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मौत की उमर क्या है? दो पल भी नहीं, जिंदगी सिलसिला, आज कल की नहीं।

197,323 просмотров • 3 лет назад •via X (Twitter)

Комментарии: 8

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Dhirendra Kumar nayak3 лет назад

ऐतिहासिक,अविस्मरणीय,अटल जी की, ए पंक्तियां ,अभूला स्मृति ,की रूप में हमारे मानस पटल में,हमेशा याद रहेंगे । न कोई था, ना कोई होगा ,हमे अब शोस रहेगा इस बात की

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LALIT KASHYAP3 лет назад

मैं जी भर जिया मैं मन ने मरू लौटकर आऊँगा कूच से क्यों डरु ||| The best one from Atal ji

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Nikhil Jha3 лет назад

प्यार इतना परायों से मुझको मिला ना अपनों से बांकी है कोई गिला

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Abhishak 🇮🇳3 лет назад

Great

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Arvind Pathrol3 лет назад

सदैव अटल

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सोनियो3 лет назад

वाह बहुत बढिया 👌

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Asit Kumar3 лет назад

Nice 👍

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ROHIT PRIYADARSHI3 лет назад

Marvelous

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सौरव दास Saurav Das यह सही है कि जंतर मंतर पर उमर खालिद की रिहाई के लिए नारे नहीं लगे। लेकिन लगने क्यों नहीं चाहिए? क्यों नहीं लगाये आप लोगों ने ? बिल्कुल लगने चाहिए थे उमर खालिद की रिहाई के नारे। क्या आपको नहीं लगता कि उमर खालिद को जमानत पर रिहा न करना देश की ज्यूडिशियरी पर बड़ा दाग है? क्या आपको नहीं लगता कि उमर खालिद को अब तक जमानत न मिलने के पीछे इस देश के युवा और विपक्ष भी जिम्मेदार हैं जिन्होंने उफ़ तक नहीं की। किस बात की सफाई दे रहे हैं आप और क्योंकर? सही को सही और गलत को गलत कहने की आपसे अपेक्षा रहती है। उमर खालिद का रिहा न होना और राम रहीम एवं आसाराम जैसे समाज के दुश्मनों का खुलेआम घूमना लज्जा की बात है। नुकसान और जगहंसाई की सोचकर सच कहने से नहीं चूकना चाहिए।

Awesh Tiwari

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