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पुराने फोन्स में खराबी आने पर हम उन्हें कस्टमर केयर या रिपेयरिंग शॉप पर छोड़ आते है. खराब फोन्स को घर में रखना भी कुंडली-दोष होता है. शायद इसीलिए फोन खराब होते ही सीधे डस्टबिन में जाता है. मगर क्या आप जानते है कि यह कितना खतरनाक है! मिर्जापुर...

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अफ्रीका का सोना! अन्तर्राष्ट्रीय सोना स्मगलरों के तार अफ्रीका से इंडिया तक कनैक्ट है. #वाराणसी के कैंट स्टेशन पर साढ़े 3 करोड़ रूपये से ज्यादा का सोना पकड़ा गया है. सोने का वजन दो किलोग्राम से ज्यादा है. महाराष्ट्र के 2 तस्कर अरेस्ट है. दोनों तस्कर अन्तर्राष्ट्रीय सोना तस्करी के गैंग के कोरियर है. एक पेंटर है और दूसरा स्टूडेंट. यह सोना अफ्रीका से बांग्लादेश आता था. वहां से अवैध घुसपैठ के जरिये पश्चिम बंगाल और फिर ट्रेन से उत्तर-प्रदेश के शहरों में खप जाता था. तस्करों ने पूछताछ में बताया है कि बीते 3 साल में करीब 35 बार इसी तरह से उन्होने सोने की तस्करी की है. बरामदगी सटीक सूचना पर GRP-RPF ने ज्वाइंट आपरेशन में डिब्रूगढ़ राजधानी एक्सप्रेस से की है. कस्टम और इनकम टैक्स के अफसर इस गैंग के तार तलाशने में जुटे है.

Narendra Pratap

83,992 просмотров • 6 месяцев назад

अनिल अंबानी का ये रवैया किसी तमाशे से कम नहीं है। ED, यानी प्रवर्तन निदेशालय, उन्हें तीसरी बार समन भेज रही है, और जवाब में वो कहते हैं कि एजेंसी अपनी "सुविधा के मुताबिक" उनका 'वर्चुअल' बयान ले ले या एक 'रिकॉर्डेड वीडियो' से काम चला ले। ये क्या हो रहा है? ये कोई कॉलेज असाइनमेंट नहीं है कि तबीयत खराब होने पर वीडियो सबमिट कर दिया। ये एक गंभीर केंद्रीय जांच है, और इस तरह का ऑफर देना जांच एजेंसी का मज़ाक उड़ाने जैसा है। अब जरा उनके बचाव का आधार देखिए। कहा जा रहा है कि वो अप्रैल 2007 से मार्च 2022 तक, यानी पूरे 15 साल, रिलायंस इंफ्रा में 'नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर' थे। ये तर्क दिया जा रहा है कि वो कंपनी के 'रोज़मर्रा के कामकाज' को नहीं देखते थे। ये कॉरपोरेट जगत का सबसे पुराना और लचर बहाना है। क्या हम मान लें कि 15 साल तक जिस कंपनी के बोर्ड में उनका नाम था, उन्हें पता ही नहीं था कि 2010 में जयपुर-रींगस हाईवे प्रोजेक्ट जैसे बड़े मामले में क्या हो रहा है? ये जिम्मेदारी से भागने का साफ प्रयास है। मामला FEMA (Foreign Exchange Management Act) से जुड़ा है। अब कंपनी का स्टेटमेंट आता है कि ये कॉन्ट्रैक्ट 'पूरी तरह घरेलू' था और इसमें 'विदेशी मुद्रा का कोई लेन-देन' शामिल ही नहीं था। ये तो और भी गंभीर सवाल खड़े करता है। अगर विदेशी मुद्रा (Foreign Exchange) का कोई लेना-देना था ही नहीं, तो ED ने FEMA का केस बनाया ही क्यों? क्या एजेंसी बिना किसी तथ्य के 15 साल पुराने मामले की जांच कर रही है? साफ बात ये है कि अगर सब कुछ इतना ही पाक-साफ है, तो अनिल अंबानी को तीसरी बार बुलाए जाने पर सीधे ED के दफ्तर जाकर जांच में सहयोग करने में क्या दिक्कत है? ये 'वर्चुअल' और 'वीडियो' वाली बहानेबाजी उसी पुराने घमंड को दिखाती है, जब उन्हें लगता था कि उनका नाम ही हर कानून से बड़ा है। उन्हें याद रखना चाहिए कि ये कांग्रेस का दौर नहीं, नया भारत है। कानून से ऊपर कोई नहीं है, और इस तरह के नाटक से वो जांच को टाल नहीं सकते।

Akshay Yadav

104,387 просмотров • 10 месяцев назад

इस तरह का नौकरी देने में खुलेआम भ्रष्टाचार इथोपिया नाइजीरिया सोमालिया यमन और पाकिस्तान जैसे देशों में भी नहीं होता है जहां सरकार नाम की कोई चीज नहीं है झारखंड पब्लिक कमिशन की ऑफिस से हर एक उम्मीदवार को फोन जाता है की पास होना है तो ₹5 लाख दे दो और फोन करने वाला रोल नंबर नाम पिता का नाम मां का नाम दसवीं से लेकर ग्रेजुएशन तक का नंबर अल्टरनेट फोन नंबर जन्मतिथि सब कुछ बता देता है और कई लोगों को तो जेपीएससी के ऑफिस में मिलने के लिए भी बुला लेता है और जब लोगों ने ट्विटर पर मुख्यमंत्री को टैग करके शिकायत किया तो पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में लिखा यह तो उनके दोस्तों ने फ्रेंक कॉल किया था भैया यह होता है कांग्रेस का नौकरी मॉडल और इसी मॉडल के तहत लालू यादव नौकरी के लिए लोगों की जमीन तक लिखवा लेता था और राहुल गांधी सहित पूरा विपक्ष की खुलेआम नौकरी की बिक्री पर चुप है

🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳

12,473 просмотров • 1 месяц назад

इबादत सादिक अब्दुल्ला साहेब फैजल आजम शब्बीर इमरान मुश्ताक और राजिक . इनका नाम ही इनकी पहचान है और इनकी पहचान ही आज के दौर में इनकी सबसे बड़ी मुसीबत है . इस सबको एमपी पुलिस ने दंगा , आगजनी , मारपीट , घर में जबरन घुसने और विस्फोटक रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था , मध्यप्रदेश पुलिस के मुताबिक ये सारे दंगाई थे लेकिन मध्यप्रदेश की ही अदालत ने इन्हें हिंसा और दंगा के आरोपों से बरी कर दिया है . अदालत ने अपने फैसले में ये भी पूछा है कि पुलिस ने आखिर इन 11 लोगों को किस आधार पर दंगे का आरोपी बनाया ? आज इंडियन एक्सप्रेस ने विस्तार से पूरी रिपोर्ट छापी है . कोर्ट का ये फैसला एमपी सरकार के मुंह पर तो तमाचा है ही इस बात का भी सबूत है कि कैसे इस देश में मुसलमानों को दंगाई घोषित करके सलाखों के पीछे डाल दिया जाता है . पूरा वीडियो मेरे यूट्यूब चैनल पर

Ajit Anjum

125,083 просмотров • 2 месяцев назад

मेहदी हसन (होस्ट): पिछले साल नवंबर में, बांग्लादेश में लगभग 30,000 हिंदुओं ने आपकी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया था। उनका आरोप था कि उनके समुदाय पर हजारों हमले हुए हैं। उस समय राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस हिंसा को “बर्बर” कहा था। सवाल यह है कि इस तरह की हिंसा को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं? या आपके नज़र में स्थिति पहले से नियंत्रण में है? मोहम्मद यूनुस: यह सब फेक न्यूज़ है। इन फेक न्यूज़ पर भरोसा नहीं किया जा सकता। होस्ट: न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी रिपोर्ट किया है कि पिछले नवंबर में हिंदुओं पर कई हमले हुए, एक साधु को सिर्फ हिंदू झंडा फहराने पर गिरफ्तार किया गया। मोहम्मद यूनुस: यही तो भारत की ख़ासियत है आजकल -फेक न्यूज़ की बाढ़। हर तरह की अफवाह फैलाई जाती है। होस्ट:यानी बिल्कुल भी एंटी-हिंदू हिंसा नहीं हो रही? मोहम्मद यूनुस: ये हिंदू और मुस्लिम के झगड़े नहीं हैं बल्कि दो पड़ोसियों की तरह आपसी विवाद हैं।

Ankit Kumar Avasthi

97,030 просмотров • 11 месяцев назад