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Ana Sayfaya Dön

बस एक अंतर है शहीद भगत सिंह के पास हनुमानजी का फोन नंबर नहीं था 😂

72,501 görüntüleme • 9 ay önce •via X (Twitter)

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जलियांवाला नरसंहार के अगले दिन एक 12 साल का बच्चा वहाँ गया था। उस वक्त उसे कोई नहीं जानता था। लेकिन उस मंजर का जो असर उस पर पड़ा, उसने बच्चे की सोच बदल दी। आज देश उस बच्चे को शहीद-ए-आज़म भगत सिंह के नाम से जानता है। फाँसी से एक हफ़्ता पहले उन्होंने ने अपने पिता सरदार किशन सिंह जी से कहा कि अंग्रेज़ों से माफ़ी नहीं माँगनी है। उन्होंने ने कहा कि उनकी कुर्बानी एक हफ़्ते में देश में आज़ादी की लहर पैदा कर देगी। और ऐसा ही हुआ। फाँसी के छह दिन बाद कांग्रेस का कराची अधिवेशन हुआ। l भगत सिंह की शहादत से जो माहौल बना, उसका सम्मेलन पर पड़ा और सम्मेलन में कराची प्रस्ताव पारित हुआ। इसमें गांधी-नेहरू ने आज़ाद देश में नागरिकों के अधिकारों की रूपरेखा देश के सामने रखी, जो बाद में संविधान का आधार बनी। आज़ादी अब एक ख़्वाब नहीं, मंज़िल बन गई। उस दिन कांग्रेस मंच पर एक बुजुर्ग व्यक्ति भी बोले थे। वो भगत सिंह के पिता सरकार किशन सिंह थे। शहीद भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु को फाँसी के छह दिन बाद ही उन्होंने से कांग्रेस के मंच से कांग्रेस कार्यकर्ताओं और देश से अपील की कि आज़ादी पाने के लिए अपने जनरल यानि गांधी जी के पीछे लाम बंद हो जाएँ। उन्होंने ने कहा कि सभी लोग कांग्रेस नेताओं का सपोर्ट करें, तभी स्वाधीनता मिल सकेगी। ये था कांग्रेस-गांधी-भगत सिंह का संबंध। और RSS के लोग इस बारे में भ्रम फैलाते हैं। स्थापना के बाद से ही RSS के नेताओं ने लिख लिख कर पोथियाँ भर दी, लेकिन 1925 में स्थापना से ले कर 1950 तक एक लाइन जलियांवाला नरसंहार के ख़िलाफ़ नहीं लिखी, एक लाइन भगत सिंह के पक्ष में नहीं लिखी, कभी भी बराबरी के अधिकार, प्रदर्शन प्रोटेस्ट के अधिकार, अभिव्यक्ति की आज़ादी के पक्ष में नहीं लिखा। क्योंकि ये सब उनके एजेंडा में था ही नहीं। इसीलिए संविधान को उनसे खतरा है, क्यूंकि इस संविधान के एजेंडा में वही सब मूल्य हैं। इसीलिए राहुल गांधी संविधान की रक्षा की बात करते हैं। बैसाखी के अवसर पर करनाल जिला (शहरी) कांग्रेस कमेटी द्वारा आयोजित बैसाखी मिलन कार्यक्रम में संबोधन के कुछ अंश। Rahul Gandhi Mallikarjun Kharge Congress

Gurdeep Singh Sappal

17,426 görüntüleme • 4 ay önce

इस तरह का नौकरी देने में खुलेआम भ्रष्टाचार इथोपिया नाइजीरिया सोमालिया यमन और पाकिस्तान जैसे देशों में भी नहीं होता है जहां सरकार नाम की कोई चीज नहीं है झारखंड पब्लिक कमिशन की ऑफिस से हर एक उम्मीदवार को फोन जाता है की पास होना है तो ₹5 लाख दे दो और फोन करने वाला रोल नंबर नाम पिता का नाम मां का नाम दसवीं से लेकर ग्रेजुएशन तक का नंबर अल्टरनेट फोन नंबर जन्मतिथि सब कुछ बता देता है और कई लोगों को तो जेपीएससी के ऑफिस में मिलने के लिए भी बुला लेता है और जब लोगों ने ट्विटर पर मुख्यमंत्री को टैग करके शिकायत किया तो पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में लिखा यह तो उनके दोस्तों ने फ्रेंक कॉल किया था भैया यह होता है कांग्रेस का नौकरी मॉडल और इसी मॉडल के तहत लालू यादव नौकरी के लिए लोगों की जमीन तक लिखवा लेता था और राहुल गांधी सहित पूरा विपक्ष की खुलेआम नौकरी की बिक्री पर चुप है

🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳

12,449 görüntüleme • 18 gün önce