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Ana Sayfaya Dön

"भैंसों के तबेले जैसी जगहों पर रह रहे हैं सिपाही, दीवान, दरोगा.. माननीय मुख्यमंत्री जी आप देखेंगे तो आंसू आ जाएंगे.." यूपी पुलिस के क्रांतिकारी सिपाही सुनील कुमार शुक्ला ने एक और वीडियो जारी किया.. इस बार सिपाही सुनील कुमार शुक्ला ने पुलिसकर्मियों के रहने की बद्तर दशाओं के...

23,799 görüntüleme • 3 ay önce •via X (Twitter)

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"पुलिस के घर पुलिस की दबिश!! महकमे का भ्रष्टाचार उजागर करने वाले सिपाही की मुसीबतें शुरू!! आधी रात को घर में घुस आई पुलिस.." लखनऊ पुलिस लाइन में ड्यूटी के बदले रुपए वसूलने का गंभीर आरोप लगाने वाले सिपाही सुनील कुमार शुक्ला के घर पर बीती रात करीब एक बजे 6/7 पुलिसकर्मी घुस आए.. सिपाही ने वीडियो बनाकर बताया कि काले अंग्रेजों के आदेश से मेरे घर पर पुलिस आई.. वीडियो में सिपाही मुख्यमंत्री से पूछ रहा है कि, "क्या मैं आतंकवादी हूं?? क्या मैं नक्सली हूं?? या मैंने किसी का बलात्कार किया है या कोई लूट की है?? क्या मैं किसी का हत्यारा हूं??" "माननीय मुख्यमंत्री जी, मैं पूछना चाहता हूं.. क्या काले अंग्रेजों के पास यही तरीका रह गया है मेरी आवाज दबाने का.. मेरी माता जी को प्रताड़ित किया जाएगा.. सिपाही कह रहा है, "माननीय मुख्यमंत्री जी, इन काले अंग्रेजों के द्वारा मुझे इस तरह से तोड़ा नहीं जा सकेगा.. अगर मुझे शांत कराना है तो इन काले अंग्रेजों को मेरी हत्या करनी होगी.. सिपाही ने कहा, "मेरी आवाज को तभी बंद किया जा सकेगा जब पुलिस महकमे के भ्रष्टाचार, अनियमितताएं, शोषण की जांच के लिए कमेटी बनाकर सुधार करना पड़ेगा.." #UPPolice #Police #Corruption #CMYogi #Bureaucracy #Duty #Lucknow #UttarPradesh

Vivek K. Tripathi

49,487 görüntüleme • 3 ay önce

पुलिस विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार की पोल खोलते लखनऊ पुलिस लाइन में तैनात सिपाही सुनील कुमार शुक्ला का एक और वीडियो सामने आया है। वीडियो में सिपाही ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि “इन काले अंग्रेजों यानी आईपीएस अफसरों से किसी भी तरह के न्याय की उम्मीद नहीं है।” सिपाही ने आरोप लगाया कि जिन अधिकारियों पर वसूली के आरोप हैं, उन्हीं को मामले की जांच सौंप दी गई है। साथ ही उन्होंने जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए हैं। गौरतलब है कि इससे पहले सिपाही सुनील कुमार शुक्ला ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर ड्यूटी लगाने के नाम पर सिपाहियों और दीवानों से 2-2 हजार रुपये वसूले जाने का आरोप लगाया था। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस महकमे से लेकर लोकभवन तक हड़कंप मच गया था। फिलहाल अमेठी निवासी सिपाही सुनील कुमार शुक्ला 20 दिनों के उपार्जित अवकाश पर चल रहे हैं।

NCIB Headquarters

10,417 görüntüleme • 3 ay önce

"लखनऊ पुलिस लाइन में तैनात सिपाही सुनील कुमार शुक्ला का दूसरा वीडियो आया सामने.." सिपाही कह रहा है, इन काले अंग्रेजों यानि आईपीएस अफसरों से किसी प्रकार के न्याय की उम्मीद नहीं है.. जिन पर वसूली के आरोप हैं, उन्हीं को जांच सौंप दी गई है.. सिपाही ने जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं.. सिपाही सुनील कुमार शुक्ला ने ड्यूटी लगाने के बदले सिपाहियों और दीवान से 2-2000 रुपए वसूलने का आरोप लगाते हुए सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया था जिसने पुलिस महकमे से लेकर लोक भवन तक हड़कंप मचा दिया था.. फिलहाल अमेठी निवासी सिपाही 20 दिन के उपार्जित अवकाश पर है.. #IPS #Corruption #UttarPradesh #Lucknow #UPPolice #Police #Duty

Vivek K. Tripathi

39,818 görüntüleme • 3 ay önce

"महंगा पड़ा पंगा, गई सिपाही की नौकरी.." ललितपुर में तैनात सिपाही जितेंद्र यादव को पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है.. इसी सिपाही ने अपने एसपी पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनकी शिकायत सीएम से की थी.. सिपाही को बर्खास्त करने की कई आधिकारिक वजह बताई गईं हैं.. पढ़िए.. सिपाही पर आरोप है कि वो महिला पुलिसकर्मी को नंबर बदलकर बार-बार फोन करता था.. उसका मानसिक उत्पीड़न कर प्रताड़ित करता था.. निपटा देने की धमकी देता था.. अफवाह फैलाकर छवि धूमिल करता था.. पुलिसकर्मियों से अवकाश पत्रावली के निस्तारण के लिए उत्कोच यानि रिश्वत मांगता था.. कुल मिलाकर भ्रष्टाचार में संलिप्त होने जैसे गंभीर आरोपों में सिपाही (वैसे पद मुख्य आरक्षी का है..) सेवा से बर्खास्त किया गया है.. सिपाही पर एसपी ललितपुर मोहम्मद मुश्ताक के खिलाफ विभिन्न माध्यमों से ग़ैर तथ्यात्मक एवं भ्रामक ख़बरों को प्रसारित करने और कराने का भी आरोप है.. इसके अलावा एक और आरोप है.. "कुछ दिन पूर्व एक हार्डकोर हिस्ट्रीशीटर के साथ बर्खास्त मुख्य आरक्षी का ऑडियो भी वायरल हुआ था जिसमें आरोपी आरक्षी विभिन्न बेशकीमती जमीनों पर अवैध रूप से क़ब्ज़े तथा अवैध रूप से धन अर्जित करके नए वाहन ख़रीदने की भी चर्चा कर रहा था.. उक्त वायरल ऑडियो का संज्ञान लेते हुए एसपी ने जांच का निर्देश भी दिया था जिसमे आरोपी आरक्षी की पूर्ण संलिप्तता पाई गई है तथा इस बिंदु को भी जांच में शामिल किया गया है.." वीडियो में जिन पुलिस अफसर को आप सुन रहे हैं, वो ललितपुर के एएसपी कालू सिंह हैं.. #Lalitpur #Police #PoliceAction #Termination #IPSvsConstable #Constable

Vivek K. Tripathi

56,327 görüntüleme • 5 ay önce

#बिहार_विधानसभा_चुनाव पहले चरण के चुनाव के लिए जदयू उम्मीदवारों की सूची आज जारी हो जाएगी। कल से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी का चुनाव प्रचार अभियान भी शुरू हो जाएगा। पूरा NDA हरेक लिहाज से एकजुट है। एनडीए का परपस है नीतीश कुमार जी के नेतृत्व में सरकार बनाना। बिहार के लोग भी एनडीए की डबल इंजन सरकार का फायदा देख रहे हैं और अब वे पीछे मुड़ कर नहीं देखना चाहते हैं। मुख्यमंत्री Nitish Kumar जी बिहार की भी कमान संभाले हुए हैं और जदयू की भी कमान संभाले हुए हैं। सरकार में और जदयू में जो भी निर्णय होता है, मुख्यमंत्री जी की अनुमति और सहमति के बाद ही होता है। हां, वे लोकतांत्रिक तरीके से निर्णय लेते हैं, सभी से चर्चा करते हैं, सभी का फीडबैक लेते हैं, उसके बाद ही अंतिम निर्णय लेते हैं। NDA का लार्जर परपस है बिहार के विकास की रफ्तार को बनाये रखना। मुख्यमंत्री जी ने एक करोड़ युवाओं को नौकरी या रोजगार देने का जो वादा किया है, उसे पूरा करना। बिहार में जो कई महत्वपूर्ण सिक्स-लेन हाइवे बन रहे हैं, विकास के बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम हो रहे हैं, उन्हें समय से पूरा करना। इस चुनाव में दीवार की लिखावट बिल्कुल स्पष्ट है। एनडीए को इतना प्रचंड बहुमत आने वाला है, कि 2010 का रिकार्ड भी पीछे छूट जाएगा। विपक्ष को भी पता है कि इस बार लोगों का फीडबैक क्या है, महिलाओं और युवाओं का मूड कैसा है और रिजल्ट कैसा आने वाला है। इसलिए पूरा विपक्ष दहशत में है। मैं देख रहा हूं कि कुछ लोग एजेंडा बेस्ड नैरेटिव चलाने की कोशिश कर रहे हैं। निराधार खबरें चला कर लोगों को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। मैं पत्रकार साथियों से और बिहार की जनता से भी आग्रह करना चाहता हूं कि अफवाहों पर ध्यान नहीं दें। केवल अधिकारिक स्रोतों से प्राप्त सूचना पर ही विश्वास करें। आज पटना में पत्रकारों से बात करते हुए 👇 #SanjayKumarJha #BiharElections #BiharElections2025 #2025FirSeNitish #NDA4Bihar Janata Dal (United)

Sanjay Kumar Jha

11,406 görüntüleme • 10 ay önce

आज एयरपोर्ट पर मीडिया से बात की- राज्य सरकार के गुजरात में प्रशिक्षण के लिए जाने के संदर्भ में पूछे गए सवाल के जवाब में : ये देखिए पूरी सरकार तमाम मंत्रिमंडल ही नहीं मुख्यमंत्री सहित दोनों डिप्टी सीएम,तमाम विधायक सत्ता पक्ष के,पूरा खाली कर दिया राजस्थान को, वैसे राजस्थान की स्थिति ऐसी बन गई है यहां हत्याएं हो रही हैं लगातार एक के बाद एक, एफआईआर दर्ज नहीं करते हैं आत्महत्याएं हो रही हैं ,इस माहौल में राजस्थान चल रहा है। गर्मी बढ़ने लग गई है तो पानी की किल्लत हो रही है, बिजली की मांग हो रही है, समस्याओं से घिरा हुआ राजस्थान है मेरे हिसाब से तो,और करप्शन की तो हदें पार हो गई हैं। करप्शन की हदें पार हो गई हैं अगर 10 करोड़ रुपए की कोई रिश्वत दे रहा है इसके मायने हैं कि वहां कितना अवैध खनन हो रहा होगा। अगर 10 करोड़ की ऑफर की हुई है, बारगेनिंग हुई है कम ज़्यादा की, सच्चाई क्या है वो तो एसीबी जाने, पर 10 करोड़ की रिश्वत का अगर लेन देन होने का अगर मान लीजिए वहां पर सौदा हुआ है इसका मतलब कितना बड़ा अवैध खनन हो रहा है, कितना नुकसान हो रहा है राजस्थान सरकार को रेवेन्यू को लेके। तो चारों ओर की स्थिति ऐसी बन गई है उस में आप जा रहे हो वहां पर प्रशिक्षण लेने के लिए देने के लिए, डेढ़ साल के बाद में ! डेढ़ साल तक इसका मतलब आपकी सरकार निकम्मी साबित हुई,नकारा रही, कुछ काम नहीं किया। इसलिए आप जो है डेढ़ साल के बाद में अब आप प्रशिक्षण लेंगे वहां पर। वो क्या तुक है वहां पर ? डेढ़ साल में बिल्कुल किए ही नहीं हैं आपने कुछ भी नहीं किए हैं तो अब प्रशिक्षण ले रहे हो आप इसलिए मैने कहा कि ये क्या हो रहा है। मेरी आलोचना जो है वो आलोचना के साथ साथ सलाह भी होती है : मेरी आलोचना जो है वो आलोचना के साथ साथ सलाह भी होती है। मेरा अपना अनुभव है तो मेरी ड्यूटी बनती है कि मैं चाहे सत्ता पक्ष हो चाहे विपक्ष हो, अगर मैं बात कहूं खाली आलोचना करने के लिए नहीं कहूं बल्कि उसमें सलाह भी होती है। अब समझने वाला समझता है अलग बात है डिपेंड करता है कि वो क्या समझते हैं वो उनके ऊपर है पर मेरी इच्छा कि मैं कोई बात कहूं आलोचना करूं, तो साथ में कुछ सलाह भी दूं मैं। मैं कम से कम 100 साल जिंदा रहना चाहता हूं राजस्थान प्रदेशवासियों की सेवा करने के लिए इसलिए मैंने कहा। अब मुख्यमंत्री जी ने शायद लिखा है कि मेरे मानसिक संतुलन बिगड़ गया है, मेरा कोई मानसिक संतुलन नहीं बिगड़ा है, मैं मुख्यमंत्री जी को,प्रधानमंत्री मोदी जी को, विश्वास दिलाता हूं मेरा मानसिक संतुलन बिल्कुल नहीं बिगड़ा है, बल्कि, गांधी जी ने तो कहा था कि मैं 125 साल जिंदा रहना चाहता हूं, गांधी जी ने कहा था मैं 125 साल जिंदा रहना चाहता हूं सेवा करने के लिए, और मैं कह रहा हूं मैं कम से कम सौ साल जिंदा रहना चाहता हूं राजस्थान प्रदेशवासियों की सेवा करने के लिए। जिसकी भावना इतनी बड़ी हो कि मुझे सौ साल तक सेवा करनी है उसका मानसिक संतुलन हमेशा कायम रहेगा ये मेरा कहना है मुख्यमंत्री भजनलाल जी को। गृह मंत्रालय के 7 तारीख को मॉक ड्रिल को लेकर एडवाइजरी जारी करने तथा सरकार के गुजरात में होने के सवाल पर : उस पे मेरा कोई कमेंट नहीं हो सकता क्योंकि वो तो पहलगाम के बाद में जिस प्रकार से विचार आ रहे हैं रक्षा मंत्री जी के, प्रधानमंत्री जी के, और पूरा देश एकजुट है, विपक्ष कह चुका है कि हम आपके साथ में हैं। राहुल गांधी जी कह चुके हैं ,तो मेरा मानना है कि ऐसे मामले के अंदर एक बार जब विपक्ष भी एकजुट है सरकार के साथ में, अब किसी को भी कमेंट नहीं करना चाहिए उसके बारे में क्योंकि जो फैसला करना है सरकार को करना है और सरकार को भी फैसला सोच समझ कर करना है। ऐसे फैसले कोई जल्दबाजी में नहीं होते हैं ऐसे फैसले कोई अति उत्साह समझ लिए अति प्रतिक्रिया समझ लीजिए उसमें नहीं होता है , ये फैसले बहुत सोच समझ के देश हित में क्या है हमारे, हमारे मुल्क के हित में क्या है उसको देख कर करने पड़ेंगे, ये पूरी छूट प्रधानमंत्री मोदी जी को, और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को होनी चाहिए। उसमें बार बार कमेंट नहीं करना चाहिए मेरा मानना है। हां ये बात जरूर है कि लोग पूछते हैं कि आप बड़ी बड़ी बातें तो करते हो, पर आपके बारह दिन हो गए हैं आप क्या जवाब दे रहे हो जनता को।

Ashok Gehlot

24,418 görüntüleme • 1 yıl önce

रियांबड़ी में बजरी माफिया के आतंक पर : देखिए मैं कह चुका हूं बजरी में सरकार पर माफिया हावी हो गए हैं, बजरी बहुत महंगी मिल रही है, हमारे वक्त में भी तकलीफ थी लोगों को मैं स्वीकार करता हूं हमारे वक्त में भी थी पर हमनें पूरा रोकने की कोशिश करी, पुलिस प्रशासन, जिला प्रशासन को पाबंद किया, आज इतना बड़ा नेक्सस बन गया ये कि नीचे से ऊपर तक ऐसा सिस्टम बन गया बना दिया अब इन लोगों ने कि कितने लोग कुचल कर मारे जा रहे हैं, पुलिस पर हमले हो रहे हैं, कई लोगों को कुचल देते हैं लोग जो इनके गैंग में शामिल नहीं होते हैं , इतनी घटनाएं हो रही हैं उसके ऊपर रोक नहीं लग रही है इस बात का दुख है और इसलिए ये बढ़ता ही जा रहा है बढ़ता ही जा रहा है,बढ़ता ही जा रहा है, और लूट मचा रही है इन लोगों ने यह स्थिति है और मुख्यमंत्री को मैं कहना चाहूंगा आप ध्यान क्यों नहीं दे पा रहे हो ? भई घूमना अच्छी बात है, अगर दौरे करते हैं मैं उसको बुरा नहीं मानता, कितने दौरे करो, पर दौरे करने के साथ साथ में गवर्नेंस भी तो करो शासन भी तो करो भई, और जो प्रॉब्लम बर्निंग प्रोब्लम आपकी है जैसे कानून व्यवस्था की स्थिति होती है घटनाएं रेप की हो रही हैं डकैती की हो रही हैं चोरी हो रही है, रोज हो रही हैं ये प्रायोरिटी पर होना चाहिए उनकी,बजरी अपने आप में ही प्रायोरिटी पर होनी चाहिए क्योंकि बजरी जब इतना, एक मध्यम क्लास का व्यक्ति भी वो मकान छोटा मोटा बनाता है उसको बजरी इतनी महंगी मिलती है कि वो बेचारा क्या मकान बनाएगा, तो तकलीफ मध्यम परिवार के लोगों को हो रही है सबको हो रही है उस पर ध्यान मुख्यमंत्री जी को देना चाहिए। मुख्यमंत्री जी की बहुत बड़ी ऑथोरिटी होती है, है, भजनलाल जी के पास में आज इतनी बड़ी पावर है उसको यूज करने की आवश्यकता है खाली उनको और कुछ नहीं करना है, प्रमोशन हो गए आईपीएस के, वहीं बैठे हुए हैं एसपी के रूप में जो डीआईजी बन गए, पहले आईएएस की यह स्थिति थी अब जा के लिस्ट निकली है तो इनको कौन रोक रहा है ? अब तो नए डीजी बन गए हैं , नए डीजी बनने के बाद में अब क्या तकलीफ आ रही है ? हो सकता है उनको कोई सलाह लेनी होगी, रुक गया होगा मान लो अब क्या दिक्कत है उनको ? तो ये जो जिस प्रकार गवर्नेंस हो रही है न उससे नुकसान इन्हीं को हो रहा है इन्हीं को हो रहा है।

Ashok Gehlot

22,470 görüntüleme • 1 yıl önce

प्राइमरी स्कूल इस देश का प्राण हैं. अगर कोई यह कहते हुए बंद करने की सिफारिश कर रहा कि टीचर पढ़ाते नहीं, स्कूल में बच्चे नहीं आते, सरकारी खर्च बहुत ज्यादा है, तो वह गलत कह रहा। प्राइमरी स्कूलों की बदहाली की वजह से ही प्राइवेट स्कूल मोटा रहे। अगर सरकारी स्कूल पूरी तरह से बदहाल हो जाए तो प्राइवेट स्कूल मनमानी पर उतर आएंगे। फिर जो दिहाड़ी मजदूर है, चना-चूरन बेचने वाले लोग हैं वह अपने बच्चों को प्राइवेट में नहीं पढ़ा पाएंगे। फिर इनकी आबादी पूरे देश में 50% से अधिक है। आप प्राइमरी की आलोचना करते हुए अक्सर अपने गांव को देखते हैं, आपका गांव संपन्न हो सकता है, कमाई के मामले में लोग आगे आ गए हों, लेकिन सुदूर किसी एरिया में जाइए। आप देखेंगे कि पढ़ाई की स्थिति अभी भी भयावह है। लोगों के पास आज भी खाने की व्यवस्था नहीं है। पढ़ाई को लेकर जागरुकता नहीं है। सरकारी टीचर किसी भी राज्य का सबसे जरूरी एसेट्स है। सारे बौद्धिक लोग हैं। राज्य में जो भी लिखा-पढ़ी वाली चीजें होती हैं उनमें आप इन्हीं की सेवा लेते हैं। आप पुलिस या फिर किसी और सर्विस विभाग से काम नहीं ले पाएंगे। आप सरकारों का शिक्षा बजट पर खर्च पता करिएगा। आपको पता चलेगा कि यह कुल बजट का 10% भी नहीं है। मिड-डे-मील पर आज भी प्रति बच्चा 5 रुपए से ज्यादा खर्च नहीं हो रहा। जबकि आपको टीचर की सैलरी ज्यादा लगती है। आप एक चीज और देखिए, जिन स्कूलों में टीचर्स या फिर वहां के ग्राम प्रधान ने अपने से पैसा लगाया, स्कूल को सजाया, बिजली, कुर्सी-मेज, पंखे और पानी की अच्छी व्यवस्था की, वहां बच्चों की संख्या बहुत अधिक मिलेगी। जबकि यह सब व्यवस्था करने का काम शिक्षक का नहीं है। जरूरी है कि स्कूलों की बेहतरी पर काम किया जाए। कुर्सी-मेज, बिजली, पीने की व्यवस्था बेहतर करना सुनिश्चित किया जाए। इंग्लिश मीडिया में तब्दील किया जाए। स्कूल को बारातघर न बनाया जाए। ताश खेलने का अड्डा न बनाया जाए। कम से कम 4 टीचर्स की व्यवस्था की जाए। तब आप देखिए, लोग कैसे अपने बच्चों का एडमिशन करवाने के लिए लाइन लगाकर खड़े नजर आएंगे। यह वीडियो कुछ महीने पहले का है। लखनऊ के एक स्कूल का है। देखिए।

Rajesh Sahu

35,002 görüntüleme • 1 yıl önce

मैंने अभी मुख्यमंत्री जी का बयान सुना, मुझे हँसी आ रही है कि मुख्यमंत्री जी कह रहे हैं कि जो किसान है वह साल में 20-25 दिन ही काम करता है, बाकी वह फ्री रहता है। बड़े कमाल की बात है अपने आप को किसान का बेटा बताते हैं, किसान परिवार से बताते हैं। एक-एक बात आपको पता है, तो आप यह कैसे कह सकते हैं? वो किसान जो अपनी फसल के लिए पूरा समय लगाता है, आपने कह दिया बुवाई करता है और चार दिन पानी देने जाता है, फिर कटाई कर लेता है। मुख्यमंत्री जी, क्या आपने कभी यह देखा कि वह किसान जो बुवाई करता है, उससे पहले उसे अपने खेत को तैयार करने में कितना समय लगता है? आपने कह दिया कि वह फसल बोने जाता है, तो बोने के बाद उसकी निराई-गुड़ाई कौन करता है? उसके लिए समय कौन देता है? फिर आपने कह दिया कि वह चार दिन पानी देने जाता है। मुख्यमंत्री जी, पानी ऐसे नहीं लगता कि प्रदेश में किसानों को आप रात को बिजली दे रहे हैं इस किसान को रात में पानी देने के लिए ठंड में खड़ा रहना पड़ता है। और आपने कह दिया "कटाई" मुख्यमंत्री जी, कटाई एक ही दिन में हो जाती है क्या ? कटी कटाई हुई फसल अभी खेतों में पड़ी है गेहूं की, और ओलावृष्टि से किसानों की फसल बर्बाद हो गई। वो आपको नहीं दिख रही l मुख्यमंत्री जी, आप यह समझ रहे हैं कि किसान के एक खेत का काम एक दिन में सारा काम हो जाता है l वह जुताई भी करेगा, बोवाई भी करेगा, निराई-गुड़ाई भी करेगा, पानी भी देगा, कटाई भी करेगा, फसल को इकट्ठा भी करेगा, उसे निकालकर घर भी लाएगा, मंडी में भी लेकर जाएगा, और तुड़े को भी घर में इकट्ठा करेगा l इसमें केवल किसान नहीं, इसमें उसका पूरा परिवार लगता है। छोटे-छोटे बच्चे खेतों में जाकर अपने माता-पिता की मदद करते हैं। और उसके बाद पूरी फसल किसके लिए छोड़ देगा, उसकी रखवाली नहीं करेगा ? रात को वहां सोता है, उसकी रखवाली करता है, फसल का ध्यान रखता है l मुख्यमंत्री जी, ऐसा लग रहा है आप किसान किसान ऐसे ही कर रहे हैं आपको किसानी की पूरी बात ही नहीं पता l

Tika Ram Jully

33,392 görüntüleme • 4 ay önce

राजस्थान में राज RSS वाले कर रहे, ये खाली मुखौटे हैं जोधपुर में आज मीडिया से बातचीत की: अशोक गहलोत का जवाब: देखिए राजनीति में जो है, झूठे आरोप नहीं लगाए जाते हैं। अगर आपके पास तथ्य है, तो उस पर बात करो। किरोड़ी मीणा जी जब सरकार में नहीं थे, तब भी वो लगातार आरोप लगाते थे। उनकी जो प्रकृति में है कि वो, आंदोलन करते रहते हैं लगातार, आप देखते हो उनको 15-20 साल से। तो एक अलग किस्म का प्राणी हैं वो। वो पहले भी आरोप लगाते थे अब भी लगा रहे हैं, अनावश्यक है। पार्टी के जो अध्यक्ष होते हैं उनकी एक अलग प्रतिष्ठा होती है। उस पे आप बार-बार चोट कर रहे हो। आरोप लगा रहे हो बिना तथ्यों के। तो आप बताइए कि पार्टी में रिएक्शन होगा? हमारी पार्टी में रिएक्शन है। डोटासरा जी को खुद को लगता है भाई ये क्या आरोप लगा रहा है वो भी बिना तथ्यों के। हम सब को लगता है। ये किरोड़ी मीणा जी को खुद को सोचना चाहिए, वो क्या किस प्रकार की उनकी अप्रोच है काम करने की है। छापे डाल रहे हैं और छापे के साथ जो जाते हैं लोग उनके, वसूली करते हैं वो। ये तो प्रूव हो गया है। जब प्रूव हो गया है तो कहते हैं कि एसीबी भी दबाव में काम कर रही है। तो भाई एसीबी तो दबाव में जब से डीजी साहब आए हैं, पहले मैंने कहा ये आदमी तो भला है डीजी। वो पूरी तरह सीएमओ के और सीएम के दबाव में है ये। और इनके जो नीचे अधिकारी है, वो भी इनकी बात नहीं मानते हैं। वो इनको उल्टा दबाते हैं। तो मुझे लगता है कि एसीबी का जो डीजी है, वो खुद परेशान होगा, मेरे ख्याल से जहां तक मैं समझता हूँ या जहाँ तक मेरे पास वहां से रिपोर्ट आती है। वहाँ के जो काम करने वाले अधिकारी कहते हैं ना कि भाई क्या हो रहा है हमारे यहाँ? स्थिति एसीबी की बहुत भयानक खराब है। दबाव में काम हो रहे हैं। मुख्यमंत्री जी को ऑबलाइज करने के लिए फैसले हो रहे हैं। आईओ कह रहा भाई ये मुल्जिम नहीं बनता हमारा। और ऊपर से कहते हैं डीजी साहब और जो दबाव आता है उनके ऊपर, नहीं आप इनको अरेस्ट करो। ऐसा मैंने आज तक कभी देखा नहीं। तीन-तीन बार हम भी मुख्यमंत्री रहे हैं। एसीबी में कोई पंचायत नहीं करनी चाहिए किसी को भी। यहाँ पंचायतें नहीं हो रही हैं। आईओ कह रहा भाई ये अरेस्ट नहीं हो सकता है क्योंकि इसमें कोई केस नहीं बनता। आप इसको अरेस्ट कीजिए। अरेस्ट हुए भी हैं, जिनमें महेश जोशी भी हैं। आईओ ने मना किया। वो ऑलरेडी द्वारा वैसे ही केस में अरेस्ट हो चुके थे। यहाँ वापस अरेस्ट कर लिया, क्या मजाक बना रखी है? क्या मुख्यमंत्री को दिखता नहीं है कि ये क्या हो रहा है? उनका खुद का नाम आता है कि दबाव आता है। शायद आरएसएस वालों का आता होगा। आरएसएस के दबाव होने के बाद में मुख्यमंत्री हथियार डाल देते हैं। राज आरएसएस कर रहा है ये तो मुखौटे हैं खाली। मुझे लगता है कि राजस्थान के अंदर आजकल जो ये लोग राज करते हैं ये मुखौटे बने हुए हैं। राज आरएसएस वाले कर रहे हैं। ट्रांसफर, पोस्टिंग, करप्शन सब वहीं से डायरेक्शन आते हैं। हालात बड़े गंभीर हैं राजस्थान के। ऐसी इनकी स्थिति बनेगी इस बार राजस्थान की, जनता जो है वो जागरूक है। ये कुछ भी कर लें, ये मुख्यमंत्री बदल देंगे ना, तब भी कुछ नहीं होने वाला है, अगली बार सरकार बदल के रहेगी। थैंक यू।

Ashok Gehlot

56,795 görüntüleme • 2 ay önce

12 साल में एक बार आने वाला आस्था का महापर्व है महाकुंभ. हिंदू धर्म और सनातन संस्कृति से परिपूर्ण आध्यात्म का महासंगम है कुंभ इसीलिए जो प्रयागराज में श्रद्धालुओं के साथ हो रहा है वो देखकर मन व्यथित है, दुखी है. कहाँ कहाँ से श्रद्धालु पैसा जोड़कर कुंभ में स्नान करने इस पर्व का हिस्सा बनने आए हैं दो व्यक्तियों के चेहरा चमकाने की सनक का ख़ामियाज़ा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है. विज्ञापन की चकाचौंध तो ऐसी थी कि श्रद्धालुओं को लगा की व्यवस्था बहुत चकाचक है. कहा गया था की लोगों के ठहरने, उनके आवागमन का उचित प्रबंध किया गया है लेकिन जो भयावह तस्वीरें और वीडियो अब सामने आ रहे हैं उसको देखकर तो यही लगता है कि सरकार और प्रशासन नाम की कोई चीज़ ही नहीं है उत्तर प्रदेश में. और रेल मंत्रालय पर तो ताला ही पड़ गया है एक नहीं ऐसे हज़ारों वाक़ये सामने आए हैं जहाँ पर मीलों लंबे जाम में फँसे लोग पंद्रह बीस घंटे बसों में और गाड़ियों में बैठने को मजबूर हैं. ना उनके पास कुछ खाने को है ना पीने का पानी है. वो धूप से और भूख से बदहाल हैं रेल मंत्री को रील बनाने से फुर्सत नहीं है इसीलिए रेल मंत्रालय का यह हाल है कि प्रयागराज आने जाने के लिए ढंग की ट्रेन तक नहीं चल पा रहीं हैं ट्रेनों की ये हालत देख कर घबराहट हो रही है. आज सुबह ही एक वीडियो देखा, एक के ऊपर एक लदे हुए लोग सिर्फ़ इस आशा में कि शायद वो घर पहुँच जाएँगे. एक और वीडियो में AC कोच की खिड़की पर लगा शीशा ही टूट गया. एक बार को सोचिए अगर आप वहाँ होते तो आप और आपके परिवार पर क्या बीतती? सरकार तो जैसे लुप्त हो गई है, पुलिस प्रशासन लापता है. लोगों को अपने हाल पर छोड़ दिया गया है. लोगों को अव्यवस्था से और कुप्रबंधन से जूझने के लिए मजबूर कर दिया गया है उत्तर प्रदेश में विश्व का सबसे वृहद लोगों का महासंगम होने का दावा ब्रांडिंग के लिए तो खूब किया गया लेकिन व्यवस्था के नाम पर ढेले भर का काम नहीं हुआ. जो लोग ड्रोन से चीज़ों का पता लगा लेने की देंगे हांकते थे वो आज भी मृत लोगों की सूची और संख्या जारी नहीं कर पाये एक आम श्रद्धालु की अपनी सरकार से आख़िर क्या अपेक्षा हो सकती है - यही कि आने जाने की उचित व्यवस्था हो, ठहरने का इंतज़ाम हो और सड़कों पर ट्रैफिक संचालन का प्रबंध हो - पर शायद यह आशा करना भी बेमानी है

Supriya Shrinate

87,452 görüntüleme • 1 yıl önce

पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे के स्पष्टीकरण देने और उनको लेकर श्री मदन राठौड़ द्वारा की गई बयानबाजी पर प्रतिक्रिया : देखिए, मेरी दृष्टि में वसुंधरा जी को सफाई देने की आवश्यकता नहीं थी। पहली बात तो यह है कि मैं उनकी पार्टी के मामलों में कोई टिप्पणी करना नहीं चाहता। लेकिन जो हालात हैं, जिस प्रकार से बीजेपी के अध्यक्ष बोलते हैं, उनकी एक अलग ही एप्रोच है ,बोलने में भी और व्यवहार में भी। व्यक्तिगत रूप से वे अच्छे और व्यवहारिक व्यक्ति हैं, हमारे उनसे अच्छे संबंध हैं। लेकिन जब पार्टी का दबाव होता है तो पता नहीं वे क्या बोल जाएं,ऐसी स्थिति बन जाती है। चाहे टिप्पणी हमारे बारे में हो या वसुंधरा जी के बारे में ,क्या कोई पीसीसी अध्यक्ष या बीजेपी अध्यक्ष इस तरह कहता है कि वसुंधरा जी बार-बार मुख्यमंत्री बनेंगी क्या? ऐसी टिप्पणी कम से कम मोदी जी के लिए छोड़नी चाहिए थी, या फिर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को करनी चाहिए थी। खैर, यह उनकी पार्टी का मामला है, हम क्या कर सकते हैं। वसुंधरा जी को जवाब देने या सफाई देने की आवश्यकता नहीं थी, क्योंकि लोग समझते हैं कि उनकी भावना क्या थी और उन्होंने किस संदर्भ में बात कही थी। अनावश्यक टिप्पणियां की गईं। हालांकि, यह उनकी अपनी मर्जी है। वसुंधरा जी कुछ कह रही हैं, मदन राठौड़ कुछ और कह रहे हैं यह उनकी पार्टी की स्थिति है। ये लोग हम पर आरोप लगाते हैं कि कांग्रेस में झगड़े हैं, लेकिन वास्तविक दुर्गति तो इनकी हो रही है। आप खुद देख रहे हैं कि कौन क्या बोल रहा है। इनकी स्थिति सड़कों पर आ गई है। हम सब एक हैं। राजस्थान में कांग्रेस पूरी तरह एकजुट है और उसी तरह आगे बढ़ रही है। यहां पर परंपरा रही है कि सरकारें वन बाय वन बदलती हैं। जूली साहब यहां खड़े हैं, हमारे नेता प्रतिपक्ष हैं। वे भी मेरी बात का समर्थन करेंगे कि अगली बार कांग्रेस ही आएगी। मीडिया द्वारा श्री मदन राठौड़ की उस बयानबाजी पर पूछे गए प्रश्न का उत्तर, जिसमें मेरे द्वारा पाकिस्तान की ओर से की गई मध्यस्थता संबंधी प्रतिक्रिया का जिक्र किया गया: देखिए, लोग संदर्भ को पढ़ते नहीं हैं। मैंने कहा था कि हमने दुनिया के सामने एक अवसर गंवा दिया। मध्यस्थता करने का काम हिंदुस्तान को करना चाहिए था। दुनिया में भारत का एक अलग ही आभामंडल (औरा) है। हमारा देश शांति, भाईचारे और अहिंसा की बात करने वाला देश है। दुनिया के कई देश उम्मीद कर रहे थे कि भारत आगे आकर अपील करेगा और मध्यस्थता की प्रक्रिया शुरू कराने का प्रयास करेगा। लेकिन उसके बजाय पाकिस्तान जैसे देश की चर्चा होने लगी, जिसे आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला माना जाता है और जिस पर वर्षों से ऐसी छवि बनी हुई है। जब वही देश शांति स्थापित करने की बात करता है, तो स्वाभाविक रूप से भारतीयों को दुख होता है। मैंने वही दुख प्रकट किया था। यदि मदन राठौड़ मेरे इस भाव को नहीं समझ पा रहे हैं, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है। आप बताइए, पाकिस्तान की क्या स्थिति है? इंदिरा गांधी जी के समय उसके दो टुकड़े हो गए थे। क्या वह कुछ कर पाया? फिर भी आज दुनिया में चर्चा हो रही है कि पाकिस्तान शांति की बात कर रहा है। आज जब इज़रायल और ईरान के बीच युद्ध जैसी स्थिति से पूरी दुनिया प्रभावित और चिंतित है, तो जो भी देश शांति की बात करेगा, लोग उसकी ओर देखेंगे। इस समय दुनिया के कई देश इस्लामाबाद की ओर देख रहे हैं कि वहां क्या निर्णय होगा। मेरी बात केवल इतनी थी कि वह स्थिति भारत की होनी चाहिए थी। मेरा मतलब ये था।

Ashok Gehlot

24,885 görüntüleme • 4 ay önce

बेटों को सरकार में दखल नहीं करना चाहिए के सदंर्भ में पूर्व में दिए मेरे बयान पर टिप्पणी : कल मैंने बेटों के लिए कह दिया तो मैंने कहा बेटों को सरकार में दखल नहीं करना चाहिए ये मत छूट दो बेटों को बेटियों को सालो को सालियों को किसी परिवार वालों को उसमें आप ये दखल करने की इजाजत मत दो| आप उनको राजनीति में लाओ वो हमारे एग्जांपल दे रहे सोनिया जी , मेरे, आप लाओ ना उनको राजनीति में उनका स्वागत करेंगे अगर हमारी वर्तमान पीढ़ी जो है चाहे किसी पार्टी की है उनके परिवार के लोगों को मोटिवेट भी करना चाहिए। अगर कोई छात्र युवा आ सकता है कोई परिवार का तो पॉलिटिक्स के छात्र भी आ सकते हैं उनके बच्चे भी आ सकते हैं , खाली आप आउट ऑफ टर्न उनको मदद नहीं मिले इतनी तो बात है या किसी का हक मत मारो ये तो होता है| बाकी आने में क्या हर्ज है अगर मान लो परिवार होगा पारिवारिक पॉलिटिकल पृष्ठभूमि का उनके परिवार के लोग आएंगे अगर उनसे अनुभव काम आएगा तो अनुभव तो पब्लिक के काम आएगा ना तो हम क्यों डिसकरेज करें बच्चों को| सब आए बेटा बेटी कोई आओ पर सरकार में दखल करेंगे करप्शन करवाएंगे, बदनामी किसकी होगी मुख्यमंत्री जी की होगी मंत्रियों की होगी, हो भी रही है क्या ये खबरे नहीं पहुंचती है मुख्यमंत्री के पास में ? जबसे सरकार बनी है तबसे ये काम शुरू हो गया बेटे बेटियों का क्या मतलब भाई और खुले आरोप लग रहे हैं हम तो पहली बार बोल रहे हैं हमने प्रयास किया कि पर्सनली हम लोग कन्वे करें कि देखिए बदनामी बहुत हो रही है। हमारे प्रयास काम नहीं आए तब मुझे बोलना पड़ा है अब मैं कहना चाहूंगा बहुत बदनामी होती है, बेटों को दूर रखो। मैंने अपने बेटे को तो मुख्यमंत्री निवास में नहीं रखा पूरे परिवार को किराए का मकान लेकर वो रहे पांच साल। आप बता दीजिए कि ये उदाहरण हम लोग दे रहे हैं हम लोगों का उदाहरण दे रहे हैं चाहे वो आर.सी.ए के चेयरमैन बने हो तो सी.पी जोशी जाने वो जाने भैया मैंने तो एक सेकंड भी टाइम नहीं दिया उसके अंदर, मैं तो पड़ा भी नहीं हूं। और अगर वो चुनाव लड़े हैं पार्टी ने टिकट दिया उसको,ऐसी स्थिति बनी होगी उनको टिकट मिला वहां पर उससे इन बातों का क्या संबंध जो मैं बोल रहा हूं मैं तो कह रहा हूं बेटे बेटियों का आप सरकार में दखल करने की इजाजत मत दो ये मैंने कहा है। और जो यह स्टेडियम वाला, श्री अनिल अग्रवाल से बात करके हम लोगों ने दो ढाई सौ करोड़ का प्रोजेक्ट है उनसे इमदाद ले रहे थे हम लोग, वो स्ट्रक्चर खड़ा हो गया है, बंद कर दिया, लाखों बच्चे जो हैं क्रिकेट के लिए रात दिन एक करते हैं, आम लोगों में लोकप्रिय है। मैं चाहे फुटबॉल का या कबड्डी का पक्षधर हो सकता हूं क्रिकेट का पक्षधर मैं नहीं रहा होऊंगा कभी मान लो ठीक है, वो अलग मेरी अलग बात है पर एज़ ए मुख्यमंत्री मेरी ड्यूटी है ना जो जनता क्या चाहती है? युवा पीढ़ी क्या चाहती है? उन खेलों को प्रोत्साहन दे हम लोग। वो मैंने प्रयास किया, वो अधूरा पड़ा हुआ है। दो साल हो गए आरसीए के चुनाव ही नहीं हो रहे हैं और आपस में लड़ रहे हैं ये लोग। कौन लड़वा रहा? कौन भिड़वा रहा? मुख्यमंत्री की नॉलेज में नहीं है क्या? कोई बोल नहीं रहा है। चुनाव नहीं करवा रहे हैं विश्वविद्यालय के, कॉलेज के। विश्वविद्यालय चुनाव क्यों नहीं करवा रहे? आप नई पीढ़ी को प्रोत्साहन नहीं देना चाहते हैं क्या? ये तमाम बातें जो हो रही है न वो बहुत ही बुरी हो रही है। इसलिए मैंने दो बातें कही थी। मैं आज भी कहना चाहूँगा मुख्यमंत्री जी से। मुख्यमंत्री जी आप भले आदमी हो, कृपा करके आप अपनी पकड़ बनाओ, इन सबको टाइट करो और जो आपके सलाहकार हैं उनको वापस उनको एक्ज़ामिन करो। ये आपको जिस प्रकार से जवाब आज आए हैं उससे मैं बहुत निराश हुआ हूँ। जनता में बहुत आक्रोश है। पूछ कुछ रहे हैं हम लोग ,जवाब कुछ और दे रहे हैं। कांग्रेस द्वारा आज राजस्थान दिवस मनाए जाने पर सवाल का जवाब: कांग्रेस क्या मना रही है, हर राज्य के अंदर देश भर के अंदर उसी दिन मनाया जाता है जिस दिन उनका गठन हुआ था। पीएम खुद करते हैं ट्वीट करते हैं। आज तो पता नहीं उन्होंने किया कि नहीं किया है। पर ये नई-नई बातें लाकर इनकी राजनीति विकास की तो है नहीं, इनकी राजनीति धर्म के नाम पर बंटवारा करने की है। कब तक करेंगे? कब तक करेंगे? जनता समझ चुकी है कि ये कब तक हमें गुमराह करेंगे।

Ashok Gehlot

24,841 görüntüleme • 5 ay önce

मैं आमतौर पर सेलिब्रिटीज़ को निशाना बनाने से परहेज़ करती हूँ क्योंकि वे आसान आलोचना का शिकार हो जाते हैं, और सवाल तो सत्ता से किया जाना चाहिए जिससे कि जवाबदेही सुनिश्चित हो लेकिन जब यह सेलिब्रिटीज़ RSS जैसी एक ऐसी संस्था की तारीफ़ों के पुल बाँधने लगते हैं जो मेरे देश में नफ़रत फैलाती, लोगों को बाँटती है, तो कुछ ज्वलंत मुद्दों पर उनकी चुप्पी पर भी ज़रूर सवाल उठते हैं • जब लोगों की लिंचिंग सिर्फ़ उनकी शक्ल या उनके खाने की वजह से होती है, तो आप चुप क्यों रहते हैं? • जब लड़कियों के साथ बलात्कार होता है और अपराधियों को सत्ता का संरक्षण मिलता है, तो आप एक भी शब्द क्यों नहीं बोलते? • जब सर्वोच्च पदों पर बैठे लोग हिंसा और नफ़रत को बढ़ावा देते हैं, तो आप चुप क्यों रहते हैं? • जब किसानों को कुचला जाता है, तो आप बोलते क्यों नहीं? • जब मणिपुर हिंसा की आग में जलता है और महिलाओं के साथ बर्बरता होती है तो आप चुप क्यों हैं? • जब बिलकिस बानो केस के दोषियों को माला पहनाकर सम्मानित किया जाता है और जश्न मनाया जाता है, तो आप ख़ामोश क्यों रहते हैं? • आसमान छूती महँगाई और पेट्रोल की कीमतों पर आपके वे भद्दे मज़ाक कहाँ चले गए? • रुपए लगातार गिर रहा है और आपको कोई भी फ़िक्र क्यों नहीं है? • इस देश में गंदे पानी से होने वाली मौतों पर आप बोलते क्यों नहीं? • जानलेवा प्रदूषण से आपको परेशानी नहीं होती? • खुले गड्ढों में गिरकर युवाओं की मौत हो रही है पर आपको जरा सा भी गुस्सा कैसे नहीं आता? • असल में तो जब आपके अपने किसी साथी को बदनाम किया जाता है, तब भी आप कभी बोलने की हिम्मत क्यों नहीं करते? अगर आप ज़रूरी ज्वलंत मुद्दों पर बोल नहीं सकते - तो कम से कम उन लोगों का महिमामंडन तो मत कीजिए जो नफ़रत फैलाते हैं और उससे फ़ायदा उठाते हैं अन्याय के सामने खामोश रहना एक choice है, लेकिन नफ़रत को बढ़ावा देना choice कतई नहीं है

Supriya Shrinate

69,473 görüntüleme • 6 ay önce

आज जयपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत में अंतर्राष्ट्रीय स्थिति को लेकर अपने विचार साझा किए : देखिए, एक तो अंतर्राष्ट्रीय स्थिति बड़ी नाजुक है। एक तरफ तेल और गैस को लेकर जो स्थिति बनती जा रही है, तो राहुल गांधी ने पहले ही वॉर्न किया था कि ये स्थिति बनेगी। हमेशा सरकार लेट कर देती है। तैयारी समय पर करनी चाहिए, क्योंकि वॉर हो गया है, तो वॉर के कारण ही ये स्थिति बनी है। तो आपके पास जस्टिफाई करने का कारण है, खाली इतना ही कि आप जनता को विश्वास में लो कि भाई देखिए, वॉर हो गया, हमारी मजबूरी है, और यहाँ ये कमियाँ रह गईं या नहीं रही हैं, हम प्रयास कर रहे हैं कि जनता को कोई तकलीफ नहीं आए, कम से कम तकलीफ आए। अब जो प्रधानमंत्री ने हाउस में बोला, वो तैयारी उस ढंग से नहीं की। आलोचना के शिकार भी हुए। ये पूरा अंतर्राष्ट्रीय युद्ध की जो स्थिति बनी है, अब किस दिशा में जाएगा, कोई नहीं जानता। और दूसरा, हमारे ट्रंप जो हैं, मिस्टर ट्रंप, पता नहीं जिस प्रकार उनका व्यवहार है मोदी जी के प्रति,कभी कहते हैं मेरे वो दोस्त हैं, कभी कहते हैं कि वो मुझे खुश करने में लगे हुए हैं, कभी कहते हैं कि मैं उनका पॉलिटिकल करियर खत्म कर सकता हूँ। आज तक मैंने किसी भी राष्ट्रपति को दूसरे देश के प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति के बारे में ऐसे कमेंट करते नहीं सुना। वो वेनेजुएला के प्रेसिडेंट को किडनैप कर सकता है एक राष्ट्र दूसरे राष्ट्र के प्रेसिडेंट को किडनैप कर ले और दुख इस बात का रहा कि दुनिया के किसी मुल्क ने निंदा नहीं की, कंडेम नहीं किया, दुख प्रकट नहीं किया। ये दुनिया के लिए बहुत-बहुत बुरा संकेत है। जो हुआ है, सब जानते हैं। अब जो स्थिति बनी है, उसमें पाकिस्तान पंचायती कर रहा है। मतलब आप बताइए, पाकिस्तान की क्या हैसियत है? हमारे देखते हुए भी हमने देखा—65 के वॉर में क्या थी, 71 में क्या थी, कारगिल में क्या थी हमेशा मुँह की खानी पड़ी। वो आज जिस प्रकार से ऑपरेशन सिंदूर के अंदर भी, तुर्की उनका साथ दे रहा था, हमारे साथ कोई नहीं था। इस प्रकार के हालात में देश चल रहा है। समझना चाहिए, कहाँ पाकिस्तान और कहाँ हिंदुस्तान है। उसके बावजूद भी वो समझौते की बात कर रहा है, डायलॉग वो करवाएंगे। और दुर्भाग्य से हमारे विदेश मंत्री जो हैं, उनका ये कहना कि वो दलाली का काम कर रहा है, ये बहुत ही गलत है। मैं समझता हूँ कि कोई विदेश मंत्री किसी मुल्क के लिए ऐसी भाषा काम में नहीं ले सकता। दलाली क्या होती है, पता नहीं। मैं तो मानता हूँ कि हो सकता है उनके मुँह से स्लिप ऑफ टंग हुआ हो। अगर ऐसा हुआ है तो अलग बात है, उनको सॉरी फील करना चाहिए, नहीं तो मैं समझता हूँ कि देश के अंदर उनकी बहुत आलोचना होनी चाहिए। आप कैसे कह सकते हो कि दलाली कर रहा है? दलाली होता क्या है? अगर दुनिया के मुल्कों में शांति स्थापित होती है हिंसा तो हिंसा ही होती है तो मुल्क कहाँ जाएगा? तीसरे विश्व युद्ध के रूप में जाएगा? थर्ड वर्ल्ड वॉर के रूप में जाएगा? कहाँ जाएगा, कोई नहीं जानता। ऐसे खतरनाक हालात में, जब दुनिया में आग लगी हुई है, वहाँ शांति स्थापित करने के लिए हर वर्ग को, हर मुल्क को प्रयास करना चाहिए। और उसके अंदर आप कह रहे हो कि दलाली कर रहा है ये बात मुझे समझ में नहीं आई। ऐसे हालात में देश चल रहा है। और लोग सब चिंतित हैं कि हमारी स्थिति कहाँ थी और कहाँ पहुँच गई। कहाँ इंदिरा गांधी का जमाना था—90 हजार से अधिक सैनिकों को, जनरल, कर्नल, मेजर को यहाँ अरेस्ट करके इंडिया में ले आए थे। 90 हजार से अधिक लोगों को, लगभग एक लाख लोगों को। और आज देश की हमारी स्थिति क्या है, आपके सामने है। ये जो अंतर्राष्ट्रीय स्थिति हुई है।

Ashok Gehlot

13,708 görüntüleme • 5 ay önce