Загрузка видео...

Не удалось загрузить видео

На главную

प्रेम दर्शन है... प्रदर्शन नहीं हैं ....🥰

11,427 просмотров • 2 месяцев назад •via X (Twitter)

Комментарии: 0

Нет доступных комментариев

Здесь появятся комментарии из оригинального поста

Похожие видео

स्त्री ने कभी यह घोषणा ही नहीं की कि मेरे पास भी आत्मा है । वह चुपचाप पुरूष के पीछे चल पड़ती है । युधिष्ठिर जैसा अद्भुत आदमी द्रौपदी को जुए में दाँव पर लगा देता है ! फिर भी कोई यह नहीं कहता कि हम कभी युधिष्ठिर को धर्मराज नहीं कहेंगे । नहीं, कोई यह नहीं कहता ! बल्कि कोई कहेगा तो हम कहेंगे कि अधार्मिक आदमी है । नास्तिक आदमी है, इसक़ी बात मत सुनो ! स्‍त्री को जुए पर, दाँव पर लगाया जा सकता है, क्योंकि भारत में स्‍त्री सम्पदा है, सम्पत्ति है । हम हमेशा से कहते रहें हैं, स्‍त्री सम्पत्ति है और इसीलिए तो पति को स्वामी कहते हैं । स्वामी का मतलब आप समझते हैं, क्या होता है ? अगर हिन्दुस्तान की स्‍त्री में थोड़ी भी अक्ल होती तो एक—एक शब्द से उसे ‘#स्वामी’ निकाल बाहर कर देना चाहिए । कोई पुरुष कोई स्‍त्री का स्वामी नहीं हो सकता । स्वामी का क्या मतलब होता है ? स्‍त्री दस्तखत कर देती है अपनी चिट्ठी में ‘ #आपकी_दासी ’ और पति देव बहुत प्रसन्न हो कर पढ़ते हैं । बड़े आनन्दित होते हैं कि बड़ी प्रेम की बात लिखी है । लेकिन इसका पता है कि स्वामी और दास में कभी प्रेम नहीं हो सकता । प्रेम की सम्भावना समान तल पर हो सकती है । स्वामी और दास में क्या प्रेम हो सकता है ? इसलिए हिन्दुस्तान में प्रेम की सम्भावना ही समाप्त हो गयी । हिन्दुस्तान में स्‍त्री—पुरुष साथ रह रहे हैं और साथ रहने को प्रेम समझ रहे हैं ! वह प्रेम नहीं है । हिन्दुस्तान में प्रेम का सरासर धोखा है । साथ रहना भर प्रेम नहीं है । किसी तरह कलह कर के 24 घण्टे गुजार देना, प्रेम नहीं है । ज़िन्दगी गुजार देनी प्रेम नहीं है । प्रेम की पुलक और है । प्रेम की प्रार्थना और है । प्रेम की सुगन्ध और है । प्रेम का सँगीत और है । लेकिन वह कहीं भी नहीं ! असल में गुलाम और दास में, मालिक में और स्वामी में, कोई प्रेम नहीं हो सकता । लेकिन हमारे खयाल में नहीं है यह बात कि पूरब की स्‍त्री नेहु विशेष कर भारत की स्‍त्री ने अपनी आत्मा का अधिकार ही स्वीकार नहीं किया है । आत्मा की आवाज भी नहीं दी है । उसने हिम्मत भी नहीं जुटायी कि वह कह सके कि ‘#मैं_भी_हूँ !

तृप्त ...🖤

210,731 просмотров • 1 год назад