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भाजपाई ही भाजपाई का सगा नहीं है, आपसी लूटपाट में ही सब एक-दूसरे की पोल खोल रहे हैं। भाजपाई विधायक वसूली एजेंट बन गये हैं। अगर इसमें ऊपरवालों की हिस्सेदारी नहीं होगी तो 25 लाख की रंगदारी वसूलनेवाले तुरंत गिरफ़्तार होंगे। ये बात सिर्फ़ सुल्तानपुर के भाजपा विधायक की...

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धिक्कार है ऐसी भाजपाई राजनीति और सत्ता की भाजपाई भूख पर जो सियासत के लिए देश के भाईचारे के बीच दंगा कराने की साज़िश करती है। बहराइच हिंसा के मामले में हर दिन नये खुलासे हो रहे हैं, जिनसे भाजपा मुँह दिखाने लायक नहीं रही है। भाजपा के विधायक ही भाजपाइयों पर साज़िश करने की एफ़आइआर करा रहे हैं और दंगाई छुपे कैमरे के सामने सच उगल रहे हैं। भाजपा के जो थोड़े बहुत समर्थक और वोटर बचे हैं, अब तो भाजपा का ये षड्यंत्रकारी और हिंसक रूप देखकर वो भी शर्मिंदा हैं। भाजपा ने अपने समर्थकों की भावनाओं को गुमराह करके, उनका इस्तेमाल अपनी सत्ता को बचाए-बनाए रखने के लिए किया है। सच तो ये है कि भाजपा अपने ही लोगों के ख़िलाफ़ षड्यंत्र कर रही है। भाजपा भाजपाइयों से दंगे कराकर उन्हें ही फँसा दे रही है। तभी तो भाजपा का विधायक, भाजपाइयों के ख़िलाफ़ रिपोर्ट लिखवा रहा है। अब तो भाजपाई भी कहने लगे हैं : भाजपा किसी की सगी नहीं। यूपी कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!

Akhilesh Yadav

451,149 次观看 • 1 年前

जब भाजपाई विधायक जी को नहीं मिला हिस्सा, तब ही खुला किस्सा! भ्रष्टाचार की परतों में छिपी भाजपाई चोरी तभी खुलती है जब बँटवारे को लेकर झगड़ा होता है। भाजपाइयों ने हर विभाग को, ऊपर से लेकर नीचे तक, भ्रष्टाचार के जाल में फँसा रखा है। जो ईमानदार बाबू या अधिकारी हैं वो भाजपाई मेगा-करप्शन के इस मेगा-नेटवर्क में बहुत घुटन महसूस कर रहे हैं। जो भाजपाई विधायक बड़े मासूम बनकर कह रहे हैं कि ये सिर्फ़ छोटे कर्मचारियों की मिलीभगत से संभव नहीं है, बड़े अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए, तो उन्हें अपनी बात पूरी करते हुए ये भी कहना चाहिए कि ये गोरखधंधा सिर्फ़ भाजपाई विधायक के स्तर पर संभव नहीं है, इसमें भाजपाई सांसद, मंत्री और मुख्यमंत्री के विरुध्द भी ‘काग़ज़ी सड़क’ बनाने की कार्रवाई होनी चाहिए। जिनमें ख़ुद दाग-दोष वो बन रहे सफ़ेदपोश देखते हैं ये मामला जाँच और दंडात्मक कार्रवाई से सुलझता है या शांतिपूर्ण गुप्त बँटवारे से। वैसे ये तो वो मामला है जो खुल गया, बाक़ी का क्या। साहसी पत्रकार से हमारा आग्रह है कि जब ‘6 करोड़’ की सड़क के भ्रष्टाचार का भंडाफोड़ किया है तो ‘6000 करोड़’ से ज़्यादा के गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे के महा-भ्रष्टाचार का महा-भंडाफोड़ भी करें। 6 करोड़ का घोटाला तो 6000 करोड़ से अधिक के महाघोटाले के आगे एक प्रतिशत का दसवाँ हिस्सा भी नहीं है। इस भ्रष्टाचार का लिंक तो गोरखपुर से लखनऊ होते हुए न जाने कहाँ तक रहा होगा। ये डबल इंजन नहीं, डबल करप्शन की सरकार है। ईमानदार कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!

Akhilesh Yadav

174,239 次观看 • 1 年前

भाजपा सरकार के एजेंडे में न तो भर्ती है और न ही कोई और नौकरी। भाजपा नौकरी न देकर पीडीए के हक़ का आरक्षण मारना चाहती है। भाजपाई हर काम को आउटसोर्सिंग के ज़रिए करवाना चाहते हैं, इससे एक तरफ़ उन्हें आरक्षण नहीं देना पड़ता है और दूसरी तरफ़ जिनको आउटसोर्सिंग का ठेका मिलता है, उनसे कमीशन और चंदा वसूली करके ये भाजपाई अपना ख़ज़ाना भर लेते हैं। भाजपा की अग्निवीर जैसी योजनाओं ने देश की सुरक्षा के साथ ही युवाओं के भविष्य की सुरक्षा को भी ख़तरे में डाल दिया है। आज बेरोज़गारी का जो हाल है, उससे न केवल युवाओं में बल्कि उनके परिवारों तक में मायूसी का माहौल है। लोग खेत-ज़मीन बेचकर अपने बच्चों को बड़ी उम्मीद से पढ़ाते हैं लेकिन जब भर्ती-नौकरी की कहीं कोई बात नहीं होती है तो वो नाउम्मीदगी और निराशा से घिर जाते हैं। भाजपा के राज में कोई ख़ुशख़बरी नहीं आती है। लोग मुस्कुराना भूल गये हैं। भाजपा ने पीड़ा, दुख, अपमान-अन्याय के सिवा जनता को कुछ नहीं दिया है। इसीलिए जनता अब ‘हँसी-ख़ुशी छीननेवाली भाजपा’ को हटाकर ही सच्चा उत्सव-त्योहार मनाएगी। भाजपा जाए तो भर्ती-नौकरी आए!

Akhilesh Yadav

54,563 次观看 • 10 个月前

वाराणसी में कफ़ सिरप मामले में दिखाने के दाँत नहीं, असली खानेवाले दाँत दिखाइए और असली गुनाहगारों को बिना किसी दबाव के पकड़िए। देश की प्रधान-नगरी का ये हाल है तो बाक़ी का क्या होगा सब समझ सकते हैं। वाराणसी में कफ़ सिरप में ये ऊपरी खुलासा हुआ कि : - जाँच के दायरे में घिरी 70 फर्मों में से 50 फ़र्ज़ी हैं - ⁠लाइसेंस इश्यू करनेवालों की भूमिका दोषपूर्ण है - ⁠टैक्स विभाग संलिप्त है - ईवे बिल का महाघपला है - ⁠अनुभव पत्र निराधार है - झूठे दस्तावेज़ संलग्न किये गये हैं - ⁠नक़ली लेन-देन का अंबार है - ⁠हवाला का गुजराती कनेक्शन है - ⁠मनी लॉन्ड्रिग की कई परते हैं - ⁠वाराणसी, चंदौली, जौनपुर, सोनभद्र, ग़ाज़ियाबाद, हापुड़, बिहार से लेकर विदेशों तक तार जुड़े हैं। उप्र ही नहीं अब तो पूरे देश की जनता इस बात को लेकर चिंतित है कि ये तो वो दवा है जिसका राज़ खुल गया है, अभी तो न जाने ऐसी कितनी और तथाकथित दवाएं होंगी जो दरअसल ज़हरीली हैं या नशे के विकल्प के रूप में बेची जा रही होंगी, जिनके सेवन से देश के नागरिकों का जीवन ख़तरे में पड़ सकता है। ये है भाजपाई कालेधन की समाप्ति के महादावे और नोटबंदी का सच। भाजपा राज में भाजपाइयों का हिस्सा तय है इसीलिए पूरा देश ही ‘महा-भ्रष्टाचारमय’ है

Akhilesh Yadav

108,828 次观看 • 8 个月前

दो में से एक ही बात हो सकती है या तो ये मुख्यमंत्री के ‘संज्ञान’ में हो रहा है या ‘अज्ञान’ में मतलब उन्हें पता ही नहीं है, ये दोनों ही परिस्थितियाँ प्रदेश के लिए हानिकारक हैं। सहारनपुर से लेकर सोनभद्र-मिर्ज़ापुर तक, यूँ तो पूरे प्रदेश में ही अवैध खनन जारी है लेकिन इससे सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र बुंदेलखंड क्षेत्र है। चंबल जैसी संरक्षित नदी भी इसका अपवाद नहीं है। नदियाँ तो जीवन देती हैं, भाजपाई कम-से-कम नदियों को तो अपने लालच और भ्रष्टाचार की भेंट न चढ़ाएं। भाजपा के भ्रष्टाचार के गोरखधंधे का ‘हिस्सा-बाँट’ पूरे प्रदेश का ‘बंटाधार’ कर रहा है। भाजपा जाए तो चैन आए!

Akhilesh Yadav

57,379 次观看 • 1 年前

‘महाभष्ट्राचारी भाजपाइयों’ से चेतावनी भरा आग्रह है कि कम से कम पेट भरनेवाले किसानों के खेत और पेट को तो अपने भ्रष्टाचार का शिकार न बनाएं। सोसाइटियों पर भाजपाई क़ब्ज़े की वजह से ही उप्र में खाद का संकट पैदा हुआ है। सब जानते हैं, भाजपाई लोग ही सारी खाद हड़पकर उसकी कालाबाज़ारी कर रहे हैं। माननीय मुख्यमंत्री जी या तो कुछ भी नहीं जानते हैं या सब कुछ जानकर भी अंजान बने बैठे हैं। दोनों ही परिस्थितियों में उनकी भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं कि वो ऐसी अनदेखी किसी दबाव में कर रहे हैं या किसी लाभ की अपेक्षा से। देखते हैं हमारी चेतावनी के बाद कितनी जल्दी खाद-संकट का हल निकलता है। ये हालात सिर्फ़ चित्रकूट या मानिकपुर विधानसभा के नहीं है, पूरे उप्र का यही हाल है। कहीं की तस्वीरें आ जाती हैं, कहीं की दबा दी जाती हैं। किसान कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!

Akhilesh Yadav

198,454 次观看 • 1 年前

“ये हम नहीं हमारी लाशें खड़ी हैं।” भाजपा की सरकार के ख़िलाफ़ दिया गया एक व्यापारी के परिवार का ये आक्रोशित कथन, भाजपा के लिए डूब मरने से कम नहीं है। दरअसल अब समाज का हर वर्ग ये समझने लगा है कि भाजपा केवल चंद अरबपतियों और विशाल कारपोरेट की ही हितैषी है और छोटे कारोबारियों को ख़त्म कर देना चाहती है। भाजपा इसके लिए बहाना ये बनाती है कि छोटे व्यापारी या दुकानदार टैक्स चोरी करते हैं। आज देशभर के व्यापारी संघ भाजपा से एक सवाल कर रहे हैं कि ‘जब देश और दुनियाभर के ये बड़े-बड़े व्यापारी नहीं थे तो क्या देश को टैक्स नहीं मिलता था?’ सच सिर्फ़ इतना है कि भ्रष्ट भाजपाई सारा व्यापार कुछ ‘महा-मुनाफ़ाख़ोरों’ के हाथों में दे देना चाहते हैं, जिससे उन्हें अरबों का राजनीतिक और व्यक्तिगत चंदा एक मुश्त मिल सके और वो इस ‘महा-भ्रष्टाचार’ के सहारे पैसा बाँटकर सरकार बनाते रहें लेकिन अब ये ‘कुटिल भाजपाई चाल’ हर व्यापारी और उनके परिवार के लोग समझ गये हैं क्योंकि काम-कारोबार ख़त्म होने से उनके पालन-पोषण, जीवन-यापन का सवाल खड़ा हो गया है। जिनके परिवार हैं वो ही ये दर्द समझ सकते हैं कि परिवार की भूख, घर के बड़े-बुजुर्गों की दवाई-देखभाल, बच्चों की पढ़ाई और घरवालों की छोटी-छोटी इच्छाओं की पूर्ति न कर पाने का दुख-दर्द क्या होता है। जिनके परिवार नहीं हैं वो अपने से आगे की कभी सोचते ही नहीं हैं। भाजपाई की यही कमीशनख़ोरी और महा-मुनाफ़ाख़ोरों को दी गई खुली छूट ही हर चीज़ के दाम बढ़ने-महंगाई का कारण है। इससे माँग भी घटती जा रही है, क्योंकि भाजपाई की कारोबार और नौकरी विरोधी गलत नीतियों की वजह से फैली बेकारी-बेरोज़गारी के कारण बाज़ार में मंदी आ गयी है और ट्रेड डील के बाद तो बंदी आ ही जाएगी। इसीलिए अब से हर चुनाव में भाजपा को सबसे बड़ा झटका सड़कों पर जूझ रहे रेहड़ी-पटरी और ठेलेवालों से लेकर छोटे दुकानदारों, कारोबारियों, छोटे-बड़े कल-कारखानों और स्थानीय उद्यमियों और उद्योगपतियों से ही मिलेगा। भाजपा राज में ‘मंदी’ और ‘बंदी’ के सिवा देश के कारोबार को कुछ और हासिल नहीं हुआ है। भाजपा हटाओ, व्यापार बचाओ!

Akhilesh Yadav

63,778 次观看 • 5 个月前

ये शासन-प्रशासन-प्रबंधन की ऊँची कुर्सियाँ पर बैठे लोगों के भ्रष्टाचार की काली धूल है जो स्टेडियम की कुर्सियाँ पर जाकर बैठ गयी है। भाजपाई ख़ुद तो कुछ नहीं बनाते, कुछ बनाकर उन्हें दे भी दो तो उसे बचा-चला नहीं पाते हैं। सरकार ये कहकर पल्ला नहीं छुड़ा सकती कि प्रबंधन किसी और के हाथ में है क्योंकि समझा जाए तो क्रिकेट के उच्चतम पदों के तार भी इन्हीं भाजपाइयों से जुड़े हैं, ये तो दरअसल डबल इंजन से बढ़कर ‘ट्रिपल इंजन’ की नाकामी का मामला है। अब ‘ट्रिपल इंजन’ का क्या मतलब हुआ ये जनता बख़ूबी समझती है। यही कारण है कि भाजपा की काली करतूतों की काई पूरे प्रदेश में फैल गयी है। घोर निंदनीय!

Akhilesh Yadav

129,048 次观看 • 8 个月前

उप्र के एक भाजपा विधायक द्वारा उप्र की एक भूतपूर्व महिला मुख्यमंत्री जी के प्रति कहे गये अभद्र शब्द दर्शाते हैं कि भाजपाइयों के मन में महिलाओं और खासतौर से वंचित-शोषित समाज से आनेवालों के प्रति कितनी कटुता भरी है। राजनीति मतभेद अपनी जगह होते हैं लेकिन एक महिला के रूप में उनका मान-सम्मान खंडित करने का किसी को भी अधिकार नहीं है। भाजपाई कह रहे हैं कि उन्हें मुख्यमंत्री बनाकर हमने गलती की थी, ये भी लोकतांत्रिक देश में जनमत का अपमान है और बिना किसी आधार के ये आरोप लगाना कि वो सबसे भ्रष्ट मुख्यमंत्री थीं, बेहद आपत्तिजनक है। भाजपा के विधायक के ऊपर, सार्वजनिक रुप से दिये गये इस वक्तव्य के लिए मानहानि का मुक़दमा होना चाहिए। भाजपा ऐसे विधायकों को प्रश्रय देकर महिलाओं के मान-सम्मान को गहरी ठेस पहुँचा रही है। अगर ऐसे लोगों के ख़िलाफ़ भाजपा तुरंत अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं करती है तो मान लेना चाहिए, ये किसी एक विधायक का व्यक्तिगत विचार नहीं है बल्कि पूरी भाजपा का है। घोर निंदनीय!

Akhilesh Yadav

255,891 次观看 • 2 年前

जब बच्चे तक न उठा सकते आवाज़ तो कैसे कहें कि ये वतन है आज़ाद? आज भाजपा के कट्टर समर्थक भी शर्मिंदा हैं और पश्चाताप और प्रायश्चित की आग में जल रहे हैं, उनका भी तो परिवार है और परिवार में बच्चे भी हैं, और उन बच्चों का भी वर्तमान और भविष्य है। अब कोई भाजपा से भविष्य की क्या उम्मीद करे, जब वर्तमान में ही जनता भाजपा से पूरी तरह नाउम्मीद हो गई है। आज हर उम्र के लाखों लोगों ने बेख़ौफ़ होकर जिस तरह भाजपा के विरोध में एकजुटता दिखाई है, सच तो ये है कि उस जन-आक्रोश को देखकर भाजपाई और उनके संगी-साथी बेहद डर गये हैं। ये वो आम जनता है जिसे सरकार की किसी भी एजेंसी का भय नहीं है। भाजपा ख़त्म!

Akhilesh Yadav

351,577 次观看 • 1 个月前

अपनी बुनियादों ज़रूरतों के लिए भरी गर्मी में सड़कों पर मारी-मारी फिर रही बेबस आम जनता की असहनीय दिक़्क़त, परेशानी और उनका भाजपा सरकार के ख़िलाफ़ गुस्सा देखकर, अब तो भाजपाई प्रवक्ता भी लड़खड़ा रहे हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि वो जनता का पक्ष रख रहे एंकर के समर्थन में बोलें या भाजपा के। जनता पूछ रही है : ये कहना क्या चाहते हैं? सुना है जनाक्रोश देखकर भाजपाई प्रवक्ताओं को लू लग गई है। वो बहाना मारकर घर बैठ गये हैं। अगर कोई चैनल उनसे कह रहा है कि हमारे शो-प्रोग्राम में घर से ही जुड़ जाइए तो ये लोग बिजली न आने की बात कहकर या फिर मोबाइल और लैपटॉप चार्ज न होने का बहाना करके बच रहे हैं। अब तो जनाक्रोश से सहमे ‘भयभीत भाजपाई’ घर से ही नहीं निकल रहे हैं, स्टुडियो या जनता के बीच जाना तो बहुत दूर की बात है। सुना है बिजली-तेल के संकट के बीच कई भाजपाई नेता, मंत्री, सांसद, विधायक, मेयर, पार्षद और संगठन पदाधिकारी इतना घबरा गये हैं कि वो सब झूठमूठ का पत्र लिखकर या वीडियो बनाकर अपनी ही भाजपा सरकार और उनके ऑफ़िसर्स के विरुध्द नाममात्र का दिखावटी विरोध प्रकट कर रहे हैं। जनता सब समझ रही है, ऐसे काग़ज़ी नाटक से भाजपा के ख़िलाफ़ जनता का क्रोध घटने की बजाय और बढ़ रहा है। अब तो डर के मारे ‘घरों, दुकानों, मकानों, प्रतिष्ठानों, वाहनों’ से भाजपा के झंडे उतर रहे हैं। #भयभीत_भाजपाई

Akhilesh Yadav

58,394 次观看 • 3 个月前

भाजपाई छापे सरकारी डकैती होते हैं। भाजपा के छापे लोगों के कमाये गये पैसों को लूटने का काम करते हैं। भाजपाई जहाँ भी देखते हैं कि कहीं धन-दौलत जमा होने की संभावना हो सकती है, वहाँ अपनी एजेंसियाँ लेकर पहुँच जाते हैं। भाजपाई हृदयहीन हैं, इसीलिए संवेदनहीन भी हैं। भाजपाई यह भी नहीं देखते हैं कि कोई व्यक्ति किसी अति गंभीर बीमारी से जूझ रहा है या किसी और परेशानी या दिक़्क़त का सामना कर रहा है। इसके विपरीत धन के लालची भाजपाई ऐसी ‘आपदा’ से जूझ रहे व्यक्ति के विपरीत हालातों में ‘अवसर’ तलाश लेते हैं और जब व्यक्ति अपने सबसे मुश्किल दौर में होता है, तब ही उसे टारगेट करते हैं, जिससे वो कोई विरोध-प्रतिरोध न कर पाये और ये उसका धन-मान सब लूट सकें। भाजपाइयों के लिए बहन-बेटी का मान भी कुछ नहीं है। भाजपाई पीड़ित को उत्पीड़ित करने का कुकृत्य करते हैं। सच तो ये है कि 2047 की बात करनेवाले जानते हैं कि उनका 2027 भी पार नहीं होगा। लखनऊ हो या दिल्ली कोई भी सत्ताइस के पार नहीं जाएगा, इसीलिए ये पैसे बटोरने में लग गये हैं। अब तो भाजपाई भी हमारी बात दोहरा रहे हैं कि ‘भाजपा किसी की भी सगी नहीं है!’ अब तो भाजपा के परंपरागत वोटर भी भाजपा से छिटक गये हैं। पूज्य शंकराचार्य जी के अपमान और उनके विरुद्ध घिनौनी साज़िश करने के कारण धर्मरत समाज भाजपा के ख़िलाफ़ खड़ा हो गया है, कारोबारी समाज जीएसटी, भ्रष्टाचार और बेतहाशा उगाही के कारण भाजपा से विमुख हो गया है और आज तो सत्ता सजातीय समाज भी इस घृणित छापे के बाद पूरी तरह भाजपा को नकार रहा है। किसी के गंभीर हालातों में डाला गया ये छापा किसी भी दृष्टि से जायज़ नहीं ठहराया जा सकता है। इसके पीछे दिल्ली के षड्यंत्र का एक न एक दिन पर्दाफाश होकर रहेगा। भाजपावाले लोगों को दुख देने के लिए कभी झूठे मुक़दमे लगवाते हैं, कभी संकट के समय जानबूझकर छापे पड़वाते हैं। कल ये दर्द विपक्ष के लोगों ने झेला था, आज भाजपा के अंदर ही लोग इसका शिकार हो रहे हैं। आज भाजपा के लोगों को पता चल रहा है कि जिनकी प्रवृत्ति डसने-काटने की होती है, ऐसे ‘दंश-डंक’ वालों को पालने-पोसने का हश्र होता क्या होता है, उसके दुष्परिणाम क्या होते हैं। पहले से शारीरिक रूप बेहद कमज़ोर हो चुके व्यक्ति का ऐसी घटनाओं से गहरा मानसिक उत्पीड़न होता है, जो आघात-अपघात का कारण बनता है, ऐसे में अगर कुछ भी अप्रिय घटित होता है तो इसके दोषी भाजपाई होंगे। स्थानीय स्तर पर भी भाजपा के कट्टर समर्थक तक, इस छापे की निंदा कर रहे हैं और समाज में मुँह दिखाने लायक नहीं बचे हैं। ये एक बेहद शर्मनाक, निंदनीय और अक्षम्य कुकृत्य है। पीड़ित परिवार के साथ हमारी गहरी सहानुभूति है, संकट के इन क्षणों में हम किसी भी तरह की सहायता-मदद करने के लिए तत्पर हैं। हम पीड़ित-परिवार की हर अपेक्षा पर खरा उतरने का प्रयास करेंगे क्योंकि परिवारवाले ही परिवारवालों का दुख-दर्द समझ सकते हैं। भाजपा ने संवेदनहीनता की सभी सीमाएं लांघ दी हैं, यही उसके अंत का परिचायक है। सत्ता के मद में डूबे भाजपाइयों के इस घोर अनैतिक व बेहद गिरे हुए कुकृत्य को देखकर, आज तो रावण भी दसों सिर झुकाकर कहीं पाताल में खड़ा होगा।

Akhilesh Yadav

40,965 次观看 • 6 个月前