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प्रेम कर भिल्लासारखं बाणावरती खोचलेलं मातीमध्ये उगवूनसुद्धा मेघापर्यंत पोचलेलं - कुसुमाग्रज ❤️
11,964 görüntüleme • 1 ay önce •via X (Twitter)
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अमर प्रेम कहानी 💞 प्यार तो सब करते है लेकिन निभाने वाले नसीब से मिलते है ❤️ true Love never end Rip 😔🥺🙏 #rip Beautiful but incomplete.... Story जब भी इनकी वीडियो देखती थी तो बस भगवान से यही कहती थी की भगवान इस इंसान को अच्छा कर देना क्योंकि मैं देखती थी की इस स्वार्थ भरी दुनियां में एक पत्नी कैसे अपने जीवनसाथी के लिए संघर्ष कर रही है..... लेकिन कहते है की जो अच्छे लोग होते है न उन्हें भगवान को भी जरूरत होती है.... आज फिर एक कहानी अधूरी रह गई....
संगीता माँझु बिश्नोई
78,071 görüntüleme • 1 yıl önce
0:35
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महिलाएं एक संभोग के बाद तुरंत दूसरे के लिए तैयार हो सकती हैं, इसी कारण वेश्यावृत्ति जैसी प्रथाएँ सदियों से अस्तित्व में हैं। वहीं पुरुष के लिए दो संभोगों के बीच एक निश्चित अंतराल आवश्यक होता है। पहली बार के बाद वह तुरंत महिला से अलग हो जाता है और अक्सर सोने की इच्छा करता है — यह उसकी प्रकृति है। 😴 महिला की प्रवृत्ति इससे बिलकुल अलग होती है। वह संभोग के तुरंत बाद साथी से ऐसी बातें सुनना चाहती है जो उसे संतुष्टि और आनंद दें। 💖 अक्सर महिलाएं यह नहीं समझ पातीं कि पुरुष प्रेम के तुरंत बाद फिर से वही जुड़ाव महसूस नहीं कर सकता। पुरुष युद्ध की समाप्ति के बाद प्रेम की इच्छा रखता है। उसका मूल स्वभाव शिकारी जैसा होता है। 🏹 सभ्यता की चादर में उसकी इस प्रवृत्ति को ढक दिया जाता है, पर इसका अस्तित्व बना रहता है। इतिहास में क्रूर माने जाने वाले तानाशाहों की जीवन शैली भी कुछ ऐसी ही थी। उदाहरण के लिए, हिटलर, जिसने हजारों लोगों की जान ली, अपने प्रेमिका के पास आकर कोमल और प्रेमपूर्ण हो जाता था। उसकी प्रेमिका के साथ बिताए हुए पलों की याद में उसके आँसू बहते थे। 😢 अशोक, जिसने कलिंग युद्ध में भारी विनाश देखा, बाद में प्रेम और करुणा की ओर मुड़ गया। यही प्रेम और पश्चाताप उसे बौद्ध धर्म की ओर खींच ले गया, और आज अशोक और बौद्ध धर्म को एक-दूसरे से अलग करना कठिन है। नेपोलियन बोनापार्ट भी अपने युद्ध के कवच को उतारकर अपनी प्रेयसी के प्यार में डूब जाता था। युद्ध में जितना वह योद्धा था, उतना ही प्रेम में समर्पित। 🛡️❤️ सामान्य पुरुष, इतनी गहराई से प्रेम या इतनी घृणा के साथ युद्ध नहीं कर सकता। उसके लिए संभोग कुछ मिनटों का खेल मात्र है, जो उसे वास्तविक संतुष्टि नहीं दे पाता। 😕 असंतोष की यह भावना कभी-कभी उसे नए साथी की तलाश में ले जाती है। ऐसे समाज में जहाँ बंधन कमजोर होते हैं, वहाँ यह बदलाव जल्दी हो सकता है। लेकिन बार-बार साथी बदलने से न तो मानसिक संतोष मिलता है और न ही परिस्थिति में कोई बदलाव। पुरुष तब तक सच्चे प्रेम में सफल नहीं हो सकता, जब तक वह अपनी आंतरिक प्रवृत्तियों को बाहर निकालने का रास्ता नहीं ढूंढता। इसी कारण, महिलाएं अक्सर उन पुरुषों की ओर आकर्षित होती हैं जो बागी और स्वतंत्र होते हैं। 😏 यही कारण है कि बिंदास और बिगड़े हुए लड़के अक्सर समर्पित प्रेमिकाएँ पा लेते हैं, जबकि सभ्य और संजीदा पुरुष पीछे रह जाते हैं। हालाँकि, यह केवल एक दृष्टिकोण है। हर व्यक्ति की प्रेम और आकर्षण की अपनी परिभाषा होती है, और सभी की अपनी पसंद होती है। 🌸💖 आखिर में, यह कहना उचित है कि पुरुष और महिला दोनों के संभोग और प्रेम की अपनी विशेषताएं होती हैं, लेकिन हर व्यक्ति के अपने विचार और मूल्य भी होते हैं। ✨
तृप्त ...🖤
634,750 görüntüleme • 1 yıl önce
