
Kalamshala
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साहित्य, समाज और संस्कृति.....
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मन न मिला तो कैसा नाता चला अकेला ठोकर खाता - कृष्ण मुरारी पहारिया ❤️🌻
Kalamshala104,663 görüntüleme • 1 yıl önce

हमने भी सोकर देखा है नए-पुराने शहरों में जैसा भी है अपने घर का बिस्तर अच्छा लगता है। . निदा फ़ाज़ली ❤️🌻
Kalamshala53,404 görüntüleme • 1 yıl önce

अँधेरों की सभा में सर उठाना सीख जाते हैं, दियों को बस जला दो, झिलमिलाना सीख जाते हैं वो ये भी सीख जाते हैं, सफ़र कैसे किया जाए, क़दम जो राह पर आगे बढ़ाना सीख जाते हैं किसी तालीम के मोहताज होते हैं नहीं पौधे, वो खुद मिट्टी में अपनी जड़ जमाना सीख जाते है अशोक रावत ✨
Kalamshala21,814 görüntüleme • 5 ay önce

जिन मुश्किलों में मुस्कुराना हो मना, उन मुश्किलों में मुस्कुराना धर्म है। . गोपालदास "नीरज" ❤️🌻
Kalamshala40,644 görüntüleme • 1 yıl önce

कहाँ की दोस्ती किन दोस्तों की बात करते हो मियाँ दुश्मन नहीं मिलता कोई अब तो ठिकाने का वसीम बरेलवी 🌻
Kalamshala31,585 görüntüleme • 1 yıl önce

मोड़ था कैसा तुझे था खोने वाला मैं रो ही पड़ा हूँ कभी न रोने वाला मैं . राजेन्द्र मनचंदा बानी 🌻
Kalamshala25,229 görüntüleme • 1 yıl önce

नौकरी माँगने वालों से माँगा जाएगा भरपूर नींद लेने का प्रमाण-पत्र...
Kalamshala17,461 görüntüleme • 1 yıl önce
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