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पूछता हूँ तमाम दुनिया से, पूछता हूँ तमाम दीनों से। अम्न के हर निगारख़ाने से, पूछता हूँ तमाशबीनों से। -IP
10 条评论

Tanvir1 年前
वो सब छोरों जो यूनिवर्सिटी बनाने के लिए इंडिया मे घूम घूम कर चंदा किए थे वो यूनिवर्सिटी बनी के नही?

Vimal Yaduvanshi1 年前
शानदार

Haidar Ali1 年前
कुछ भी इनकी सवाल कि जवाब नहीं दे सकते सामने वाले

Siloriya Op1 年前
बहुत शानदार 👌👌

⁝1 年前
इधर-उधर क्यों भटक रहे हो, दिल्ली आकर प्रचार शुरू करो।

Rajendra Senwar1 年前
कुछ समझ नहीं आया

Faheem mirza فہیم مرزا 🇮🇳1 年前
बेहतरीन उम्दा अल्फाज़

Ishteyak ansari1 年前
बेशक 👍🏻

Jubair idrisi1 年前
Dehli me bhi aa jao bahar hi gumte rhoge

IFTEKHAR AHMAD KHAN1 年前
Zindabad
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0:50
Sensitive content
तवायफ, सभी मजबूरी से मजबूत स्त्री को समर्पित🙏🏻 हाँ, हाँ मैं तवायफ़ हूँ, जिस्म का धंधा हर रात करती हूँ उसी गली में रहती हूँ, जिस गली में तुम रात बिताते हो परिवार के सामने मुझे नीच बतलाते हो, रात होते ही मुझे अपना बनाते हो नाम मेरा रंडी रखा है, और खुद मेरे पास हवस मिटाते हो हाँ मैं वही मयख़ाना हूँ, जिसके जिस्म से तुम पैमाना भरते हो सांझ होते ही सजती सवंरती हूँ, हर रात तेरे लिए बिस्तर नयी सजाती हूँ हाँ तेरे पाप को अपने कोख़ में पनाह देती हूँ, बिन बाप के बच्चों को अपना नाम देती हूँ बस तुम लोग के वजह से नाम नहीं कमा पाती हूँ, पैसे होने के बाद भी रंडी नाम से जानी जाती हूँ भूख खुद की इज़्ज़त बेचने को मजबूर करती है, बस यही सोचकर आँसू पी लेती हूँ तब भी ज़िंदा हूँ, ना इस काम से शर्मिन्दा हूँ आँशु क्या ज़हर क्या रोज़ सबको अपना बना लेती हूँ हर एक की बाहों में जाकर इश्क़ बाँटना आसान नहीं है, मेरी बेरंग जिंदगी से तेरी रात रंगीन करती हूँ काजल में अश्क़ छुपाती, पल पल नाम छुपाती, हर रोज़ बिकती हूँ, हर पल तेरे मुँह के "मेरी रंडी" नाम को भी अपनाती हूँ हांँ हाँ मैं तवायफ़ हूँ, कुछ मज़बूरी के कारण, काजल के पीछे अश्क़ छुपाती हूँ हाँ हाँ मैं तवायफ़ हूँ, अपनी भूख के लिए तेरी प्यास बुझाती हूँ हाँ हाँ मैं तवायफ़ हूँ, जिस्म का धंधा हर रात करती हूँ
तृप्त ...🖤
49,991 次观看 • 2 年前

10:28
Sensitive content
मैं समलैंगिक हूँ, अब तक 150 से अधिक पुरुषों से संबंध बना चुका हूँ अब बहुत दुखी हूँ, क्या करूँ ?
Bhajan Marg
271,790 次观看 • 1 年前
