्रभारी महासचिव Ghulam Ahmad Mir जी 📍 दिल्ली

Congress

14,127 次观看 • 6 个月前

⦁ बिहार में लोगों का गुजारा नहीं हो रहा है और नरेंद्र मोदी लंबी-चौड़ी बातें करके चले जाते हैं ⦁ 20 साल से NDA की सरकार है, फिर महिलाओं को पैसे पहले क्यों नहीं दिए, आज क्यों दे रहे हैं? ⦁ बिहार में अपराध बेलगाम है। सरेआम हत्याएं हो रही हैं, लोग डर के साये में जी रहे हैं ⦁ यहां महिलाएं असुरक्षित महसूस करती हैं, अकेले बाहर जाने से घबराती हैं ⦁ बिहार में महंगाई हद से ज्यादा है, लोग न कुछ खरीद पा रहे हैं और न त्योहार मना पा रहे हैं ⦁ बिहार में जनता के साथ ही नीतीश कुमार की भी कोई सुनवाई नहीं है ⦁ बिहार की सरकार केंद्र से चल रही है। ये 'डबल इंजन' नहीं, 'सिंगल इंजन' सरकार है : कांग्रेस महासचिव श्रीमती Priyanka Gandhi Vadra जी 📍 बिहार

Congress

21,490 次观看 • 10 个月前

आज भाजपा के पास अनेक राज्यों में 60 साल से कम आयु के कई चेहरे हैं जो अगले 20 साल तक भाजपा को टॉप पर रखेंगे। भाजपा शासित राज्यों में आज कांग्रेस कहीं भी चुनौती देने की स्थति में नहीं है। जब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री चुनने की बात आई तो मोदी जी ने देखा कि जो व्यक्ति शरद पवार के सामने दबाव की स्थिति में न हो और न ही कंप्रोमाइज करें , देवेंद्र फड़नवीस इस खाँचे में फिट बैठते थे। उसके साथ न ही कोई बैगेज है और न ही भ्रष्टाचार का आरोप इसीलिए कुछ समय के लिए सत्ता से बाहर होने पर भी विपक्ष उनकी कोई हानि नहीं कर पाया। वे कम उम्र (44 वर्ष) में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बनने वाले शरद पवार के बाद दूसरे सबसे कम उम्र के नेता हैं। उन्होंने कानून की पढ़ाई की है और बिजनेस मैनेजमेंट का कोर्स भी किया है, जिससे उन्हें जटिल प्रशासनिक और वित्तीय मामलों को समझने में मदद मिलती है।

Prashant Umrao

34,200 次观看 • 3 个月前

निर्मला बूरा हरियाणा की एक अत्यंत सम्मानित और उपलब्धि-सम्पन्न खिलाड़ी हैं। वे भीम अवार्डी, कॉमनवेल्थ गेम्स सिल्वर मैडलिस्ट, एशियन चैम्पियनशिप सिल्वर मैडलिस्ट, तथा 20 बार सीनियर नेशनल मैडलिस्ट रही हैं, जिनमें से 14–15 गोल्ड मेडल सिर्फ सीनियर नेशनल स्तर पर हैं। वर्तमान में वे हरियाणा पुलिस में इंस्पेक्टर के पद पर सेवा दे रही हैं। कुश्ती में आज के समय में वे सबसे सीनियर सक्रिय खिलाड़ी हैं, और इस उम्र में भी उनका निरंतर खेलना हम सभी के लिए एक प्रेरणा है। लेकिन हाल ही में हरियाणा में नेशनल के लिए हुए ट्रायल में उनके साथ अत्यंत अनुचित व्यवहार किया गया… निर्मला बूरा की ट्रायल तक नहीं ली गई, न कोई कारण बताया गया और न कोई आधिकारिक सूचना दी गई। फेडरेशन में गुंडे-बदमाशों को बैठा दिया जो मनमर्जी से, बिना किसी पारदर्शिता के, खिलाड़ियों को शामिल या बाहर करने का निर्णय ले रहे हैं। दुर्भाग्य यह है कि हरियाणा और केंद्र का खेल मंत्रालय इस गंभीर मुद्दे पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा, जबकि खिलाड़ी पूरे वर्ष कड़ी मेहनत करते हैं और उचित अवसर की उम्मीद में रहते हैं। यदि निर्मला बूरा जैसी अनुभवी और देश के लिए अनगिनत पदक जीतने वाली खिलाड़ी की सुनवाई नहीं हो रही, तो आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों का भविष्य कैसे सुरक्षित रहेगा? यह स्थिति केवल एक खिलाड़ी की नहीं, बल्कि पूरे भारतीय खेल तंत्र पर एक प्रश्न है और अब इसमें सुधार अनिवार्य हो चुका है। खेलों में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता बहाल करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है, ताकि हर खिलाड़ी को उसकी योग्यता और प्रदर्शन के आधार पर पहचान मिल सके। मैं, निर्मला दीदी के सम्मान और हर खिलाड़ी के अधिकार के लिए खड़ी हूँ। मैं सरकार, खेल मंत्रालय और सभी जिम्मेदार अधिकारियों से आग्रह करती हूँ कि इस मामले का तुरंत संज्ञान लिया जाए और उनको न्याय दिलाने के लिए ठोस कार्रवाई की जाए।

Vinesh Phogat

23,936 次观看 • 9 个月前

मुख्यमंत्री जी, "सर मुंड़ाते ही ओले पड़ना" शुरू हो गए हैं आपने राइजिंग राजस्थान में 35 लाख करोड़ के MOU कर दिए, जो राजस्थान की मौजूदा GDP से दोगुना से भी ज्यादा हैं। लेकिन सच्चाई ये है कि न तो निवेश आया और न ही निवेशक अब फोन उठा रहे हैं। सदन में जब मैंने आपसे पूछा कि आखिर कितने MOU धरातल पर आए, तो आप जवाब नहीं दे पाए। क्योंकि आपको पहले से ही मालूम था कि यह सिर्फ़ कागज़ी आंकड़े हैं, हकीकत में इनका कोई वजूद नहीं है। भरतपुर में तो ऐसे MOU हुए हैं जिनमें काम पहले से चल रहे हैं। यह वही स्थिति है जो लॉकडाउन में मोदी जी के 20 लाख करोड़ के पैकेज की थी, जिनकी घोषणाएं और प्रेस कॉन्फ्रेंस तो खूब हुईं, लेकिन जनता तक एक भी रुपया नहीं पहुंचा। राइजिंग राजस्थान की आड़ में आपने अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए प्रदेशवासियों को गुमराह करने का काम किया है l #RisingRajasthan

Tika Ram Jully

22,526 次观看 • 1 年前

भगवा आतंकवाद का दुष्प्रचार एक व्यापक षड्यंत्र का हिस्सा था। आजादी के बाद से ही हमारे दिमागों में यह बात भर दी गई थी, जिसे सुषमा स्वराज जी ने 1996 में 13 दिन की सरकार के विश्वास मत पर चर्चा के दौरान संसद में कहा था कि दिल्ली की लुटियंस जोन में तब तक आपको प्रबुद्ध 'इंटेलेक्चुअल' नहीं माना जाता, जब तक आप अपने भारतीय होने पर ग्लानि और हिंदू होने पर शर्म का अनुभव न करें। लेकिन जब 1990 के दशक में हिंदुत्व का उभार दिखा और अटल जी की सरकार के दौरान 2003–2004 आते आते भारत की इकोनॉमी ग्रोथ की भी सक्सेस स्टोरी दिखने लगी, उसके बाद दुनिया की तमाम वो शक्तियां सक्रिय हो गईं जो आज मोदी जी की सरकार को अस्थिर करने के लिये एड़ी चोटी का ज़ोर लगा रही हैं, उनका एक ही उद्देश्य है कि भारत की मूल शक्ति हिंदू धर्म को जागृत नहीं होने देना चाहिए। इसलिए 2004 के बाद जो कांग्रेस की सरकार आई, उसमें ऐसे अवांछित तत्व मौजूद थे जो जाने में या अनजाने में इनफ्लुएंस हो रहे थे उन भारत विरोधी तत्वों का मोहरा बनते गए । अब आज सारी की सारी बातें अब बहुत ही स्पष्ट नजर आ रही हैं। आज आप देख लीजिए हिंदुओं को उत्तर-दक्षिण में लड़ाना है। हिंदी-माराठी, हिंदी-कन्नड़ और हिंदी-बांग्ला, हिंदुओं को भाषा में लड़ाना है। प्रांत में लड़ाना है, और जम कर जातियों में लड़ाना है। भारत तेरे टुकड़े होंगे इंशाअल्लाह का ख्वाब ऐसे ही सच थोड़े न होने वाला है। हिंदुओं को आपस में लड़ा कर कमजोर करना ओर हिंदू आस्था के हर प्रतीक जिसमें सबसे मुख्य भगवा है उसको आरोपित कलंकित करना। लेकिन भारत के राष्ट्रीय ध्वज में भगवा ही एकमात्र रंग है जो त्याग और बलिदान का प्रतीक है।

Dr. Sudhanshu Trivedi

34,857 次观看 • 1 年前

राम मंद‍िर में चढ़ावा चोरी की जानकारी सबसे पहले अख‍िलेश यादव की ओर से सामने लाई गई. जब अखि‍लेश यादव को ये जानकारी हुई तो उन्‍होंने आयोध्‍या के पूर्व व‍िधायक पवन पांडेय को कॉल क‍िया और पुष्‍ट‍ि की. इसके बाद सोशल मीड‍िया में पोस्‍ट हुआ और ये बात सबके सामने आई. याद रहे- जब अख‍िलेश यादव ने पोस्‍ट क‍िया था, तब ट्रस्‍ट गुपचुप इस मामले की जांच कर रहा था और लीपापोती में लगा था. न कोई FIR थी, न कोई स्पष्ट सूचना. अख‍िलेश के ट्वीट के बाद मामला बड़ा हो गया और अब इसमें लोगों की ग‍िरफ्तारी और इस्‍तीफे हो रहे हैं. अगर अख‍िलेश यादव ने ये बात सामने न लाई होती तो प्रभु राम के साथ ये चोरी चलती ही रहती.

Ranvijay Singh

88,748 次观看 • 2 个月前

#ERCP और यमुना जल का हल्ला मचा रहे हैं, लेकिन हकीकत ये कि ERCP के टेंडर अडाणी को दे रहे हैं और यमुना जल की अब तक DPR तक नहीं बनी। मुख्यमंत्री जी ने पहले बजट भाषण में कहा था कि 4 महीने में यमुना जल की DPR तैयार कर दी जाएगी, लेकिन आज 2 साल बीत जाने के बाद भी डीपीआर तक नहीं बन पाई है। बजट में आखिर 32 हजार करोड़ की घोषणा किस आधार पर की गई है? आर्थिक समीक्षा 2025 के अनुसार जल जीवन मिशन में 28,517 करोड़ रुपये का बजट अनुमान था, लेकिन खर्च हुए केवल 10,530 करोड़ रुपये और 17,987 करोड़ रुपये लैप्स हो गए। 2024 में 15 हजार करोड़ खर्च कर 25 लाख घरों को कनेक्शन देंगे, फिर 2025-26 में 20 लाख और घरों को जोड़ेंगे। यानी कुल 45 लाख घरों का लक्ष्य घोषित किया गया, लेकिन सरकार स्वयं इस बजट में लिख रही है कि अब तक केवल 14 लाख कनेक्शन ही उपलब्ध कराए गए हैं। मुख्यमंत्री जी.. बताएं आखिर डबल इंजन सरकार में योजनाओ और घोषणाओं की जमीनी हकीकत क्या है? #RajasthanAssembly

Govind Singh Dotasra

21,667 次观看 • 6 个月前

स्मार्ट मीटर का विरोध क्यों ?? किसी भी समाज में जब कोई बदलव होता है तो लोग उसे बहुत ही ज्यादा रेजिस्टेंस के साथ स्वीकार करते हैं, क्योंकि पुराने सिस्टम की आदत कुछ इस कदर लग जाती है की नयी व्यवस्था को अपनाने से हम परहेज करने लगते हैं ..ऐसा ही कुछ इन दिनों गुजरात में बिजली विभाग द्वारा शुरू किये गए प्रीपेड स्मार्ट मीटर्स के साथ भी होते हुए दिखाई दे रहा है विरोध का कारण ये हैं की स्मार्ट मीटर , रेग्युलर मीटर की तुलना में तेज़ चलता है और बिल दुगुना आ रहा है -- सुनकर क्या लगेगा कि सभी मीटर ख़राब हैं और इन स्मार्ट मीटर्स के आने से पूरी व्यवस्था चरमरा जाएगी .. जिस तरह से लोगों के विरोध की reels वायरल हो रही हैं, पहली नज़र में मुझे भी ऐसा ही लगा.. रीजनल न्यूज़ चैनल्स पर देखा तो उसमे भी ज्यादा बिल आने की कहानियाँ पर खबर के पीछे क्या कारण है ये कोई नहीं दिखा रहा था. इसीलिए मैंने खुद ही पुरे मुद्दे की पड़ताल करने का फैसला किया और सभी पक्षों से बातचीत करके उन्हें वेरिफाई करके जो तथ्य सामने आये उनसे स्पष्ट होता है की स्मार्ट मीटर के तेज़ चलने के बारे में सारा प्रचार भ्रांतियों से भरा हुआ है .. इसलिए तथ्यों को सामने रखना बहुत जरुरी है सबसे पहले ये पता चला की लोगों के मन में शंका ना बढे इसके लिए हर 100 मीटर्स के क्लस्टर में रैंडम बेसिस पर 5 पुराने मीटर्स भी लगे होंगे जो की नए प्री-पेड मीटर्स के साथ भी जुड़े होंगे ताकि रीडिंग्स को कम्पेयर किया जा सके.. (मैं यहाँ पर आज सुबह का ही ये वीडियो भी पोस्ट करूँगा जिसमे रीडिंग्स को कम्पेयर भी किया गया है..नतीजा खुद ही देखिएगा) तो फिर ये भ्रान्ति पैदा कहाँ से हुई की ये मीटर तेज़ चल रहे हैं . इसकी सबसे बड़ी वजह ये है की जिन घरों में भी पायलट प्रोजेक्ट के तहत नए मीटर लगाए गए हैं वहां उन घर वालों की सुविधा के लिए पुराने मीटर के यूसेज को उसे वक्त सेटल नहि किया गया और घर वालों की जानकारी में लाने के बाद उस यूसेज चार्ज को 180 दिनों में डिवाइड करके नए मीटर के यूसेज के साथ डेली बेसिस पर जोड़ना शुरू किया गया है .. जिससे लोगों को लगता है की 10 दिन में इतना एक्स्ट्रा पैसा कहा से लग गया . इसके अलावा प्री-पेड मीटर्स में ये व्यवस्था की गयी है की ग्राहक को मोबाइल फोन की जी तरह मीटर पहले से ही चार्ज करवाना होगा और यदि उसका उपयोग प्री-पेड एमाउंट से 300 रूपए ज्यादा भी हो जायेगा तब तक उसकी बिजली नहीं कटेगी .. यानी उतना क्रेडिट उसे मिलेगा.. लेकिन उसके बाद बिजली कट जाएगी और रिचार्ज करवाने पर कनेक्शन ऑटोमैटिकली दोबारा शुरू हो जायेगा.. इन्टरेस्टिंगली 300 रुपये माइनस में जाने के बाद भी बिजली विभाग ग्राहक को 5 दिन का ग्रेस पीरियड दे रहा है अगर उसमे भी रिचार्ज नहीं होता है तब बिजली कटेगी.. अब वडोदरा का वो किस्सा ही ले लीजिये जिसमे एक महिला ये कहते हुए दिख रही है की उसका बिल डबल से भी ज्यादा हो गया .. उसकी हकीकत ये है की महिला ने रिचार्ज एमाउंट यूज़ करने के बाद 300 रुपये की लिमिट भी क्रॉस कर लिए 5 दिन का ग्रेस भी बीत गया उसके बाद तीन दिन की छुट्टी आ गयी (रूल्स के अनुसार छुट्टी के दिन भी बिजली नहीं काटी गयी) बाद में जब बिजली कट गयी तब उसने सब-डिवीज़न ऑफिस में जा कर रिचार्ज करवाणा कनेक्शन शुरू हो गया पर उसके 1500 के रिचार्ज में से 300 रुपये का एक्सेस एमाउंट + 8 दिन ( जिसमे लिमिट क्रॉस करने के बावजूद बिजली नहीं काटी गयी) का एक्सेस यूसेज चार्ज तुरंत कट गया .. अब जानकारी के आभाव में उसे लगा उसका बिल ज्यादा आ रहा है .. पर बाद में जब उसे असली वजह के बारे में बताया गया तो उसका कन्फ्यूज़न दूर हो गया पर तन तक खबर इतनी वायरल हो गयी की दूसरे जिलों से भी लोगों को लगने लगा की उनका मीटर भी तेज़ चल रहा है .. This is called fear of unknown और जब भी कोई नया सिस्टम इंट्रोड्यूस होता है उसको लेकर संशय बना रहता है.. मुझे लगता है सरकार को इसके बारे में और ज्यादा अवेयरनेस फ़ैलाने की जरुरत है क्योंकि सिस्टम सचमुच में उपयोगी है क्योंकि 1. इससे बिजली के उपयोग की रियाल टाइम जानकारी हमें मिलेगी .. हम उसे कंट्रोल भी कर पाएंगे 2. ⁠सरकार के लेवल पर डिस्ट्रीब्यूशन लॉसेस भी कम होंगे 3. ⁠विभाग के हाथ में पैसा होगा तो सर्विसेज़ भी और बेहतर होगी बिहार, आसाम और आंध्रप्रदेश जैसे राज्यों में ये सिस्टम सक्सेसफुली इम्प्लीमेंट हुआ है .. नॉएडा की का बड़ी कप्लोनीज़ में ये सिस्टम सक्सेसफुली चल रहा है तो गुजरात में क्यों नहीं .. वैसे बता दूँ की गुजरात के सूरत में इस सिस्टम को सबसे अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है वहां सबसे पहले ये मीटर GEB की कॉलोनी में ही लगाए गए और बाद में सूरत के पाल इलाके में जहाँ लोग जानकारी को जल्दी स्वीकार कर पाए India TV Bhupendra Patel

Nirnay Kapoor

55,323 次观看 • 2 年前

ममता बनर्जी ने इंडिया एलायंस में होने का कोई भी धर्म नहीं निभाया.. 1. 2024 के लोकसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने बंगाल में अपने कोटे से एक भी सीट अपने एलायंस को नहीं दी 2.राहुल गांधी ने वोट चोरी की बात की लेकिन ममता बनर्जी हमेशा चुप रहीं 3.गौतम अडानी के मुद्दे पर संसद में कभी भी TMC साथ नहीं आई 4.नीतीश कुमार को इंडिया एलायंस का संयोजक बनने से ममता ने रोका..राहुल तब भी चुप रहे तो क्या एलायंस का धर्म निभाने के सारी जिम्मेदारी राहुल गांधी की ही हैं.. अब जब ममता खुद हार गईं तब कह रही हैं मैं इंडिया एलायंस को मजबूत करूंगी अब तो आपके पास कोई चारा ही नहीं बचा। प्रधानमंत्री पद के 3 उम्मीदवार थे नीतीश कुमार, ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल तीनों हार के घर बैठ चुके हैं.. अमित शाह ने कलकत्ता में पत्रकारों से कहा था कि आने वाले समय में बंगाल में बीजेपी vs कांग्रेस होगा।

Jeetu Besla

80,016 次观看 • 3 个月前