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राजनीति जन समस्याओं पर होनी चाहिए न कि धर्म पर ☝️
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यह चादर मोद क्या बोल रहा है झोपड़ी के बेटी चो...

अच्छा ! 70 साल एक धर्म पर राजनीति करते रहे तब ठीक था! देश के नेता रोजा इफ्तिहार और दरगाहों पर पत्तल चाटते रहे तब ठीक था ? आज दूसरे धर्म की बात होने लगी तो बुरा लग रहा ?

हिंदू होकर मंदिर मे पूजा पाठ करना धर्म की राजनीती है लेकिन हिंदू होकर जालीदार टोपी पहन कर इफ्तार करना राजनीती नहीं है? गजब का दोगला है चचा तू 😂😂😂

अतीक और मुख्तार जैसे गुंडे के तलवे चाटने वाले भी अब राजनीति पर ज्ञान देंगे 😀😀😀 गजबै है 😀😀😀

गोल टोपी पहन कर इफ्तारी खाने हज हाउस बनवाते वक्त तेरे यादव परिवार को क्यों नहीं समझा पाए तुम,

धर्मांधता की ऐसी घुट्टी पिला दी गई है कि इन्हें न तो कोरोना में लाशों का अम्बार दिखा था, ना ही कुंभ में। अंतिम संस्कार के लिए भी जिन परिजनों को अपने लोगों की लाशे नहीं मिलीं, इन अंधभक्तों को वो भी नहीं दिख रहे! अंधभक्तों का देश था पहले, अब मुर्दों का देश बना दिया है।

भाटी जी आप भी अखिलेश और राहुल के सानिध्य में आकर गुमराह हो चुके जिस पार्टी की आप बात कर रहे हो वह पार्टी शासन में है आना क्या चाहती है आप भी लिखी हुई स्क्रिप्ट ही पढ़ते रही बात धर्म की तो हर पार्टी राजनीतिक धर्म पर ही कर रही है कोई टोपी लगाकर कोई तिलक लगाकर।

तो ये क्या है.? भाटी जी बहुत देर लग गया तुम्हें ज्ञान प्राप्त होने में, पीपल न सही बबूल के नीचे ही बैठ जाते तो जल्दी हो जाता, चलो अब्बू को नहीं समझा पाए अब बेटे को ही समझा दो कि ये टोपी पहन कर धर्म की राजनीति न करें..?

अगर धर्म के नाम पर राजनीति नहीं होनी चाहिए तो यह मुस्लिम वोटो के लिए सर पर मुस्लिम टोपी क्यों पहना है?

