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भाजपा में अब इस कदर नेतृत्व का दिवालियापन हो गया है कि तनख़्वाह पर पलने वाले लोग ही बस मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जी के समर्थन में बयान दें रहे हैं. याद रखना… भूपेश बघेल बदलने और बिकने वाला नहीं है.

21,622 Aufrufe • vor 1 Jahr •via X (Twitter)

10 Kommentare

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Gouri Shanker Shrivasvor 1 Jahr

मेरा मासूम सा सवाल था माननीय:- 1- रुचिर गर्ग किस हैसियत से शाहीन बाग (दिल्ली) जाकर भाषण देते थे2-रुचिर गर्ग कहा के है? 3-संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला (जौनपुर) किस राज्य से ताल्लुक़ रखते है? 4- मीडिया इवेंट कंपनी (टेशू लैब) किस सलाहकार के पुत्र का था (16 लाख महीना)

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Sakshi Baghelvor 1 Jahr

भूपेश बघेल जी का भ्रम और राजनीति बेनकाब! 1️⃣ विष्णुदेव साय जी का सम्मान: विष्णुदेव साय, छत्तीसगढ़ की जनता के बीच एक सशक्त और सम्मानित नेता हैं। उनका समर्थन जनता से आता है, न कि किसी तनख्वाह पर पलने वाले लोगों से।👇

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Sakshi Baghelvor 1 Jahr

2️⃣ भूपेश बघेल का रिकॉर्ड: छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति पर क्या जवाब है? किसान कर्जमाफी और वादों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं? 👇

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Sakshi Baghelvor 1 Jahr

भाजपा का संकल्प: भाजपा नेतृत्व जनता की सेवा और विकास पर केंद्रित है, न कि व्यक्तिगत हमलों पर। छत्तीसगढ़ की जनता बदलाव चाहती है, और भाजपा हर वादा पूरा करेगी।

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Deepak Goelvor 1 Jahr

कबाड़ को कबाड़ी खरीदता है भाजपा नहीं

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Praveenvor 1 Jahr

ये बेचने वालों में से है ….जैसे सीजीपीएससी का पोस्ट बेचा और पाँच साल रहता तो छत्तीसगढ़ को ही बेच देता

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Piyush Agrawalvor 1 Jahr

हां भूपेश बघेल ठगने वाला है 5 साल छत्तीसगढ़ को ठगा है

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Saagar Solankivor 1 Jahr

भाजपा के मानसिक दिवालियेपन पर अब हंसी भी नहीं आती,दया आती है बस।

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Aashish Dubeyvor 1 Jahr

जन जंगल जमीन खनिज संपदा बिजली उद्योग कारखाना संस्कृति सबला बचाना हे बीजेपी ला भगाना हे

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MR.SINGH_VEER007vor 1 Jahr

Rajiv yuva mitan club कोनो सरकारी नई रिहिस कका ओमे तो जम्मो जहां कांग्रेसिया सेना रिहिस है कांग्रेसी सेना ला बंद कर दिआ ता बुरा लग गे का

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भाजपा सरकार के लिए ‘रोज़गार मेला’ सिर्फ़ एक इवेंट है और कुछ नहीं। यहाँ नौकरी के नाम पर युवाओं को ठगा जा रहा है। लगता है भाजपा के लोग विदेश में नौकरी के नाम पर ‘प्लेसमेंट एजेंसी’ के एजेंट बनकर नाममात्र के वेतन पर युवाओं की मजबूरी का फ़ायदा उठाकर बीच में कमीशन कमाना चाहते हैं। भाजपा के लिए नौकरी भी एक जुमला है। अब उप्र के सचेत युवा ‘भाजपाई झाँसे’ में आकर अपना शोषण नहीं होने देंगे, उन्हें नौकरी के नाम पर कोई गुमराह नहीं कर सकता है। जहाँ 9 साल इंतज़ार कर लिया है वो कुछ दिन और कर लेंगे और आगामी चुनाव में यही युवा भाजपा सरकार का टोकन काटेंगे और हमेशा के लिए पत्ता भी साफ़ कर देंगे क्योंकि अब वो समझ गये हैं कि ‘नौकरी भाजपा के एजेंडे में है ही नहीं’। युवा ये भी नहीं भूलेंगे कि ये वही मुख्यमंत्री जी हैं जिन्होंने उप्र के युवाओं के बारे में कहा था कि कमी नौकरी की नहीं है बल्कि युवाओं में योग्यता की है। मुख्यमंत्री जी ये भी बताएं कि विदेश में जानेवाले युवाओं का शोषण नहीं होगा इसकी गारंटी कौन देगा। इस तरह के आयोजन साबित कर रहे हैं कि निवेश और उससे सृजित होनेवाला रोज़गार का दावा फुस्स हो गया है। हमारे प्रदेश की युवतियों की नौकरी के लिए सरकार की कोई विशेष योजना क्यों नहीं है? भाजपा सरकार जवाब दे। युवा कहे आज का नहीं चाहिए भाजपा! भाजपा जाए तो नौकरी-रोज़गार आए!

Akhilesh Yadav

52,857 Aufrufe • vor 1 Jahr

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी का यह बयान अत्यंत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। आदिवासी अंचल के रहने वाले और आदिवासी नेतृत्वकर्ता मुख्यमंत्री जी जो एक पेड़ लगा कर विकास के लिए लाखों पेड़ काटने की वकालत करते हैं, मुझे लगता है कि उन्हें अपने इस बयान पर स्पष्टीकरण देना चाहिए। मुख्यमंत्री जी का काम तो होना चाहिए कि चाहे लाखों-लाख जितने पेड़ लग सके इस ओर प्रयास हो। किन्तु जब विकास की बात यहां हो रही है तो यह भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि यदि कोल खनन करना हो, सड़क बनाना हो अथवा अन्य कार्य करने हों, ऐसे कार्यों के लिए कम से कम संरक्षित माने जाने वाले वनों को, ऐतिहासिक स्थलों को टारगेट न कर दूसरे रास्ते ढूंढने चाहिए। रामगढ़ महोत्सव पर अतिथि के तौर पर मुख्यमंत्री जी का यह बयान बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है, जब कि इसी रामगढ़ और उससे लगे कई क्षेत्र के लोग जंगल बचाने, ऐतिहासिक स्थल रामगढ़ को बचाने, अपनी जमीन बचाने वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं।

T S Singhdeo

10,664 Aufrufe • vor 3 Monaten

विपक्ष के लोगों को पता है कि चुनाव मैदान में वे साफ हो चुके हैं। इसलिए NDA में क्या हो रहा है, इस बारे में भ्रांतियां फैला रहे हैं, निराधार स्टोरी प्लांट करवा रहे हैं। माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी चुनाव मैदान में जाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। एक-एक चीज पर खुद उनकी नजर है। सारे लोगों से वे खुद बात कर रहे हैं। एनडीए के घटक दलों के नेतागण, खासकर दिल्ली में बीजेपी के जो बड़े नेता हैं, उनसे भी मुख्यमंत्री जी की बात हो रही है। जो कुछ भी तय हो रहा है, मुख्यमंत्री जी से बात करके ही तय हो रहा है। NDA के पांचो घटक दल साथ मिलकर प्रचंड बहुमत के लिए काम कर रहे हैं। हमलोग तो सीटों की संख्या भी घोषित कर चुके हैं। कौन किस सीट पर लड़ेगा, संभवत: आज शाम तक वह भी फाइनल हो जाएगा। एनडीए का लार्जर परपस है कि बिहार में जो विकास का मोमेंटम पकड़ा हुआ है, वह कहीं से भी बाधित नहीं हो। ऐसे लोग फिर से सत्ता में न आ जाएं, जिनका ट्रैक रिकार्ड बिहार की जनता जानती है। इस उद्देश्य के लिए पूरा एनडीए एकजुट है, और मुख्यमंत्री Nitish Kumar जी नेतृत्व में, उनके गाइडेंस में तथा उनके गार्जियनशिप में ही यह चुनाव सभी लोग लड़ रहे हैं। मैं बिहार की जनता से भी अनुरोध करता हूँ कि अफवाहों पर ध्यान नहीं दें। आज पटना में ANI से बात करते हुए 👇 #SanjayKumarJha #BiharElections #BiharElections2025 #2025FirSeNitish #NDA4Bihar

Sanjay Kumar Jha

40,193 Aufrufe • vor 1 Jahr

भाजपा के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ बिष्ट ठाकुर, उनके करीबी अधिकारियों तथा कई ढोंगी बाबाओ ने मिलकर शंकराचार्य श्री अविमुक्तेश्वरानंद जी के खिलाफ बड़ा षड्यंत्र रचा था, घिनौना षड्यंत्र रचा था। उसका खिलाफ खुलासा खुद अब आरोप लगाने वाला आशुतोष ब्रह्मचारी नामक उक्त अपराधी कर रहा है, क्या भाजपा का आईटी सेल और मुख्यमंत्री आदित्यनाथ बिष्ट ठाकुर एवं उनके अधिकारीशंकराचार्य जी से माफ़ी मांगेंगे? शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी एवं उनके बटुकों का अपमान, बदनाम किया गया, मीडिया और सोशल मीडिया में गंदी गंदी खबर शंकराचार्य जी के खिलाफ चलाई गई, बदनाम करने का प्रयास किया गया, वह सब कुछ स्पष्ट अब हो गया है कि यह सब कुछ सत्ता के दम पर मुख्यमंत्री आदित्यनाथ बिष्ट और भाजपाई करवा रहे थे। सोचिए जरा। ये भाजपाई, मुख्यमंत्री आदित्यनाथ बिष्ट, उनके करीबी अधिकारी और चाटुकार ढोंगी बाबा लोग सनातन के भी सगे नहीं हैं, सनातन को भी बदनाम, अपमानित कर रहे हैं, भगवान शिव के साक्षात स्वरूप माने जाने वाले शंकराचार्य जी पर किस प्रकार के घृणित आरोप इस भाजपा सरकार, मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने लगवाए, कालनेमी तक कहा गया। अब असली कालनेमी, मारीच, खर दूषण का खुलासा हो चुका है जो सत्ताधीश के रूप में भाजपा की सत्ता का शीर्ष बना बैठा है।

Samajwadi Party Media Cell

18,891 Aufrufe • vor 4 Monaten

कुछ प्रश्न पूछे नहीं जाते, पुछवाए जाते हैं। रूडी जी यह भी कह रहे हैं कि ‘मैं ऐसा कुछ नहीं करने वाला हूँ’, और संख्या-प्रतिशत-प्रभाव-बता देंगे कहते हुए, भी बता रहे हैं कि 70 सीटों पर, जो बिहार की कुल सीटों का एक चौथाई है, वो जीत सकते हैं, या जिता सकते हैं। सत्य यह है कि चाहे रघुवंश बाबू हों या जगतानंद सिंह जी, RJD से जब-जब खड़े हुए जीतते रहे। सत्य यह है कि रूडी जी के ही विरोध में RJD यदि उन्हीं के समाज का प्रत्याशी देता तो संभवतः वो भी सीट नहीं बचा पाते। मैं यह इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि रूडी जी यह भूल रहे हैं कि महाराणा के गढ़ और भाजपा की परंपरागत सीट औरंगाबाद, बक्सर पर भाजपा कैसे हारी। औरंगाबाद में किस समाज का व्यक्ति भाजपा से खड़ा था? किस समाज का व्यक्ति विरोध में था (अभय कुशवाहा) जिसको इसी समाज ने जिताया? अभय कुशवाहा इस क्षेत्र के इतिहास में पहले गैर-राजपूत सांसद हैं। बक्सर में जगतानंद सिंह जी के पुत्र कैसे जीते? वहाँ उन्हें राजद से खड़े होने पर किसने वोट दिया? क्या सुधाकर सिंह जी को एकमुश्त वोट नहीं पड़ा बक्सर में? रूडी जी स्वयं 2004 में छपरा सीट लालू से कैसे हारे? क्या छपरा में आपके समाज के लोग नहीं हैं? सत्य यह है कि 3.5% ने कभी एकमुश्त भाजपा को समर्थन दिया ही नहीं है बिहार में। हर बार ऐसे उदाहरण हैं कि यदि किसी भी सीट पर राजद का प्रत्याशी उस समाज से है, तो सारा वोट उधर जाता है। चाहे लोकसभा हो, या विधानसभा। भाजपा का राजपूत काडर सदैव पार्टी के साथ दिखता है, पर समाज में ऐसी कोई सार्वभौमिक स्वीकार्यता नहीं रही है। मैंने चार उदाहरण चार कोनों से दिए हैं ताकि आपको समझ में आ जाए कि रूडी जी का राजनैतिक कैपिटल इस तरह के सॉफ्ट ब्लैकमेल पर कैसे आ गया है। और बोनस में, अभी कॉन्स्टीट्यूशन क्लब के चुनाव में उनकी जीत हर पार्टी के समर्थन से हुई। ये बहुत कुछ कहता है। परंपरागत रूप से समाज का वोट राजद को ही जाता रहा है। अपवाद स्वरूप पिछले दशकों में कुछ शिफ्ट होता दिखता है, पर वह एकमुश्त नहीं है। इसलिए ‘हम बता देंगे’ की धमकी उनको नहीं देनी चाहिए। जातियों के नाम पर BJP के केन्द्रीय नेतृत्व को केवल भ्रमित किया जा रहा है कि इतना प्रतिशत है, हम यहाँ ये कर सकते हैं। यह केवल नंबर बता कर मलाई खाने का मामला है।

Ajeet Bharti

167,915 Aufrufe • vor 1 Jahr