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बहुत बड़ी ख़बर- गोरखपुर आकर सीएम सिटी में बदहाली का ऐसा सच बता गईं गर्वनर आनंदी बेन पटेल!! गोरखपुर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में आईं गर्वनर आनंदी बेन पटेल ने कुछ इस अंदाज़ में बोलना शुरू किया- "जो हमारी कमियां है, वो तो मुझे बताना ही पड़ेगा। ये तो...

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मैं तो अपनी ज़िम्मेदारी निभा रहा हूँ, अपनी दावेदारी कर रहा हूँ।मेरे लिये पार्टी हाईकमान का आदेश सर्वोपरि रहेगा। रही बात किसी और की तो वो अभी तक हमारी पार्टी में नहीं हैं और क्षेत्र में भी नहीं दिखाई पड़ रहे हैं तो उनकी चर्चा करने का आख़िर क्या ही औचित्य है। हमारी पार्टी में जो सबसे क़ाबिल उम्मीदवार होगा उसे ही टिकट मिलेगा। हमारी मुख्य लड़ाई भाजपा से है, भाजपा अमरोहा में हिन्दू-मुस्लिम करने की साजिश करना चाहती है। पर मेरे रहते ये सब करने में वो सफ़ल नहीं हो पाएँगें। वो लोग टिकट पाने के बावजूद भी दिल्ली में ही बैठे हैं, अमरोहा में चुनाव लड़ना है लेकिन ये बीते दस सालों से तो दिल्ली में हैं। यहाँ किसी बाहरी की ज़रूरत ही नहीं है। सचिन चौधरी अपने अमरोहा की सेवा के लिये हमेशा की तरह हाज़िर है। इस बार भी जीत गठबंधन की ही होगी।

Sachin Chaudhary

1,097,554 Aufrufe • vor 2 Jahren

गोरखपुर की शहरी जनता अपने विधायक-मुख्यमंत्री के ‘लोकल डबल इंजन’ से पूछ रही है कि तथाकथित स्मार्ट सिटी बनाने के नाम पर अरबों के जिस फ़ंड का ख़र्चा काग़ज़ों में दिखाया गया है, वो कौन डकार गया। दूसरों को आँख बंद करके ‘शासन-प्रशासन’ के नाम पर कोसनेवालों ने अब क्या अपनी आँखें बंद कर ली हैं? माननीय को चिराग तले का अंधेरा नहीं दिखता है तो कम-से-कम चिराग़ तले का पानी ही देख लें। अब क्या वो अपने क्षेत्र के शिकायत करनेवालों पर भी अपने कटु वचनों की भड़ास निकालेंगे। इनकी कड़वाहट देखकर तो करेला भी शर्मा जाता है। सबसे पहले जल भराव के पीड़ितों के लिए भोजन-पानी, दैनिक ज़रूरतों के सामानों, दवाइयों व रैन बसेरे का इंतज़ाम किया जाए। हम जलमग्न क्षेत्रों में हुई जनता की हानि की भरपाई की माँग करते है। महंगाई व बेरोज़गारीजन्य ‘मंदी, भ्रष्ट जीएसटी तंत्र तथा भाजपाई वसूली’ से जूझते व्यापारियों की हालत वैसे ही बहुत जर्जर है, अब जलभराव के कारण वो अपने माल की हानि बर्दाश्त करने की स्थिति में नहीं है। कारोबारियों को बिना किसी भेदभाव के, ईमानदारी से मुआवज़ा दिया जाए। सरकार के भ्रष्टाचार का ख़ामियाज़ा जनता या दुकानदार भाई क्यों भुगतें? साथ ही हमारी माँग ये भी है कि जलभराव के बाद आनेवाली बीमारियों से भी बचाव के उपाय किये जाएं व सफ़ाई अभियान युद्ध स्तर पर चलाया जाए। अब क्या वो गोरखपुर का नाम भी बदलकर ‘जलनगरी’ रखनेवाले हैं? अब तो साबित हो गया है कि माननीय जापान किसी और की ख़ोज में गये थे न कि सिटी प्लानिंग जैसा कोई अनुभव लेने, नहीं तो गोरखपुर की ये दुर्गति न होती। इस बार भाजपा के हाथ से गोरखपुर भी गया!

Akhilesh Yadav

110,774 Aufrufe • vor 1 Monat

भाजपा सरकार ने करोड़ों की जो धनराशि गोरखपुर के राजघाट के निर्माण के लिए निकाली थी उसमें से सिंचाई विभाग ने भाजपाइयों के साथ मिलकर, भ्रष्टाचार की नहर निकालकर अपने स्वार्थ के कई खेत सींच लिए हैं तभी ये बदहाली है। निर्माण की इस दुर्गति के पीछे भाजपाई कमीशनख़ोरी ही ज़िम्मेदार है, जिसने दो अधिवक्ताओं की असामयिक जान ले ली है, उस पर अधिकारियों की असंवेदनशील बेहूदा बयानबाज़ी की प्रेरणा उन भ्रष्ट अफ़सरों को कहाँ से मिल रही है कहने की ज़रूरत नहीं हैं। इधर भाजपा सरकार में ये देखा जा रहा है कि मृतकों के परिजनों के घाव पर नमक छिड़कने का काम लगातार किया जा रहा है। भाजपाई याद रखें अब जनता न तो भाजपावालों के भाषण सुनने के मूड में है, न उनके बयान। निर्माण में संलिप्त अधिकारियों व ग़ैरज़िम्मेदार बयानबाज़ी पर अगर अधिकारियों का निलंबन नहीं हुआ तो माना जाएगा कि वो अपने मुखिया और सांसद के कहने पर ऐसा भ्रष्ट काम कर रहे हैं, ऐसी भ्रष्ट भाषा बोल रहे हैं। उप्र की भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार का हाल ये है कि अगर लोगों को पता चल जाए कि ये निर्माण भाजपाकाल में हुआ है तो : - भाजपाकाल में निर्मित छतरी और द्वार के नीचे जनता खड़ी नहीं होती है; - भाजपाकाल में निर्मित पानी की टंकी देखकर दूर भागती है; - ⁠भाजपाकाल में निर्मित दीवार का सहारा नहीं लेती है; - भाजपाकाल में निर्मित सड़क, हाईवे और एक्सप्रेसवे पर नहीं चलती है; - ⁠भाजपाकाल में निर्मित पुलों से नहीं गुजरती है; - ⁠भाजपाकाल में निर्मित मंदिर और संसद की टपकती छत से ख़ौफ़ खाती है; भाजपा ने भ्रष्टाचार का वैश्विक रिकॉर्ड तोड़ दिया है। भाजपाई ये भी नहीं सोचते हैं कि इन जानलेवा निर्माणों के कारण कभी उनके अपने भी इसका शिकार हो सकते हैं, लेकिन हृदयहीन भ्रष्ट भाजपाई अपने आप के अलावा किसी और के बारे में या परिवार के बारे में नहीं सोचते हैं। ये बड़े गर्व से कहते हैं कि हमारा तो परिवार ही नहीं है। परिवार उनके होते हैं जो ज़िम्मेदारी निभाना जानते हैं, उनके नहीं जो ज़िम्मेदारी से भागकर सुरंगों में रहते हैं। गोरखपुर में सांसद, विधायक, मेयर का भाजपाई ट्रिपल इंजन है, ऊपर से मुख्यमंत्री भी यहीं के हैं और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी, शायद इसीलिए भ्रष्टाचार में बंदरबाँट के हिस्से भी ज़्यादा हो रहे हैं और निर्माण के लिए कुछ बचता ही नहीं है। बेहद निंदनीय!

Akhilesh Yadav

171,708 Aufrufe • vor 4 Tagen

आज अखबार में मुख्यमंत्री जी का आर्टिकल प्रकाशित होने और प्रदेश के हालातों पर : दूसरा जो है, आज आर्टिकल आया है मुख्यमंत्री महोदय का, आर्टिकल आया अच्छी बात है। पांच साल बनाम डेढ़ साल, कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं पूरे प्रदेशवासियों और प्रदेश के गांव गांव में तो ऐसी सरकार का निकम्मापन नाकारापन मैने कभी नहीं सुना किसी सरकार का। सरकारें बीजेपी की भी रही हैं सरकारें राजस्थान में कांग्रेस की भी बनी हैं बीजेपी की भी रही हैं इतना निकम्मा नकारापन मैंने कही देखा नहीं,और इतने कम समय के अंदर, आप बताइए तीन साल बाद में सरकार के बारे में लोग प्रतिक्रिया देते हैं काम नहीं हो रहे हमारे, करप्शन बहुत है सुनवाई नहीं हो रही है किस के पास जाएं सब बातें बोलते हैं लोग तीन साल के बाद में। यही सरकार ऐसी है 6 महीने में ही लोगों को समझ पड़ गया पूत के पांव पालने में होते हैं न वो कहावत चरितार्थ हुई है तो राजस्थान में हुई है। अरे ये क्या हो गया हम ने ये क्या कर दिया, चुनाव तो, सरकार तो पहले वाली चली गई कांग्रेस की पर नई सरकार में ये क्या हो रहा है जिसके पास जाएं, वो सरकार का मुख्या अगर दावा करे तो मैं ये बार बार कहता हूं ये उनका बहुत बड़ा साहस है हिम्मत है कि वो ये मुकाबला कर रहे हैं। और आज ही जिस अखबार में आर्टिकल लिखा गया कम से कम सीएमओ को चाहिए था डीआईपीआर को चाहिए था मैनेज करते आज तो उनके खिलाफ न्यूज नहीं आती। आज भास्कर के अंदर आर्टिकल भी आया है और मुख्यमंत्री के दावे को खोखला साबित कर रहे हैं वो ऐसी ऐसी घटनाएं आज आई हैं उसके अंदर कानून व्यवस्था की हो या अन्य घटनाएं हों तो आज तो मैनेज करना चाहिए था कम से कम। मैनेजमेंट भी नहीं किया आर्टिकल की खुद की धज्जियां उड़ गईं उसके अंदर ही। पत्रिका में क्या आता है अलग बात है और अखबारों में क्या आता है वो तो लंबी चौड़ी बाते हैं लगातार आ रही हैं।

Ashok Gehlot

13,496 Aufrufe • vor 1 Jahr

"इतना सन्नाटा क्यूं है भाई.. न मोदी जी आये.. न शाह साहब दिखे.. न भाजपा शासित सारे राज्यों के सीएम.. माजरा क्या है!!" बिहार में पहली बार भाजपा की सरकार बनी.. और कोई जश्न नहीं हुआ?? ये भी पहली बार देख रहा हूं.. भाजपा के मुख्यमंत्री ने जहां-जहां शपथ ली, वहां के भव्य समारोह तो देखे ही होंगे आप सबने.. फिर बिहार में इतना सन्नाटा क्यूं!! प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और तमाम राज्यों के सीएम कहां रह गए?? वो भी तब, जब बिहार में भाजपा का सपना पूरा हो रहा है.. पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री शपथ ले रहा है.. ..और शपथ ग्रहण समारोह में नजर आ रहे चेहरों में वो खुशी, वो उत्साह क्यों नहीं दिख रहा?? खुशी और उत्साह छोड़िए.. माहौल में जैसे उदासी सी छाई लग रही है.. दया कुछ तो गड़बड़ है?? #Bihar #SamratChaudhary #CM #BJP #BiharCM #OathCeremony #Government

Vivek K. Tripathi

63,902 Aufrufe • vor 5 Monaten

भाजपा सरकार के मंत्रियों का ये ‘मानमर्दन’ सुनने में कटु लगे जैसे ‘मुख्य-मुख’ के वचन मुख्यमंत्री जी पता करके बताएं जनमानस में आक्रोश का विषय बना ये वीडियो AI जेनरेटेड है या सत्य है। अगर ये सत्य है तो जवाब आपको ही देना होगा क्योंकि मंत्रियों का चयन तो आपने ही किया है। ये आपको चुनौती है मंत्रियों को नहीं, लेकिन आपके इन विशेष मंत्रियों के नामों की भी पर्ची अगर ऊपर से ही आई थी तो आप ये वीडियो ऊपर भी भेज सकते हैं। बच नहीं सकते, हर हाल में जवाब तो देना ही पड़ेगा क्योंकि ये दो समाज के मान-सम्मान का सवाल बन गया है। अगर कहनेवालों ने किसी एक व्यक्ति विशेष का नाम लिया होता तो बाद दूसरी थी परंतु एक ‘समाज विशेष’ और एक ‘दल विशेष’ का नाम लेकर दो बड़े समाजों के मान को सरेआम ठेस पहुँचायी गयी है। इन दलों के नेताओं को भी आगे आकर बोलना चाहिए। अगर उन दोनों समाज के मंत्री बने नेताओं ने कुछ नहीं किया तो मान लिया जाएगा कि उन्हें व्यक्तिगत स्तर पर अपना मंत्री पद ज़्यादा प्यारा है, अपने समाज का मान-सम्मान नहीं। घोर आपत्तिजनक व निंदनीय!

Akhilesh Yadav

124,650 Aufrufe • vor 3 Monaten

माननीय विधायक महोदय कुलदीप धनकड़ जी आप राजनीति के लिए अपने संस्कार भी भूल गए। मेरे दिवंगत पिताजी के लिए इतने हल्के शब्दों का उपयोग, क्या पार्टी आपको यही संस्कार सिखाती है। मैंने तो जनभावनाओं को उठाया था। इसमें मैंने क्या ग़लत बोल दिया, मैंने तो उसमे आपके परिजनों का नाम नहीं लिया था क्योंकि मेरे परिवार और पार्टी ने मुझे ऐसे संस्कार नहीं दिए। क्या लोकतंत्र में ग़लत बात का विरोध करना ग़लत है ? मैंने तो ये कहा था की ये गोदामों की ज़मीन पावटा की जनता की संपति है इसको नहीं बेचना चाहिए। क्योंकि पावटा क़स्बे में वैसे ही सरकारी भवनों के लिए जगह नहीं है तो आने वाले समय में इस भूमि में अनेक सरकारी कार्यालय बन सकते है। क्या ये माँग करना जायज़ नहीं है। मैंने कब कहा की ये मेरे बाप की ज़मीन है। मैंने तो जनता की संपति बताया था, हाँ आपको एक बात बताना चाहता हूँ की जो शब्द आपने मेरे दिवंगत पिताजी के लिए बोले है वो मुझे भी बोलने आते है लेकिन मेरे संस्कार मुझे ऐसे हल्के शब्दों के लिए अनुमति नहीं देते। जनता ने मुझे विपक्ष में बैठने का जनादेश दिया है इसलिए मेरा धर्म बनता है की अगर सत्तापक्ष कोई ग़लत निर्णय करे तो मैं उसका विरोध करूँ। और हाँ आपने बोला है की मैंने काम नहीं किए है क्या ऐसे, तो मैंने तो मेरे कार्यकाल में एक भी सार्वजनिक संपति नहीं बेची। और हाँ आप जनता को सार्वजनिक रूप से ये बताए की आप और आपकी सरकार इस ज़मीन को क्यो बेचना चाहती है। जनता को ये पूछने का अधिकार है। आप पावटा में सर्वदलीय सभा बुलाओ और जनता से राय करो की ये ज़मीन बेचनी चाहिए या नहीं। आप और आपकी सरकार जनता से बड़े नहीं हो। लोकतंत्र में जनता ही मालिक है। सरकार जनता की मालिक नहीं है बल्कि जनता सरकार की मालिक है।सत्ता का इतना अहंकार ठीक नहीं है विधायक महोदय, सत्ताये तो आती जाती रहती है लेकिन अपने परिवार के संस्कार मत भूलो, आप जिंदगी भर इस पद पर नहीं रहोगे।

Indraj Gurjar

19,673 Aufrufe • vor 1 Jahr

भाजपा के अंदर आपस में ‘विचारों का विलय’ नहीं हो रहा है और दावे दुनिया भर के। आप तो लखनऊ की कुर्सी पर ध्यान दें, जिसे दिल्लीवाले विलय ही नहीं, विलीन भी करनेवाले हैं। एक मुख्यमंत्री होने के नाते वैसे भी ये विषय आपके अधिकार क्षेत्र का नहीं है। ऐसा लगता है कि ये सुझाव देने के लिए आपको दिल्लीवालों ने मिलने का समय नहीं दिया तभी आप माइक पर बोलने को मजबूर हैं, नहीं तो ये बात तो आप भी समझते ही हैं कि जब आपस में खटास हो तो एक-दूसरे के अधिकार-क्षेत्र में अतिक्रमण और भी खलता है। ध्यान रखिएगा कहीं ऐसा न हो कि इस अतिक्रमण के ख़िलाफ़ कोई तोड़क कार्रवाई हो जाए, बुलडोज़र तो दिल्लीवालों के पास भी है।

Akhilesh Yadav

152,406 Aufrufe • vor 2 Jahren

धरना दे रहे आनंदीलाल पोद्दार मूक बधिर विद्यालय के विद्यार्थियों से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत की : लोकसभा का मेंबर बना पहला काम मैंने किया, यह जो बच्चे हैं, डेफ एंड डम्ब ( मूक-बधिर), तो मैंने उन्हीं के लिए गांधी बधिर विद्यालय खोला था। आज इस बात को करीब 40 साल से ज्यादा हो गया। अब वो बढ़ते-बढ़ते कॉलेज बन गई है जोधपुर के अंदर। इस प्रकार से मेरे को उस वक्त से मालूम है कि डेफ एंड डम्ब बच्चों की प्रॉब्लम क्या रहती है। आजकल तो बहुत ही आधुनिक तकनीकें आ गई हैं। हमारी गवर्नमेंट ने ही शुरू की थी देश के अंदर, बाद में भारत सरकार ने शुरू किया। 7 साल- 8 साल तक के बच्चों को जो है कॉकलियर इंप्लांट लग जाते हैं। बच्चे का अगर बचपन में सरकार ऑपरेशन करवा देती है जैसे मैंने शुरू किया राजस्थान के अंदर, मेरे दूसरे कार्यकाल के अंदर, साढ़े 6-7 लाख का खर्चा आया। हमने जो भी बच्चा आया, सबका कॉकलियर इंप्लांट लगाया तो वो बच्चे उसके बाद में बोलना और सुनना सीख जाते हैं। जब सुनना सीखेंगे तो बोलना सीख जाते हैं। प्रॉब्लम आती है सुनने में। अगर पैदाइश से ही वो सुन नहीं सकता, तो ये बोलेगा क्या? जब सुनाई ही नहीं देता है तो कौन क्या बोल रहा है। तो ये जो नई तकनीक आई है, बहुत ही कारगर है। अब मैंने सुना भारत सरकार ने भी इसके ऊपर ध्यान दिया है। तो राजस्थान तो वो राज्य है। अभी बच्चों की प्रॉब्लम यही थी, एक तो टीचर्स जो हैं, ये साइन लैंग्वेज होती है, बिना साइन लैंग्वेज के जो टीचर लगे हुए हैं अधिकांश, वो क्या पढ़ाएंगे जब उनको साइन लैंग्वेज खुद को नहीं आती है, इनको क्या पढ़ाएंगे? और ये तमाम बच्चे बड़े एक्सपर्ट बन गए हैं, काफी लोग, जो साइन लैंग्वेज से बातचीत कर सकते हैं सब।तो इनकी उस संबंध में समस्याएं हैं। फिर व्यवहार क्या है टीचर्स का, इनके नियम-कायदे फॉलो होते हैं कि नहीं होते हैं, सरकार सुविधाएं देती है वो इन तक पहुंचती हैं कि नहीं पहुंचती हैं, बिल्डिंग जर्जर हालत में है, बाथरूम गंदे पड़े हैं, गंदगी साफ नहीं होती है, जनरल समस्याएं इन्होंने बताई हैं। तो मैं मुख्यमंत्री को खुद लिखूंगा डी.ओ. लेटर, बताऊंगा कि मैं जाके आया हूँ और मेरा खुद का बैकग्राउंड इन्हीं की सेवाओं से शुरू हुआ है। मैं उनको अहसास करवाने की कोशिश करूँगा कि आप भी ध्यान दें। ये लड़के-लड़कियाँ यहाँ पर करीब 300 के लगभग पढ़ रहे हैं यहाँ पर। तो जब बोल नहीं सकते, सुन नहीं सकते, आप सोच सकते हो क्या बीत रही होगी। साइन लैंग्वेज ही है जिससे अपना वो जीवन बसर कर सकते हैं। ये बच्चे बड़े उम्र के हैं, इनका वो ऑपरेशन भी नहीं हो सकता है। ये स्थिति है। तो इसलिए मैंने जान-बूझकर उचित समझा कि मैं खुद जाऊँ। अभी मिस्टर जूली साहब आके गए थे, वो विपक्ष के नेता हैं, वो भी उठाएंगे असेंबली में भी। वो भी लिखेंगे मुख्यमंत्री जी को, हम दोनों बात करेंगे आपस के अंदर। और जो भी हो सकता है। ये संस्थान बहुत शानदार संस्थान है । पोद्दार जी के नाम से बनी है, 50 साल पहले बनी होगी, इसका अपना अलग महत्व है राजस्थान के अंदर। बाकी तो धीरे-धीरे पनपती हैं, सात हैं, आठ हैं, जो भी संस्थान हैं। दुर्भाग्य है प्रदेश का कि मैंने जो बाबा आमटे विश्वविद्यालय खोला यहाँ निशक्तजनों के लिए, उसमें डेफ एंड डम्ब भी आते हैं, ब्लाइंड भी आते हैं, हैंडीकैप्ड भी आते हैं। वो विश्वविद्यालय कागजों के अंदर है। वीसी को बिठा रखा है ये शिक्षा संकुल के अंदर। सरकार की ये स्थिति है, ढाई साल से वो वीसी बिठा रखा है वहाँ पर। अब रिटायरमेंट हो गया उनका। कुछ सेक्टर ऐसे होते हैं जहाँ राजनीति बीच में नहीं आती। उसमें तो सरकार को चाहिए चाहे कोई पार्टी के बच्चे पढ़ते हों, किसी परिवार के कोई, किसी पार्टी का कोई मतलब नहीं है। ये तो सेवा का काम है। इनकी सेवा करना, ईश्वर की सेवा करना है।

Ashok Gehlot

41,494 Aufrufe • vor 1 Monat

राजस्थान में राज RSS वाले कर रहे, ये खाली मुखौटे हैं जोधपुर में आज मीडिया से बातचीत की: अशोक गहलोत का जवाब: देखिए राजनीति में जो है, झूठे आरोप नहीं लगाए जाते हैं। अगर आपके पास तथ्य है, तो उस पर बात करो। किरोड़ी मीणा जी जब सरकार में नहीं थे, तब भी वो लगातार आरोप लगाते थे। उनकी जो प्रकृति में है कि वो, आंदोलन करते रहते हैं लगातार, आप देखते हो उनको 15-20 साल से। तो एक अलग किस्म का प्राणी हैं वो। वो पहले भी आरोप लगाते थे अब भी लगा रहे हैं, अनावश्यक है। पार्टी के जो अध्यक्ष होते हैं उनकी एक अलग प्रतिष्ठा होती है। उस पे आप बार-बार चोट कर रहे हो। आरोप लगा रहे हो बिना तथ्यों के। तो आप बताइए कि पार्टी में रिएक्शन होगा? हमारी पार्टी में रिएक्शन है। डोटासरा जी को खुद को लगता है भाई ये क्या आरोप लगा रहा है वो भी बिना तथ्यों के। हम सब को लगता है। ये किरोड़ी मीणा जी को खुद को सोचना चाहिए, वो क्या किस प्रकार की उनकी अप्रोच है काम करने की है। छापे डाल रहे हैं और छापे के साथ जो जाते हैं लोग उनके, वसूली करते हैं वो। ये तो प्रूव हो गया है। जब प्रूव हो गया है तो कहते हैं कि एसीबी भी दबाव में काम कर रही है। तो भाई एसीबी तो दबाव में जब से डीजी साहब आए हैं, पहले मैंने कहा ये आदमी तो भला है डीजी। वो पूरी तरह सीएमओ के और सीएम के दबाव में है ये। और इनके जो नीचे अधिकारी है, वो भी इनकी बात नहीं मानते हैं। वो इनको उल्टा दबाते हैं। तो मुझे लगता है कि एसीबी का जो डीजी है, वो खुद परेशान होगा, मेरे ख्याल से जहां तक मैं समझता हूँ या जहाँ तक मेरे पास वहां से रिपोर्ट आती है। वहाँ के जो काम करने वाले अधिकारी कहते हैं ना कि भाई क्या हो रहा है हमारे यहाँ? स्थिति एसीबी की बहुत भयानक खराब है। दबाव में काम हो रहे हैं। मुख्यमंत्री जी को ऑबलाइज करने के लिए फैसले हो रहे हैं। आईओ कह रहा भाई ये मुल्जिम नहीं बनता हमारा। और ऊपर से कहते हैं डीजी साहब और जो दबाव आता है उनके ऊपर, नहीं आप इनको अरेस्ट करो। ऐसा मैंने आज तक कभी देखा नहीं। तीन-तीन बार हम भी मुख्यमंत्री रहे हैं। एसीबी में कोई पंचायत नहीं करनी चाहिए किसी को भी। यहाँ पंचायतें नहीं हो रही हैं। आईओ कह रहा भाई ये अरेस्ट नहीं हो सकता है क्योंकि इसमें कोई केस नहीं बनता। आप इसको अरेस्ट कीजिए। अरेस्ट हुए भी हैं, जिनमें महेश जोशी भी हैं। आईओ ने मना किया। वो ऑलरेडी द्वारा वैसे ही केस में अरेस्ट हो चुके थे। यहाँ वापस अरेस्ट कर लिया, क्या मजाक बना रखी है? क्या मुख्यमंत्री को दिखता नहीं है कि ये क्या हो रहा है? उनका खुद का नाम आता है कि दबाव आता है। शायद आरएसएस वालों का आता होगा। आरएसएस के दबाव होने के बाद में मुख्यमंत्री हथियार डाल देते हैं। राज आरएसएस कर रहा है ये तो मुखौटे हैं खाली। मुझे लगता है कि राजस्थान के अंदर आजकल जो ये लोग राज करते हैं ये मुखौटे बने हुए हैं। राज आरएसएस वाले कर रहे हैं। ट्रांसफर, पोस्टिंग, करप्शन सब वहीं से डायरेक्शन आते हैं। हालात बड़े गंभीर हैं राजस्थान के। ऐसी इनकी स्थिति बनेगी इस बार राजस्थान की, जनता जो है वो जागरूक है। ये कुछ भी कर लें, ये मुख्यमंत्री बदल देंगे ना, तब भी कुछ नहीं होने वाला है, अगली बार सरकार बदल के रहेगी। थैंक यू।

Ashok Gehlot

56,840 Aufrufe • vor 2 Monaten

जैसलमेर में बस जलने से 20 लोगों के जिंदा जलने की घटना पर मीडिया के प्रश्न को लेकर मेरा रिएक्शन : बहुत बुरा हादसा हुआ है, ये हादसे अभी और हुए थे दूदू के पास में भी और एक तो, हादसे का क्या करें, 20 लोग मारे गए, वेंटीलेटर पर हैं लोग, 70% बर्न है तो ये बहुत ही दुखद घटना है और मेरे ख्याल से तो ये तो जांच का विषय भी है बस में आग लगी क्यों, ये जांच का विषय भी हो सकता है, कई बार नई बस खरीदते हैं, मैने सुना कोई दस दिन पहले ही बस खरीदी थी सुना है मैंने, तो पता नहीं कोई टेक्निकली गलत तो नहीं है, ऐसे वक्त में कोई लापरवाही नहीं करनी चाहिए, बकायदा कंपनी में कंप्लेंट करनी चाहिए कि भई रवाना हुई थी बस , एक्सीडेंट भी नहीं हुआ और ये हादसा हुआ क्यों, कोई टेक्निकली फाल्ट हो गई, आग लग गई, मैनें सुना आग लगते ही जो दरवाजे थे वो लॉक हो गए जो सुनते हैं असलियत क्या है नहीं मालूम हम लोगों को पर इसको सरकार को चाहिए कि इसकी बाकायदा कंपनी से बात करके इसकी जांच भी करवाएं मेरा मानना है। बाकी तो हम ईश्वर से प्रार्थना ही कर सकते हैं कि मृत आत्माओं को शांति प्रदान करें, जो अभी तकलीफ में हैं अस्पताल में वो जल्दी स्वस्थ हों यही हमारी कामना है, परिवारजनों के लिए भी यही कह सकते हैं कि बहुत बड़ा हादसा हुआ है बहुत दुखद है अब उसको आपको कैसे सहन करना है वो भगवान आपको शक्ति दे।

Ashok Gehlot

73,531 Aufrufe • vor 11 Monaten