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पूछता हूँ तमाम दुनिया से, पूछता हूँ तमाम दीनों से। अम्न के हर निगारख़ाने से, पूछता हूँ तमाशबीनों से। -IP

24,582 次观看 • 1 年前 •via X (Twitter)

10 条评论

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Tanvir1 年前

वो सब छोरों जो यूनिवर्सिटी बनाने के लिए इंडिया मे घूम घूम कर चंदा किए थे वो यूनिवर्सिटी बनी के नही?

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Vimal Yaduvanshi1 年前

शानदार

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Haidar Ali1 年前

कुछ भी इनकी सवाल कि जवाब नहीं दे सकते सामने वाले

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Siloriya Op1 年前

बहुत शानदार 👌👌

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1 年前

इधर-उधर क्यों भटक रहे हो, दिल्ली आकर प्रचार शुरू करो।

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Rajendra Senwar1 年前

कुछ समझ नहीं आया

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Faheem mirza فہیم مرزا 🇮🇳1 年前

बेहतरीन उम्दा अल्फाज़

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Ishteyak ansari1 年前

बेशक 👍🏻

Jubair idrisi 的头像
Jubair idrisi1 年前

Dehli me bhi aa jao bahar hi gumte rhoge

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IFTEKHAR AHMAD KHAN1 年前

Zindabad

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तवायफ, सभी मजबूरी से मजबूत स्त्री को समर्पित🙏🏻 हाँ, हाँ मैं तवायफ़ हूँ, जिस्म का धंधा हर रात करती हूँ उसी गली में रहती हूँ, जिस गली में तुम रात बिताते हो परिवार के सामने मुझे नीच बतलाते हो, रात होते ही मुझे अपना बनाते हो नाम मेरा रंडी रखा है, और खुद मेरे पास हवस मिटाते हो हाँ मैं वही मयख़ाना हूँ, जिसके जिस्म से तुम पैमाना भरते हो सांझ होते ही सजती सवंरती हूँ, हर रात तेरे लिए बिस्तर नयी सजाती हूँ हाँ तेरे पाप को अपने कोख़ में पनाह देती हूँ, बिन बाप के बच्चों को अपना नाम देती हूँ बस तुम लोग के वजह से नाम नहीं कमा पाती हूँ, पैसे होने के बाद भी रंडी नाम से जानी जाती हूँ भूख खुद की इज़्ज़त बेचने को मजबूर करती है, बस यही सोचकर आँसू पी लेती हूँ तब भी ज़िंदा हूँ, ना इस काम से शर्मिन्दा हूँ आँशु क्या ज़हर क्या रोज़ सबको अपना बना लेती हूँ हर एक की बाहों में जाकर इश्क़ बाँटना आसान नहीं है, मेरी बेरंग जिंदगी से तेरी रात रंगीन करती हूँ काजल में अश्क़ छुपाती, पल पल नाम छुपाती, हर रोज़ बिकती हूँ, हर पल तेरे मुँह के "मेरी रंडी" नाम को भी अपनाती हूँ हांँ हाँ मैं तवायफ़ हूँ, कुछ मज़बूरी के कारण, काजल के पीछे अश्क़ छुपाती हूँ हाँ हाँ मैं तवायफ़ हूँ, अपनी भूख के लिए तेरी प्यास बुझाती हूँ हाँ हाँ मैं तवायफ़ हूँ, जिस्म का धंधा हर रात करती हूँ
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तवायफ, सभी मजबूरी से मजबूत स्त्री को समर्पित🙏🏻 हाँ, हाँ मैं तवायफ़ हूँ, जिस्म का धंधा हर रात करती हूँ उसी गली में रहती हूँ, जिस गली में तुम रात बिताते हो परिवार के सामने मुझे नीच बतलाते हो, रात होते ही मुझे अपना बनाते हो नाम मेरा रंडी रखा है, और खुद मेरे पास हवस मिटाते हो हाँ मैं वही मयख़ाना हूँ, जिसके जिस्म से तुम पैमाना भरते हो सांझ होते ही सजती सवंरती हूँ, हर रात तेरे लिए बिस्तर नयी सजाती हूँ हाँ तेरे पाप को अपने कोख़ में पनाह देती हूँ, बिन बाप के बच्चों को अपना नाम देती हूँ बस तुम लोग के वजह से नाम नहीं कमा पाती हूँ, पैसे होने के बाद भी रंडी नाम से जानी जाती हूँ भूख खुद की इज़्ज़त बेचने को मजबूर करती है, बस यही सोचकर आँसू पी लेती हूँ तब भी ज़िंदा हूँ, ना इस काम से शर्मिन्दा हूँ आँशु क्या ज़हर क्या रोज़ सबको अपना बना लेती हूँ हर एक की बाहों में जाकर इश्क़ बाँटना आसान नहीं है, मेरी बेरंग जिंदगी से तेरी रात रंगीन करती हूँ काजल में अश्क़ छुपाती, पल पल नाम छुपाती, हर रोज़ बिकती हूँ, हर पल तेरे मुँह के "मेरी रंडी" नाम को भी अपनाती हूँ हांँ हाँ मैं तवायफ़ हूँ, कुछ मज़बूरी के कारण, काजल के पीछे अश्क़ छुपाती हूँ हाँ हाँ मैं तवायफ़ हूँ, अपनी भूख के लिए तेरी प्यास बुझाती हूँ हाँ हाँ मैं तवायफ़ हूँ, जिस्म का धंधा हर रात करती हूँ

तृप्त ...🖤

49,991 次观看 • 2 年前

हाँ मैं ब्राह्मण हूँ. कमजोर इतना हूँ कि सबको माफ कर देता हूँ. लालची इतना हूँ कि चन्द्रगुप्त को राजा बना देता हूँ. डरपोक हूँ, इसलिए तो पृथ्वी को इक्कीस बार अत्याचारियों से मुक्त करता हूं. अनुपयोगी भी हूँ, तभी तो हड्डियों से वज्र बनवाता हूँ. अनपढ हूँ, क्योंकि व्याकरण और गणित को खोज कर लाता हूँ. जातिवादी हूँ, माया,मुलायम,कांग्रेस,भाजपा....पता नहीं कितनो के साथ हूँ. आरक्षण का विरोध नहीं करता, क्यूंकि अपनों के नाराज होने का डर है. सरकार से कुछ नहीं मांगता, क्यूंकि हिन्दूस्तान कमजोर होने का डर है. बंगलादेश,पाकिस्तान से गायब हूँ, कश्मीर से निष्कासित हूँ . फिर भी अखंड भारत का स्वपन देखता हूँ. कदम कदम पर ठगा जाता हूँ, फिर भी.... सर्वेभवंतु सुखिन:का मंत्र गुनगुनाता हूँ, क्योंकि ..... ❤️मैं ब्राह्मण हूँ❤️ सहमत मतलब रिट्वीट 🫰

Niranjan Kumar Jha

68,095 次观看 • 1 年前