
Ashok Gehlot
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Former Chief Minister of Rajasthan, MLA from Sardarpura.
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सवाल : सर यूजीसी का इफेक्ट आएगा? जवाब : यूजीसी का, इनके कुकर्मों का, इनके कुशासन का भी पड़ेगा। क्या कर्म कर रहे हैं बताओ? कुकर्म ही कर रहे हैं। जब काम नहीं कर रहे, तो कुकर्म ही हुआ ना मतलब ये तो। आप काम ही नहीं करो, करप्शन भयंकर है। कई गुना ज्यादा करप्शन बढ़ गया है। ऐसा आज तक कभी सुना ही नहीं था, वो हो चुका है। हमारी स्कीम बंद कर दीं या कमजोर कर दीं। जोधपुर सहित राजस्थान भर में बिल्डिंगें बनी हुई खड़ी हैं बनी हुई, चाहे स्पोर्ट्स की हो, चाहे सुमेर लाइब्रेरी हो, चाहे हॉस्पिटल्स हों। आप बताइए क्या कारण है बंद करने का या काम नहीं करने का? स्थिति बड़ी नाजुक है। इसको मैं कुकर्म कहता हूं क्योंकि ये काम कर नहीं रहे हैं। नगरीय निकाय चुनाव में इनको झटका मिलेगा, मैं अपील कर रहा हूँ पब्लिक से बार-बार, आप झटका दोगे, आपके हाथ में है काम करवाना। पब्लिक इनको झटका देगी, इनको बुरी तरह से पराजित करेगी, तब इनकी आंखें खुलेंगी कि ये क्या हो गया। तब हो सकता है कि इनको होश आए और पब्लिक के कुछ काम हों। हम लोग तो विपक्ष में हैं और अपनी भूमिका निभाते हुए आम जनता की चिंता करते हैं। मेरा मानना है कि पब्लिक को चाहिए कि आगे आकर के, कोई संकोच नहीं करे, कोई लिहाज नहीं करे, और जमकर के कांग्रेस को कामयाब करे।
Ashok Gehlot68,641 просмотров • 3 дней назад

राजस्थान की जनता से अपील 🙏 टूटी सड़कें, जलभराव, बंद स्ट्रीट लाइटें, कचरे के ढेर, पट्टों के लिए भटकते लोग... यही है BJP सरकार की हकीकत। कांग्रेस जीतेगी तो शहरों में काम होगा। 9 और 11 सितंबर को अपने वार्ड में कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में मतदान कर कांग्रेस को भारी बहुमत से विजयी बनाएं।
Ashok Gehlot73,504 просмотров • 4 дней назад

सवाल : नगर निकाय चुनाव में मुख्यमंत्री खुद रोड शो कर रहे हैं ? जवाब : अब कितनी बार मैं कह चुका हूं, कल मैंने पॉडकास्ट भी किया है। जोधपुर सहित पूरे प्रदेश के अंदर कांग्रेस का माहौल बन चुका है। मुख्यमंत्री जी को नगरीय निकाय चुनाव में रोड शो करने की नौबत क्यों आई? पहली बार इतिहास में कोई मुख्यमंत्री घूम रहे हैं। हमने तो अपने वक्त में कभी कैंपेन किया ही नहीं। ये लोकल चुनाव हैं, लोकल नेता सक्षम होते हैं,उनमें दमखम होता है, वह योग्य होते है और जमीन से जुड़े होते हैं उन पर छोड़ना चाहिए चुनाव। आप सिंबॉलिक मीटिंग कर लो, अलग बात है पर आप पूरे राजस्थान में घूम रहे हो क्योंकि आपने कुछ काम किए ही नहीं। लोगों में आक्रोश है , हमारे वक़्त में पट्टे देने के काम हो रहे थे, सड़कों के हो रहे थे, जो भी काम थे , प्रशासनिक काम भी थे, काम करने का एक माहौल था। शिकायतें तो देखो, हर गवर्नमेंट में रहती हैं। मैं दावा नहीं करता कि मेरे वक्त में कोई शिकायत नहीं थी पर लाखों पट्टे दिए गए और अब ये पट्टे दे नहीं पा रहे हैं। ढाई-तीन साल इनको हो गए हैं, 1 लाख पट्टे मुश्किल से दिए होंगे। तो मेरा मानना है कि ये अब चाहे कितने ही घूमो, कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है। जनता मानस बना चुकी है। जोधपुर में कांग्रेस का बोर्ड बनेगा। जो फीडबैक आ रहा है उससे कार्यकर्ताओं में शानदार उत्साह है। आम पब्लिक कांग्रेस के साथ जुड़ी है। और जो इनके वोट बैंक कहलाते थे, सो कॉल्ड, वो भी इस बार टूट रहे हैं। पूरे प्रदेश से खबरें आ रही हैं कि जो इनका वोट बैंक कहलाते थे, वो भी बड़े गुस्से के अंदर हैं उनके साथ व्यवहार भी अच्छा नहीं हो रहा है। हालात बड़े गंभीर हैं। तो मैं समझता हूं कि इस बार स्थानीय निकाय में कांग्रेस के बोर्ड बनेंगे और मैं बार-बार कह रहा हूं कि इन लोगों को झटका लगना जरूरी है। सवाल : केंद्रीय मंत्री तो कई वार्डों को व्यक्तिगत चुनाव मान के घूम रहे हैं लगातार जोधपुर में। जवाब : व्यक्तिगत और सार्वजनिक की उनकी क्या परिभाषा है मुझे पता नहीं है, पर वो तो वही हैं। सवाल : 40 लोगों का जोधपुर में निष्कासन हुआ, बागी या दागी कहें। क्या ये जल्दबाजी नहीं थी सर? जवाब : देखो, मैं तो अभी आया ही हूं। जो निर्णय प्रदेश के अंदर होता है पीसीसी का सर्कुलर होता है और उसमें जो दिशा-निर्देशन होता है, उसके अकॉर्डिंग टू सब जिला कांग्रेस कमेटियां काम करती हैं।
Ashok Gehlot60,514 просмотров • 4 дней назад

मुख्यमंत्री श्री Bhajanlal Sharma का धन्यवाद, जो आप हमारी कांग्रेस सरकार द्वारा शुरू की गई सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना और उसके लाभ के बारे में एक बुजुर्ग महिला से चर्चा कर रहे हैं। अब आपको सभी बुजुर्ग, दिव्यांग, विधवा और जरूरतमंद नागरिकों के हित में दो काम करने चाहिए: 1.आपकी भाजपा सरकार कई-कई महीनों तक सामाजिक सुरक्षा पेंशन का भुगतान नहीं कर पा रही है। इसे सुनिश्चित करें कि यह राशि हर महीने की एक तारीख को नियमित रूप से लाभार्थियों के बैंक खातों तक पहुंचे। 2.केंद्र सरकार से मांग करें कि नेशनल सोशल असिस्टेंस प्रोग्राम (NSAP) के तहत मिलने वाली पेंशन राशि को 300 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रतिमाह किया जाए और इसके लाभार्थियों की संख्या भी बढ़ाई जाए। इसमें केन्द्र और राज्य सरकार 50-50% हिस्सा दें।
Ashok Gehlot152,801 просмотров • 10 дней назад

"स्थानीय निकाय चुनावों में CM का रोड शो कोई उपलब्धि नहीं, बल्कि सरकार की सबसे बड़ी नाकामी है।" पत्रकार: स्थानीय निकाय चुनावों में मुख्यमंत्री रोड शो कर रहे हैं, इस पर आपका क्या कहना है? जवाब: देखिए, यह सोचने वाली बात है कि मुख्यमंत्री को रोड शो करने की नौबत क्यों आई? यह पहली बार है जब कोई मुख्यमंत्री स्थानीय निकाय (नगर पालिका, नगर परिषद और नगर निगम) के चुनावों में रोड शो कर रहा है। यह उनके लिए कोई उपलब्धि (प्लस पॉइंट) नहीं, बल्कि उनकी सबसे बड़ी नाकामी (नेगेटिव पॉइंट) है। उन्होंने खुद सिद्ध कर दिया है कि पिछले ढाई साल से सरकार कैसे चल रही है और जनता में कितना भारी आक्रोश है। टूटी सड़कों और खराब सीवरेज व्यवस्था से शहर बर्बाद हो रहे हैं; विकास का कोई काम नहीं हो रहा है। हमारी सरकार के समय 'प्रशासन शहरों के संग' अभियान चलता था, जिसका लोग खुशी से इंतज़ार करते थे। हमने 12 लाख पट्टे बांटे थे। इनसे पूछिए, पिछले ढाई-पौने तीन साल में इन्होंने कितने पट्टे दिए हैं? मुश्किल से एक लाख भी नहीं दिए होंगे। इसी घबराहट और बौखलाहट में दिल्ली, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों से इनके मंत्री और हाईकमान के नेता यहां आ रहे हैं। आखिर स्थानीय चुनावों को इतना बड़ा टारगेट बनाकर क्यों चला जा रहा है? इसका साफ मतलब है कि इन्हें जनता के आक्रोश का पता चल गया है और अब ये जनता को भ्रमित करने आ रहे हैं। मैं जनता से अपील करूंगा कि वे इनके भ्रम में न आएं। जब दुखी जनता इन्हें इन चुनावों में हराएगी, तभी इनकी नींद खुलेगी। हार के डर से ही सही, इनका 'डबल इंजन', हाईकमान और स्थानीय नेतृत्व काम करने का प्रयास करेगा, जिससे अंततः जनता का ही भला होगा। आज भ्रष्टाचार की हदें पार हो चुकी हैं। इन चुनावों में हार के बाद जब इन पर अंकुश लगेगा, तभी सड़कें बनेंगी, पट्टे मिलेंगे और वास्तविक विकास होगा। हार से इन्हें यह स्पष्ट संदेश जाएगा कि आगामी विधानसभा चुनावों में भी इनका सूपड़ा साफ होने वाला है। मैं प्रदेशवासियों से अपील करता हूं कि इन्हें (भाजपा को) वोट की चोट से इतना ज़ोर का झटका दें कि इन्हें अपनी हार का अहसास हो जाए। तभी जाकर ये बचे हुए दो-सवा दो साल में जनता के लिए कुछ काम कर पाएंगे। (मीडिया से बातचीत, जयपुर, 06.09.2026)
Ashok Gehlot89,727 просмотров • 7 дней назад

अगली सरकार कांग्रेस की बने राजस्थान में इसमें एक बड़ी भूमिका मेवाड़ की होगी : एक BAP पार्टी एक पैदा और हो गई । अब बताइए, BAP पार्टी ने 40 साल पहले कहा था हम तो अलग प्रदेश बनाने लिए, भील प्रदेश बना लेंगे । अरे आज विज्ञान का युग है, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आ गई, AI आ गया। आपके बच्चे वगैरह पढाई करते होंगे । मोबाइल फोन है, दुनिया भर से जुड़े हुए हैं हम लोग आज। यह मीटिंग हो रही है ना, यह मीटिंग आज कोई जयपुर में देखना चाहे, दिल्ली में, बंबई में, लंदन में, अमेरिका में, वो बैठा- बैठा देख सकता है कौन कहाँ बैठा हुआ है, कौन भाषण दे रहा है, कौन यहाँ बैठा हुआ है, दुनिया में देख सकता है। और हमने तो अभी चालू कर रखा है मशीन को। हमारी मशीन चालू है। वो देख रही है जिनको मालूम है कि मैं बोल रहा हूँ, वो देख भी रहे हैं अभी। चाहें तो दुनिया देख सकती है, इतनी क्रांति हो चुकी है। अब कहाँ यह भील प्रदेश की बात करते हैं? पीछे जाने की बात करते हैं, बाप पार्टी वाले। एक बार बच्चों में जोश आ गया। बच्चे बच्चे ही हैं, Gen-Z हुई नहीं हुई दिल्ली के अंदर। मैं कहना चाहूँगा BAP पार्टी वालों को भी, वो भी हमारे मिलने वाले, मित्र लोग हैं, मैं जब पहले मुख्यमंत्री था, मेरा साथ दिया BAP पार्टी वालों ने। सरकार बचाने में साथ दिया। मैं कैसे भूल सकता हूँ? कैसे भूल सकता हूँ? उनका साथ मिला। बाद में वो फिर वापस अलग भी हो गए। तो वो जो उनके नेता हैं, तमाम लोग, उनको कहना चाहूँगा, राजकुमार वो उनका एमपी बन गया, हमने उनका साथ दिया। तब वो एमपी बन गए। अब मैं एक अपील करना चाहूँगा कि राजस्थान को एक करो। सरकार तभी बनेगी जब हमारा मेवाड़ जो है ,मारवाड़ है, मेवाड़ है, राजस्थान के विभिन्न संभाग हैं, यह तमाम मज़बूत होंगे कांग्रेस के पक्ष में, तब सरकार बनेगी। अब आप चौथी बार का नारा लगा रहे हो। अरे चौथी बार कौन मुख्यमंत्री बने, वो छोड़ो अभी पर सरकार कांग्रेस की बने, वो तब बनेगी जब मेवाड़ मज़बूत होगा। मेवाड़ मज़बूती की शुरुआत जो है, प्रतापगढ़ से होनी चाहिए, इसलिए मैं आया हूँ। आपसे शुरुआत हो। उदयपुर, डूंगरपुर, बाँसवाड़ा, चित्तौड़ जहां लोग रहते है आपके पूरे मेवाड़ के अंदर, भीलवाड़ा हो चाहे राजसमंद हो, सब जगह लोगों को मैसेज जाना चाहिए कि प्रतापगढ़ के लोगों ने यह संकल्प ले लिया है कि पूरे मेवाड़ के अंदर वापस कांग्रेस मज़बूत होगी। अगली सरकार कांग्रेस की बने राजस्थान में, एक बड़ी भूमिका मेवाड़ की होगी, यह भावना सब में आनी चाहिए। स्थान- जन आक्रोश यात्रा महारैली, प्रतापगढ़. 30 अगस्त 2026.
Ashok Gehlot143,442 просмотров • 12 дней назад

"भाजपा सरकार ने राजस्थान में क्रिकेट को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है" पत्रकार: कल प्रधानमंत्री ने दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) में भी बात की? जवाब: यूनिवर्सिटी और जेन-जी से जुड़े इन मामलों पर तो कल कन्हैया कुमार ने ही उन्हें माकूल जवाब दे दिया है। कल रात मीडिया के साथ अपने इंटरव्यू में कन्हैया कुमार ने प्रधानमंत्री जी की यूनिवर्सिटी वाली अप्रोच को पूरी तरह एक्सपोज़ कर दिया। जब उन्होंने ही सारी बातें स्पष्ट कर दी हैं, तो उस पर मैं और क्या बोलूं। पत्रकार: राजस्थान में क्रिकेट का ढांचा भी पूरी तरह से खत्म हो गया है क्या? जवाब: इस सरकार ने राजस्थान में क्रिकेट को पूरी तरह बर्बाद करके रख दिया है। पिछले पौने तीन साल में इन्होंने RCA (राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन) के चुनाव तक नहीं करवाए। जयपुर में दुनिया का एक बहुत बड़ा क्रिकेट स्टेडियम बन रहा था, जिसका काम आज रुका पड़ा है। जब वैभव गहलोत अध्यक्ष थे, तब सी.पी. जोशी जी और हम सबने हिंदुस्तान जिंक के अनिल अग्रवाल जी से बात की थी। उन्होंने इसके लिए करीब 150 करोड़ रुपये भी दे दिए थे। लेकिन आज स्थिति यह है कि वह स्टेडियम अधूरा पड़ा है। क्या मुख्यमंत्री जी को यह नहीं सोचना चाहिए कि हमारी युवा पीढ़ी (Gen Z), लाखों-करोड़ों बच्चे और बुजुर्ग, जो क्रिकेट प्रेमी हैं, वे इस स्टेडियम के पूरा होने का इंतज़ार कर रहे हैं? स्टेडियम का काम रुकवाना और RCA के चुनाव न करवाना, ये तमाम बातें लोग देख और समझ रहे हैं। अगर सरकार को अभी भी अपनी इन गलतियों का एहसास नहीं हुआ, तो समय आने पर जनता इन्हें जरूर सबक सिखाएगी। (मीडिया से बातचीत, जयपुर, 06.09.2026)
Ashok Gehlot81,254 просмотров • 7 дней назад

(प्रेस से बातचीत: 2 सितंबर 2026) पत्रकार: सर, राहुल गांधी जी को एमपी में जो रैली करने जा रहे थे, मतलब 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम, उसकी इजाजत नहीं मिली है। जवाब : कहां मिली? कोटा में मिली, देहरादून में मिली, प्रयागराज में मिली और,फिर मिली वहां भी ऐसा ही होगा। यह तो क्या बताएं इनके बारे में! प्रशासन पहले मना करता है, बाद में देनी पड़ती है जब छात्रों का, युवकों का, युवतियों का जो प्रेशर पड़ता है 'जेन-जी' का, परमिशन देते हैं, पर उनके प्रोग्राम बहुत ही एक मैसेज दे रहे हैं कंट्री के युवाओं को। और छोटे बच्चे भी स्कूलों की जो समस्याएं हैं, उनको लेकर सड़कों पर आने लग गए हैं। देखिए, बच्चों की, स्कूलों की प्रॉब्लम कोई अभी एकदम पैदा हुई है, ऐसी बात नहीं है। सरकार हमारी भी आई होगी, सरकारें गई होंगी। लाखों स्कूलें होती हैं, हजारों स्कूलें होती हैं, रिपेयर मांगती हैं, छत गिर जाती है। रेगुलर रिपेयर होने लग जाए मान लो, और जो पूरी तरह ध्वस्त होने की स्थिति में आ गईं, वहां नई स्कूल बन जाए। अगर प्रायोरिटी पर आप काम करने लग जाओ, तो फिर शिकायत लोगों को नहीं होती है। ना गांव वालों को होती है, ना बच्चों को होती है, ना समाज को होती है। सवाल यह आता है जब आप उसकी तरफ ध्यान नहीं दो। कोई अगर ध्यान आकर्षित करे आपका कि भाई यह तो बिल्डिंग गिरने वाली स्थिति बन गई है, कहीं यह बरसात में गिर नहीं जाए। तब भी आप लापरवाही करो, मुख्य शिकायत इन बातों की है। तो मैं मानता हूं कि स्कूलों की मरम्मत टाइम पर हो, जिनकी स्थिति बहुत ही नाजुक है, उन बिल्डिंग को ठीक करें, नई बनाएं, तो एक अलग ढंग का यह काम चलते रहना चाहिए। अभी इस माहौल को देखकर सरकार ने घोषणा कर दी ₹12,000 करोड़ खर्च करेंगे। पूछो ₹12,000 करोड़ कब खर्च करोगे? चुनाव के बाद में खर्च करोगे? मुझे लगता नहीं कि यह कोई 12,000 छोड़िए, 4,000 भी खर्च कर पाएंगे। यह तो खाली इन्होंने आंकड़े बता दिए हैं। अरे, पेमेंट तो आप कर नहीं पा रहे हो, ना पेंशन दे पा रहे हो, ना ठेकेदारों को पेमेंट कर पा रहे हो। पेमेंट की बहुत स्थिति खराब है। जो लोग मर गए बेचारे एक्सीडेंट में, ₹5 लाख का मैंने प्रोविजन किया था मरने वालों को देने का। ₹10 लाख का किया दो लोगों के मरने पर। उनका नहीं दे पा रहे हो पैसा। 2,500 लोगों का अटका पड़ा है पैसा, सैंक्शन होने के बाद में भी। वह क्या सरकार ₹12,000 करोड़ दे देगी! यह खाली छात्रों के गुस्से को दबाने के लिए किया गया है, इसमें कोई दम नहीं है। पत्रकार: सर, आज बीकानेर में जिस तरीके से घटना हुई है उस पर प्रतिक्रिया? जवाब : बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। अब टिकट तो सबको मिल नहीं सकता,एक को ही मिलेगा टिकट तो। उसमें आप अगर इस प्रकार दुर्व्यवहार करोगे किसी अध्यक्ष के साथ, तो वह बहुत निंदनीय है। पुलिस को कार्रवाई करनी चाहिए उनके खिलाफ में। अगर वह पार्टी कार्यकर्ता हैं पीटने वाले, या कोई दूसरों को बुलाकर ले आया कोई, जांच होनी चाहिए और पार्टी कार्यकर्ताओं, उनके खिलाफ भी एक्शन होना चाहिए।
Ashok Gehlot107,850 просмотров • 10 дней назад

जोधपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत जोधपुर एयरपोर्ट के नए भवन को लेकर पूछे प्रश्न का उत्तर : जोधपुर एयरपोर्ट का नया भवन बना है पर पहली बरसात में ही पानी भर गया तो लोगों में बहुत चर्चा रही इसकी। एयरफोर्स से संबंधित झगड़ा जो दो साल से झगड़ा नहीं मिट रहा था, उसको निपटाने में कांग्रेस सरकार का बहुत बड़ा योगदान है। जमीनों का आदान-प्रदान नगर निगम से करना था, वो भी हमने करवाया। ये उस वक्त की बात है। भवन बनने के बाद पहली बार ऐसी स्थिति बनी है। हाई कोर्ट की ऐसी स्थिति बन गई है, पार्लियामेंट की बन गई है। तो कहीं न कहीं ऐसी स्थिति है कि ठेकेदारों पर अंकुश होना जरूरी है। पार्लियामेंट भवन में पहली बरसात के अंदर पानी पहुंच गया, तो ये स्थिति है, अब हाई कोर्ट बिल्डिंग में भी पहुंच गया। ऐसा मुझे एहसास है, मैं मालूम कर रहा हूं कि कोई जमाने के अंदर हाई कोर्ट बिल्डिंग हो या लोअर कोर्ट बिल्डिंग हो, सरकारें बनाती थीं और वो हैंडओवर करती थीं कोर्ट को, जुडिशरी को। उससे रेस्पोंसिबिलिटी फिक्स होती थी अपने आप ही। अब क्या हुआ, पूरा देखरेख हाईकोर्ट प्रशासन का ही था तो ऐसी स्थिति बन गई कि आज शिकायतें ही शिकायतें हो रही हैं। मुझे पता नहीं अन्य राज्यों में क्या हो रहा है, अन्य राज्यों में भी अगर सब जगह जुडिशरी वाले खुद बना रहे हैं, तो कोई दिक्कत तो नहीं है। यहां पर भी अगर मान लो वो सिस्टम ठीक है, तो हम स्वागत करेंगे। तो मेरा मानना है कि प्रशासनिक काम सरकार का डिपार्टमेंट देखे। उनकी जिम्मेदारी फिक्स हो, तो ये स्थिति नहीं बने। दुख होता है कि नई बिल्डिंग है और ऐसी स्थिति बन जाती है
Ashok Gehlot36,007 просмотров • 4 дней назад

यह खड़गे साहब वाला मामला था, अब आप बताइए, हल्द्वानी गए थे वो। मैं आज नहीं, बचपन से कहता हूँ मानवता पर कलंक कहता हूँ मैं। मैं बचपन से कहता हूँ मीटिंगों के अंदर, एक मनुष्य जो है, दूसरे मनुष्य के साथ में छुआछूत रखे, इससे बड़ा कलंक नहीं हो सकता, यह मानवता पे कलंक है। ह्यूमैनिटी पे कलंक है ही यह, और है देश के अंदर। जातियाँ अलग, धर्म अलग, गोत्र अलग, सब बातें हैं। पर छुआछूत तो नहीं होनी चाहिए ना? वो छुआछूत होती है। अब आप बताइए, अगर मल्लिकार्जुन खड़गे साहब, जो कांग्रेस प्रेसिडेंट हैं, वो गए वहाँ पे तो उसके बाद में उस स्थान को गंगाजल छिड़क करके, हवन करके, शुद्धिकरण किया जाने का यह अप्रोच रखी गई, तो खड़गे साहब ने हाउस के अंदर कहा , "मैं शेड्यूल कास्ट का हूँ, दलित हूँ, मैंने आज तक दलित के नाम पे कभी कोई चीज़ नहीं माँगी है।" यह जो कुछ भी इन्होंने किया मेरे जाने के बाद में, यह मेरे को नहीं बल्कि देश के तमाम दलितों की भावनाओं को ठेस पहुँची है, कांग्रेस पार्टी को भी पहुँची है, और लाइक-माइंडेड लोग जो हैं, कोई पार्टी के हों, हो सकता है आरएसएस और बीजेपी के भी हों, वो भी उनमें भी ऐसे लोग होंगे जो कहेंगे यह गलत तरीका है। तो कहने का मतलब है कि खड़गे साहब ने खुल के बात करी। ऐसे लोगों की मैं निंदा करना चाहता हूँ । पर दुख इस बात का है, वही बात फिर आती है, पहले पार्लियामेंट में देखते थे कि कोई क्वेश्चन लगा हुआ किसी मंत्री का है, मंत्री गैलरी तक आ गया और उसको लगा कि मेरा क्वेश्चन आ गया है, आने वाला है, आ गया है, अनाउंस हो गया है वो भाग के आता अंदर, सांस फूलता था उसका, और सॉरी फील करता चेयर से पहले वो, और फिर वो जवाब उत्तर देता। सब परंपराएँ खत्म। मोदी जी और अमित शाह जी अभी 19 दिन तक नहीं आए हाउस के अंदर। विपक्ष के नेता और माँग करते रहे बुलाने की। मैंने क्या कहा आपको? नाम सुन लेते थे कि नाम आने वाला है हाउस के अंदर, दौड़ के आते थे। कोई घटना-दुर्घटना देश के किसी भाग में हो गई, किसी भाग में हो गई और गंभीर घटना होती थी, तो सुओ मोटो स्टेटमेंट गृह मंत्री देते थे। तमाम परंपराएँ खत्म कर दीं इन्होंने। और वही बात आती है इसके लिए भी, नड्डा साहब जो हैं, जेपी नड्डा साहब नेता हैं उसके राज्यसभा के, खड़गे साहब जब बोले तो उन्होंने खड़े होकर कहा, "मैं इसको गंभीरता से लेता हूँ, हमारा कोई संबंध नहीं, पूरी जाँच करूँगा और सजा दिलवाएँगे।" जो भी उन्होंने कहा, एक्सएक्ट वर्ड तो मुझे याद नहीं। आप मुझे बताइए, उन बात को एक महीने से अधिक निकल गए। तो हम पूछना चाहते हैं दो-चार क्वेश्चन मेरे हैं। एक तो अभी तक भी उत्तराखंड पुलिस तत्काल एफआईआर दर्ज क्यों नहीं करी? तत्काल एफआईआर दर्ज करे। उपलब्ध जो वीडियो हैं, सोशल मीडिया पोस्ट्स हैं और आयोजकों के सार्वजनिक बयान क्या आए हैं, उसकी जाँच हो। एससी/एसटी एक्ट जो है, नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम तथा अन्य लागू कानूनी प्रावधानों की क्या-क्या उनके ऊपर लग सकता है, उसमें वो कार्रवाई करें। आयोजन करने वाले व्यक्तियों और संगठन की पहचान उनकी सार्वजनिक की जाए कि यह लोगों ने इस काम को किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर धामी साहब जो हैं, उनको समयबद्ध जाँच की घोषणा करनी चाहिए। जेपी नड्डा साहब बताएँ कि उनके राज्यसभा में दिए गए आश्वासन पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और प्रधानमंत्री जी, मोदी जी को, नरेंद्र मोदी जी को खुद को इस घटना की स्पष्ट शब्दों में निंदा करनी चाहिए और दलित समाज को पूरे देश भर के अंदर आश्वस्त करना चाहिए कि संविधान के साथ में किसी को भी खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा, यह हमारी माँग है। अब आप बता दीजिए इसमें क्या बुरा है? उल्टा चोर कोतवाल को डांटे! राहुल गांधी जी को सपोर्ट करेंगे, जैसे मैं बोल रहा हूँ आपके सामने। कल मेरे खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कर दें कि आपने अहमदाबाद में यह बातें बोली थीं। राहुल गांधी जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करी, यही तो कहा जो मैं बोल रहा हूँ और राहुल जी के खिलाफ में एफआईआर दर्ज भी हो गई वहाँ। जिनके खिलाफ दर्ज होनी थी जेपी नड्डा साहब के आश्वासन के बाद में, वो तो नहीं हुई, और राहुल गांधी के खिलाफ कर दी! तानाशाही प्रवृत्ति है इनकी, यह देश को तानाशाही की तरफ ले जाना चाहते हैं। इसीलिए ज्यूडिशियरी दबाव में है, इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया दबाव में है, ईडी, इनकम टैक्स, सीबीआई दबाव में है और ऐसी हरकतें कर रहे हैं जैसे यह आपकी सेंसस करवा रहे हैं, उसकी विधि भी गलत पकड़ ली इन्होंने। आप बताइए कि आप क्या चाहते हो देश के लिए? 29 लाख वोट बंगाल के अंदर सही थे, प्रोसेस पूरा नहीं कर पाए ज्यूडिशियरी, जो बैठाए थे उन्होंने जजेज को, तो यह कह दिया गया कि यह 29 लाख वोट या 27 लाख वोट जो भी थे, इस बार नहीं अगली बार वोट दे देंगे।
Ashok Gehlot54,631 просмотров • 8 дней назад

"जातिगत जनगणना के नाम पर गलत प्रणाली अपना रही है सरकार" पत्रकार: जातिगत जनगणना एक बड़ा मुद्दा है। कल आप अहमदाबाद में भी थे, इस पर लगातार चर्चा हो रही है... जवाब: इस विषय पर मैं पहले ही विस्तार से अपनी बात रख चुका हूं। दरअसल, जातिगत जनगणना को लेकर इस सरकार की नीयत साफ नहीं है। वरना जो सिस्टम प्रणाली इन्होंने अपनाई है, वह गलत प्रणाली है। SECC (सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना) का एक सर्वे हुआ था यूपीए गवर्नमेंट के वक्त में। हर घर-घर में गए, स्पेलिंग गलत लिखाई तो वो भी एक जाति हो गई। G-E-H-L-O-T मेरे नाम की स्पेलिंग मैं लिखता हूं, किसी ने G-A-H-L-O-T लिख दिया तो वो दो जाति हो गईं, गोत्र अलग हो गए। तो 46 लाख जातियां हो गईं। तो वो फिर जो डॉक्यूमेंट हैं, वो अब दबे पड़े हैं। SECC के डॉक्यूमेंट कोई काम नहीं आए। काम मोदी जी ने लिया उनको। मोदी जी ने पूरे देश में यह भ्रम फैला दिया कि वे सबको 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा दे रहे हैं, जो बिल्कुल गलत है। यह बीमा सबको नहीं, बल्कि सिर्फ उन लोगों को मिल रहा है जो SECC के डेटा में शामिल थे। हमारी भोली-भाली जनता इनके बहकावे में आ जाती है। लेकिन अब लोगों का भ्रम टूट चुका है। अब जनता समझ गई है कि ये लोग असत्य बोलते हैं और सिर्फ झूठे वादे करते हैं। ना हर साल दो करोड़ नौकरियां मिलीं, ना अच्छे दिन आए, ना किसानों की आय दुगनी हुई, ना काला धन वापस आया और ना ही खातों में 15 लाख रुपये आए। ये लोग अब जनता के सामने पूरी तरह एक्सपोज़ हो चुके हैं और आगामी चुनावों में ये सारी बातें प्रमुखता से उठेंगी। (मीडिया से बातचीत: जयपुर, 06.09.2026)
Ashok Gehlot26,095 просмотров • 7 дней назад

"बिना पैसे दिए सरकार में कोई काम नहीं हो रहा, विकास पूरी तरह ठप है, स्थानीय चुनावों में जनता देगी जवाब" पत्रकार: ये सरकार अपने ढाई साल और आपके पांच साल के कार्यकाल की तुलना कर रही है, इस पर आपका क्या कहना है? जवाब: मेरे पिछले जवाब में ही इसका उत्तर आ गया है। ये अपनी तुलना करते रहें, लेकिन लोकतंत्र में असली जवाब जनता ही देती है। अगर जनता इस कुशासन के बावजूद इन्हें जिताती है, तो यही स्थिति आगे भी बनी रहेगी और लोग परेशान होते रहेंगे। आज हर गांव और हर परिवार दुखी है। बिना पैसे दिए कोई काम नहीं होता और विकास पूरी तरह ठप पड़ा है। हमारी अन्नपूर्णा जैसी योजनाएं बंद कर दी गई हैं, और अब लोग खाली थैले लेकर घूम रहे हैं। मैं बार-बार कह चुका हूं कि भले ही योजनाओं से मेरी फोटो हटा दें, लेकिन जनता की भलाई की स्कीमें बंद क्यों कर रहे हैं? जनता इस बात को भली-भांति समझ रही है। लोगों को समय पर पेंशन नहीं मिल रही है। मैंने पेंशन बढ़ाकर ₹3000 करने की मांग की थी जिसमें आधा पैसा केंद्र और आधा राज्य दे, क्योंकि केंद्र अभी सिर्फ ₹300 देता है लेकिन सरकार की तरफ से इस पर कोई जवाब नहीं आया। सत्ता में बैठे इन लोगों को जब तक इन चुनावों में करारा झटका नहीं लगेगा, ये कोई काम नहीं करेंगे। विपक्ष में होने के नाते यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम सरकार पर इतना दबाव बनाएं कि वे मजबूर होकर जनता के हित में काम करने की सोच पैदा करें। (मीडिया से बातचीत, जयपुर, 06.09.2026)
Ashok Gehlot25,920 просмотров • 7 дней назад

पत्रकार: सर, आरएसएस के जो साप्ताहिक मुखपत्र है 'ऑर्गेनाइजर', उसने हाल ही में एक जो लेख छापा था उसमें जो यूपीए सरकार के समय जो सोनिया गांधी जी की अध्यक्षता में नेशनल एडवाइजरी कमेटी थी, उसको दिमागी नक्सल बताया है। उसको किस तरह देखते हैं आप? जवाब: देखिए, वो मुझे लगता है वो खुद ही नक्सली सोच वाले लोग होंगे। आज़ादी मिलते ही इन्होंने संविधान का विरोध किया था। संविधान का विरोध करने वाले लोग हैं ये। और मनुस्मृति की बात करने लग गए थे उस ज़माने के अंदर। आज़ादी मिलते ही वही 'ऑर्गेनाइजर' अख़बार है जिसकी कोई क्रेडिबिलिटी नहीं है। और जिस प्रकार वो एनएसी के लोगों को, नेशनल एडवाइजरी कमेटी जो यूपीए गवर्नमेंट वक्त में थी, सोनिया गांधी जी चेयरपर्सन थीं उसकी। और कई एक्टिविस्ट भी उसके अंदर थे जिन्होंने क्रांतिकारी काम किए। आरटीई, राइट टू एजुकेशन, फूड सिक्योरिटी एक्ट, एक के बाद एक जो एक्ट बनाया देश के अंदर। शिक्षा का अधिकार मिला हो, सूचना का अधिकार मिला हो, खाद्य सामग्री का अधिकार मिला हो। अधिकार आधारित युग की शुरुआत करी उन्होंने, सोनिया जी ने। उनको कहते हैं ये दिमागी नक्सलियों का अड्डा था वो! ये कहते हैं 'ऑर्गेनाइजर' कहता है। और 15 अगस्त को प्रधानमंत्री जी ने निसंकोच वही काम लिया जो ये ले रहे हैं 'ऑर्गेनाइजर' अख़बार वाले कह रहे हैं। तो इनमें कोई दम नहीं है, लोग समझते हैं। लोग समझते हैं कि किस रूप में सोनिया गांधी जी ने जो जिस प्रकार से कॉन्ट्रिब्यूट किया है देश के अंदर हर क्षेत्र में, सोशल सिक्योरिटी के अंदर। आज हम जो यहां प्रेरणा लेते हैं, आज राजस्थान में कांग्रेस सरकार ने जो इतिहास बनाया है अपना सोशल सिक्योरिटी के अंदर पूरे देश में चर्चा हो रही है, उसकी प्रेरणा ही हमने सोनिया गांधी जी से ली होगी, उनसे ली होगी। जिस प्रकार से उन्होंने कार्यक्रम चलाए थे उस ज़माने के अंदर। आज 22-23 साल से देख रहा हूं मैं। तो इसलिए ये इस प्रकार जो ये अख़बार है आपका, साप्ताहिक अख़बार है ये 'ऑर्गेनाइजर', उसकी कोई क्रेडिबिलिटी मैं नहीं मानता।
Ashok Gehlot51,795 просмотров • 15 дней назад

"बढ़ती मंहगाई से राहत के लिए अन्नपूर्णा राशन किट पुनः शुरू करे सरकार" भाजपा सरकार की गलत नीतियों ने आम आदमी से चीनी और गुड़ की मिठास और प्याज का तीखापन दोनों छीन लिए हैं। "अच्छे दिन" और महंगाई कम करने के बड़े-बड़े वादे करने वाली सरकार के राज में आज रसोई का हर सामान आम आदमी की पहुंच से बाहर होता जा रहा है। यह सिर्फ महंगाई नहीं, आम आदमी की थाली पर सुनियोजित डाका है। यह तो बस महंगाई बढ़ने की शुरुआत भर है। देशभर में कमजोर मानसून के कारण कहीं ऐसा न हो कि महंगाई और बढ़ जाए। गरीब और मध्यम वर्ग को इस महंगाई से राहत देने के लिए भाजपा सरकार को राजनीतिक प्रतिशोध छोड़कर कांग्रेस सरकार के दौरान प्रदेश में चलाई गई दाल, नमक, चीनी, खाद्य तेल, मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर, हल्दी पाउडर आदि देने वाली अन्नपूर्णा राशन किट योजना को पुनः शुरू करना चाहिए, जिससे इस अल्पआय वर्ग को राहत मिल सके। यही जनभावना है।
Ashok Gehlot57,286 просмотров • 18 дней назад

पेंशन स्वत: बढ़ने जैसे सामजिक सुरक्षा के अनेक फैसले किए : सामाजिक न्याय मिले, इसलिए हमने महँगाई राहत शिविर लगाए। सब काम किए हमने। ग्रामीण ओलंपिक खेल शुरू किए, बुज़ुर्ग, बूढ़े, औरतें सबने भाग लिया खेलों के अंदर भी। महँगाई राहत शिविरों में आप बताइए, बिजली के 100 यूनिट माफ़ कर दिए हमने किसानों को, कितने ख़ुश हुए किसान! बिजली की मार बहुत भारी पड़ती थी, जो रामलाल जी बता रहे थे आपको। किसानों को 1000 यूनिट फ़्री कर दी बिजली हम लोगों ने। तो हर वर्ग का हमने ध्यान रखा उस ज़माने के अंदर और इसीलिए गाँव में पेंशन थी बुज़ुर्गों की, बूढ़े लोगों की, बूढ़ी औरतों की, विधवाओं की, एकल नारी की, निःशक्तजनों की। पेंशन ₹500, ₹1000, ₹1500 तक बढ़ाते गए और फिर क़ानून पास कर दिया सरकार किसी की भी हो, ऑटोमैटिक 15% पेंशन बढ़ेगी ही बढ़ेगी। यह भी फैसला मैने किया । और यह पेंशन 4-4, 5-5 महीने से दे नहीं पा रहे हैं, हाल आप देख रहे हो। अरे और तो और, जो मर गया एक्सीडेंट में, मैंने ₹5 लाख किए, दो मर गए परिवार के तो ₹10 लाख किए। 2,500 लोगों के पैसे बकाया हैं राजस्थान के अंदर। अरे जो मर गया बेचारा गरीब, क्या ग़रीबी है उस घर की, उसको देखो कम से कम। उसको आप ₹5 लाख जो सैंक्शन कर दिया आपने, वो भी नहीं दे पा रहे हो आप लोग! तो अब लिस्ट तो लंबी है कि मैं क्या काम गिनाऊँ आपको। मुझसे ज़्यादा तो यह जानते हैं आपके रामलाल जी। आप ख़ुद जानते हो, हम तो भूल जाते हैं क्योंकि 100, 200, 300, 400 काम किए होंगे। मैं कहीं जाता हूँ दौरे में, कहीं रुक जाती है मेरी गाड़ी, गाँव वाले इकट्ठे हो जाते हैं, तो मुझे वह ऐसी-ऐसी बातें बताते हैं जो मैं भूल गया हूँ। आप सोच सकते हो कि क्या-क्या हमने नहीं किया। गाँव में अंग्रेजी स्कूल खोल दीं, बच्चों का भविष्य बहुत बदल जाए। हमारे बच्चे गाँव तक ही सीमित क्यों रहें? इंग्लिश पढ़ाना आवश्यक है आज के ज़माने में। मोबाइल फोन आ गए। अरे मैं मोबाइल फोन दे रहा था महिलाओं को, यह हमारी बहनें बैठी होंगी, किसी को मिला होगा। मैं सब महिलाओं को देने वाला था मोबाइल फोन, जो ₹6,000-₹7,000 का था। चुनाव डिक्लेयर हो गए, रोक दिया। यह भेदभाव है। इलेक्शन कमीशन ने रोक दिया। अभी बिहार में चुनाव हो रहे थे, बीजेपी का राज था वहाँ पर, परसों पोलिंग है, वोट पड़ेंगे परसों, आज महिलाओं के खाते में ₹10,000 जा रहे हैं वहाँ पर, उनको रोक नहीं रहे हैं वो लोग और मेरा स्मार्ट फ़ोन था राजस्थान में, रोक दिया यहाँ पर। स्थान- जन आक्रोश यात्रा महारैली, प्रतापगढ़. 30 अगस्त 2026.
Ashok Gehlot37,909 просмотров • 12 дней назад

कांग्रेस प्रेसिडेंट श्री मल्लिकार्जुन खरगे का अपमान किए जाने तथा भाजपा सरकार द्वारा कार्रवाई न करने को लेकर पूछे सवाल का उत्तर : यह देश की गंभीर घटना है। कांग्रेस प्रेसिडेंट के साथ में ऐसा हो सकता है, आप कल्पना कीजिए पूरे देश के अंदर दलित वर्ग के साथ में क्या हो रहा होगा? यह हम जानते हैं। इनके शासन में जो लापरवाही हो रही है उससे वह बढ़ गया है। यह मैं नहीं कहता कभी हुआ ही नहीं, पहली बार इशू हुआ है। यह घटनाएं, अन्याय, अत्याचार, उत्पीड़न की होती रही हैं, परंतु जो यह घटना हुई है खरगे साहब वाली, उसको पूरे देश में जो वर्ग है, दलित वर्ग है, पिछड़े वर्ग हैं, आदिवासी हैं या गरीब आदमी कोई हो, जिसको पीड़ा है, दलित वर्ग के प्रति हमदर्दी है, संवेदनशीलता रखती है सरकारें हों चाहे वह कोई आदमी हो, देशवासी हो, उसको बहुत दर्द हुआ है। अभी वह समझ नहीं पा रहा है कि यह इतनी हिम्मत और हिमाकत कैसे कर ली? जहाँ तक सवाल है कि राज्यसभा के अंदर जब मुद्दा उठाया खरगे साहब ने, तो उन्होंने यह भी कहा कि 'मैंने ज़िंदगी बिता दी है, कभी मैंने शेड्यूल कास्ट के नाम से कोई चीज़ नहीं माँगी है। पर यह अपमान मेरा नहीं है, यह अपमान पूरे देश के दलितों का है, इसलिए मैं पीड़ा के साथ में यह बात उठा रहा हूँ।' जे.पी. नड्डा साहब ने खड़े होकर कहा, जो वहाँ पे लीडर भी हैं हाउस के, कि 'इसको मैं गंभीरता से लेता हूँ और इसमें हम कार्रवाई करेंगे।' फिर खरगे साहब को, राहुल गांधी जी को पत्र लिखना पड़ा। खरगे साहब बार-बार रिमाइंड करवा रहे हैं, हम सब रिमाइंड करवा रहे हैं नेता लोग, जितने कांग्रेस के हैं कि भाई नड्डा साहब का हाउस में आश्वासन कोई मामूली बात नहीं होती है। हाउस में आश्वासन देना ही अपने आप में बहुत बड़ी बात होती है। तो नड्डा साहब जब बोले थे तो सबने लाइक किया था और उम्मीद की थी कि अब यह कुछ कार्रवाई करेंगे। उत्तराखंड सरकार जो बीजेपी की है उसको कहेंगे, अविलंब कार्रवाई होगी, लोग अरेस्ट होंगे, मुकदमे दर्ज होंगे और लोग अरेस्ट होंगे, कुछ भी नहीं हुआ, कुछ भी नहीं हुआ। इसका दर्द हम सबको है, देशवासियों को है, बहुत भयंकर आक्रोश है। अब अगर बीजेपी की सरकार, एनडीए गवर्नमेंट नहीं समझ पा रही है तो टाइम पे लोग समझा देंगे उनको, यह मेरा मानना है।
Ashok Gehlot26,034 просмотров • 8 дней назад