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मैं हर भारतीय से कहता हूँ संविधान पढ़ो,अपने अधिकारों को जानो।🇮🇳
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10 Kommentare

Bahut khoob @drmerajhusain Bhai

are bhai ye nari ko to khule mein saans lene do... ye to madrassa mein nafrat band karo

ओर ये भी जान लो की 1947 का बँटवारा धर्म के आधार पर हुआ था। ओर कोई भी मियाँ भारत का अधिकारी नही है।

संविधान में अम्बेडकर जी को लिखना चाहिए था 40 परसेंट से ज्यादा मुस्लिम आबादी वाली लोकसभा और विधानसभा मुसलमानो की लिए आरक्षित!! संविधान में ये होना चाहिए था जो भी शख्स भरतीय मुसलमानो को जिहादी पाकिस्तानी बोले और देशभक्ति का सबूत मांगे उसके ऊपर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज होना चाहिए

बाबा साहब के इस्लाम के ऊपर टिप्पणी भी बताया करो । तुम बस दलितों के बीच नंबर बना रहे हो।

संविधान पढ़ो अच्छी बात है!🙏🚩 किन्तु संविधान पहिले #मौलवी को पढ़ाना जरुरी है,क्यों की मदरसा मे पढ़ने वाले मदसा के छात्र #महिलाओ_का_सन्मान इस तरह से करेंगे तो कैसे चलेगा? 🤦♂️🤷♂️

सर सैयद के विचार पसमांदा के बारे में क्या थे इस पर बात करनी थी। पसमांदा का तो आज भी बुरा हाल है। उदाहरण देने में भी धूर्तता। आंबेडकर जी के मुस्लिम के बारे में क्या विचार थे पता है आप को।

हा. हिंदू संविधान पढे और संविधान के रास्ते पर चले. तूम Sh@riya पढना और पत्थरबाजी करना, दंगे करना और #STSJ के नारे लगाना. तूम संविधान मत पढना.

अधिकारों के साथ कर्तव्य भी आते हैं, हक और फर्ज दोनों को जानना जरूरी है

और बाबा साहब ने तो पहले ही बता दिया था कि सारे मुसलमानों को पाकिस्तान भेज देना चाहिये,वो कभी देशभक्त नहीं हो सकते। मुसलमान भारत में रहेंगे तो कभी शांति नहीं होगी। मुसलमान भारत के खिलाफ जिहाद छेड़ सकते हैं। : डॉक्टर भीमराव अंबेडकर
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तवायफ, सभी मजबूरी से मजबूत स्त्री को समर्पित🙏🏻 हाँ, हाँ मैं तवायफ़ हूँ, जिस्म का धंधा हर रात करती हूँ उसी गली में रहती हूँ, जिस गली में तुम रात बिताते हो परिवार के सामने मुझे नीच बतलाते हो, रात होते ही मुझे अपना बनाते हो नाम मेरा रंडी रखा है, और खुद मेरे पास हवस मिटाते हो हाँ मैं वही मयख़ाना हूँ, जिसके जिस्म से तुम पैमाना भरते हो सांझ होते ही सजती सवंरती हूँ, हर रात तेरे लिए बिस्तर नयी सजाती हूँ हाँ तेरे पाप को अपने कोख़ में पनाह देती हूँ, बिन बाप के बच्चों को अपना नाम देती हूँ बस तुम लोग के वजह से नाम नहीं कमा पाती हूँ, पैसे होने के बाद भी रंडी नाम से जानी जाती हूँ भूख खुद की इज़्ज़त बेचने को मजबूर करती है, बस यही सोचकर आँसू पी लेती हूँ तब भी ज़िंदा हूँ, ना इस काम से शर्मिन्दा हूँ आँशु क्या ज़हर क्या रोज़ सबको अपना बना लेती हूँ हर एक की बाहों में जाकर इश्क़ बाँटना आसान नहीं है, मेरी बेरंग जिंदगी से तेरी रात रंगीन करती हूँ काजल में अश्क़ छुपाती, पल पल नाम छुपाती, हर रोज़ बिकती हूँ, हर पल तेरे मुँह के "मेरी रंडी" नाम को भी अपनाती हूँ हांँ हाँ मैं तवायफ़ हूँ, कुछ मज़बूरी के कारण, काजल के पीछे अश्क़ छुपाती हूँ हाँ हाँ मैं तवायफ़ हूँ, अपनी भूख के लिए तेरी प्यास बुझाती हूँ हाँ हाँ मैं तवायफ़ हूँ, जिस्म का धंधा हर रात करती हूँ
तृप्त ...🖤
49,991 Aufrufe • vor 2 Jahren
