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परखना मत परखने मे कोई अपना नही रहता।

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✨परखना मत - बशीर बद्र कभी-कभी हम किसी रिश्ते को समझने की कोशिश में उसे इतना परखने लगते हैं कि उसकी सहजता ही खो जाती है। बशीर बद्र साहब की ये बेहद ख़ूबसूरत पंक्तियाँ हमें याद दिलाती हैं कि रिश्ते सिर्फ़ सवालों, कसौटियों और प्रमाणों से नहीं चलते उनमें थोड़ा भरोसा, थोड़ा फ़ासला और बहुत-सी मोहब्बत भी चाहिए। परखना मत परखने में कोई अपना नहीं रहता किसी भी आइने में देर तक चेहरा नहीं रहता बड़े लोगों से मिलने में हमेशा फ़ासला रखना जहाँ दरिया समुंदर से मिला दरिया नहीं रहता और शायद इस पूरी रचना का सबसे ख़ूबसूरत एहसास इन पंक्तियों में है... मोहब्बत एक ख़ुशबू है हमेशा साथ चलती है कोई इंसान तन्हाई में भी तन्हा नहीं रहता। कविता की यही ख़ासियत है कुछ शब्द पढ़ने या सुनने के बाद ख़त्म नहीं होते, वे हमारे भीतर बहुत देर तक चलते रहते हैं। सुनिए बशीर बद्र की कविता ‘परखना मत’, काव्यराग के संगीत और स्वर में।

Saru

43,145 views • 1 month ago