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भाजपा और राजद दोनों को अंदाजा नहीं है कि ज़मीन पर क्या होने जा रहा है।

12,057 просмотров • 1 год назад •via X (Twitter)

Комментарии: 10

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UltraViolent Light ( UV Prakash)1 год назад

एक झारखंड में भी था "तीसरा मोर्चा" जयराम महतो आखिरकार वही हुआ, वोट कटे केवल, सीट आई केवल बेरमो वो भी कुछ ही वोटों से और आखिरकार चुपचाप सोरेन से मिल गया वही ये प्रशांत किशोर कर रहा है बस वोट काटेगा और UPA में मिल जाएगा

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Pharamcia Yadava1 год назад

राजद का वोटबैंक सौ प्रतिशत इंटैक्ट रहने वाला है,पीके से खतरा सिर्फ जदयू और भाजपा को हो सकता है हां फ्लोटिंग वोट्स कहीं भी जा सकते हैं लेकिन वैसे भी बिहार के फ्लोटिंग वोट्स भी भाजपा में जाते हैं तो नुकसान भाजपा को ज्यादा होता दिख रहा है और जिस तरह की निकम्मापन है होना ही चाहिए

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Malal1 год назад

किसी का वोट इंटैक्ट नहीं रहेगा। या छिटपुट असर होगा या टोटल सफाया

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Ameet1 год назад

भाई, आयेगा तो सब जात पर ही। हल्ला करने से वोट नही मिलता। टिकट कटने से नाराज NDA और राजद के 2-4 नेता इसके टिकट पर जीत भी सकते है। पर उससे अंतर नही पडेगा।

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N∆SHU 卐1 год назад

Sahi kahe log 200 200 leke jamin pe nach rhe hai 😭😭🤣

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Malal1 год назад

तुम मोतिहारी शहर में रहके ऐसे ही बात कर सकते हो। गाँव तक इसका संघठन चला गया है।

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Manohar singh Rathore1 год назад

भाई साहब pr करके कितना वोट का नुक़सान करेंगे राजद का यह सीट तो एक नहीं आएगा

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Malal1 год назад

ये तो चुनाव के वक्त में देखेंगे

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KK1 год назад

Yes...it seems so....

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ATUL ANAND1 год назад

इनको झटका लगना बहुत आवश्यक हैं, आम बिहारियों को पूर्ण मूर्ख समझ रखा है बीजेपी ने, राजद तो अभी भी 90 के दशक में रहना चाहती है।

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उप्र में भाजपा के तथाकथित अमृतकाल की इससे दुर्भाग्यपूर्ण तस्वीर और क्या हो सकती है कि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ समझे जानेवाला किसान आज अपनी ज़मीन को बचाने के लिए ख़ुद को आग लगाने पर मजबूर हो रहा है। मेरठ में वन विभाग द्वारा अपनी ज़मीन हड़पे जाने के बाद कई बार कोशिश करने पर भी सुनवाई न होने से हताश होकर ख़ुद को आग लगानेवाले किसान को सबसे पहले अच्छे से अच्छा इलाज सुनिश्चित कर बचाया जाए और फिर उसकी ज़मीन लौटाई जाए। भाजपा खेती और किसान दोनों को विरोधी है। जबसे भाजपा आई है तबसे उसकी बुरी नज़र किसानों की ज़मीन पर भी है और उनकी पैदावार पर भी। चाहे भूमि के अधिग्रहण का क़ानून रहा हो, खाद की बोरी में चोरी, महँगे बीज, बिजली, सिंचाई के रूप में लगातार बढ़ती कृषि लागत और फसल की लगातार घटती क़ीमत या काले क़ानून सब भाजपा की किसान विरोधी सोच का उदाहरण हैं। किसान भाजपा का दाना-पानी उठा देंगे। #नहीं_चाहिए_भाजपा

Akhilesh Yadav

172,269 просмотров • 2 лет назад