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सेवा करते समय हम धर्म नहीं देखते। 🙏
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हम देखते हैं। जिसको समस्या है वो ना आया करे।

जो जय श्रीराम नहीं बोल सकते। वो इंसान की जाती से नहीं हो सकते।।

यही तो इन्सानियत है यही तो हर धर्म की खूबसूरती है जो बात नफरती चिंटुओ के समझ में नहीं आती है !!

तो किसी शहर मे जाने पर धर्म क्यों देखा जाता है ??

तभी किसी संत ने कहा है 👇🏻👇🏻👇🏻 धर्म मतलब “जय श्री राम “ अधर्म मतलब “गुस्ताख ए नबी - सर तन से जुदा “

सेवा करते हुए धर्म नहीं देखा जाना चाहिए

धर्म सिर्फ एक है सनातन हम देखते हैं हमारे शास्त्रों में लिखा है दान पात्र को दिया जाए।सेवा मानव की जाए @टंकियों की, गौ भक्षकों की सेवा करने की आज्ञा नहीं है हमें।जो करना चाहते हैं करें। और सुन कश्मीर में कितनी सेवा की तेरे बापों ने हिंदुओं की सबको पता है।सेवा के नाम पर

इस्कॉन मंदिर में बांग्लादेश वाले खूब सेवा किए थे उसका परिणाम क्या हुआ आंखों के सामने दिखा। वैसे खैर भूखे लोगों को हमेशा भोजन और प्यासे को पानी देना चाहिए। लेकिन हकीकत देख कर इच्छा मर जाती है। बाकी गरीबों को कोई जाति नहीं होती न ही कोई धर्म होता है

और जो धर्म देख ले फिर वो सेवा कैसा??

धर्म क्या देखोगे मुल्ले तुम लोग तो खुद सनातन धर्म का सहारा लेकर कर होटल दुकान चलाते हो और पेट पालते हो औश्र ज्ञान पेल कर हिन्दू को समझाते हो ।।
