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Ana Sayfaya Dön

प्यारे से जोड़े ने नया मोपेड़ खरीदा कितनी खुशी से अष्टविनायक मंदिर मे पूजा करवा रहे है इस खुशी,ईमोशन के आगे अमीरों की Land Rover भी फैल है ये मामला CC का नहीं , खुशी का है

95,700 görüntüleme • 10 ay önce •via X (Twitter)

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UP- संतकबीरनगर के बुद्धिराम ने 5 बच्चों की मां अपनी बीबी की गांव के ही एक लड़के से शादी करा दी. बुद्धिराम ने 21 साल पहले खुशी से प्रेम विवाह किया था. दोनों के 5 बच्चे है. सबसे बड़ा बेटा 18 साल का है. इसी बीच खुशी को गांव के ही अवधेश से प्रेम हो गया. मामला इतना बढ़ गया कि अवधेश अब खुशी के साथ उसी के घर में मैग्जेमम समय स्पेंड करने लगा. बुद्धिराम ने खुशी को अवधेश से अलग करना चाहा तो खुशी ने उसे धमकी दी कि उसके टुकड़े ब्लूड्रम में भर दिये जायेगें. बुद्धिराम ने समय रहते बुद्धि का इस्तेमाल किया और मंदिर ले जाकर खुशी और अवधेश की शादी करा दी. नया पति मिलने से खुशी खुश है और नया पापा मिलने से बच्चे. बुद्धिराम अपनी जान बचने से खुश है. खुशी की मांग भरते अवधेश को कनखनियों से देखते बुद्धिराम की आंखों की खुशी देखी जा सकती है.

Narendra Pratap

76,137 görüntüleme • 2 ay önce

बुलंदशहर के एक गांव मे अम्मा नूर जहाँ कई दशक से, संसाधन ना होने के कारण बिना बिजली के ही जीवन गुज़ार रही थी!😔 फिर अचानक एक दिन पुलिस गश्त के दौरान आईपीएस अनुकृति शरमा का वहां से गुज़र हुआ और उनकी नज़र जब इस बूढ़ी अम्मा के घर पर पड़ी और पता चला के इनके घर मे अभी तक बिजली का कनेक्शन तक नहीं, तो तुरंत ही उन्होंने बिजली विभाग फ़ोन कराया और अपने खर्चे से उनके घर मीटर और बिजली की फिटिंग कराई! फिटिंग होने के बाद अम्मा से ही स्विच ऑन कराया तो अम्मा के चेहरे की खुशी देखने लायक थी, ये सब देखकर जहाँ बहुत खुशी भी हुई के असली अफसर की यही पहचान होती है जो गरीब जनता का दर्द समझकर उनके चेहरे पर खुशी लाने का प्रयास करते हैँ, साथ मे दुख भी हुआ के अमीर, अमीर से और अमीर होता जाता है, और गरीब आज भी इस हाल मे अपनी पूरी जिंदिगी गुज़ार देता है, जहाँ उसके पास बेसिक सुविधा भी नहीं! अनुकृति शरमा जी और उनकी टीम को दिल से सलाम जिन्होंने एक बूढ़ी अम्मा को अपने जीवन के आख़िरी पड़ाव मे ये खुशी दी!🫡❤️👇

yasir hasan

111,422 görüntüleme • 2 ay önce

नालंदा विश्वविद्यालय ने शास्त्रार्थ की हमारी प्राचीन परंपरा को फिर से जीवंत किया है। शास्त्रार्थ केवल अपनी बात रखने का माध्यम नहीं है। ये वाद-संवाद और मंथन की एक अनुशासित प्रक्रिया है। इसमें तर्क के साथ, तथ्य के साथ, अपनी बात कहना बहुत जरूरी होता है और उसमें आपकी महारत होनी चाहिए। दूसरों के विचारों को धैर्य से सुनने और समझने की सीख भी इस शास्त्रार्थ की प्रक्रिया से मिलती है। मुझे खुशी है कि नालंदा विश्वविद्यालय ने इसे अपने दीक्षांत समारोह का हिस्सा बनाया। इस प्राचीन परंपरा को आज के समय से जोड़ने का ये प्रयास बहुत सराहनीय है। - पीएम श्री Narendra Modi #MannKiBaat पूरा वीडियो देखें:

BJP

13,033 görüntüleme • 3 ay önce