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म चै भेजिटेबल म:म मात्र खाने हो अब चै । हैट असतिहरू ।

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त बोल त्यति मात्रै जे म सुन्न चाहन्छु I त हेर त्यति मात्रै जो म देखाउन चाहन्छु I त सुन त्यति मात्रै जे म सुनाउन चाहन्छु I तेरो स्वतन्त्रताको घेरा मैले कोरेको सुन्य भन्दा बाहिर छैन I किनकि मलाइ चिनेको छस ? म हु सरकार हु म सरकार म हु तेरो सरकार I हजो यसरी कुर्लने नेपालकै गगन थापा हुन कि चेकोस्लाभियाका गगन थापा हुन ? हिजो यसरी कुर्लने नेपालकै गगन थापा हुन कि युगाण्डाका गगन थापा हुन ? इनी यहि पृथ्वीका गगन थापा हुन कि अन्य कुनै ग्रह वा उपग्रहका गगन थापा हुन ? एक जना युवालाइ टिकट काटेर साउदी हिडेको अबस्थामा समातेर हिरासतमा लिइएर जान नपाउने अबस्थामा पुर्याइएको छ I की आफ्नो सभापति बिरुद्ध नाराबाजी गरेकै कारण भाउजुको डरले बोल्न नसकेका हुन ? भाउजुको डरले बक्य बसेको हो ? यसै कारण इनी दुइजिब्रे र दोगलापंथी हुन I जनताको आखामा छारो हाल्न माहिर छन I अब जनताका आखा खुलिसके I यस्ता पश्चिमाका डलरे प्यादाहरुलाइ सदाका लागी उखालेर फ्याक्ने छन I Gagan Thapa

डाँडाघरे~रबि को परिवार

17,273 Aufrufe • vor 1 Jahr

ए मूर्ख हो यतातिर ध्यान देऊ: सिमाना होइन जग्गा मिचेको कुरा गरेका छन् प्रधानमन्त्रीबालेनले। र सिधै नेपाल भारत मात्र होइन सुगौली सन्धि ताकाको बेलायत सरकारलाई पनि ध्यानाकर्षण गराएका छन्। प्र.म. बालेनले सिमा विवादको विषयमा पहिलो जवाफमा भनेका थिए, लिपुलेक-लिम्पियाधुराको विषय भारत र नेपालको मात्र नभएर यो बेलायत पनि जोडिएको विषय हो । बालेनले बेलायतलाई पनि छलफलमा सहभागी गराउने बित्तिकै तत्कालिन इस्ट इन्डिया कम्पनि र भारत बीच भएको सन्धि अनि इस्ट इन्डिया र नेपाल बीच भएको सन्धि समेत आकर्षित हुन्थ्यो । बेलायतलाई जोड्नुको आशय सुगौली सन्धि र सो अघिको ग्रेटर नेपालको सीमा समेत आकर्शित हुन्थियो। बालेन तराईबासी भएकाले उनले यता र उताकाले भोग चलन गरिरहेको देखे अनुरूप सामान्य नागरिकले बोल्ने भाषामा बोले । हो दशगजा तथा थप जमिनमा नेपाल र भारत दुबैबाट क्रस होल्डिङ भएको छ ( तर त्यसलाई मिचिएको भनिदैन ) अर्थात् सिमा पार गएर पनि नेपाली किसानले जग्गा भोगचलन गरेको अवस्था छ । तर यसलाई सिमासँग जोडेर मिचिएको भन्न सकिदैन। तर यदी नेपालले मिचेकै भए कस्को पालामा कस्ले यति बहादुर हिम्मतिला काम गरे छन् जनतालाई सु-सूचित हुने अधिकार छ । बालेन सरकारले जानकारी गराउने छन् । भारतको सीमा मिच्ने बीर नेपालीलाई सम्मान गर्नै पर्छ है । दशगजा (No Man's Land) नेपाल र भारतबीचको अन्तर्राष्ट्रिय सीमा क्षेत्रमा रहेको खाली भूभाग हो, जुन सीमा स्तम्भहरूबाट दुवै देशको सहमतिमा १० गज (करिब ९ मिटर) छोडिएको हुन्छ। दस गजा उर्बर भुमी भएको हुनाले दुबै देशका जनताहरुले खेतीपाती गरिनै रहेका छन् । बालेनको गल्ति यति नै भयो कि प्र.म.को कुर्सीमा बसेर उनले सामान्य नागरिकले झै शब्द चयनमा ध्यान दिएनन् । देशको लगाम हातमा लिएपछी गम्भीर हुनु पर्छ । ……सायद अब देखी गम्भीर होलान् की ! अब त कुरा बुझ मूर्ख हो।

शशांक घिमिरे 🇳🇵🇦🇺

17,327 Aufrufe • vor 2 Monaten

कृषि तथा वन विज्ञान विश्वविद्यालयका विद्यार्थी साथीहरू मलाई निरन्तर फोन/इमेल गरिरहनुभएको छ। अझै परीक्षाको समय निश्चित भएको छैन। आज भोली हुने भनिएका प्रवेश परीक्षाहरू फेरि स्थगित भएका छन्। विद्यार्थीहरू अब केही हुँदैन भन्ने निराशामा छन्। 'सदनमा बोले पनि केही हुँदैन? अब विकल्प के हो?' भनेर पीडित विद्यार्थीहरू सोधिरहेका छन्। परीक्षा ढिलो हुनुमा सत्तारुढ काँग्रेस-एमालेकै विद्यार्थी संघठनहरूको झगडा मुख्य कारण बनेको छ। कसैले पनि यो समस्याको समाधान गर्न चाहँदैन किनभने यसले उनीहरूको ‘भविष्यको राजनीतिक सम्भावना’ अर्थात् ‘गुण्डागर्दी’लाई निस्तेज गर्नेछ। भोली प्रोफेसर पिट्न र विद्यार्थीलाई चिट चोराउन होस् या असुली गर्न तिनै विद्यार्थी सङ्गठन चाहिन्छन्। कोलम्बिया विश्वविद्यालयमा प्रवचन दिँदै हाम्रा प्रधानमन्त्री भन्नुहुन्छ, 'विश्वविद्यालय ज्ञानको मन्दिर हो।' कसैले सोधौँ न हो - किन हाम्रा प्रधानमन्त्रीज्यू अमेरिकामा हुँदा मात्र विश्वविद्यालयलाई ज्ञानको मन्दिरको रूपमा देख्नुहुन्छ? किन नेपालीका छोराछोरी पढ्ने नेपालका विश्वविद्यालयलाई राजनीतिक खेल मैदान बनाउनुहुन्छ? किन विश्वविद्यालयमा राजनीतिक भागबन्डामा आफ्ना आसेपासेहरूलाई नियुक्त गर्नुहुन्छ? किन कलेजलाई ब्यारेक जस्तो बनाएर विद्यार्थीलाई कार्यकर्ता बनाउनुहुन्छ? किन हो यो दोहोरो चरित्र?? प्रधानमन्त्रीज्यूको पाखण्ड र दोहोरो चरित्र छर्लङ्ग छ। प्रधानमन्त्रीज्यू ! तपाईँले विद्यार्थीको पढ्न पाउने हक बन्धक राखेर कृषि औद्योगिकीकरण गर्न सक्नुहुन्न है। न त तपाईँले विद्यार्थी-विद्यार्थीबिच घृणा फैलाएर विश्वविद्यालयलाई ज्ञानको मन्दिर बनाउन सक्नुहुन्छ। खोजेको के हो? के तपाईँ आफ्ना विद्यार्थीहरूका समस्याप्रति चासो राखेर समाधान गर्न सक्नुहुन्न? की समाधान चाहनुहुन्न? शिक्षामन्त्री र गृहमन्त्रीलाई पनि मेरो प्रश्न: विद्यार्थी-विद्यार्थी लडाइराख्नु, पढ्ने-पढाउने माहौल बनाउनुपर्दैन भन्ने प्रधानमन्त्रीको आदेश नै छ कि, तपाईँहरूलाई पनि बालै मतलब नभाको हो?

Sumana

46,665 Aufrufe • vor 1 Jahr

यह कांग्रेस के दो मुस्लिम सांसद हैं मोदी जी की बोटी बोटी काटने की बात करने वाले इमरान मसूद हैं और दूसरे मोहम्मद जावेद है यह कह रहे हैं कि क्या हो गया अगर किसी ने गंगा नदी में इफ्तारी किया और मीट मछली के बचे हुए हड्डी वगैरा गंगा नदी में फेंक दी है ? इस पर क्या आप लोग केस दर्ज करोगे अब इनको पड़कर कोई पूछो की बकरे का मीट तो बकरे का मीट ही होता है फिर तुम लोग हमेशा हलाल मीट खाने की ही बात क्यों करते हो ? अबे गंगा नदी हमारे लिए पवित्र नदी है काशी जहां हिंदुओं का पवित्र काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग है जहां पौराणिक काल के हजारों मंदिर हैं वहां गंगा नदी में अगर कोई मीट मांस मछली का इफ्तारी करेगा और उसमें हड्डी फेंकेगा तो उसका विरोध होगा उसे जेल भेजा जाएगा और हम तो डिमांड करते हैं कि बुलडोजर एक्शन भी होना चाहिए

🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳

21,064 Aufrufe • vor 4 Monaten

कांग्रेस ने भारत में 60 साल तक राज की और अंग्रेज जितना रेल नेटवर्क बनाकर गए थे कांग्रेस ने उसमें 10 फ़ीसदी से ज्यादा बढ़ोतरी नहीं किया आपको जानकर आश्चर्य होगा कि दो बड़े शहर उदयपुर और अहमदाबाद आपस में बड़ी रेलवे लाइन से कनेक्ट ही नहीं थे और छोटी रेलवे लाइन भी 16 घंटे घूम कर आती थी जिसमें दो जगह ट्रेन बदलनी पड़ती थी कांग्रेस ने इस पूरे एरिया को इसलिए छोड़ दिया क्योंकि यह पूरा एरिया आदिवासी एरिया है जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने तब जितना कांग्रेस सरकार ने 60 साल में रेलवे में इजाफा नहीं किया था उसकान 10 गुना से ज्यादा नरेंद्र मोदी जी ने अपने 10 साल के कार्यकाल में कर दिया और हां आज भारत का 99.99% रेलवे ट्रैक इलेक्ट्रिक हो चुका है और बड़ी लाइन में कन्वर्ट हो चुका है अब उदयपुर अहमदाबाद सीधी रेलवे लाइन से जुड़ गए हैं बड़ी लाइन इलेक्ट्रिक लाइन से जुड़े हैं कल उदयपुर अहमदाबाद के बीच में बंदे भारत ट्रेन भी चली जो मात्र 3:30 घंटे में उदयपुर से अहमदाबाद पहुंचा देगी अब इस रूट से आगे जयपुर से लेकर दूर तक भी ट्रेन चलेंगे ताकि यह जो पूरा आदिवासी एरिया है यहां के आदिवासियों को इसका फायदा मिल सके

🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳

21,963 Aufrufe • vor 5 Monaten

बीजेपी का 'जबरिया दुल्हा' चुनावी फेरे ले पाएगा या नहीं ? बिहार में 'जबरिया विवाह / जबरिया दुल्हा ' बनाने की कहानियां तो बहुत सुनी थीं, जहाँ लड़के को अगवा करके जबरन सिंदूर दान करवा दिया जाता था। लेकिन राजनीतिक.संदर्भ में पटना की बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव की सीट पर पहली बार 'जबरिया उम्मीदवारी' का लाइव नजारा बीजेपी के सौजन्य से ही देखने को मिला है! पहले बीजेपी ने बड़े गाजे-बाजे के साथ किसी अभिषेक कुमार सिन्हा का टिकट फाइनल किया, लड्डू बांटे गए, बीजेपी के नेताओं की बारात सज गयी , लगा कि दूल्हा सात फेरे लेने को तैयार है, लेकिन अगले ही दिन खबर आई कि 'पारिवारिक कारणों' से दूल्हे ने चुनावी फेरे लेने से इनकार कर दिया l अब जब बारात दरवाजे पर खड़ी हो और दूल्हा गायब हो जाए, तो इज्जत बचाने के लिए आनन-फानन में क्या किया जाता है ? वही, जो पुरानी फिल्मों में होता था—"दुल्हे के छोटे भाई या बगल के किसी सीधे-साधे लड़के को पकड़ो, सेहरा पहनाओ और मंडप में बिठा दो!" बीजेपी ने भी यही किया। मात्र कुछ ही घंटों के भीतर 'जबरिया नीति' अपनाते हुए किसी नीरज कुमार सिन्हा को बुलाया गया, उसके सिर पर पार्टी का सिंबल (सेहरा) बांधा गया और कहा गया "बाबू अब इज्जत दांव पर लगी है , बस किसी तरह से कमलगट्टों की फ़ौज व् निक्कर गैंग की लाज बचाओ।" अब देखना दिलचस्प है कि ' जबरिया दुल्हा ' चुनावी मंडप में टिक कर चुनावी फेरे ले पाता है या फेरों के बीच ही बैठ जाता है !!

Rohini Acharya

15,905 Aufrufe • vor 20 Tagen

जिस सरकार का मुखिया ईमानदार हो उस सरकार के जिम्मेदार डंके की चोट पर बात करते है। योगी सरकार के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के सामने उनके ही विधायक बृजभूषण सिंह हुड़दंग करने आये थे। शिकायत किया की फला फला गाव मे पानी नही आ रहा है,सड़के खोद दी गई है। मंत्री जी ने डंके की चोट पर कहा की अगर ऐसा हुआ तो तत्काल कार्रवाई होगी। बस मुझे उन जगहो का दौरा करा दिजिए। मै तुरंत सस्पेंड करूँगा। विधायक जी पता नही क्यो शाँत हो गये?कहने लगे कहा-कहा जायेंगे? शिकायत बस ले लिजिए। मंत्री जी ने कहा शिकायत रखिए औचक निरीक्षण करते है। सभी कार्यक्रम स्थगित कर दूँगा। आप लेकर चलिए और दिखाईये कहा सड़के खोदी गई है और किस गाँव मे पानी नही आ रहा है? जो मुद्दा विधायक जी का था उनके समर्थको ने मंत्री जी के हाथ मे डाल दिया। अब विधायक जी सोच रहे होंगे किन चूतियो के कहने पर मैने ये सब कर दिया? एक बात और सुनिए विधायक जी बाहुबली है और राजपूत भी है। देख लिजिए राजपूतो की कितनी चल रही है? राजपूत और विधायक शब्द जोड़ने से मेरा तात्पर्य मात्र इतना था की योगी जी है तो सबके है और नही है तो किसी के नही है। जो सर्वविदित है। अब या तो मसला कमिशन का था और मंत्री जी समझ गये या तो अखिलेश यादव से टिकट विधायक जी को लेना था यह बात भी मंत्री जी समझ गये। प्रदेश अध्यक्ष रहे है तो राजनिति के रंग तो समझते ही होंगे। खैर विधायक जी के मन मे जो भी रहा हो दाल नही गली और मंत्री जी का रंग देखकर ढिला पड़ गए। स्वतंत्र देव सिंह को उनके ईमानदारी के लिए तारीफ मिलनी चाहिए। योगी जी के सबसे करीबी लोगो मे स्वतंत्र देव सिंह शामिल है। उनकी इमानदारी प्रशंसनीय है।

Arun Yadav Kosli

48,648 Aufrufe • vor 6 Monaten

मुझे तो हंसी आती है और ताज्जुब भी होता है जब पूर्वांचल के ग्वाले अहीरवाल से बराबरी करने की बात करते है अंग्रेज पूर्वांचल और अन्य जगह के ग्वालों की भर्ती फौज में नहीं करते थे इनकी कमजोर नस्ल और अव्यवस्थित जंगली व्यवहार के कारण अयोग्य माना जाता था , इसके विपरीत वृहद अहीरवाल जो वर्तमान दक्षिणी हरियाणा एवं राजस्थान के कुछ भागों के अलावा उत्तर प्रदेश के कानपुर तक फैला है इस क्षेत्र के यदुवंशी और नंदवंशी अहीरों को भारत के सबसे लड़ाकू और बेहतरीन फौजी माना जाता था, यूंही अहीरवाल क्षेत्र को भारत का इजरायल नहीं माना जाता, अहीर कौम की मार्शल इतिहास की बात की जाए तो हमारी कलम की स्याही सुख जाए, 5 हजार की अहीरों के साथ गुजरात के वीर देवायात अहीर ने जूनागढ़ किले पे चढ़ाई कर दि थी । भरौल रियासत के अहीर राजा पांच हजार से अधिक सेना के साथ मैनपुरी के राजा तेज सिंह चौहान को परास्त की थे । भिरावती राज के अहीर राजा छिद्दू सिंह दस हजार की सेना और तोप के साथ रोहिला नवाब से जंग छेड़ दिया था करनाल के युद्ध में 5 हजार अहीरों ने राव बालकृष्ण अहीर के नेतृत्व में शहादत दिया, नसीबपुर नारनौल के युद्ध में राजा राव तुलाराम जी के नेतृत्व में अहीरवाल के 5 हजार अहीर अंग्रेजों के खिलाफ लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए, रेजांगला की शौर्यगाथा किसी से छिपी नहीं जिसे ग्वाले अपने क्षेत्र में यादव के नाम पे अपनी शौर्यगाथा बता Feeling लेते है और कारगिल युद्ध के परमवीर चक्र विजेता योगेंद्र सिंह जी भी पश्चिम यूपी चौबीसा के अहीरवाल के ही अहीर है, अब बात करते हैं ग्वाल बिरादरी पे इनका कोई इतिहास नहीं यादव कौम के नाम पर फौज में भर्ती हो जाते अब पर फौज में खास प्रदर्शन नहीं देते , पूर्वांचल में जितने अंग्रज़ों के विरुद्ध लड़ने वाले वीर सपूत थे शहीद भगवान अहीर से लेकर अन्य सभी ढढोर अहीर समाज से आते है ग्वालों ने कभी राष्ट्र के लिए हथियार नहीं उठाया, सन 1781 में काशी के जमींदार ठाकुर चैत सिंह ने जब बगावत किया तो उसे सेना का अभाव था उसे ग्वाले दिखे तो ग्वालों से मदद मांगी ग्वालों ने बड़ी रकम मांगी इसके लिए , चैत सिंह ने इन्हें रकम दे दिया जब युद्ध की घड़ी आई तो डरपोक ग्वाले अपनी भैंसिया पे गंडासे, लोहाबंद इत्यादि बांध अंग्रेजों फौज के तरफ दौरा के भाग गए ग्वालों से बहादुर तो उन भैंसे थी कम से कम अंग्रेजों फौज को घायल करते हुए खदेड़ दिया अंततः ग्वालों का एक मात्र युद्ध का श्रेय भी उनकी भैंसिया को जाता है। अब आप ही सोचिए अहीर और ग्वाल में जमीन आसमान का अंतर है।

Ahirs Of India

55,102 Aufrufe • vor 8 Monaten