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Though born into the sacred order of the Brahmins, you may call me Moses. || Team Dahi-Chiura ||
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जो भरत तिवारी को जाति से और अपराध से जोड़ रहे हैं , उनके लिए यह वीडियो। कभी उन गाँव में जाकर अगस्त-सितंबर में जाकर समय बिताओ जहाँ नदी में लोगों की जीवन भर की उनकी पूँजी गिर रही होती है। किस दहशत में वो लोग रातों को सोते हैं , उसको प्रत्यक्ष अनुभव करो फिर उसे वेदना की आवाज को दबाए जाने के बाद की पीड़ा को समझो। भरत की सनक की पृष्ठभूमि है उसमे है , ना कि पिस्तौल लेकर लड़ते हुए लड़के में।
Comrade M14,218 просмотров • 8 дней назад

“डोभाल डॉक्ट्रिन मेरे डॉक्ट्रिन से सुपीरियर है” “मैं अपने रणनीति से जितना कुछ कर सकता हूँ , डोभाल वो सब कर सकता है , उसके अलावा भी वो बहुत कुछ कर सकता है। जो मैं सोच तक नहीं सकता।” 1857 में इटावा के कलेक्टर थे AO ह्यूम , जब मेरठ विद्रोह की ख़बर उनतक पहुँची तो तत्काल उन्होंने 650 राज के वफ़ादार भारतीयों की एक अस्थायी सेना बनाई और इसी सेना के सहारे उन्होंने विद्रोहियों से मोर्चा लिया। इस प्रारंभिक सफलता से उन्हें हुए विश्वास हुआ कि अगर प्रयास किया जाए तो आम लोगों से जुड़कर, उनके साथ काम करके अंग्रेजी राज की जड़ें ज़्यादा मजबूत की जा सकती हैं। इसी कवायद में कुछ और अंग्रेजी अधिकारियों को लेकर उन्होंने कांग्रेस की नींव रखी। जिसका प्रारंभिक मकसद था आम लोगों से ब्रिटिश राज का सीधा कनेक्शन होना। पब्लिक का एंगर मैनेजमेंट करना , दोनों साइड के लिए विन-विन सिचुएशन क्रिएट करना। ब्रिटिश राज का सेफ्टी वाल्व बनना। आगे चलकर स्टंट का यह हश्र हुआ कि अंग्रेजों को भगाने के लिए कांग्रेस ही मुख्य प्लेटफार्म बन गई। -अमरजीत सिंह दुल्लत की कश्मीर डॉक्ट्रिन AO ह्यूम के पब्लिक साइक को समझने से कुछ अलग नहीं है। अगर यह जारी रहती तो इसका क्या परिणाम आता , यह रॉकेट साइंस नहीं है। इस डॉक्ट्रिन का असर यह था कि आतंकवादी भारत सरकार से पैसे भी ले रहे थे , भारतीयों को मार भी रहे थे और मुख्यधारा के मीडिया में मस्त अपना दुखड़ा भी रो रहे थे।जिनको मार रहे थे , उन्हें अपना शोषक भी बता रहे थे। - बाक़ी डोभाल डॉक्ट्रिन क्या है ….यह तो AS दुल्लत साहब ही बता पाएंगे।
Comrade M53,077 просмотров • 6 месяцев назад

अंजना ओम कश्यप और प्रशांत किशोर में भोजपुरी बैंटर। मजा आ गया सुनके। 🤣
Comrade M60,743 просмотров • 9 месяцев назад

Can Suvendu Adhikari pull off what Himanta did in the last Battle of Saraighat?
Comrade M17,488 просмотров • 2 месяцев назад

राहुल गांधी के SIR यात्रा के बाद से तेजस्वी यादव विपक्ष के स्पेस से गायब हैं। यात्रा के तुरंत बाद उनके छपरी डांस का वीडियो वायरल किया राजद IT सेल ने , उसके बाद राजद से संजय यादव का अधिकार यात्रा के बस में आगे बैठने का फोटो वायरल हुआ था। जिसपे आपस में ही खूब जूतम पैजार हुआ। फिर रोहिणी यादव की नाराजगी वायरल हुई और कार्यकर्ताओं की अनदेखी के नाम पर आलोक चीकू का सोशल मीडिया पर चीत्कार थोड़ा चर्चा का विषय बना। अन्यथा राजद विपक्ष के स्पेस से पूर्णतया बाहर हो चुकी है। कोई मीनिंगफुल ख़बरें राजद कैम्प से बाहर नहीं आ रही है। और जैसा प्रशांत किशोर पिछले तीन वर्षों से कहते आ रहे हैं कि चुनाव आते-आते जनसुराज की सीधी लड़ाई NDA से होगी। कुछ वैसा ही माहौल बनते दिख रहा है। शायद अगले 5 अक्टूबर से जनसुराज अपना कैंपेन लांच करने जा रही है , तब इसकी इंटेंसिटी और बढ़ जाए।
Malal49,932 просмотров • 9 месяцев назад
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बिहार में फ़ुटहोल्ड बनाने के लिए प्रशांत किशोर ने एनार्की का सहारा नहीं लिया। कोई आर्टिफीसियल अनरेस्ट नहीं क्रिएट किया। टूलकिट्स के सहारे मूवमेंट्स नहीं क्रिएट किए। राजनीति के सबसे आसान हथकंडे पीपल टू पीपल डिवाइड का सहारा नहीं लिया। मिथिला-पूर्वांचल - सीमांचल जैसे रीजन में थोड़े से फंडिंग्स से हलचल मचाने वाले कई मूवमेंट्स तैयार हो सकते थे। जो राष्ट्रवादी पार्टी के साँस हलक में ला देते। उसके पास भी नफ़रत से मोटिवेटेड कैडर होता। यह सब नहीं किए । गांधी को दुहराया।जैसा रास्ता गांधी ने जिया था। जिन विचारों को उन्होंने प्रॉपगेट किया। उसे ही लेकर आगे बढ़ा। यह कठिन रास्ता है। लेकिन कठिन रास्ते के सहारे ही लोगों को उनकी वास्तविक सच्चाई दिखलाई जा सकती है। पलायन , अफ़सरशाही , धवस्त हो चुकी शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर ध्यान आकृष्ट किया जा सकता है। यह सब बोरिंग मुद्दे हैं , जो इन गड्ढों में धँसा हुआ है उसे भी इसे जानने-गुनने की इच्छा नहीं है। प्रशांत ने अपने एक्सपर्टीज से इसे जनता की बीच रोचक बनाया। जनसुराज के स्ट्रक्चर में बहुत सी कमियाँ है , जो उसके उड़ान को लिमिटेशन दे रही हैं। उसपर चुनाव बाद बात करेंगे। पर उसका नैरेटिव ही आज विमर्श है। इसके पहले कभी नहीं हुआ कि हर मेजर ट्रेन जंक्शन पर छठ आने वालों को लिए स्पेशल व्यवस्था हुआ हो। इसबार हो रहा है। हर बार घुसपैठियों को रोकने वाले और बांग्लादेशी भगाने वाले गृह मंत्री बता रहे हैं कि वह बिहार को AI हब बनायेंगे। उनके टुकड़ो पर पलने वाली अंजना ओम कश्यप को हैसियत नहीं कि उनसे काउंटर प्रश्न कर ले कि AI हब के लिए ह्यूमन रिसोर्स तैयार करने का प्लान क्या है? खैर यहाँ विपक्ष में राजद है जो पूरी तरह अमित शाह के हाथों कंप्रोमाइज़्ड है। इलेक्शन पोलराइज्ड होना ही है , बहुत से लोग जो दिल से जनसुराज को वोट देना चाहते हैं , वो नहीं देंगे क्योंकि कि वोट ख़राब हो जाएगा तो राजद आ जाएगी और हमारी जिंदगी इससे भी ख़राब हो जाएगी। जो जनसुराज के एक्चुअल ग्रोथ को और रिड्यूस करेगी। फिर भी प्रशांत किशोर राइट ऑफ नहीं होंगे। बीजेपी IT सेल का कॉर्डिनेटेड अटैक उन्हें तिलक मिटाने वाला मुल्ला एजेंट और मेघा प्रसाद जैसी दलाल को पत्रकार नहीं साबित कर पाएगा। चुनाव खुल चुका है , जो जहाँ समझेगा अपने विवेक से वोट करेगा। शायद प्रशांत बुरी तरह हार जाए। मेरी तरह जो रियलिस्टक लोग उनसे दस प्रतिशत वोट की उम्मीद लगाये हुए हैं।वह भी क्रॉस ना कर पाए। मगर प्रशांत किशोर बने रहेंगे। अगली सरकार के सामने यक्ष प्रश्न बनकर खड़ा रहेंगे। जब भी कोई बिहारी दिल्ली , गुजरात , पंजाब , मुंबई , तमिलनाडु में पीटा जाएगा तो उनकी बातें सरकारों के मस्तिष्क में नृत्य करेंगी। वह कोई सत्यप्रकाश तिवारी और शशिभूषण सिन्हा नहीं हैं , जो अमित शाह के ताप से डर जाएँगे। जय बिहार 🙏🏼
Comrade M38,561 просмотров • 8 месяцев назад

न तो तुम्हारा कमर लचीली है ना तुम यहाँ वीर रस का भाषण देते हो। जो मैं तुमसे ऑबेसेस्ड हो जाऊँ। तुम गाली देने की धमकी क्यों दे रहे , तुम्हें गाली देनी चाहिए। तुम पायनियर हो उनमें से जिन्होंने 2024 लोकसभा के पहले राजपूत vs ब्राह्मण , राजपूत vs भूमिहार कराके ….सोशल मीडिया की लड़ाई में एक दूसरे कम्युनिटी की औरतों को घसीटवाया। आज तुम्हारी लगाई आग नंगई की पराकाष्ठा तक पहुँच गई है। जहाँ लोग आपसी लड़ाई में भी कम्युनिटी की औरतों को टारगेट कर रहे हैं। अब ट्वीट डिलीट करके संत बन रहे हो? तुम्हारे जैसे लोगों के वजह से आज योगी एक जात के नेता बनकर रह गए हैं। उनका सारा आर्गेनिक वोकल सपोर्ट वर्ग अब ठंडा होकर बैठ चुका है। तो अब सवर्ण और हिंदू का बात करने लगे हो। नीचे तुम्हारा ब्राह्मणों से ऑब्सेशन का 30 sec का वीडियो है। ऐसे कई क्लिप कट जाएँगे। अब ब्राह्मण इतना फालतू नहीं है कि रोज़ ब रोज़ तुमसे लुकारी लेकर लड़ने आ जाएगा। जिसे तुम अपनी वीरता समझते हो , हो सकता है सामने वाला मूर्खता समझता हो और चुप रहता है। बाक़ी सोशल मीडिया पर गाली देने का सिस्टम है कि मिलियंस में पोस्ट जाते हैं , बहुत लोग कमेंट्स में अल-बल बकते हैं। कई सारे चुटकुले यहाँ कुंठा पाले हुए हैं। वो भी गाली देते हैं। मैं नोटिस नहीं करता। पर जिस दिन गाली देने के पिच पे आ गया उस दिन सामने वाले का नाम गाली के साथ ट्रेंड करेगा सिपाही। इसलिए मुँह उतना ही खोलो जितना में दाँत चियार ना लगो। जै राम जी की।
Malal19,107 просмотров • 7 месяцев назад

ब्राह्मणवाद शब्द इसलिए गढ़ा गया है ताकि संपन्न ब्राह्मणों को गिल्ट ट्रैप किया जा सके और कमजोर ब्राह्मणों पर अत्याचार किया जा सका। ऐसे ही शब्दों का आतंक है कि साधन-संपन्न और सामाजिक रूप से ताकतवर जातियाँ आज कमजोर तबके का आरक्षण खा रही हैं। और सत्ता पाने के लिए उनके ही नाम का विक्टिम कार्ड खेल रही हैं। ऐसे ही शब्दों का आतंक है कि एक कमजोर ब्राह्मण विष्णु तिवारी को अकारण बीस साल जेल में रहना पड़ा। जिस भी सज्जन ने इसे टोकने का कार्य किया है , नेक कार्य किया है। खींच के दो चार जूता भी मारना चाहिए था। अगली बार कोई क्रांतिकारी यह कूलता दिखाने का प्रयास करे तो उसके हृदय में डर हो।
Comrade M11,189 просмотров • 5 месяцев назад

मनोज झा ने ठाकुर का कुआं पढा था, पहली बात तो ये कि वो सभी जातियों के लिए है जिसके पास खेत है। दूसरी बात जहां का मनोज झा और आनंद मोहन है , वहां कोई ठाकुर मतलब राजपूत नहीं होता है। और असल बात ये कि अगर किसी एक आदमी ने राजपूत जाति पर बुरा भी बोल दिया तो सारे दलों के राजपूत ब्राह्मण जाति को गाली क्यों देने लगे,जबकि ब्राह्मण अपना वोट देकर इनको जिताता है, आनंद मोहन जो डीएम की हत्या में सजायाफ्ता था, उसे ब्राह्मण डिफेंड करते थे। बुद्धिनाथ मिश्रा जैसे लोगों ने लेख लिख डाले कि आनंद मोहन कितना महान व्यक्तित्व है, फिर भी वो जेल से निकला तो ब्राह्मणों को गाली देने से शुरूआत की । जब जगदानंद सिंह ने कहा था कि हमें राम से दिक्कत नहीं है, तुलसीदास दुबे से दिक्कत है, तब तो किसी ब्राह्मण ने राजपूत जाति को कुछ नहीं कहा । और इतने दोगलेपन के बाद, सर उतार लेने की बात के बाद जब चुनाव आता है तो ये लोग बताते हैं कि हमारे तो पूज्य हैं, हमारे तो देवता है, हम सम्मान करते हैं। और ये सब सुनकर ब्राह्मणों को एकदम अपने ही लिखे मिथकों में चले जाते हैं, इन्हे लगता है कि ये यज्ञ कर रहे हैं और चार दिन पहले गाली देने वाला राजपूत इनके यज्ञ की यज्ञ की रक्षा करने के लिए धनुष बाण लेकर खड़ा है। तो मेरे भाई ये सब फील लेना छोड़ दो, और सत्य को समझो ,न यहां कोई वशिष्ठ है ना कोई राम न परशुराम, ये सब चीजें एक दूसरे को ठगने के लिए यूज होती है। Kalicharan Aadivasi जी
Malal13,690 просмотров • 8 месяцев назад

भाजपा और राजद दोनों को अंदाजा नहीं है कि ज़मीन पर क्या होने जा रहा है।
Comrade M12,057 просмотров • 1 год назад
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