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यतो धर्मस्ततो जयः।

131,896 views • 1 year ago •via X (Twitter)

11 Comments

Aditya Agarwal's profile picture
Aditya Agarwal1 year ago

@vipul2777 Kalpana se badi saza 🔥🔥🔥

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ℙ𝔸𝕋ℍ𝔸𝔸ℕ 🇮🇳1 year ago

भाषण बाजी शुरू हो गई मौत पर राजनीति करने वाला पहला प्रधान मंत्री देखा है

Arvind Veer singh (पीडीए परिवार)'s profile picture
Arvind Veer singh (पीडीए परिवार)1 year ago

जो जवानों को सुरक्षा देस नहीं सकते जनता को सुरक्षा वो क्या देगे। देश की गद्दार भाजपा

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hermes1 year ago

kya fekh rahe hain, inhone ne kashmir se 370 hata ke aur notebandi karke terrorist ko bhaga dia tha na ?

vishal gupta's profile picture
vishal gupta1 year ago

🙏

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Solar Heavy1 year ago

- All I Knew

कृष्णा सिंह's profile picture
कृष्णा सिंह1 year ago

चुनावी रैली में जवाब देते हुए चुनावी प्रधानमंत्री..

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Mukesh1 year ago

ये बात तो पीएमओ से भी बोल सकते थे बिहार चुनाव प्रचार में आ कर बोलने की क्या जरूरत आन पड़ी #Pulwama2?

Chintan's profile picture
Chintan1 year ago

Do it, Modi ji. They’re crossing all limits now — only you can teach them a lesson. No expectations from the other parties.

Bijaya Kumar Jena's profile picture
Bijaya Kumar Jena1 year ago

ଜୟ ଭାରତ🙏

Lowkesh chandra's profile picture
Lowkesh chandra1 year ago

पहलगाम हादसे को हुए कुछ वक्त ही हुआ है और जनाब बिहार पंचायती राज दिवस में शामिल हुए और वहाँ भाषण दिया है लंबा चौड़ा मेरे एक सवाल है क्या इस वक्त मोदी जी को बिहार में होना चाहिए था या पहलगाम में ? मुझे ये फैसला ग़लत लगा बाक़ी आप बताओ जो पब्लिक कहे वो सही

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धार की ऐतिहासिक भोजशाला में वर्षों के संघर्ष के बाद फिर गूंजी मां सरस्वती की वंदना! वर्ष 1997 में तुष्टिकरण की राजनीति ने हिंदुओं से पूजा का अधिकार छीन लिया। 2003 में बसंत पंचमी के पावन अवसर पर भोजशाला में पूजा करने पहुंचे श्रद्धालुओं पर लाठियां बरसाई गईं। तत्कालिन दिग्विजय सिंह सरकार ने अत्याचार की सारी सीमाएं लांघ दी, लेकिन हिंदुओं की आस्था नहीं टूटी। कांग्रेस की साजिशें और लाठियां भी उन श्रद्धालुओं के संघर्ष को रोक नहीं सकी। 2024 के ASI सर्वे और 2026 के हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले ने भोजशाला को मां वाग्देवी यानी, मां सरस्वती का मंदिर माना। और फिर हिंदू धर्म के लोगों को मिली पूजा-पाठ करने की इजाजत। सही कहा गया है— सत्य और धर्म को दबाया नहीं जा सकता... यतो धर्मस्ततो जयः 🚩 देखिए पूरा वीडियो...

BJP

11,720 views • 3 months ago

हमारे यहां शास्त्रों में कहा गया है- यतो धर्मस्ततो जयः! यानी, जय का शक्ति का मूल धर्म है। धर्म यानी, Duty, Justice, धर्म यानी, स्वभाव, सम्भाव, धर्म यानी, संवाद, संवेदना। और यही Nation First की भावना में भी समाहित है। भारत अपनी पावर को इसी लेंस से देखता है, इसी तराजू पर तौलता है। भारत की एक और विशेषता है, और अब तो दुनिया ने भी मान लिया है। हम किसी क्षणिक घटना पर उतावले होने वाले देश नहीं हैं। हम वो हैं, जिसने विकास और विनाश देखा भी है, झेला भी है। हम वो देश हैं, जिसके जेहन में युगों की मेमोरी चिप लगी हुई है। इसलिए भारत जो कर रहा है- वह आने वाले 1,000 वर्ष का Future लिखने वाला है, और यही दुनिया के लिए सबसे बड़ी भारत की गारंटी है। भारत, Fast-Growing Economy भी है और एक Credible Economy भी है, और भारत rising power के साथ-साथ reliable power है। - पीएम श्री Narendra Modi पूरा वीडियो देखें:

BJP

39,048 views • 2 months ago

🚨 Sabarimala Reference Hearing – Day 9 “All religions are not the same, Hindu scriptures do not threaten non-believers with hell” — सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता आदरणीय अश्विनी उपाध्याय “सत्यमेव जयते” — सत्य की ही जीत होती है “यतो धर्मस्ततो जयः” — जहाँ धर्म है, वहीं विजय है मेरे लॉर्ड्स के समक्ष रखे गए इस तर्क को सरल भाषा में समझिए: भारत का संविधान सिर्फ अधिकार देने का दस्तावेज़ नहीं है, बल्कि देश की एकता, संतुलन और वैज्ञानिक सोच को बनाए रखने का मार्गदर्शक है। अनुच्छेद 25 हर व्यक्ति को धर्म मानने, पालन करने और प्रचार करने का अधिकार देता है, लेकिन यह अधिकार पूरी तरह खुला नहीं है। यह सार्वजनिक व्यवस्था, स्वास्थ्य, नैतिकता और अन्य संवैधानिक प्रावधानों के अधीन है। अनुच्छेद 26 धार्मिक संस्थाओं को अपने धार्मिक मामलों को चलाने का अधिकार देता है, लेकिन यह भी उन्हीं सीमाओं में बंधा हुआ है और अनुच्छेद 25 से बड़ा नहीं हो सकता। मुख्य बात यह है कि अनुच्छेद 25 एक सामान्य नियम है और अनुच्छेद 26 उसी का एक हिस्सा। कोई भी हिस्सा पूरे नियम से बड़ा नहीं हो सकता। सीधी बात: धर्म मानना आपका अधिकार है, लेकिन ऐसा कुछ नहीं किया जा सकता जिससे समाज में तनाव, भ्रम या विभाजन पैदा हो। दुनिया के कई देशों में भी धर्म के प्रचार पर सीमाएं हैं। हर जगह यह अधिकार पूरी तरह से खुला नहीं होता। अगर “धर्म प्रचार” बिना संतुलन के होगा, तो इससे समाज में टकराव, अंधविश्वास और विभाजन बढ़ सकता है। हमारा लक्ष्य एक ऐसा भारत होना चाहिए जो एकजुट हो, वैज्ञानिक सोच पर चले और संविधान के मूल उद्देश्यों को पूरा करे। अधिकार जरूरी हैं, लेकिन सीमाओं के भीतर। धर्म व्यक्तिगत आस्था है, राष्ट्र की एकता सबसे ऊपर है। जहाँ संतुलन है, वहीं संविधान जीवित है। Ashwini Upadhyay

अखण्ड भारत संकल्प

29,632 views • 4 months ago