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देखो ट्रेन मे किस तरह हिजड़ो द्वारा मारपीट की जा रही है हैरानी की बात इतने सारे लोग तमाशा देखते रहे आखिर यह कौन सी जगह है जहाँ कुछ लोग नियम कानून से ऊपर समझकर दूसरो पर दादागिरी दिखाते है? There is hardly anything left to say If this...

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यह है अन्वेषी जैन, जो अपने लाइव सेशन मे पर्यावरण की चिंता कर रही थी लेकिन अपनी ड्रेसिंग सेन्स की वजह से ट्रोल हो गई l हुआ यूँ अन्वेषी, अपने घर पर लाइव सेशन कर रही थी, उन्होंने कहा, देखो, ये मेरा नया घर है, कितना अच्छा व्यू है, लेकिन घर के पास वाली जगह मे भी कन्स्ट्रक्शन हो रहा है, जिसके लिए बहुत सारे पेड़ काटे जा रहे है, इतने मे ही कोई कमेन्ट करता है, “इसमें क्लीवेज दिखाने वाली कौन सी बात थी” फिर अन्वेषी गुस्सा हो जाती है और कहती है, अयान आप अपनी आखें बंद कर लो, मैं अपनी ड्रेस ऊपर करने वाली नहीं हूँ, उसके बाद फिर वो कहती है, देख ही क्यों रहे हो, अगर अन्वेषी जैन, आप ए.सी. मे बैठकर पर्यावरण की चिंता करेगी तो कोई भी गंभीर नहीं लेगा l

Vishal M. Yadav

39,004 Aufrufe • vor 22 Tagen

"मेरा बुलंदशहर का एक भाई था उसने चन्द्रशेखर आजाद रावण के ऊपर गोली चलाई जो सही जगह नहीं लगी। अगर उस दिन चल जाती तो आज तमाशा नहीं होता" अभिषेक ठाकुर नामक यह गुंडा खुलेआम कैमरे के सामने Chandra Shekhar Aazad चन्द्रशेखर आजाद के ऊपर इसके भाई द्वारा गोली चलाए जाने की बात करते हुए धमका रहा है चन्द्रशेखर आजाद देश के बड़े संवैधानिक पद पर हैं और हैरानी की बात है कि कोई इतनी आसनी से बिना डर के खुलेआम धमकियां दे रहा है Delhi Police कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज बची है? अरे कुछ तो वर्दी की लाज रख लो, खुद का सामना कैसे कर लेते हो तुम लोग?? देश में कानून व्यवस्था मर चुकी है, धीरे-धीरे लोकतंत्र को खत्म किया जा रहा है...!!

Priyanshu Kumar

83,953 Aufrufe • vor 18 Tagen

Ghaziabad के NH-9 पर दबंगई का लाइव Video Viral. पीड़ित पंकज की i20 कार सड़क किनारे खड़ी ब्रेजा से टकरा गई थी, जिसके बाद हर्जाना देने की बात कहने पर भी दबंगों ने उन्हें सड़क पर घसीटकर पीटा।वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे आरोपी युवक को लात-घूंसों से बेरहमी से पीट रहे हैं, जबकि वहां मौजूद लोग तमाशा देखते रहे। सिर्फ मारपीट ही नहीं, आरोप है कि हमलावरों ने पंकज की सोने की चेन, मोबाइल और 22 हजार रुपये भी लूट लिए। यह पूरी घटना कवि नगर (Kavi Nagar) थाना क्षेत्र की है, जहां दिनदहाड़े हुई इस वारदात ने कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। #Ghaziabad #RoadRage #ViralVideo #KaviNagar #UPPolice #GhaziabadNews #NH9 #CrimeNews

Republic Bharat - रिपब्लिक भारत

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बरेली के इस्लामिया मैदान में जिलाधिकारी (DM) को "आई लव मोहम्मद" ज्ञापन देने शांति पूर्वक जा रहे लोगों पर बरेली पुलिस ने अचानक बेरहमी से लाठीचार्ज कर दिया। इस लाठीचार्ज में कई लोग घायल हो गए, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने वाले नागरिकों पर इस तरह की पुलिसिया ज्यादती लोकतंत्र के मूल्यों को ठेस पहुँचाती है। लोगों को देख देखकर पीटना सड़कों पर पुलिस द्वारा रोकना उनके साथ मारपीट करना ये पुलिसिया गुंडागर्दी है। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण निंदनीय घटना है। हम सभी पीड़ितों के साथ हैं अन्याय के खिलाफ हैं। प्रशासन को ज्ञापन लेकर लोगों को अपील करना चाहिए था न कि भीड़ पर लाठियां चलाकर उन्हें घायल करना चाहिए था ये घटना शर्मनाक है।

Neha Yadav

18,336 Aufrufe • vor 1 Jahr

भारत के हर कोने में बिना सफ़ाई, बिना हाइजीन और बिना किसी मानक के ठेले लगाकर अनहाइजेनिक पानी-पूरी बेची जा रही है। नंगे हाथों से मसाले दबाए जाते हैं , लाल मिर्च और घोल खुले में तैयार होता हैऔर लोग वही जहर समझकर खाते हैं। सवाल : क्या यह सब Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) को आज तक दिखा ही नहीं? कहाँ हैं FSSAI के फील्ड अधिकारी? क्या कभी ठेलों की नियमित जाँच होती है? क्या पानी के स्रोत , बर्फ़ , मसाले और हाथों की सफ़ाई की कोई सैंपल टेस्टिंग की जाती है? अगर नियम हैं तो लाइसेंस , चेतावनी और कार्रवाई जमीन पर क्यों नहीं दिखती? धूल-मिट्टी से सनी चीज़ें लोग रोज़ ठेलों पर खा रहे हैं और बीमार पड़ रहे हैं। तो जिम्मेदार कौन है—ठेला वाला या निगरानी में नाकाम सिस्टम? जब बीमारी फैलती है तब किस पर FIR होती है , किसे सज़ा मिलती है? या फिर आम आदमी बीमार पड़े और सिस्टम चुप रहे यही नीति है?

खुरपेंची स्वास्थ्य

54,402 Aufrufe • vor 8 Monaten

क़ानून व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए लगातार हो रही मशक़्क़त के बावजूद कुछ #SHO CP Delhi #DilKiPolice की हिदायत को भी गंभीरता से नहीं ले रहे हैं! ताज़ा मामला DCP North East Delhi मातहत तैनात #Jyoti_Nagar के थानाध्यक्ष से जुड़ा है। आरोप है कि #SHO की सीट पर तैनात इंस्पेक्टर #Ved_Parkash ने एक मकान पर कथित तौर पर क़ब्ज़ा करा दिया। यह भी आरोप है कि क़ब्ज़ा कराने के लिए दूसरी पार्टी से मिलकर पहले मकान मालिक के बेटे पर झूठा मुक़दमा दर्ज कर दिया गया। जिस समय अदालत में मामले की सुनवाई हो रही थी तो उसी दौरान पुलिस की मिलीभगत से मकान के ताले तोड़कर क़ब्ज़ा करा दिया गया। हैरानी की बात यह है कि इस मामले में जब #PCR पर शिकायत की गई तो मौक़े पर पहुँची ज्योति नगर पुलिस ने पीड़ितों को ही बंद करने की धमकी और दे दी। सवाल यह है कि जब करोड़ों की संपत्ति पर क़ब्ज़ा कराने के लिए #SHO ही गुंडों की तरह काम करेंगे तो शहर में लोग किस पर भरोसा करें? सूत्रों की मानें तो पुलिस मुख्यालय ने इस मामले में हुई शिकायत को गंभीरता से लिया है और जाँच की जा रही है। सूत्रों की मानें तो मामले में #SHO सहित कई लोग नप सकते हैं! PMO India गृहमंत्री कार्यालय, HMO India LG Delhi Delhi Police

SUBODH JAIN

18,536 Aufrufe • vor 3 Monaten

समाज के खोखलेपन की तस्वीर... लाठी डंडों से यह युद्ध आस्था धाम खाटू श्याम जी में लड़ा जा रहा है। महिलाओं पर भी लठ बरसाए जा रहे हैं और महिलाएं भी लठ बरसा रही हैं। बात कितनी बड़ी है, यह जाने बिना इस युद्ध की गंभीरता का आकलन नहीं किया जा सकता। तो बात जो बताई जा रही है, वह इतनी सी है कि आज वहां बारिश आ रही थी और बारिश से बचने के लिए कुछ श्रद्धालुओं ने एक दुकान की शरण ली। दुकानदार ने इन्हें बाहर निकलने को कहा और जब नहीं निकले तो झगड़ा शुरू हो गया जो लाठी डंडों से मारपीट में बदल गया। सबसे ज्यादा अफसोस जनक यह है कि लड़ सिर्फ चार-छह लोग रहे हैं लेकिन देखने वाले सैकड़ो लोग हैं। सब बहुत ही आराम से चलती बारिश में इस लड़ाई का मजा ले रहे हैं। किसी में यह हिम्मत नहीं है कि कोई आगे बढ़कर किसी की लाठी पकड़ ले और शांत रहने की अपील कर दे। निश्चित ही ऐसी लड़ाइयां लंबी नहीं चलती। दोनों और दो-दो लठ खाकर आखिर अपने-अपने काम ही लगा होता है क्योंकि दुकानदार और श्रद्धालु दोनों ही कोई लड़ाके नहीं होते हैं लेकिन क्या लोग थोड़ा सा धैर्य बनाकर नहीं रख सकते? कोई समझाने रोकने वाला नहीं होता कितनी भीड़ में? यह हमारे खोखले होते सामाजिक मूल्यों की बानगी है। ये दृश्य बेहद पीड़ा दायक हैं।

Arvind Chotia

26,417 Aufrufe • vor 1 Jahr

बच्चों ने खोली स्कूल प्रशासन की पोल।।।कबाड़ में बेची जा रही थीं सरकारी किताबें ।।। गया जी (बिहार) से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ कोच प्रखंड के छतीहर जमालपुर विद्यालय के बच्चों ने हिम्मत दिखाकर स्कूल प्रशासन की पोल खोल दी है।।। छात्रों का आरोप है कि जहाँ एक तरफ वे किताबों के बिना पढ़ाई करने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी तरफ स्कूल की प्रभारी द्वारा बच्चों को बांटी जाने वाली सरकारी किताबों को कबाड़ में बेचा जा रहा था।।। बच्चों ने जब किताबों से भरी बोरियां कबाड़ी वाले के टेंपो में लादे जाते देखा, तो चुप बैठने के बजाय तुरंत अपने फोन से इसका लाइव सबूत (वीडियो) बना लिया। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह नई नवेली सरकारी किताबें बोरियों में भरकर बेची जा रही हैं।।। छात्रों द्वारा बनाया गया यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बच्चों के इस साहसिक कदम की हर तरफ तारीफ हो रही है और लोग स्कूल प्रशासन व दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।।। क्या ऐसे बढ़ेगा देश, जब बच्चों के हक की किताबें कबाड़ में बिकेंगी??? आपकी इस पर क्या राय है???

Sudhanshu Yadav

23,236 Aufrufe • vor 1 Monat

सुना कुछ लोगों ने चुनाव आयोग की धांधली का पर्दाफाश करने पर राहुल गांधी की निंदा की है 👉कौन हैं यह लोग? 140 करोड़ के देश में यह 272 लोग कितने प्रतिष्ठित हैं यह तो नहीं पता - लेकिन BJP रोज़गार एक्सचेंज में आवेदनकर्ता ज़रूर हैं! 👉वरना वोट चोरी के इतने सारे सबूत देखकर भी आँखों पर पट्टी बाँधना और उल्टी बात करने वालों में कोई भी पूर्व चुनाव आयुक्त क्यों नहीं है? पुलिस वाले क़ानून व्यवस्था पर बात नहीं कर रहे, पूर्व उच्चायुक्त फेल्ड विदेश नीति पर नहीं बोल रहे हैं, RAW वाले पहलगाम से लेकर दिल्ली बम ब्लास्ट की विफल intelligence पर नहीं बोल रहे हैं, लेकिन सब के सब चुनाव आयोग की पैरवी कर रहे हैं ▪️इन लोगों में से कितनों के अंदर हिम्मत है कि फ़र्ज़ी पते, फेक आईडी, फ़र्ज़ी फोटो, एक छोटे से घर में सैकड़ों लोगों के रजिस्टर होने पर सवाल उठायें? ▪️इनमें से कितनों की हिम्मत है यह पूछने की कि चुनाव के बीचोंबीच सरकार पैसे बांटती रही और चुनाव आयोग मूक दर्शक क्यों बना रहा? ▪️इनमें से कितनों की हिम्मत है कि चुनाव आयोग की संदिग्ध भूमिका पर सवाल पूछ सकें? ▪️इनमें से कितनों की हिम्मत है कि BJP के नेताओं के अलग अलग जगहों पर एक से ज़्यादा वोट डालने पर सवाल उठायें? ▪️असलियत तो यह है कि 2014 के पहले ‘ज़िम्मेदार प्रतिष्ठित’ नागरिक चुनी हुई सरकार से सवाल पूछते थे, आख़िर जिसके पास सत्ता संसाधन संस्थाएं हैं - सवाल भी तो उन्हीं से होगा. लेकिन अब सवालों के घेरे में वो व्यक्ति है जो इस देश के लोकतंत्र की धज्जियां उड़ने के ख़िलाफ़ मज़बूती से लड़ रहा है 👉और मीडिया वाले चरणचुम्बकों का तो क्या ही कहना?! यह तो नरेंद्र मोदी के दिन को रात कहने पर सियार की तरह हुआँ हुआँ करना शुरू कर देते हैं

Supriya Shrinate

167,799 Aufrufe • vor 10 Monaten

🛕 सोमनाथ मंदिर में राहुल गांधी ने खुद को बताया था गैर-हिंदू। राहुल गांधी की गैर-हिंदू की तरह एंट्री की गई है। एक बार फिर से बता दें, इस वक्त की यह बड़ी खबर है। राहुल गांधी के सोमनाथ मंदिर जाने पर विवाद हो गया है। सोमनाथ के रजिस्टर में राहुल ने खुद को गैर-हिंदू लिखा है। सोमनाथ मंदिर में एक नियम है कि जो गैर-हिंदू होते हैं, वहां उनको प्रवेश करने से पहले इजाजत लेनी पड़ती है। तो उसी के तहत राहुल गांधी और अहमद पटेल, इन दोनों ने ही सिग्नेचर किए। इन दोनों ने अपने-अपने को डिक्लेयर किया कि वे नॉन-हिंदू हैं और उसके बाद उनको इजाजत दी गई। उसके बाद उन्होंने दर्शन किए हैं। इसकी तस्दीक भी उन सिग्नेचर्स से की जा रही है जो आप देख रहे हैं। बाकायदा यहां के पुजारियों ने कन्फर्म किया कि यह तस्वीर और यह जो सिग्नेचर आए हैं, ये असली हैं। उन्होंने समझाया कि हां, ये सिग्नेचर सही हैं और चूंकि नॉन-हिंदू हैं, इसलिए उन्होंने ये सिग्नेचर किए हैं। उसके बाद जाकर उन्होंने दर्शन किए हैं और विजिटर बुक में बाकायदा एंट्री भी की। पूरे मामले को लेकर अब यह जो विवाद उठा है, जैसे कि मंदिर की विजिटर बुक में आपने बताया कि राहुल की गैर-हिंदू की तरह एंट्री का यह पूरा मामला है, इस बारे में क्या रिएक्शन अभी तक सामने आए हैं? लेकिन रिएक्शन सीधा सा यह है कि बीजेपी से जुड़े लोग इन सिग्नेचर्स को तमाम जगहों पर पहुंचा रहे हैं। अलग-अलग मीडिया ग्रुप्स, समर्थकों के पास। उनका यह कहना है कि राहुल गांधी इस बात को छुपाते क्यों हैं? 🤔 अगर वे नॉन-हिंदू हैं, तो सोमनाथ मंदिर सभी के लिए खुला है, लेकिन एक नियम यह है कि गैर-हिंदू को इजाजत लेनी पड़ती है। और यह नियम वहां ट्रस्ट ने सिक्योरिटी कंसर्न्स के चलते लागू किया था। कुछ साल पहले से ही वे यह सवाल उठा रहे हैं। बीजेपी से जुड़े लोग पूछ रहे हैं कि राहुल यह बात छुपा क्यों रहे हैं? यह बात उनको जाहिर करनी चाहिए थी। और चूंकि चुनाव का मौका है, इसलिए छोटी-छोटी बातों को भी तूल दिया जा रहा है, एक नए तरीके से। तो अब यह भी एक बड़ा विवाद का मसला बनता जा रहा है। 🗳️ राहुल के मंदिर जाने को लेकर तो पहले से ही विवाद कई दिनों से चला आ रहा है। बिल्कुल देखिए, वह एक अलग मसला है। वहां पर तो सवाल उठ रहे थे कि राहुल गांधी "सॉफ्ट हिंदुत्व" की ओर बढ़ रहे हैं। लेकिन अब यह बात सामने आ गई कि जो बात छिपाई जा रही थी, सोमनाथ जाकर वह बात साबित हो गई। एक बात और है, जो आज से पहले भी लोग बताते आए थे, लेकिन ट्रस्ट का यह नियम नहीं था। यह नियम अभी दो-तीन साल पहले लागू किया गया है, सिक्योरिटी कंसर्न्स के चलते। 🙏 अब सिर्फ शुक्रिया। फिलहाल पूरी जानकारी के लिए।

अखण्ड भारत संकल्प

12,412 Aufrufe • vor 3 Monaten

SIR एक सामान्य संवैधानिक प्रक्रिया है और यह 20–22 वर्षों के बाद हो रही है। चूंकि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है और यहां जनसंख्या भी सबसे अधिक है, इसलिए तुलनात्मक दृष्टि से नाम कटने वालों की संख्या यहां ज्यादा दिखाई देती है। चुनाव आयोग ने बहुत स्पष्ट रूप से पूरा विवरण दिया है कि कितने लोग मृत पाए गए, कितने लोग दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके हैं, कितनों के नाम डबल वोटर के रूप में दर्ज थे और कितने लोग अवेलेबल नहीं हैं। जो यह कहा जा रहा है कि इस प्रक्रिया में कितने घुसपैठिए निकाले गए, तो इसे अपने-आप समझना चाहिए कि SIR की प्रक्रिया के बाद जो लोग गायब हैं या सामने नहीं आ रहे हैं, वे घुसपैठिए हैं या कौन हैं। उदाहरण के तौर पर, बिहार में 42 लाख लोगों के नाम कटे, लेकिन 42 लोग भी सामने नहीं आए। मान लीजिए उत्तर प्रदेश में 70 लाख लोग गायब हैं, तो जो लोग अवेलेबल नहीं हैं, उनके नाम पर भी इस बात की संभावना रहती थी कि कोई और आकर वोट डाल दे।जो संभावना अब समाप्त हो गई है । अब SIR की प्रक्रिया में यदि इतने लोग गायब हैं और उनमें से कोई भी दावेदार सामने नहीं आ रहा, तो यह समझा जा सकता है कि ये कौन लोग हैं? जो संदिग्ध और संदेहास्पद परिस्थितियों में वोटर लिस्ट में दर्ज थे, लेकिन वास्तविकता में उनका भौतिक सत्यापन नहीं हो पा रहा है।

Dr. Sudhanshu Trivedi

14,534 Aufrufe • vor 8 Monaten

नोयडा से बड़े खुलासे-🚨 मृतक की मिट्टी में जा रही गाड़ी को लोगों ने रोका, दंगा फैलाने के लिए सडक किनारे बैठे व्यक्ति ने कहा “पत्थर मार ,, पत्थर मार” इतने में गाड़ी में बैठी बहादुर महिला नीचे उतरी बोली आप कहाँ कार्य करते हैं तो वह छुपने लगे... छुपते हुए बोला कहा हम नहीं कह रहे हैं... महिला ने बहादुरी से कहा तुमने कहा है... मैंने सुना है...शर्म नहीं आती? फैक्ट्री भी यहां पर नहीं है फैक्ट्री से रोड का कोई मतलब नहीं है, आखिर यह अराजक तत्व कौन भेज रहा है? इनमें जो चेहरे दिख रहे हैं यह लोग श्रमिक नहीं हैं, अधिकांस चेहरे नोयडा में भी कभी नहीं दिखे। यूपी पुलिस एक्टिव है, इनको सबक सिखा देगी, लेकिन आप सोचो यह दंगाई श्रमिकों की आड़ लेकर कैसे अराजकता फैला रहे हैं। श्रमिकों की सरकार और कम्पनी मालिको से बात हो गयी है, सेलरी में भी इजाफा हो गया है, श्रमिक काम पर लौट चुके हैं... लेकिन यह कहाँ से आए हैं कौन हैं? योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति है, अगर जरा भी हरकत किया, तो बचेंगे नहीं, यूपी पुलिस वह हाल करेगी कि जीवनभर भुगतोगे!

Sudhir Mishra 🇮🇳

142,488 Aufrufe • vor 5 Monaten

मीडिया द्वारा पूछने कि SIR पर कांग्रेस कब आंदोलन करेगी पर जवाब : अब देखिए हाईकमान ने फैसला किया परसों, कल-परसों मीटिंग हुई है, जो फैसला सुनाया आपको मिस्टर वेणुगोपाल ने, कि तय किया कि पहला वीक जो है दिसंबर में उसमें रामलीला मैदान में रैली होगी। इधर एक तारीख से तो पार्लियामेंट शुरू हो रही है और फर्स्ट वीक में रैली हो रही है। रैली एसआईआर को लेकर हो रही है। देखते हैं उसमें क्या फैसला करते हैं। मीडिया द्वारा कहने कि कुछ की राय है कि चुनाव का बॉयकॉट होना चाहिए जब तक ईवीएम से हो रहे हैं पर मेरा जवाब : रामलीला मैदान में रैली होने दीजिए। फैसले तो बिना सोचे समझे हो नहीं सकते। पहले मोदी कांग्रेस मुक्त भारत की बात करते थे अब कांग्रेस मुक्त भारत की बात की बजाय कांग्रेस मुक्त विपक्ष की बात करने लग गए। ये खतरनाक खेल चल रहा है देश के अंदर, इसको आपको हमको समझना पड़ेगा और मैं मुख्यधारा के मीडिया से अपील करना चाहूंगा कि अब तो अपनी अंतरात्मा को पूछे कि देश में होगा क्या? डेमोक्रेसी कैसे बचेगी? बीजेपी से या सत्तापक्ष से, पीएमओ से जो खबरें आती हैं उनको लाइन दी जाती है पंचलाइन क्या बनेगी? कौन सी न्यूज आएगी? कौन सी न्यूज को आपको हाईलाइट करना है, कौन सी नहीं करनी है? सब फैसला पीएमओ करता है। मुझे कहते हुए कोई संकोच नहीं है और यह सब मीडिया वाले जानते हैं कि वास्तव में कहां से खबरें आ रही है। कृपया करके देश के हित में आप लोग आगे आओ वरना इतिहास आपको माफी नहीं करेगा। नमस्कार, जय हिंद।

Ashok Gehlot

31,942 Aufrufe • vor 10 Monaten

पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे के स्पष्टीकरण देने और उनको लेकर श्री मदन राठौड़ द्वारा की गई बयानबाजी पर प्रतिक्रिया : देखिए, मेरी दृष्टि में वसुंधरा जी को सफाई देने की आवश्यकता नहीं थी। पहली बात तो यह है कि मैं उनकी पार्टी के मामलों में कोई टिप्पणी करना नहीं चाहता। लेकिन जो हालात हैं, जिस प्रकार से बीजेपी के अध्यक्ष बोलते हैं, उनकी एक अलग ही एप्रोच है ,बोलने में भी और व्यवहार में भी। व्यक्तिगत रूप से वे अच्छे और व्यवहारिक व्यक्ति हैं, हमारे उनसे अच्छे संबंध हैं। लेकिन जब पार्टी का दबाव होता है तो पता नहीं वे क्या बोल जाएं,ऐसी स्थिति बन जाती है। चाहे टिप्पणी हमारे बारे में हो या वसुंधरा जी के बारे में ,क्या कोई पीसीसी अध्यक्ष या बीजेपी अध्यक्ष इस तरह कहता है कि वसुंधरा जी बार-बार मुख्यमंत्री बनेंगी क्या? ऐसी टिप्पणी कम से कम मोदी जी के लिए छोड़नी चाहिए थी, या फिर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को करनी चाहिए थी। खैर, यह उनकी पार्टी का मामला है, हम क्या कर सकते हैं। वसुंधरा जी को जवाब देने या सफाई देने की आवश्यकता नहीं थी, क्योंकि लोग समझते हैं कि उनकी भावना क्या थी और उन्होंने किस संदर्भ में बात कही थी। अनावश्यक टिप्पणियां की गईं। हालांकि, यह उनकी अपनी मर्जी है। वसुंधरा जी कुछ कह रही हैं, मदन राठौड़ कुछ और कह रहे हैं यह उनकी पार्टी की स्थिति है। ये लोग हम पर आरोप लगाते हैं कि कांग्रेस में झगड़े हैं, लेकिन वास्तविक दुर्गति तो इनकी हो रही है। आप खुद देख रहे हैं कि कौन क्या बोल रहा है। इनकी स्थिति सड़कों पर आ गई है। हम सब एक हैं। राजस्थान में कांग्रेस पूरी तरह एकजुट है और उसी तरह आगे बढ़ रही है। यहां पर परंपरा रही है कि सरकारें वन बाय वन बदलती हैं। जूली साहब यहां खड़े हैं, हमारे नेता प्रतिपक्ष हैं। वे भी मेरी बात का समर्थन करेंगे कि अगली बार कांग्रेस ही आएगी। मीडिया द्वारा श्री मदन राठौड़ की उस बयानबाजी पर पूछे गए प्रश्न का उत्तर, जिसमें मेरे द्वारा पाकिस्तान की ओर से की गई मध्यस्थता संबंधी प्रतिक्रिया का जिक्र किया गया: देखिए, लोग संदर्भ को पढ़ते नहीं हैं। मैंने कहा था कि हमने दुनिया के सामने एक अवसर गंवा दिया। मध्यस्थता करने का काम हिंदुस्तान को करना चाहिए था। दुनिया में भारत का एक अलग ही आभामंडल (औरा) है। हमारा देश शांति, भाईचारे और अहिंसा की बात करने वाला देश है। दुनिया के कई देश उम्मीद कर रहे थे कि भारत आगे आकर अपील करेगा और मध्यस्थता की प्रक्रिया शुरू कराने का प्रयास करेगा। लेकिन उसके बजाय पाकिस्तान जैसे देश की चर्चा होने लगी, जिसे आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला माना जाता है और जिस पर वर्षों से ऐसी छवि बनी हुई है। जब वही देश शांति स्थापित करने की बात करता है, तो स्वाभाविक रूप से भारतीयों को दुख होता है। मैंने वही दुख प्रकट किया था। यदि मदन राठौड़ मेरे इस भाव को नहीं समझ पा रहे हैं, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है। आप बताइए, पाकिस्तान की क्या स्थिति है? इंदिरा गांधी जी के समय उसके दो टुकड़े हो गए थे। क्या वह कुछ कर पाया? फिर भी आज दुनिया में चर्चा हो रही है कि पाकिस्तान शांति की बात कर रहा है। आज जब इज़रायल और ईरान के बीच युद्ध जैसी स्थिति से पूरी दुनिया प्रभावित और चिंतित है, तो जो भी देश शांति की बात करेगा, लोग उसकी ओर देखेंगे। इस समय दुनिया के कई देश इस्लामाबाद की ओर देख रहे हैं कि वहां क्या निर्णय होगा। मेरी बात केवल इतनी थी कि वह स्थिति भारत की होनी चाहिए थी। मेरा मतलब ये था।

Ashok Gehlot

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कांवर के नाम पर आतTanक का नंगा नाच? हरिद्वार के पतंजलि योगपीठ पुल के नीचे का यह वीडियो बताया जा रहा है। आरोप है कि एक मालिश करने वाले व्यक्ति से मामूली गलती हुई, जिसके बाद कुछ लोगों ने उसके साथ बेरहमी से मारपीट शुरू कर दी। आखिर किसी इंसान को जानवरों की तरह पीटना और उसकी जान लेने पर उतारू हो जाना किस तरह की 'आस्था' है? भक्ति और यात्रा का मूल आधार संयम, करुणा और अनुशासन होता है। लेकिन यदि आस्था के नाम पर सड़क पर उत्पात मचाया जाए, किसी को भीड़ बनकर पीटा जाए, लिंचिंग की कोशिश की जाए, गाड़ियाँ तोड़ी जाएँ या लूटपाट की जाए, तो उसे भक्ति नहीं कहा जा सकता। यह सीधा-सीधा कानून और इंसानियत पर हमला है। बताया जा रहा है कि यदि उत्तराखंड भीम आर्मी के स्थानीय कार्यकर्ताओं और पुलिस ने समय रहते हस्तक्षेप न किया होता, तो एक निर्दोष व्यक्ति की जान जा सकती थी। नमाज़ पर रोज़ ज्ञान देने वाले तथाकथित गोदी पत्रकारों को भी अपने समाज में फैल रही ऐसी हिंसक मानसिकता पर सवाल उठाने चाहिए। हिंसा किसी भी धर्म, आस्था या परंपरा का हिस्सा नहीं हो सकती। जो लोग आस्था के नाम पर कानून हाथ में लेते हैं, वे आस्था नहीं, बल्कि अराजकता और भय का माहौल पैदा करते हैं। हमें एक समाज के रूप में गंभीरता से सोचना होगा कि हम किस दिशा में बढ़ रहे हैं। क्या हमारी संवेदनशीलता इतनी खत्म हो चुकी है कि भीड़ की हिंसा भी सामान्य लगने लगी है? - पूजा माथुर #KanwarYatra #StopMobViolence #PeaceAndSanity #LawAndOrder

Pooja Mathur

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हिजाब पहने यह मुस्लिम लड़की एक्सरसाइज कर रही है और ट्रेनर उसे सहारा देने के लिए उसके बिल्कुल पीछे खड़ा है। इस दौरान दोनों के शरीर पूरी तरह एक-दूसरे से सटे हुए हैं। आख़िर यह कौन-सी एक्सरसाइज है? मैं भी 15 सालों से जिम कर रहा हूं लेकिन हमने तो यह सब बकैती नहीं किया। जिससे कि समाज में गलत इम्पैक्ट पड़े। जिम में अक्सर देखा जाता है कि कुछ ट्रेनर ट्रेनिंग के नाम पर लड़कियों से एक्सरसाइज करवाते समय उनके बेहद करीब रहते हैं। और लड़कियों को भी इससे कोई आपत्ति होती नहीं होती है। लेकिन हमें परवरिश की पहचान जरूर दिखती है। जिम कल्चर समाज को बर्बाद कर रहा है। लोग बेशर्म होते जा रहे हैं। लानत हो ऐसे लोगों पर। #Gym #Exercise #GymTrainer #workout #muslim #viral
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हिजाब पहने यह मुस्लिम लड़की एक्सरसाइज कर रही है और ट्रेनर उसे सहारा देने के लिए उसके बिल्कुल पीछे खड़ा है। इस दौरान दोनों के शरीर पूरी तरह एक-दूसरे से सटे हुए हैं। आख़िर यह कौन-सी एक्सरसाइज है? मैं भी 15 सालों से जिम कर रहा हूं लेकिन हमने तो यह सब बकैती नहीं किया। जिससे कि समाज में गलत इम्पैक्ट पड़े। जिम में अक्सर देखा जाता है कि कुछ ट्रेनर ट्रेनिंग के नाम पर लड़कियों से एक्सरसाइज करवाते समय उनके बेहद करीब रहते हैं। और लड़कियों को भी इससे कोई आपत्ति होती नहीं होती है। लेकिन हमें परवरिश की पहचान जरूर दिखती है। जिम कल्चर समाज को बर्बाद कर रहा है। लोग बेशर्म होते जा रहे हैं। लानत हो ऐसे लोगों पर। #Gym #Exercise #GymTrainer #workout #muslim #viral

Er. Firoz Naik Mirza

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विपक्ष के लोगों को पता है कि चुनाव मैदान में वे साफ हो चुके हैं। इसलिए NDA में क्या हो रहा है, इस बारे में भ्रांतियां फैला रहे हैं, निराधार स्टोरी प्लांट करवा रहे हैं। माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी चुनाव मैदान में जाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। एक-एक चीज पर खुद उनकी नजर है। सारे लोगों से वे खुद बात कर रहे हैं। एनडीए के घटक दलों के नेतागण, खासकर दिल्ली में बीजेपी के जो बड़े नेता हैं, उनसे भी मुख्यमंत्री जी की बात हो रही है। जो कुछ भी तय हो रहा है, मुख्यमंत्री जी से बात करके ही तय हो रहा है। NDA के पांचो घटक दल साथ मिलकर प्रचंड बहुमत के लिए काम कर रहे हैं। हमलोग तो सीटों की संख्या भी घोषित कर चुके हैं। कौन किस सीट पर लड़ेगा, संभवत: आज शाम तक वह भी फाइनल हो जाएगा। एनडीए का लार्जर परपस है कि बिहार में जो विकास का मोमेंटम पकड़ा हुआ है, वह कहीं से भी बाधित नहीं हो। ऐसे लोग फिर से सत्ता में न आ जाएं, जिनका ट्रैक रिकार्ड बिहार की जनता जानती है। इस उद्देश्य के लिए पूरा एनडीए एकजुट है, और मुख्यमंत्री Nitish Kumar जी नेतृत्व में, उनके गाइडेंस में तथा उनके गार्जियनशिप में ही यह चुनाव सभी लोग लड़ रहे हैं। मैं बिहार की जनता से भी अनुरोध करता हूँ कि अफवाहों पर ध्यान नहीं दें। आज पटना में ANI से बात करते हुए 👇 #SanjayKumarJha #BiharElections #BiharElections2025 #2025FirSeNitish #NDA4Bihar

Sanjay Kumar Jha

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