
Samar Raj
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Journalist:: @boltahindustan and @boltaup // IIMC & DU Alumni
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बात एकमात्र विधायक की नहीं है, उस भाई की है जो बुरे से बुरे दौर में साथ खड़ा रहा। अटल से लेकर अचल तक, राखी बंधवाकर बहनजी बोलकर, मौके पर धोखा दे दिए। उमाशंकर साथ निभाते रहे, अंतिम सांस तक। सारी सरकारी मशीनरी उनके खिलाफ छोड़ दी गई फिर भी डिगे नहीं, जवाब देते रहे। जिस दौर में 80 में 64 विधायक भाजपा चले जाते हैं उस दौर में अकेले चट्टान की तरह खड़े रहे। हजारों करोड़ की संपत्ति और व्यापार है, उसके बावजूद धमकियों से नहीं डरे। उमाशंकर सिंह अलग तो थे, श्रद्धांजलि💐। दुनिया में ऐसे ही आपसी भरोसा बना रहे, बचा रहे।
Samar Raj244,084 просмотров • 1 месяц назад

अगर AAP के 63 MLA तोड़कर चड्ढा को CM बनाने के 1% भी चांस हैं तो ये अकेले चड्ढा के बस की बात नहीं है; इसके मास्टरमाइंड 100% संदीप पाठक हैं। पिछले कुछ सालों से यही AAP को चला रहे थे। केजरीवाल जेल में थे तो यही दिल्ली पंजाब गुजरात MP हरियाणा सब संभाल रहे थे।
Samar Raj666,869 просмотров • 4 месяцев назад

बच्ची को बचपन से बताया गया चंद्रशेखर शेर है, सवा शेर है, अढ़ाई शेर है; वो यही बोलती रही, मसीहा मानने लगी। अचानक जंतर मंतर पर भेड़ियों का हमला हो गया, उन्होंने उसी पिता को मारकर अधमरा कर दिया जिसको शेर पर अटूट भरोसा था। भेड़िए का भाई मंत्री है, और मोटा भाई गृहमंत्री; वो छूट गया। पीड़िता का भाई सांसद है, रीलबाज सांसद; मदद माँगती रही, वो मदद नहीं किया। सबक है सबके लिए कि नेताओं के चक्कर में पड़कर जिंदगी दांव पर न लगाएं। गुस्सा है दिल्ली पुलिस पर कि पॉलीटिकल प्रेशर में इतने पक्षपाती न हो जाएं। सहानुभूति है बच्ची और इसके पिता के प्रति, आप लोग हर संभव मदद पहुंचाएं। पॉलीटिकल प्रेशर कल उनकी जुबान बदल दे फिर भी असल सबक क्या है, आप भूल न जाएं।
Samar Raj67,715 просмотров • 17 дней назад

आकाश आनंद का सबसे विवादित भाषण ये है जिसमें आपा खोते हुए अपशब्द बोल गए थे। अगले ही सेंटेंस में मैनेज करते हुए कहते हैं किसी का गूदा तो नहीं निकाल सकते हो ये सिर्फ आपका गुस्सा हो सकता है। अपना गुस्सा आप वोट करके दिखा सकते हो, इन्हें सत्ता से हटाकर दिखा सकते हो। बाबा साहब ने जो अधिकार दिए हैं उसका फायदा उठा सकते हो। ये शानदार कवर है, इससे समझ में आता है आकाश आनंद बेहतरीन कम्युनिकेटर हैं। मेच्योर लीडर हैं। जिस मुद्दे पर 2024 में आकाश आनंद आग बबूला हो गए थे उसी मुद्दे पर 2026 में देशभर का युवा जंतर मंतर पर आ गया सरकार बैकफुट पर चली गई। सोचो कितना विजनरी स्टैंड रहा होगा। जिस तेवर के साथ अभी अगस्त 2026 में कैंपेन शुरू किए थे, साल 2 साल में बहुत कुछ बदल सकता था मगर फिर से इमेच्योर बताकर हटा दिए गए हैं। दरअसल बहनजी की लड़ाई किसी आकाश या किसी व्यक्ति से नहीं है, वाद विवाद संवाद की सहज धारा से है, जो कुछ सरल है उसके खिलाफ है। कुछ पॉजिटिव अच्छा या सुखद ना हो जाए इस अनुभूति के खिलाफ है। वैदिक काल में इस्तेमाल हुई संस्कृत की जलेबी अभी कहीं देखने को मिलती है तो बहन जी के सेंटेंस में। आम लोग नहीं समझते, बहुजन समाज के लोग तो ये संस्कृत पाठ बिल्कुल नहीं समझते। वो तो उनका लगाव उनका समर्पण है कि सबकुछ पढ़कर समझने की कोशिश करते हैं। आकाश को एक दो शब्द के ग़लत इस्तेमाल के लिए रोका टोंका जा सकता है मगर संवाद की भाषा स्वाभाविक है, युवाओं की इच्छाओं आकांक्षाओं के अनुरूप है। इसलिए कहूंगा फिर कभी मौका मिलेगा तो भी यही तेवर रखना Akash Anand सही शब्दों के साथ। सियासी फैसले इमैच्योर हो सकते हैं मगर मिशनरी ज़ुबान नहीं, इस दृढ़ निश्चय के साथ।✊🔥
Samar Raj56,233 просмотров • 17 дней назад

CJP पहले पार्ट में हम चलाए थे ये कड़ा, खून से नहला दिए थे। नीले कबूतर को लाल कर दिए थे। CJP 2 में हम करेंगे बेल्ट ट्रीटमेंट और भी ट्रीटमेंट, कट्टा ट्रीटमेंट भी करेंगे। मोदी शाह के लंपट पुत्र और कपिल चिराग के छोटे भाई बताएं कि ये ऐसे ही आएंगे या दिल्ली पुलिस की वर्दी में आएंगे?
Samar Raj49,860 просмотров • 16 дней назад

आकाश आनंद ने कल बहनजी के यहां फोन किया। ऑफिस इंचार्ज अनूप से हाल-चाल पूछा कि इनकी तबीयत सही है? इसपर भी बहनजी को लग रहा है कोई साज़िश हो रही है। अशोक सिद्धार्थ के इशारे पर आकाश नाच रहे हैं। हम जानते हैं साज़िश नहीं ये चिंता है प्रेम है अपनापन है मगर फिर भी बहन जी का आरोप सही है। जब तक अपनी बात व्यथा करुणा प्रेम पब्लिक में नहीं रखेंगे तब तक एक पक्ष जो बोलेगा वही सही है। Akash Anand पूरे प्रकरण में चुप रहकर जरूरत से ज्यादा मैच्योर दिखे हैं। उनकी यही मैच्योरिटी अब मुसीबत बनती जा रही है। बिना बोले सब समझ जाएं, अब वो पुरानी दुनिया नहीं है। पॉडकास्ट आर्टिकल या एक वीडियो के जरिए बात बोलें, अगर उनसे डायरेक्ट बात नहीं हो रही है। ग़लतफहमी और ग़लत इंटरप्रेटेशन पर बनी धारणा ही अब सच्चाई का रूप लेते जा रही है।
Samar Raj21,544 просмотров • 7 дней назад
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ये मिश्रा जो इस्लामी झंडे को उखाड़कर भगवा लहरा रहा है वो साम्प्रदायिक है नफ़रती भी। वो भीड़ जो इसके विरोध में गोलियों से छलनी कर रही है वो भी साम्प्रदायिक है, दंगाई भी। मगर इन सबसे जरूरी बात-यूपी में जो सरकार है वो सबसे ज्यादा साम्प्रदायिक है साथ ही निकम्मी भी।
Samar Raj1,191,812 просмотров • 1 год назад

अखिलेश यादव इस शंकराचार्य का चरण वंदन करते-करते लगभग सरेंडर कर चुके हैं। अमन चोपड़ा ने चालाकी की, जवाब में इसने बोल दिया हां अखिलेश सनातनी नहीं हैं। मामला इतने पर नहीं खत्म होता। धूर्त एंकर चालाकी से शंकराचार्य को ट्रिगर कर देता है उसके बाद मुलायम सिंह यादव को कारसेवकों का हत्यारा बताते हुए जिस तरह की भाषा इसने यूज़ की है, वैसी भाषा कोई विरोधी नेता भी इस्तेमाल नहीं करता है। इतनी क्लिप काफी है हिंदूवादी मानसिकता के लोगों के लिए अखिलेश मुलायम को सिरे से खारिज कर देने के लिए, BJP को इससे ज्यादा की जरूरत नहीं है। हमेशा कहता हूं आज फिर कह रहा हूं -दलित पिछड़े नेताओं को सामाजिक न्याय पर फोकस रखना चाहिए, ये मंदिर मस्जिद हिंदू मुस्लिम वाली पिच पर खेलने की जरूरत नहीं है। यहां आपकी हार तय है, प्राचीन काल से लिखी हुई है।
Samar Raj97,126 просмотров • 1 месяц назад

कारवाँ के रिपोर्टर सुनील कश्यप कह रहे हैं- BSP इस बार बहुत अच्छा करने जा रही है, हो सकता है सपा से ज्यादा सीटें आ जाएं। अब इस बात को सही साबित करने के लिए सपा को दो-तीन सीट पर सिमटना पड़ेगा, जो असंभव है। हालांकि ग्राउंड रिपोर्टिंग में काफी गंभीर सुनील इसके पीछे दलील देते हैं कि BSP संगठन के तौर पर सबसे अच्छा काम कर रही है इसलिए बेहतरीन करने जा रही है। मैं वीडियो पोस्ट कर दे रहा हूं हताश निराश BSP समर्थकों के भ्रामक मगर सुखद एहसास के लिए, सेव करके रख लें। सच्चाई ये है कि जो भी पार्टी जमीन पर जितना काम करेगी, जमीन के अंदर उतना धंसती जाएगी। हर किसी की राय अब मोबाइल से बनती है, मीडिया सोशल मीडिया से बनती है; इसलिए ज्यादातर जमीनी पार्टी आपको जमीन के एक-दो फीट ऊपर नीचे ही दिखती है। वाद विवाद संवाद से नाता तोड़ना कोई अच्छी बात नहीं है। मान्यवर कांशीराम ने तब मना किया था जब मीडिया चलाने वाले और खबर पढ़ने वालों की अपनी एक क्लास और जाति हुआ करती थी। आज सबसे बड़ी ऑडियंस बहुजन समाज है तो उससे रोज संवाद और हर बात पर वाद विवाद ना करना सुसाइडल प्रयास है। काश ये बातें सच हो जाएं और बहुजन समाज को समर्पित सबसे बड़े आंदोलन की पार्टी बच जाए, मगर सच है कि हमारा ये "काश" भी कोरी बकवास है। (Sunil Kashyap की ये क्लिप Anurag Minus Verma के पॉडकास्ट से )
Samar Raj39,486 просмотров • 20 дней назад