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सनातन भारत अनादि काल से कर्म प्रधान रहा है, न कि जाति प्रधान.
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राईट

जाति पाती का भेद नहीं हर दिल से हमारा नाता है, प्रभु राम हमारे पूर्वज हैं हमारे आदर्श है हम सब को उन्हीं का अनुसरण करते हुए भेदभाव मिटा कर वसुधैव कुटुम्बकम की परम्परा को आगे बढाते हुए आपसी भेदभाव करने वाले राक्षसों का वध करते हुए अखंड भारत की ओर अग्रसर होना चाहिए 🚩

सत्य कहा आपने। जो आचरण से गिरा हुआ है केवल वही शूद्र (क्षूद्र) है, चाहे वह किसी भी संवैधानिक जाति से संबंध रखता हो।

@govindisback यह बात मोहन भागवत को समझाओ और हम को हिंदू राष्ट्र के सपने बेचना बंद करो ताकि बीजेपी जैसी पार्टी इस पर राजनीति करना बंद कर सकें

वर्ण व्यवस्था मौर्य गुप्त काल तक ही ठीक से चल पाई फिर मुगल आए तो उन्हों अधिकतर निचले तबके में इनका ही धर्म परिवर्तन किया फिर अंग्रेजो ने जातीय व्यवस्था अपनाई क्या आप वर्ण व्यवस्था में किस काल से गिरावट आई या क्यों ये व्यवस्था भारत में बाद में फेल हुई कोई लिंक हो तो शेयर करे

मोहन भागवत आरएसएस नामक NGO चलाता है, वही करे। अनादि धर्म और सिद्धान्त पर सौ वर्ष प्राचीन NGO अनर्गल प्रलाप करेगा तो प्रकृति NGO को समाप्त करेगी, धर्मसिद्धान्त को नहीं। विष्ठा में इत्र छिड़कने से वह कस्तूरी नहीं बन जाता है। आरएसएस धर्म नहीं है, NGO है। NGO के कारण धर्म नहीं बदलता।

What is wrong with MOHANBHAGWAT? Why is acting weird? PLEASE PUT SOME PRESSURE & SEND HIM TO VRUDHASHRAM or MANASIKH CHIKITSALAY

ब्राह्मण के बच्चे के जन्म के दसवें दिन उसका ब्राह्मण-मूलक नाम रखने का विधान है मनुस्मृति में, 10 दिन के बच्चे में ज्ञान के क्षेत्र में कौन से झंडे गाड़ देने की सम्भावना है। अगर जाति कर्मप्रधान है तो वर्ण-संकर्णता का क्या सिद्धांत है। Whatsapp से बाहर निकलें धर्मग्रंथ पढ़ें (1/2)

फिर ये जातियों में समाज को किस ने बाँटा?? कियो आज भी कोई दलित उँची जात वालों के डर से घोड़ी नहीं चढ़ सकता? कियों उसे मंदिरों में प्रवेश नहीं करने दिया जाता? कियों आज भी कोई दलित भारत के किसी भी मंदिर का मुखय पुजारी बना या गया? स्टेज पे लेक्चर झाड़ने से कुछ नहीं होगा।
