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पांच साल बनाम डेढ़ साल की तुलना के मुद्दे पर : ये तो मतलब मेरे ख्याल से बीजेपी वाले खुद ही हंस रहे होंगे इसके ऊपर तो, जो उनका जुमला है पांच साल बनाम डेढ़ साल इस मैटर में तो आरएसएस वाले और जो बीजेपी के जो इंटेलेक्चुअल हैं...

25,695 views • 1 year ago •via X (Twitter)

9 Comments

DK Rajpurohit 🇮🇳's profile picture
DK Rajpurohit 🇮🇳1 year ago

अशोक गहलोत साहेब 🫡

Rakesh saini's profile picture
Rakesh saini1 year ago

आपके शासनकाल में की तो यह रत्ती भर भी बराबरी नहीं कर सकते जननायक साहब ♥️

Kishan Tanwar (Mali) Bikaner (Rajasthan)'s profile picture
Kishan Tanwar (Mali) Bikaner (Rajasthan)1 year ago

जय हो जननायक

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Dashrath Parmar1 year ago

हाथी और चींटी की तुलना कर रहा हे rss,,

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Abhijeet1 year ago

राजस्थान की हालत कुछ सही नही चल रही है @ashokgehlot51

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Rajesh Kumar1 year ago

Bjp zindabaad congress paper chor

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Dheeraj sharma1 year ago

एक पेपर भी सही डंग से नहीं करवा पाए आप 1.69 लाख की वेकन्सी रनिंग मे है और 66000 हजार को नियुक्ति मिल चुकी है एक बार अपना शुरुआत का एक साल के बारे मे पता करोगे तो बहुत शर्म आएगी आपको 🤣

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Rakesh Parashar1 year ago

Sir berojgari bhatta nahi dal raha 8 month se

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Naresh kumar saini1 year ago

Matlab 5 sal me ye aapke pure 15 sal k brabar kam kr denge...🙃

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आज अखबार में मुख्यमंत्री जी का आर्टिकल प्रकाशित होने और प्रदेश के हालातों पर : दूसरा जो है, आज आर्टिकल आया है मुख्यमंत्री महोदय का, आर्टिकल आया अच्छी बात है। पांच साल बनाम डेढ़ साल, कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं पूरे प्रदेशवासियों और प्रदेश के गांव गांव में तो ऐसी सरकार का निकम्मापन नाकारापन मैने कभी नहीं सुना किसी सरकार का। सरकारें बीजेपी की भी रही हैं सरकारें राजस्थान में कांग्रेस की भी बनी हैं बीजेपी की भी रही हैं इतना निकम्मा नकारापन मैंने कही देखा नहीं,और इतने कम समय के अंदर, आप बताइए तीन साल बाद में सरकार के बारे में लोग प्रतिक्रिया देते हैं काम नहीं हो रहे हमारे, करप्शन बहुत है सुनवाई नहीं हो रही है किस के पास जाएं सब बातें बोलते हैं लोग तीन साल के बाद में। यही सरकार ऐसी है 6 महीने में ही लोगों को समझ पड़ गया पूत के पांव पालने में होते हैं न वो कहावत चरितार्थ हुई है तो राजस्थान में हुई है। अरे ये क्या हो गया हम ने ये क्या कर दिया, चुनाव तो, सरकार तो पहले वाली चली गई कांग्रेस की पर नई सरकार में ये क्या हो रहा है जिसके पास जाएं, वो सरकार का मुख्या अगर दावा करे तो मैं ये बार बार कहता हूं ये उनका बहुत बड़ा साहस है हिम्मत है कि वो ये मुकाबला कर रहे हैं। और आज ही जिस अखबार में आर्टिकल लिखा गया कम से कम सीएमओ को चाहिए था डीआईपीआर को चाहिए था मैनेज करते आज तो उनके खिलाफ न्यूज नहीं आती। आज भास्कर के अंदर आर्टिकल भी आया है और मुख्यमंत्री के दावे को खोखला साबित कर रहे हैं वो ऐसी ऐसी घटनाएं आज आई हैं उसके अंदर कानून व्यवस्था की हो या अन्य घटनाएं हों तो आज तो मैनेज करना चाहिए था कम से कम। मैनेजमेंट भी नहीं किया आर्टिकल की खुद की धज्जियां उड़ गईं उसके अंदर ही। पत्रिका में क्या आता है अलग बात है और अखबारों में क्या आता है वो तो लंबी चौड़ी बाते हैं लगातार आ रही हैं।

Ashok Gehlot

13,500 views • 1 year ago

इंतज़ार शास्त्र में हमारे द्वारा उठाए इशू के बजाए किसी अन्य संदर्भ में भाजपा की बयानबाजी पर मेरा रिएक्शन : मैं तो कह चुका हूं, ये तो लागू होगा मोदी जी पर या क्या नाम है उनका, हमारे आरएसएस के मोहन भागवत जी, उनके लिए लागू होगा। मैं तो कह चुका हूं पहले आप लोगों को सबको, गांधीजी ने कहा था 125 साल तक मैं सेवा करना चाहता हूं और ये कट्टरपंथियों ने उनकी हत्या कर दी। मैंने कहा, मैं 100 साल तक सेवा करना चाहता हूं प्रदेशवासियों की, देशवासियों की। तो ये मेरे लिए लागू नहीं हो सकता। अब वो पता नहीं किस संदर्भ में कहा है, क्यों कहा है। उनको मालूम है, मैं कह चुका हूं ये बात। पर क्योंकि ये तो जो ऊपर से कहा जाता है कि आपको आज क्या लाइन लेनी है इनके मंत्रियों को, इनके नेताओं को, वो ही लाइन ले लेते हैं। अब वो कौन, कैसे सलाह देंगे हम लोगों को? वो तो पूरी कांग्रेस की राजनीति करने लग गए हैं। वो कांग्रेस नेताओं को कैसे कह सकते हैं कि आपको क्या करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए? जो हमने इनको इशू बनाए हैं, उसका जवाब दे नहीं रहे और गोलमाल जवाब दे रहे हैं। बड़ी बेइज्जती हो रही है इन लोगों की, क्योंकि आप जवाब तो दो कम से कम, कुछ भी दो—नेगेटिव दो, पॉजिटिव दो, कुछ भी कहो, पर आप संदर्भ से हटकर बात कर रहे हो। जो हमने क्वेश्चन इंतज़ार शास्त्र में पूछे हैं, उनका जवाब कम से कम कुछ तो दो—‘हाँ’ दो, ‘ना’ दो, पर आप संदर्भ बदलकर कैसे जवाब दे सकते हो? ये कर रहे हैं ये लोग। लोग हंस रहे हैं इनके ऊपर।

Ashok Gehlot

11,219 views • 6 months ago

राजस्थान में राज RSS वाले कर रहे, ये खाली मुखौटे हैं जोधपुर में आज मीडिया से बातचीत की: अशोक गहलोत का जवाब: देखिए राजनीति में जो है, झूठे आरोप नहीं लगाए जाते हैं। अगर आपके पास तथ्य है, तो उस पर बात करो। किरोड़ी मीणा जी जब सरकार में नहीं थे, तब भी वो लगातार आरोप लगाते थे। उनकी जो प्रकृति में है कि वो, आंदोलन करते रहते हैं लगातार, आप देखते हो उनको 15-20 साल से। तो एक अलग किस्म का प्राणी हैं वो। वो पहले भी आरोप लगाते थे अब भी लगा रहे हैं, अनावश्यक है। पार्टी के जो अध्यक्ष होते हैं उनकी एक अलग प्रतिष्ठा होती है। उस पे आप बार-बार चोट कर रहे हो। आरोप लगा रहे हो बिना तथ्यों के। तो आप बताइए कि पार्टी में रिएक्शन होगा? हमारी पार्टी में रिएक्शन है। डोटासरा जी को खुद को लगता है भाई ये क्या आरोप लगा रहा है वो भी बिना तथ्यों के। हम सब को लगता है। ये किरोड़ी मीणा जी को खुद को सोचना चाहिए, वो क्या किस प्रकार की उनकी अप्रोच है काम करने की है। छापे डाल रहे हैं और छापे के साथ जो जाते हैं लोग उनके, वसूली करते हैं वो। ये तो प्रूव हो गया है। जब प्रूव हो गया है तो कहते हैं कि एसीबी भी दबाव में काम कर रही है। तो भाई एसीबी तो दबाव में जब से डीजी साहब आए हैं, पहले मैंने कहा ये आदमी तो भला है डीजी। वो पूरी तरह सीएमओ के और सीएम के दबाव में है ये। और इनके जो नीचे अधिकारी है, वो भी इनकी बात नहीं मानते हैं। वो इनको उल्टा दबाते हैं। तो मुझे लगता है कि एसीबी का जो डीजी है, वो खुद परेशान होगा, मेरे ख्याल से जहां तक मैं समझता हूँ या जहाँ तक मेरे पास वहां से रिपोर्ट आती है। वहाँ के जो काम करने वाले अधिकारी कहते हैं ना कि भाई क्या हो रहा है हमारे यहाँ? स्थिति एसीबी की बहुत भयानक खराब है। दबाव में काम हो रहे हैं। मुख्यमंत्री जी को ऑबलाइज करने के लिए फैसले हो रहे हैं। आईओ कह रहा भाई ये मुल्जिम नहीं बनता हमारा। और ऊपर से कहते हैं डीजी साहब और जो दबाव आता है उनके ऊपर, नहीं आप इनको अरेस्ट करो। ऐसा मैंने आज तक कभी देखा नहीं। तीन-तीन बार हम भी मुख्यमंत्री रहे हैं। एसीबी में कोई पंचायत नहीं करनी चाहिए किसी को भी। यहाँ पंचायतें नहीं हो रही हैं। आईओ कह रहा भाई ये अरेस्ट नहीं हो सकता है क्योंकि इसमें कोई केस नहीं बनता। आप इसको अरेस्ट कीजिए। अरेस्ट हुए भी हैं, जिनमें महेश जोशी भी हैं। आईओ ने मना किया। वो ऑलरेडी द्वारा वैसे ही केस में अरेस्ट हो चुके थे। यहाँ वापस अरेस्ट कर लिया, क्या मजाक बना रखी है? क्या मुख्यमंत्री को दिखता नहीं है कि ये क्या हो रहा है? उनका खुद का नाम आता है कि दबाव आता है। शायद आरएसएस वालों का आता होगा। आरएसएस के दबाव होने के बाद में मुख्यमंत्री हथियार डाल देते हैं। राज आरएसएस कर रहा है ये तो मुखौटे हैं खाली। मुझे लगता है कि राजस्थान के अंदर आजकल जो ये लोग राज करते हैं ये मुखौटे बने हुए हैं। राज आरएसएस वाले कर रहे हैं। ट्रांसफर, पोस्टिंग, करप्शन सब वहीं से डायरेक्शन आते हैं। हालात बड़े गंभीर हैं राजस्थान के। ऐसी इनकी स्थिति बनेगी इस बार राजस्थान की, जनता जो है वो जागरूक है। ये कुछ भी कर लें, ये मुख्यमंत्री बदल देंगे ना, तब भी कुछ नहीं होने वाला है, अगली बार सरकार बदल के रहेगी। थैंक यू।

Ashok Gehlot

56,850 views • 3 months ago

आज एयरपोर्ट पर मीडिया से बात की- राज्य सरकार के गुजरात में प्रशिक्षण के लिए जाने के संदर्भ में पूछे गए सवाल के जवाब में : ये देखिए पूरी सरकार तमाम मंत्रिमंडल ही नहीं मुख्यमंत्री सहित दोनों डिप्टी सीएम,तमाम विधायक सत्ता पक्ष के,पूरा खाली कर दिया राजस्थान को, वैसे राजस्थान की स्थिति ऐसी बन गई है यहां हत्याएं हो रही हैं लगातार एक के बाद एक, एफआईआर दर्ज नहीं करते हैं आत्महत्याएं हो रही हैं ,इस माहौल में राजस्थान चल रहा है। गर्मी बढ़ने लग गई है तो पानी की किल्लत हो रही है, बिजली की मांग हो रही है, समस्याओं से घिरा हुआ राजस्थान है मेरे हिसाब से तो,और करप्शन की तो हदें पार हो गई हैं। करप्शन की हदें पार हो गई हैं अगर 10 करोड़ रुपए की कोई रिश्वत दे रहा है इसके मायने हैं कि वहां कितना अवैध खनन हो रहा होगा। अगर 10 करोड़ की ऑफर की हुई है, बारगेनिंग हुई है कम ज़्यादा की, सच्चाई क्या है वो तो एसीबी जाने, पर 10 करोड़ की रिश्वत का अगर लेन देन होने का अगर मान लीजिए वहां पर सौदा हुआ है इसका मतलब कितना बड़ा अवैध खनन हो रहा है, कितना नुकसान हो रहा है राजस्थान सरकार को रेवेन्यू को लेके। तो चारों ओर की स्थिति ऐसी बन गई है उस में आप जा रहे हो वहां पर प्रशिक्षण लेने के लिए देने के लिए, डेढ़ साल के बाद में ! डेढ़ साल तक इसका मतलब आपकी सरकार निकम्मी साबित हुई,नकारा रही, कुछ काम नहीं किया। इसलिए आप जो है डेढ़ साल के बाद में अब आप प्रशिक्षण लेंगे वहां पर। वो क्या तुक है वहां पर ? डेढ़ साल में बिल्कुल किए ही नहीं हैं आपने कुछ भी नहीं किए हैं तो अब प्रशिक्षण ले रहे हो आप इसलिए मैने कहा कि ये क्या हो रहा है। मेरी आलोचना जो है वो आलोचना के साथ साथ सलाह भी होती है : मेरी आलोचना जो है वो आलोचना के साथ साथ सलाह भी होती है। मेरा अपना अनुभव है तो मेरी ड्यूटी बनती है कि मैं चाहे सत्ता पक्ष हो चाहे विपक्ष हो, अगर मैं बात कहूं खाली आलोचना करने के लिए नहीं कहूं बल्कि उसमें सलाह भी होती है। अब समझने वाला समझता है अलग बात है डिपेंड करता है कि वो क्या समझते हैं वो उनके ऊपर है पर मेरी इच्छा कि मैं कोई बात कहूं आलोचना करूं, तो साथ में कुछ सलाह भी दूं मैं। मैं कम से कम 100 साल जिंदा रहना चाहता हूं राजस्थान प्रदेशवासियों की सेवा करने के लिए इसलिए मैंने कहा। अब मुख्यमंत्री जी ने शायद लिखा है कि मेरे मानसिक संतुलन बिगड़ गया है, मेरा कोई मानसिक संतुलन नहीं बिगड़ा है, मैं मुख्यमंत्री जी को,प्रधानमंत्री मोदी जी को, विश्वास दिलाता हूं मेरा मानसिक संतुलन बिल्कुल नहीं बिगड़ा है, बल्कि, गांधी जी ने तो कहा था कि मैं 125 साल जिंदा रहना चाहता हूं, गांधी जी ने कहा था मैं 125 साल जिंदा रहना चाहता हूं सेवा करने के लिए, और मैं कह रहा हूं मैं कम से कम सौ साल जिंदा रहना चाहता हूं राजस्थान प्रदेशवासियों की सेवा करने के लिए। जिसकी भावना इतनी बड़ी हो कि मुझे सौ साल तक सेवा करनी है उसका मानसिक संतुलन हमेशा कायम रहेगा ये मेरा कहना है मुख्यमंत्री भजनलाल जी को। गृह मंत्रालय के 7 तारीख को मॉक ड्रिल को लेकर एडवाइजरी जारी करने तथा सरकार के गुजरात में होने के सवाल पर : उस पे मेरा कोई कमेंट नहीं हो सकता क्योंकि वो तो पहलगाम के बाद में जिस प्रकार से विचार आ रहे हैं रक्षा मंत्री जी के, प्रधानमंत्री जी के, और पूरा देश एकजुट है, विपक्ष कह चुका है कि हम आपके साथ में हैं। राहुल गांधी जी कह चुके हैं ,तो मेरा मानना है कि ऐसे मामले के अंदर एक बार जब विपक्ष भी एकजुट है सरकार के साथ में, अब किसी को भी कमेंट नहीं करना चाहिए उसके बारे में क्योंकि जो फैसला करना है सरकार को करना है और सरकार को भी फैसला सोच समझ कर करना है। ऐसे फैसले कोई जल्दबाजी में नहीं होते हैं ऐसे फैसले कोई अति उत्साह समझ लिए अति प्रतिक्रिया समझ लीजिए उसमें नहीं होता है , ये फैसले बहुत सोच समझ के देश हित में क्या है हमारे, हमारे मुल्क के हित में क्या है उसको देख कर करने पड़ेंगे, ये पूरी छूट प्रधानमंत्री मोदी जी को, और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को होनी चाहिए। उसमें बार बार कमेंट नहीं करना चाहिए मेरा मानना है। हां ये बात जरूर है कि लोग पूछते हैं कि आप बड़ी बड़ी बातें तो करते हो, पर आपके बारह दिन हो गए हैं आप क्या जवाब दे रहे हो जनता को।

Ashok Gehlot

24,418 views • 1 year ago

धरना दे रहे आनंदीलाल पोद्दार मूक बधिर विद्यालय के विद्यार्थियों से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत की : लोकसभा का मेंबर बना पहला काम मैंने किया, यह जो बच्चे हैं, डेफ एंड डम्ब ( मूक-बधिर), तो मैंने उन्हीं के लिए गांधी बधिर विद्यालय खोला था। आज इस बात को करीब 40 साल से ज्यादा हो गया। अब वो बढ़ते-बढ़ते कॉलेज बन गई है जोधपुर के अंदर। इस प्रकार से मेरे को उस वक्त से मालूम है कि डेफ एंड डम्ब बच्चों की प्रॉब्लम क्या रहती है। आजकल तो बहुत ही आधुनिक तकनीकें आ गई हैं। हमारी गवर्नमेंट ने ही शुरू की थी देश के अंदर, बाद में भारत सरकार ने शुरू किया। 7 साल- 8 साल तक के बच्चों को जो है कॉकलियर इंप्लांट लग जाते हैं। बच्चे का अगर बचपन में सरकार ऑपरेशन करवा देती है जैसे मैंने शुरू किया राजस्थान के अंदर, मेरे दूसरे कार्यकाल के अंदर, साढ़े 6-7 लाख का खर्चा आया। हमने जो भी बच्चा आया, सबका कॉकलियर इंप्लांट लगाया तो वो बच्चे उसके बाद में बोलना और सुनना सीख जाते हैं। जब सुनना सीखेंगे तो बोलना सीख जाते हैं। प्रॉब्लम आती है सुनने में। अगर पैदाइश से ही वो सुन नहीं सकता, तो ये बोलेगा क्या? जब सुनाई ही नहीं देता है तो कौन क्या बोल रहा है। तो ये जो नई तकनीक आई है, बहुत ही कारगर है। अब मैंने सुना भारत सरकार ने भी इसके ऊपर ध्यान दिया है। तो राजस्थान तो वो राज्य है। अभी बच्चों की प्रॉब्लम यही थी, एक तो टीचर्स जो हैं, ये साइन लैंग्वेज होती है, बिना साइन लैंग्वेज के जो टीचर लगे हुए हैं अधिकांश, वो क्या पढ़ाएंगे जब उनको साइन लैंग्वेज खुद को नहीं आती है, इनको क्या पढ़ाएंगे? और ये तमाम बच्चे बड़े एक्सपर्ट बन गए हैं, काफी लोग, जो साइन लैंग्वेज से बातचीत कर सकते हैं सब।तो इनकी उस संबंध में समस्याएं हैं। फिर व्यवहार क्या है टीचर्स का, इनके नियम-कायदे फॉलो होते हैं कि नहीं होते हैं, सरकार सुविधाएं देती है वो इन तक पहुंचती हैं कि नहीं पहुंचती हैं, बिल्डिंग जर्जर हालत में है, बाथरूम गंदे पड़े हैं, गंदगी साफ नहीं होती है, जनरल समस्याएं इन्होंने बताई हैं। तो मैं मुख्यमंत्री को खुद लिखूंगा डी.ओ. लेटर, बताऊंगा कि मैं जाके आया हूँ और मेरा खुद का बैकग्राउंड इन्हीं की सेवाओं से शुरू हुआ है। मैं उनको अहसास करवाने की कोशिश करूँगा कि आप भी ध्यान दें। ये लड़के-लड़कियाँ यहाँ पर करीब 300 के लगभग पढ़ रहे हैं यहाँ पर। तो जब बोल नहीं सकते, सुन नहीं सकते, आप सोच सकते हो क्या बीत रही होगी। साइन लैंग्वेज ही है जिससे अपना वो जीवन बसर कर सकते हैं। ये बच्चे बड़े उम्र के हैं, इनका वो ऑपरेशन भी नहीं हो सकता है। ये स्थिति है। तो इसलिए मैंने जान-बूझकर उचित समझा कि मैं खुद जाऊँ। अभी मिस्टर जूली साहब आके गए थे, वो विपक्ष के नेता हैं, वो भी उठाएंगे असेंबली में भी। वो भी लिखेंगे मुख्यमंत्री जी को, हम दोनों बात करेंगे आपस के अंदर। और जो भी हो सकता है। ये संस्थान बहुत शानदार संस्थान है । पोद्दार जी के नाम से बनी है, 50 साल पहले बनी होगी, इसका अपना अलग महत्व है राजस्थान के अंदर। बाकी तो धीरे-धीरे पनपती हैं, सात हैं, आठ हैं, जो भी संस्थान हैं। दुर्भाग्य है प्रदेश का कि मैंने जो बाबा आमटे विश्वविद्यालय खोला यहाँ निशक्तजनों के लिए, उसमें डेफ एंड डम्ब भी आते हैं, ब्लाइंड भी आते हैं, हैंडीकैप्ड भी आते हैं। वो विश्वविद्यालय कागजों के अंदर है। वीसी को बिठा रखा है ये शिक्षा संकुल के अंदर। सरकार की ये स्थिति है, ढाई साल से वो वीसी बिठा रखा है वहाँ पर। अब रिटायरमेंट हो गया उनका। कुछ सेक्टर ऐसे होते हैं जहाँ राजनीति बीच में नहीं आती। उसमें तो सरकार को चाहिए चाहे कोई पार्टी के बच्चे पढ़ते हों, किसी परिवार के कोई, किसी पार्टी का कोई मतलब नहीं है। ये तो सेवा का काम है। इनकी सेवा करना, ईश्वर की सेवा करना है।

Ashok Gehlot

41,958 views • 1 month ago

जासूसी के मसले पर : ये बहुत सीरियस मामला है उसमें जूली साहब अगर गए भी हैं राज्यपाल के पास में आप बताइए दो कैमरा एक्स्ट्रा लगा दिए और उसका जो कंट्रोल सिस्टम है वो स्पीकर साहब ने अपने चैंबर में रखा है, खाली वो खुद देख सकते हैं या उनका प्राइवेट सेक्रेटरी देख सकता है,ये तो बहुत बड़ा क्राइम किया गया है इसको तो जांच होनी चाहिए इसकी तो, आप को क्या अधिकार है कि आप ,दो कैमरे लगे हुए थे पहले से ही, राज्यसभा में, लोकसभा में असेंबली में लगते हैं और पूरा देश देखता है जब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से या जब डिबेट होती है यूट्यूब के माध्यम से सब देख सकते हैं कौन क्या बोल रहा है पर आप अलग कैमरा लगा दो विपक्ष की तरफ, क्या बात कर रहे हैं वो आपस के अंदर, क्या नहीं कर रहे हैं और पूरा स्पीकर के पास में खबर पहुंचती जाए, डोटासरा वाला मामला था यही तो था, हाउस एडजर्न था उस वक्त में, आप इनफॉर्मल कई बार बात करते हैं जुमला बोल देते हैं ये क्या कांग्रेस वाले क्या बीजेपी वाले बोल देते हैं तो क्या आप उन जुमलों को ले के जो हाउस में प्रोसेसिंग में बोला नहीं गया है तब भी आप उसको ले के आप ऐसे कमेंट करवा दो डोटासरा जी पर, ये तो एमएलए बनने लायक ही नहीं है , ये क्या अधिकार है स्पीकर का किसी माननीय सदस्य को कहे तुम माननीय सदस्य बनने लायक नहीं हो, उनकी एब्सेंस में वो भी, एब्सेंस में, ऐसा नहीं है सबके सामने कहा हो वो बात नहीं है पर आपने डिबेट करवा दी कोई कह रहा है पाँच साल के लिए निकाल दो कोई कह रहा है 4 साल के लिए निकाल दो ये जो माहौल बनाया हाउस के अंदर मैं समझता हूं उचित नहीं है इनको सोचना चाहिए था अब जो ये इनकी जांच होनी चाहिए गवर्नर के पास गए ये लोग , गवर्नर को जांच करानी चाहिए, हाउस को चाहिए कि वास्तव में कैमरे क्यों लगे है? कैमरे का पेमेंट किसने किया? क्या हुआ तमाम बातें आ चुकी हैं।

Ashok Gehlot

48,575 views • 1 year ago

केंद्रीय मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत के ट्वीट को लेकर पूछे गए सवाल का उत्तर तथा संजीवनी के पीड़ितों के विषय में मेरे विचार : तो मैंने कब मना किया, हम कुछ नहीं कर रहे हैं, हमें तो जैसे ही मालूम पड़ा कि एमएलए फंड का नहीं है हमनें खुद ने ही मना कर दिया। जानबूझ कर इनके पास में कहने को कुछ है नहीं तो इश्यू बना रहे हैं। कोई जरूरी है मैं उद्घाटन करूं वहां जा कर के, मैनें कभी कहा भी नहीं है, न्यूज़ तब बनती है जब हम कह दें हम तो करेंगे और सरकार कह दे कि आप नहीं करोगे, ये तो बात ही नहीं हुई है तो इनको कहो कि कोई इश्यू जो हम उठाते हैं उनका जवाब दे। जवाब उसका दे नहीं रहे हैं और आप राइट एंड लेफ्ट कर रहे हैं तो ये कोई तरीका नहीं हुआ। वो उन्होंने मेरे खिलाफ केस कर रखा है, डिफेमेशन का केस कर रखा है मैं तो उम्मीद कर रहा था अब ये समझ गए होंगे मेरी भावना क्या थी उस वक्त तो डिफेमेशन केस मेरे खिलाफ कर रखा है वो वापस ले लेंगे, मैं तो ये उम्मीद कर रहा हूं उनसे, और वो उल्टा नया इश्यू खड़ा कर रहे हैं, ये बात है। आज मैं फिर कहना चाहूंगा, जो लोग, वो आपका जो कौन सा इश्यू था, वो हैं न जिसमें जेल गए थे कई लोग, क्या नाम था उसका ? संजीवनी, संजीवनी घोटाला, मैं चाहूंगा वो यहां आकर अभी देखें दो तीन बार बन गए एमपी बन गए, और उनको कैबिनेट मंत्री बनाया गया है दिल्ली के अंदर। कैबिनेट मंत्री कोई मामूली बात नहीं होती है , कैबिनेट मंत्री बनना बड़ी बात है वो सरकार के पार्ट हैं वहां पर उनको चाहिए वो आगे आएं, हम लोग आपस में बात करें , अगर उनको निर्दोष है जैसा वो दावा करते हैं तो हमें खुशी होगी कि आप निर्दोष साबित हों, नंबर एक। नंबर दो मैं चाहूंगा कि वो आगे आएं, हम लोग आपस में बातचीत करें बैठ के चर्चा करें और जो लोग पीड़ित बेचारे हैं ,किसी के पचास लाख, अस्सी लाख, एक करोड़, पच्चीस लाख, कोई कल्पना नहीं कर सकते,ऐसे लोग जिनकी पूरी पेंशन की पेंशन गायब हो गई ,गहने बेच के दे दिए, उधार दे दिए कि भई ब्याज अच्छा मिल जाएगा , ऐसे ऐसे लोग मेरे पास आए हैं डेढ़ डेढ़ सौ लोग ,अपन बात सोच नहीं सकते किस प्रकार से वो तकलीफ में हैं उन तकलीफ को हम हटाएं। हमारा कोई एम नहीं है किसी को टारगेट बनाने का, हम चाहते हैं उनकी जो समस्या हैं वो कैसे हल हो इसलिए हम चाहेंगे कि गजेंद्र सिंह शेखावत जी खुद बात करें आपस में बात करें और एक कमेटी जो काम कर रही है संघर्ष समिति उसको बुला लें और जो पीड़ित लोग हैं उनमें पांच दस लोगों को बुलाएं बैठ कर बातचीत करें कि भई इनकी समस्या या हैं इनके आरोप ये ये हैं।

Ashok Gehlot

14,486 views • 1 year ago

तिरंगा चुभने वाले को अपना ठिकाना बदल लेना चाहिए।। ये जो आज पंजाब से प्रेस कॉन्फ्रेंस करके ये बात बोली गई है ये दिखा रहा है कि देश के प्रति तिरंगे के प्रति इनका क्या प्यार भाव है। भिंडरावाला को सुरक्षा बलों ने मार गिराया था और जहां सेना किसी को मारे तो इसका मतलब वो इंसान गलत था लेकिन भिंडरावाला के प्यार में अंधे इन खालिस्तानी समर्थकों का दिमाग इतना खराब हो गया है कि इन्होंने तिरंगे पर ये टिप्पणी कर डाली। अब बताओ हिमाचली गलत है जो भिंडरावाला के झंडे का विरोध कर रहे है या ये गलत है जो तिरंगे को लेकर ये बात कर रहे हैं।। रही नशे की बात तो हिमाचल आकर कोर्ट में जाओ और देखो कितनी पंजाबी चिट्ठे वाले जहर की तस्करी में आज अंदर है और सजा भुगत रहे हैं भगवान ही मालिक है अब पंजाब का 🙏 #HimachalPradesh

Gems of Himachal

166,069 views • 1 year ago

स्व कान्हैयालाल साहू की हत्या की जाँच में हो रही देरी पर प्रधानमंत्री जी द्वारा कुछ भी नहीं बोलने पर मेरी प्रतिक्रिया - दो बच्चों ने सहयोग किया, उनके पीछे भगे , उसको लेके कई विवाद हुए पर फिर भी हमनें उन दोनों को नौकरी दी,तो सब कुछ किया और रात को ही केस ले लिया एनआईए ने, अब तीन साल के बाद में एनआईए कुछ नहीं कर पा रही है, एनआईए अच्छी एजेंसी है पर क्या कारण है कि उन्होंने चालान पेश कर दिया 166 उसमें गवाह हैं और पंद्रह सोलह के अभी तक बयान हुए हैं, उनके लड़के के बयान भी पूरे नहीं हुए हैं अभी,और जो एक बच गया था जिसके लिए हम ने डॉक्टर भेजे थे वहां से जयपुर से जब उसको ब्रेन हेमरेज हो गया इसका बचना जरूरी है तभी केस आगे बढ़ेगा, उसका बयान नहीं ले रहे हैं वो बिलकुल ठीक है बयान देने की स्थिति में है, तमाम बातें मैं रिपेटेडली कह चुका हूं, जब गृह मंत्री आए तब भी कहा, प्रधानमंत्री मोदी जी आए तब भी कहा तो क्या मतलब ये यह भी नहीं कह सकते कि चलो हम लोग देखेंगे डिले क्यों हो रहा है, क्यों किस कारण से डिले हुआ है तीन साल क्यों लगे हैं, मेरा दावा है हमारे पास अगर केस होता तो छह महीने के अंदर अंदर या तो फांसी की सजा होती या आजीवन कारावास होता पर मुकदमे का फैसला हो जाता इतना मैं कह सकता हूं। क्या कारण है कि साढ़े तीन साल तीन साल हो गए कुछ नहीं हो रहा है और चुनाव में हमारे खिलाफ मुद्दा बना गया कन्हैयालाल जी को पांच लाख ही दिए पचास लाख नहीं दिए और एक मुसलमान को पचास लाख दे दिए मुसलमान को क्योंकि वो मुसलमान था, डैमेज किया पार्टी को चुनाव के अंदर, हमारे हारने के कारण में एक इनका झूठ बोलना भी था, पूरा कैंपेन झूठ आधारित बनाया गया चुनाव में, सब झूठ बोले गए झूठे आंकड़े दिए गए और चुनाव जीत गए ये लोग और उस पर मुख्य मुद्दा पांच लाख बनाम पचास लाख और लोगों के जहन में बैठ गया कि पांच लाख ही कैसे दिए, अब ये इनकी पोल खुल गई है और दोनों कार्यकर्ता बीजेपी के थे वो, मारने वाले कार्यकर्ता बीजेपी कार्यकर्ता थे ये तो प्रूव हो चुका है, तब भी मतलब ये क्यों नहीं बोल रहे हैं ये बहुत बड़ा मेरा आरोप है और पब्लिक ही इनका जवाब देगी, मेरा मानना है कि राजस्थान की जनता समझ चुकी है,इनके झूठ को पकड़ चुकी है और इनको जवाब देगी। मैं वास्तव में नहीं समझ पा रहा हूं कि क्या रहस्य है या तो कार्यकर्ता बीजेपी के हैं क्योंकि कल सजा होगी इनको पूरे देश में बदनामी होगी बीजेपी के दो कार्यकर्ताओं ने कन्हैयालाल टेलर की हत्या की थी उनको ये सजा हो गई है, बदनामी से बच रहे हैं या लापरवाही है कुछ तो कारण है कि क्यों नहीं मतलब उनको सजा दिला पा रहे हैं, आम जनता प्रदेशवासी पूछ रहे हैं मोदी जी को अमित शाह जी को। हमारे खिलाफ मुद्दा बनाया, उनकी पत्नी ने कहा साहब मेरे पास आते आप को खाली पांच लाख ही मिले हुए हैं, पांच लाख रुपए मिले तो पत्नी मुझे कह कह रही है उनकी पत्नी साहब हम ने कहा कैसे कह दें हम लोग, हमें 51 लाख रुपए मिले हैं। ये झूठ फैला फैलाकर चुनाव जीत गए ये लोग, ये मुख्य मुद्दा है, अगले चुनाव में जनता जवाब देगी इस पार्टी को तुमने झूठ क्यों बोला, कई झूठ बोले उसमें मुख्य मुद्दा ये भी था।

Ashok Gehlot

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आज राज्यों के इलेक्शन कमीशंस की वेबसाइट बंद होने पर : आज मैंने सुना कि वेबसाइट भी बंद कर दी गई है अभी हम ने निकाला कोशिश करी निकालने की हमनें अभी उसका लिया है स्क्रीनशॉट, तो चार वेबसाइट जो है राजस्थान की महाराष्ट्र की बिहार की और एमपी की ,चार वेबसाइट खुल नहीं रही हैं हो सकता है इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद में खोल दें सुनकर के अलग बात है, अभी तो नहीं खुल रही है इसका मतलब है सुधार कर रहे होंगे वो लोग कुछ भी कर रहे होंगे पर मैं फिर कहना चाहूंगा कि राहुल गांधी का बोलने का गुस्से होने का एटम बम कहने का जो नजरिया है वो कोई व्यक्तिगत नहीं है देश हित के अंदर है उनका जीवन ऐसा है उनका व्यक्तित्व ऐसा है उनके कृतित्व ऐसे हैं मैंने बहुत करीब से पहचाना उनको, दुर्भावना या घृणा नफरत किसी के प्रति नहीं है चाहे वो नरेंद्र मोदी भी क्यों नहीं हों या कोई भी हो ये उनको पहचानने में उनको वक्त लगेगा वो अलग बात है। राहुल गांधी को पहचानने में इन लोगों को वक्त लगेगा वो व्यक्तित्व ऐसा है जो दिल में प्रेम प्यार मोहब्बत भाईचारा ले के चलता है पर देश हित के अंदर, देश हित में जो बोलते हों बात कड़वी लोगों को लगती है, आगाह करते हैं नोट बंदी को ले कर, कोविड को ले के और किसी मुद्दे को लेके तो लोगों को कड़वी लगती है पर सच्चाई सामने आती है वो बाद में। उसी प्रकार से ये जो इश्यू उठाया है LoP के रूप में ये उनका धर्म भी है कर्तव्य भी है कि पब्लिक में क्या मैसेज जा रहा है और खुल कर कहा पहले मैं बोल नहीं पा रहा था क्योंकि मुझको जो है खुद को श्योरिटी नहीं थी इसलिए मैं बोलता था पर उस में वो, वो मैं उस रूप में नहीं बोल पाता था जो मैं बोलना चाहता था अब जब मैंने छह महीने लगाए हैं और छह महीने में देख लिया है कि वास्तव में ये तो वोटों की चोरी हो रही है और ये तो लोकतंत्र को खतरा है तब जाकर के मैं ये प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहा हूं एटम बम का नाम दे रहा हूं क्योंकि एटम बम पूरे मुल्क का लोकतंत्र खंडन हो जाएगा कमजोर हो गया तो पूरे मुल्क को नुकसान है इसलिए एटम बम के रूप में है ये मुल्क के लिए मुल्क के भविष्य के लिए।

Ashok Gehlot

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पत्रकार: सर, मूक- बधिर बच्चों की समस्याएं जो हैं , उन पर क्या कहेंगे ? जवाब : मैं जा रहा हूँ, वहाँ जा रहा हूँ। टीचर नॉर्मल लगाए गए हैं, मूक-बधिर वालों की भाषा अलग होती है। वो साइन लैंग्वेज होती है । उससे वो समझते हैं कि कौन क्या बोल रहा है आपस के अंदर, बातचीत भी करेंगे तो साइन लैंग्वेज से करेंगे। मैंने तो खुद ने एक 40 साल पहले जब मैं एमपी बना, 45 साल पहले, मैंने खुद ने स्कूल खोली है मूक-बधिर की। मुझे मालूम है कि उनमें क्या-क्या समस्याएं आती हैं, अब तो कॉलेज बन गई हमारी जोधपुर के अंदर। तो यह तो सरकारी है, हमारी जो चल रही एनजीओ से चल रही है। यह सरकारी कॉलेज है, सरकारी कॉलेज में कमी है और वहाँ के बच्चे हड़ताल कर रहे हैं, तो इतनी संवेदनशीलता कौन दिखाएगा? सरकार को ही दिखानी पड़ेगी, यह मेरी मांग है। उनसे बातचीत भी करो तथा हल करो जो समस्याएं हैं। सवाल : सर गर्भवती महिलाओं का एक बड़ा मामला सामने आया था, 104 एम्बुलेंस जो है वो ऑफ ट्रैक हैं , क्या रिएक्शन है आपका ? जवाब : 104 तो बंद पड़ी हुई हैं , हमने वो क्या नाम था उसका? जननी सुरक्षा योजना, मैंने ही शुरू की 15 साल पहले। वो तमाम गाड़ियाँ बंद पड़ी हैं। अब बताइए, एक साल से बंद पड़ी हैं, तो बेचारी औरतों पर क्या बीत रही होगी ? आराम से गाड़ी जाती, लेके आती उनको गाँवों से भी अस्पताल में, प्रसव होता, वापस पहुँचाती। तो यह तमाम हरकतें जो सरकार कर रही है ना, यह उचित नहीं है। मैं कोई राजनीतिक बात नहीं करना चाहता, मैं चाहता हूँ मुख्यमंत्री जी तीनों बातों पर, चाहे वो हमारे डेफ एंड डम्ब हों, चाहे जननी सुरक्षा योजना है उसकी बात हो, और चाहे आपके यह शुभम की बात हो हड़ताल की, छात्र संघ चुनाव की घोषणा करें और उनको विश्वास दिलाएं कि आप तो हड़ताल तोड़ दीजिए, मेरे पर छोड़ दीजिए, इतना ही कह दीजिए। कम से कम हड़ताल तोड़ो उनकी, यह मेरा मानना है। सवाल : सर, यह बीजेपी कह रही है संत रविदास का जो पाठ्यक्रम था वो कांग्रेस ने हटा दिया था ? जवाब : इनकी बातों का क्या जवाब दूँ ? इनकी बातों में इनके कोई गंभीरता नहीं होती है, यह मैं कह सकता हूँ।

Ashok Gehlot

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