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मन खुश हो जाता है जब भारत के वो लोग जो पढ़े लिखे नहीं है किताब को दिखाने पर नहीं बता पाते कि ये भारत का संविधान है लेकिन तस्वीर दिखाने पर तत्काल बोलते हैं कि ये अंबेडकर महाराज हैं और संविधान बनाया। बाबा साहेब की जन्म जयंती पर...

103,825 Aufrufe • vor 1 Jahr •via X (Twitter)

11 Kommentare

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Manish Singhvor 1 Jahr

आपको सैल्यूट है सर बाबा साहेब के विचारों और उनके विरासत को आगे बढ़ाने का जो कार्य कर रहे वो बहुत ही सराहनीय है #जयभीम

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Travala.com 🏨 ✈️vor 4 Jahren

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Tarun Royvor 1 Jahr

Kuch kaam nahi hai toh ...side pe jake freefire khela kare....

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ANIL KUMARvor 1 Jahr

भारतीय संविधान के निर्माता,भारतरत्न बाबा साहेब आंबेडकर जी की 134वीं जयंती पर हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई...... #Dr.B.R.Ambedkar_Jayanti_2025

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Dr.Amit pandit (पटेल समर्थक ओर आरक्षण विरोधी)vor 1 Jahr

@grok संविधान का ड्राफ़्ट किसने तैयार किया और कब संविधान सभा को दिया

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Dipak kumar Patel🇮🇳vor 1 Jahr

जय भीम जय संविधान

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PK Yadavvor 1 Jahr

बाबा साहेब सिर्फ़ जाति उन्मूलन के नहीं, समता, समाज में सच्ची मैत्री और संविधान की आत्मा के पक्षधर थे। स्मरण तभी सच्चा है जब संघर्ष उनके सपनों के भारत के लिए हो। जय भीम 🇮🇳 #जयभीम #AmbedkarJayanti

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Baijnath Senvor 1 Jahr

क्या खूबसूरती से भाव व्यक्त किया है! ये दिखाता है कि बाबा साहेब अंबेडकर का सम्मान लोगों के दिलों में कितना गहरा बैठा है—शिक्षा से परे, पहचान और कृतज्ञता की भावना से जुड़ा हुआ। 14 अप्रैल वाकई में एक राष्ट्रीय चेतना का दिन है।

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Sanjay Kapurvor 1 Jahr

सही कहा आपने । लेकिन मन तब बहुत दुखी होता है जब अधिकांश पुलिस वाले ही संविधान की धज्जियाँ उड़ा देते हैं ! संविधान का पालन और उसकी इज़्ज़त क़ानून के so called रखवालों का करना अत्यंत आवश्यक है!

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Sachchidanand singhvor 1 Jahr

यह सब बताने की जगह अगर यह बताया गया होता कि इनकी बजह से 0 वाला भी कुछ बन सकता है जल्दी समझ जाते ।

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Gaurav Kumar Jhavor 1 Jahr

😐🫣

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किसी एक की सत्ता का अहंकार-अभिमान सच्चे साधु-संतों के मान-सम्मान से बड़ा नहीं हो सकता है। जो अपने लिए भूमि पर स्थायी क़ब्ज़ा करके बैठे हैं वो धर्म के काम के लिए किसी और को अस्थायी भूमि तक का आबंटन नहीं करना चाहते हैं। ये सदियों से चली आ रही परंपरा का घोर अपमान है। व्यक्तिगत दंभ एक दिन हारता ही है। कुंभ और माघमेले की ये स्वस्थ परंपरा रही है कि इस पुण्य कार्य के आयोजन के लिए अधिकारीगण पूज्य साधु-संतों का आशीर्वाद लेते हैं लेकिन कलयुग के वर्तमान भाजपा राज में हालात ये हो गये हैं कि साधु-संतों को अधिकारियों के आगे ज़मीन पर लेटकर गिड़गिड़ाना पड़ रहा है वो भी किसी व्यक्तिगत नहीं बल्कि धर्मार्थ कार्य हेतु। ऐसे में सवाल ये उठता है कि अधिकारी किसके कहने पर संत-समाज से ऐसा दुर्व्यवहार करने का दुस्साहस कर रहे हैं। सब जानते हैं कि कोई भी समझदार अधिकारी ऐसा कार्य नहीं करता है, जिससे समाज आक्रोशित हो। और ये भी सब जानते हैं कि अधिकारी किससे संचालित होते हैं और किसके डर और दबाव से ऐसा कुकृत्य करने पर मजबूर हैं। अपने को सबसे ऊपर दिखाने के लिए औरों को नीचा दिखाने का काम जो कर रहा है, वो याद रखें कि अधर्म कभी नहीं जीतता है और एकाधिकार की दुर्भावना अंततः पराजित होती ही है।

Akhilesh Yadav

61,285 Aufrufe • vor 9 Monaten

जहाँ एक ओर देश संविधान लागू होने की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर गौरवान्वित हो रहा है ,वहीं दूसरी ओर अमृतसर में सचखंड श्री हरमंदिर साहिब के पास हेरिटेज स्ट्रीट पर परम पूज्य बाबा साहेब अंबेडकर की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त करने और संविधान की प्रति जलाने की घटना ने जातिवादी मानसिकता के नंगे सच को उजागर कर दिया है। यह कृत्य केवल एक प्रतीकात्मक हमला नहीं है, बल्कि एक सुनियोजित प्रयास है। जो समाज के दबे-कुचले वर्गों को उनके अधिकारों और सम्मान से वंचित रखने की घृणित मानसिकता को प्रदर्शित करता है। साथ ही यह घटना इस बात का प्रमाण है कि आम आदमी पार्टी की सरकार इतनी महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक जगह पर भी नागरिकों और प्रतीकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में असफल रही है। जातिवादी ताकतें, जो सदियों से अपने विशेषाधिकारों को बनाएं रखने के लिए षडयंत्र करती रही हैं, इस तरह के कायरतापूर्ण प्रयासों से यह साबित करती हैं कि वे आज भी बाबा साहेब अंबेडकर द्वारा स्थापित समानता और न्याय की व्यवस्था से भयभीत हैं। संविधान, जिसने भारत को जाति, धर्म और वर्ग से ऊपर उठकर एकता और बंधुत्व का संदेश दिया, उस पर इस प्रकार का हमला दर्शाता है कि कुछ ताकतें अभी भी जातिगत भेदभाव को बनाए रखना चाहती हैं। बाबा साहेब अंबेडकर की प्रतिमा को तोड़ने और संविधान को जलाने वालों ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वे संविधान के मूल्यों को स्वीकारने के लिए तैयार नहीं हैं। लेकिन यह भी स्पष्ट है कि यह मानसिकता अब भारत में टिकने वाली नहीं है। ऐसे समय में जब देश संविधान की 75वीं वर्षगांठ मना रहा है, यह घटना हमें याद दिलाती है कि जातिवाद केवल इतिहास का हिस्सा नहीं है, बल्कि एक जिंदा चुनौती है। इस चुनौती का सामना करने के लिए समाज को संगठित होकर जातिवादी मानसिकता के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़नी होगी। DGP Punjab Police को चाहिए कि दोषियों पर त्वरित और कठोर कार्रवाई करे, ताकि समाज को यह संदेश मिले कि संविधान की गरिमा और बाबा साहेब के आदर्शों के खिलाफ जाने वाले किसी भी व्यक्ति को कानून के शिकंजे से बचने का अवसर नहीं मिलेगा। अब समय आ गया है जब हम बाबा साहेब के सपनों के भारत को साकार करने के लिए जातिवाद और नफरत की जड़ों को उखाड़ फेंके। संविधान की रक्षा हर नागरिक का कर्तव्य है, और इसकी गरिमा को बनाए रखना हमारा सामूहिक दायित्व। जय भीम, जय भारत, जय संविधान।

Chandra Shekhar Aazad

197,036 Aufrufe • vor 1 Jahr

रिपोर्टर – जब भारत में fundamental rights छीने जा रहे हैं, तो नॉर्वे भारत पर भरोसा क्यों करे? MEA – हमारे पास गांधी हैं, प्राचीन सभ्यता है, और एक संविधान है जो मौलिक अधिकारों की गारंटी देता है। अगर अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो लोग कोर्ट जा सकते हैं। MEA ने यह क्यों नहीं बताया कि जिस संविधान की वह बात कर रहे हैं, उसके निर्माता के बारे में भारत सरकार के गृह मंत्री कहते हैं ~ “अंबेडकर, अंबेडकर मत करो।” MEA ने यह क्यों नहीं बताया कि वह गांधी की बात कर रहे हैं, लेकिन भारत सरकार गोडसे को पालने वालों के हाथों की कठपुतली मात्र बन गई है! MEA ने यह क्यों नहीं कहा कि संविधान मौलिक अधिकारों की गारंटी देता है, और उसी संविधान को बदलने की बात उनकी सरकार में बैठे कई नेता कर चुके हैं!

Priyanka Bharti

33,700 Aufrufe • vor 4 Monaten

मैं गंगा नदी को माँ नहीं मानती ।हम दलित कभी अपवित्र माने जाते थे? हाँ, लेकिन गंगा जल ने हमें शुद्ध नहीं किया! बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने हमें अधिकार दिए, सम्मान दिया और इंसान बनाया! गंगा का पानी? बस पानी है! गंगा सिर्फ़ एक नदी है, देवी नहीं! हम दलित तभी सच्चे शुद्ध होंगे, जब हर दलित संविधान पढ़ेगा, भीम राव अंबेडकर के रास्ते पर चलेगा न कि गंगा में डुबकी लगाएगा! जो लोग आज भी गंगा-पूजा के नाम पर दलितों को अपमानित करते हैं, उनका समय खत्म हो चुका है! आंबेडकर की विचारधारा और शिक्षा ही हमारी गंगा है! संविधान की किताब ही हमारी धार्मिक किताब हैं! जय भीम! जय संविधान! दलित एकता ज़िंदाबाद!

Neha Bharti omg

267,841 Aufrufe • vor 2 Monaten

संघ और कांग्रेस में फर्क है। संघ- जन्म के आधार पर ऊंच-नीच, असमानता, विषमता में विश्वास रखता है। कांग्रेस पार्टी- हमेशा से समता में विश्वास करती है। जब देश में संविधान बनाया जा रहा था। तब महात्मा गांधी जी ने नेहरू जी से कहा कि संविधान बनाने की जिम्मेदारी बाबा साहेब अंबेडकर जी को देनी चाहिए, क्योंकि वह एक दर्द से गुजरे हैं और मानवता के प्रति समर्पित हैं। इसके बाद- बाबा साहेब ने देश को दुनिया का बेहतरीन संविधान दिया, लेकिन संविधान बनने के 3-4 दिन के बाद RSS ने मुखपत्र 'ऑर्गनाइजर' में एक लेख लिखकर संविधान की धज्जियां उड़ाने की कोशिश की। इस लेख में कहा गया कि यह संविधान मनुस्मृति पर आधारित नहीं है, इसलिए हम इसे स्वीकार नहीं करते हैं। इतना ही नहीं, RSS द्वारा बाबा साहेब के पुतले भी जलाए गए। RSS इस संविधान पर विश्वास नहीं करता है और इसीलिए इनके नेता लगातार संविधान बदलने की बात करते रहते हैं। : AICC-OBC विभाग के चेयरमैन Dr Anil 'JaiHind' 🇮🇳 जी

Congress

19,418 Aufrufe • vor 1 Jahr

कुछ दिन पहले अडानी पर अमेरिका में केस होने का मामला आया, जिस पर पूरे समय BJP ने सदन में चर्चा नहीं होनी दी। फिर अमित शाह जी का अंबेडकर जी पर बयान आया। हम शुरू से कहते आए हैं कि BJP-RSS की सोच संविधान विरोधी और अंबेडकर जी के खिलाफ है। BJP और RSS के लोग बाबा साहेब अंबेडकर जी के योगदान को मिटाना चाहते हैं। अंबेडकर जी के प्रति उनकी जो सोच है, उसे उन्होंने सबके सामने दिखा दिया है। हमने अमित शाह से इस्तीफ़ा मांगा, लेकिन वो नहीं हुआ और आज फिर से इन्होंने मुद्दे को भटकाने का काम किया है। हम अंबेडकर जी की प्रतिमा से संसद की ओर शांति से जा रहे थे। संसद की सीढ़ियों पर BJP के सांसद खड़े थे, जो हमें अंदर जाने नहीं देते हैं। इन्होंने अंबेडकर जी का अपमान किया है, उस पर अमित शाह माफी मांगें और इस्तीफ़ा दें। BJP जिस मुख्य मुद्दे को मिटाना चाहती है-वो अडानी का केस है, जिस पर ये चर्चा नहीं चाहते हैं। अडानी को नरेंद्र मोदी हिंदुस्तान बेच रहे हैं। : नेता विपक्ष श्री Rahul Gandhi

Congress

49,317 Aufrufe • vor 1 Jahr

एक मुख्यमंत्री, जिसने संविधान की शपथ ली है कि वह संविधान का पालन करेंगी, वही भारत के गृहमंत्री को धमकी देती हैं कि मैं न चाहूं तो भारत के गृहमंत्री पश्चिम बंगाल में घुस नहीं सकते। सोचिए, संविधान की मूल भावना, अनुच्छेद 19 कहता है कि हर नागरिक स्वतंत्र है, पूरे भारत में कहीं भी जा सकता है। भारत की एक-एक इंच भूमि पर हक भारतीयों का है। तो ऐसा कैसे हो सकता है कि जिस मुख्यमंत्री ने संविधान की शपथ ली है, वही भारत के गृहमंत्री को धमकी देती हैं। ममता बनर्जी को लगता है कि रोहिंग्या उनका वोट बैंक हैं, उनके साथ ममता बनर्जी रिश्ता बनाए रखना चाहती हैं, और गृहमंत्री को धमकी देती हैं। - श्री Gaurav Bhatia गौरव भाटिया 🇮🇳 पूरा देखें:

BJP

15,047 Aufrufe • vor 8 Monaten