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भगवा बौद्धों का है.....

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श्रीराम मंदिर के शिखर पर स्थापित धर्म ध्वजा संपूर्ण समाज राष्ट्र व विश्व के लिये एक प्रेरणा है। जहाँ तक इसके भगवा रंग पर यदि किसी को आपत्ति है तो भगवा भारत के राष्ट्रीय ध्वज में सबसे ऊपर स्थापित रंग है। हरा रंग हरियाली का प्रतीक है, यह एक सामान्य सार्वभौमिक तथ्य है; सफेद रंग शांति का प्रतीक है और यह भी एक सामान्य व सार्वभौमिक तथ्य है जो दुनिया के हर देश पर समान रूप से लागू है। पर भगवा रंग त्याग और बलिदान का प्रतीक है और यह केवल भारत के संदर्भ में ही है। हमारे तिरंगे में जो विशुद्ध भारतीयता का रंग है, जिसका सिर्फ भारत के साथ कनेक्शन है, वह भगवा रंग है। इसलिए हमारे संविधान निर्माताओं ने भगवा रंग को लिया और उसे सबसे ऊपर रखा। यही वही रंग है जो यज्ञ में ज्वालाओं का प्रतीक है। यही वही रंग है जब energy-mass conversion होता है तो अग्नि का रंग यही भगवा दिखाई पड़ता है। यही वही रंग है जो ऋषियों ने पहना था, यही वही रंग है जो भगवान बुद्ध ने पहना था। यही वही रंग है जो भगवान राम और भगवान कृष्ण के ध्वज पर था। सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य, सम्राट विक्रमादित्य से लेकर ललितादित्य मुक्तापीड से राजाराज चोल से लेकर छत्रपति शिवाजी महाराज, महाराणा प्रताप व गुरु गोविन्द सिंह जी के ध्वज तक यही भगवा है और फाँसी से पहले गीत गाते भगत सिंह इसी को बसंती चोला कहते थे। भगवा भारत के ओज का प्रतीक है, भारत के शौर्य का प्रतीक है। इसमें किसी को कौन-सी नकारात्मकता नजर आती है? Charcha With Chitra- एबीपी न्यूज पर लिंक -

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