
Prakhar Shrivastava
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"एक दुखियारी माँ का श्राप" आज डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि है... कश्मीर की तत्कालीन शेख अब्दुल्ला सरकार की कैद में डॉ. मुखर्जी की रहस्यमयी मौत हो गई थी... नेहरू सरकार पर भी आरोप लगे थे... लेकिन कोई जांच न हुई... श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मां जोगमाया देवी ने अपने बेटे की रहस्यमयी मौत के बाद नेहरू को जो पत्र लिखा था उसे आज विशेष तौर पर पढ़ा जाना चाहिए... क्योंकि इस पत्र में एक मां का करुण क्रंदन है... एक प्रतिज्ञा है... और एक “श्राप” भी है… "नेहरू जी, मैंने अपने बेटे की रहस्यमयी मृत्यु पर एक निष्पक्ष जांच की मांग की थी ना कि आपका कोई निष्कर्ष मांगा था। आखिर आपको एक खुली और निष्पक्ष जांच से दिक्कत क्या है? मेरे पास पक्के सबूत हैं जिनसे काफी कुछ साबित हो सकता है। लेकिन आपने उन्हें जानने या समझने की कोई कोशिश नहीं की। आप सबूतों का सामना करने से डरते हैं। मैं जम्मू कश्मीर की सरकार को अपने बेटे की मौत का जिम्मेदार मानती हूं और ये आरोप भी लगाती हूं कि आपकी सरकार भी इसमें शामिल थी। मैं चाहती हूं कि भारत के लोगों को पता चले कि इस दुखद घटना के असली कारण क्या हैं, जिसे एक "स्वतंत्र देश" में अंजाम दिया गया और जिसमें आपकी सरकार ने भी एक भूमिका अदा की। लेकिन एक दिन सच सामने आएगा, एक दिन आपको भारत के लोगों को और स्वर्ग में भगवान को भी जवाब देना होगा।" - जोगमाया देवी (डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मां) दिनांक - 9 जुलाई 1953
Prakhar Shrivastava21,046 görüntüleme • 3 gün önce

"बंगाल का कसाई, नेहरू का भाई!" क्या आपको पता है कि आजादी के बाद नेहरू ने बंगाल के कसाई सुहरावर्दी का 50 लाख का इनकम टैक्स माफ कर दिया। कैसे हिंदुओं के "भक्षक" के "रक्षक" बने थे नेहरू? आज कोलकाता के सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर गोपाल मुखर्जी मार्ग कर दिया गया है। ये तो सब जानते हैं कि 16 अगस्त 1946 के डायरेक्ट एक्शन डे में सुहरावर्दी ने कैसे हिंदुओं का नरसंहार करवाया था... लेकिन भारत की आजादीके बाद सुहरावर्दी कहां गया और उसका क्या हुआ... ये कोई नहीं जानता... तो सुनिए... आजादी के बाद सुहरावर्दी पाकिस्तान नहीं गया, भारत में ही रहा... उसने गांधी और नेहरू का दामन थाम लिया... वो बदला नहीं था, बल्कि वो कोलकाता में अपने बिजनेस को बचाना चाहता था... आखिरकार नेहरू ने दिसंबर 1948 में सुहरावर्दी का 50 लाख रुपये का टैक्स माफ करवा दिया... बस फिर क्या था... मार्च 1949 पाकिस्तान चला गया और 1956 में जाकर पाकिस्तान का प्रधानमंत्री भी बन गया...
Prakhar Shrivastava16,577 görüntüleme • 5 gün önce

बड़ा खुलासा... गोपाल पाठा ने जब बचाई गांधीजी की जान... कैसे दी थी उन्हें सुरक्षा...!!! आज विपक्ष के कई नेता गोपाल पाठा के नाम पर सड़क किये जाने का विरोध कर रहे हैं... लेकिन उन्हें ये पता होना चाहिए कि गोपाल पाठा ने न केवल हिंदुओं की रक्षा की... बल्कि समय आने पर एक साल बाद यानी अगस्त 1947 में गांधीजी को भी सुरक्षा दी थी... वो भी स्टेनगन के साथ... और हां... गांधीजी ने लिखित में गोपाल पाठा को हथियारों के साथ सुरक्षा देने की अनुमति दी थी... ऐसे में गांधी की अहिंसा पर रिसर्च कर रहे लोगों को इस घटना को जानने के बाद ही अपने कोई विचार बनाना चाहिए... #Kolkata #WestBengal #GopalPatha #GopalMukherjee #BengalHistory #DirectActionDay #PooraSachOnDD
Prakhar Shrivastava12,569 görüntüleme • 4 gün önce

जो नेहरू नहीं कर पाए... वो आज के कांग्रेसी क्या खाक कर लेंगे? RSS के खिलाफ तीन नेताओं ने मोर्चा खोल दिया है... प्रियांक खड़गे, वीडी सतीशन और गहलोत जी तीनों आरएसएस के खिलाफ लगे पड़े हैं... यही दुस्साहस नेहरू ने भी किया था... वो अपने पत्रों में संघ को खतरा बताते थे, लेकिन जिन्ना की मुस्लिम लीग को क्लीन चिट देते थे... कांग्रेस का ये मुस्लिम लीग वाला प्यार आज भी केरल में दिखता है... केरल के सीएम नाराज़ हैं कि तीन वाइस चांसलर्स संघ के कार्यक्रम में क्यों गये... बोल रहे हैं कि इन तीनों को माफी मांगना चाहिए... कुछ ऐसा ही नेहरू भी करते थे... एक बार सर्वपल्ली राधाकृष्णन (जो बाद में राष्ट्रपति बने) संघ की शाखा में चले गये थे... तब नेहरू उनसे नाराज हो गये थे... और पत्र लिखकर बोले कि “हमारी समस्या यह नहीं है कि पाकिस्तान क्या करता है… बल्कि हमारी समस्या यह है कि हमारे अपने बहुत से लोग क्या करते हैं।”... यानी नेहरू की नज़र में पाकिस्तान से भी खतरनाक था संघ!!! नेहरू तो गांधी की हत्या से एक महीने पहले से ही संघ के खिलाफ प्लानिंग और प्लॉटिंग में जुट गये थे... हत्या हुई तो मौका हाथ लग गया... प्रतिबंध लगा दिया... लेकिन साबित कुछ नहीं हुआ... नतीजा संघ का कुछ नहीं बिगाड़ पाये... संघ 100 वर्ष का हो गया... कांग्रेस चार राज्यों में सिमट गई... अब आप बताइये जो दुरुह कार्य नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी नहीं कर पाये... क्या वो ये तीन लोग कर पाएंगे?
Prakhar Shrivastava22,034 görüntüleme • 10 gün önce

सच यही है कि 1947 में नेहरू 'इलेक्टेड' प्राइम मिनिस्टर नहीं बल्कि 'एक्सीडेंटल' प्राइम मिनिस्टर थे... इसीलिए उनका असली कार्यकाल 1952 से ही माना जाना चाहिए... वीडियो में कही गई बातों का स्रोत निम्नलिखित हैं :- 1. सरदार पटेल: एक समर्पित जीवन, राजमोहन गांधी, पृष्ठः 378 to 381 2. गांधी हिज लाइफ ऐंड थॉट्स, आचार्य कृपलानी, पृष्ठः 248 to 251 3. सेलेक्टेड वर्क्स ऑफ जवाहर लाल नेहरू, सीरीज 2, खंड 15, पृ. 457 4. संपूर्ण गांधी वांग्मय, खंड 84, पृष्ठ 408 5. सरदार पटेल्स कॉरेस्पॉन्डेंट, वॉ. 10, पृ. 38 6. सरदार पटेल्स कॉरेस्पॉन्डेंस, वॉ. 3, पृ. 153 7. आजादी की कहानी, मौलाना आजाद, पृष्ठः 146 8. इंडिया फ्रॉम कर्जन टू नेहरू एंड आफ्टर, दुर्गा दास, पृ. 237
Prakhar Shrivastava26,333 görüntüleme • 15 gün önce

कभी सोचा भी नहीं था कि मेरी पुस्तक 'हे राम' को अन्नू कपूर जैसे महान कलाकार इतने दिल से पढ़ेंगे... उनकी यह भावनात्मक प्रतिक्रिया मेरे लिए सिर्फ एक प्रशंसा नहीं, बल्कि मेरी लेखन-यात्रा का सबसे अनमोल क्षण है। किसी भी लेखक के लिए पुरस्कार या सम्मान से भी बड़ा सुख यह है कि उसके शब्द किसी संवेदनशील आत्मा के हृदय तक पहुंचें... आज, जब अन्नू कपूर जी ने 'हे राम' की सराहना की, तो लगा जैसे मेरी साधना पूरी तरह से सफल हो गई है। इन चंद पलों को आभार और विनम्रता के साथ आप सबसे साझा कर रहा हूँ। 🙏 #HeyRam #AnnuKapoor #Gratitude #Jansabha Jansabha जनसभा #Spandan #conclave2025 Rana Yashwant #Gandhi #Godse #गांधी #गोडसे
Prakhar Shrivastava118,430 görüntüleme • 8 ay önce

1942 का भारत छोड़ो आंदोलन तो सुपर-डुपर फ्लॉप था !!! वो तो कुटिल वामपंथी इतिहासकारों ने इस आंदोलन को आज़ादी दिलवाने का झूठा श्रेय दे दिया !!! क्योंकि वो नहीं चाहते थे कि इस देश में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आज़ाद हिंद फौज के योगदान को याद रखा जाये !!! स्थान - नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, भोपाल (म.प्र.) आयोजक - द यंग थिंकर्स फोरम Young Thinkers' Forum Amitabh Soni
Prakhar Shrivastava307,171 görüntüleme • 2 yıl önce

बॉलीवुड के "रहीम चाचा सिंड्रोम" का 'पूरा सच' !!! दीवार फ़िल्म के विजय को 786 से प्यार है... लेकिन भगवान शंकर से तकरार है !!! विजय कैसा नास्तिक है... भगवान को नहीं मानता, लेकिन 786 को सर आंखों रखता है !!! अन्नू कपूर ने सही कहा है इस बॉलीवुड के बारे में। #PooraSach
Prakhar Shrivastava210,346 görüntüleme • 1 yıl önce

उसके अब्बा जान 'तुर्किकी'... उसकी अम्मी जान 'ईरानी'... फिर भी हामिद अंसारी को 'गजनी' लगे हिंदुस्तानी !!! हामिद अंसारी 1961 में IFS बने थे, उस दौर में पीएम नेहरू खुद IFS अधिकारियों का चयन करते थे... तो माना जा सकता है हामिद अंसारी भी 'नेहरू कोटे' की भर्ती थे... जाहिर है उनका इतिहासबोध भी नेहरू की तरह ही होगा... नेहरू ने भी डिस्कवरी ऑफ इंडिया में महमूद गजनी को बचाने का पूरा प्रयास किया है। #HamidAnsari #Poora_Sach
Prakhar Shrivastava63,326 görüntüleme • 4 ay önce

वो 2002 के गुजरात दंगे से लेकर... 2023 के नूह दंगों तक... वो हर दंगे में एजेंडे के साथ एकतरफा रिपोर्टिंग करता रहा... अब जब उसका एजेंडा बेनकाब हो गया है तो वो कुंठित "गिद्ध" मिडिल क्लास को सांप्रदायिक बता रहा है... इस गिद्ध का असली सच, मैने 2020 में खजुराहो लिट्रेचर फेस्टिवल में बताया था... #VultureReporter #NuhViolence #Mewatviolence #HindusUnderAttack #PlannedAttackOnHindu
Prakhar Shrivastava326,647 görüntüleme • 2 yıl önce

आज 3 जून है... आज ही के दिन 1947 में भारत के बंटवारे की घोषणा की गई थी... जिसे रेडियो पर माउंटबेटन, नेहरू और जिन्ना ने पढ़कर सुनाया था... लेकिन बड़ा सवाल ये है कि विभाजन का विरोध करने वाले ये कांग्रेस के नेता इस पर सहमत कैसे हो गए... दरअसल इसका खुलासा खुद नेहरू ने एक इंटरव्यू में 1960 में किया था... जानने के लिए देखिए ये वीडियो
Prakhar Shrivastava11,842 görüntüleme • 23 gün önce

आज जिस तरह से इज़राइल ईरान के न्यूक्लियर प्लांट्स को तबाह कर रहा है... ठीक उसी तरह उसने 80 के दशक की शुरुआत में भारत की मदद से पाकिस्तान के परमाणु सयंत्र पर हमला करने का पूरा प्लान बनाया था... लेकिन भारत आखिरी समय में पीछे हट गया और इज़राइल पाकिस्तान के कहुटा में बने न्यक्लियर प्लांट को उड़ा नहीं पाया... #पूरा_सच #PooraSach #DDNEWS #Iran #IranIsraelConflict #Pakistan
Prakhar Shrivastava107,198 görüntüleme • 1 yıl önce

जिस टीपू सुल्तान ने अपने 8 और 5 साल के बेटों को अंग्रेजो के पास गिरवी रख दिया था... ऐसे ‘सौदेबाज़’ टीपू के बारे में ओवैसी का कहना है कि टीपू सुल्तान ने वीर सावरकर की तरह अंग्रेजों को लव लेटर नहीं लिखे... दरअसल ओवैसी को थर्ड एंग्लो-मैसूर वार के बारे में कुछ पता नहीं है... इस युद्ध में जब अंग्रेज सेना ने टीपू सुल्तान की राजधानी श्रीरंगपट्टनम को घेर लिया था... तब टीपू ने गवर्नर लॉर्ड कॉर्नवालिस को पत्र लिखकर युद्ध रोकने, शांति और संधि करने की गुहार लगाई थी... जिसे अंग्रेजों ने स्वीकार किया... युद्ध के बाद हुई श्रीरंगपट्टनम संधि में टीपू ने बड़े ही शर्मनाक तरीके से समझौता करते हुए अपने दो बेटों को अंग्रेजों के पास गिरवी रख दिया। #TipuSultanControversy #TipuSultan
Prakhar Shrivastava44,134 görüntüleme • 4 ay önce

माँ भारती के सच्चे सपूत... अमर बलिदानी अभिषेक को सहस्त्र प्रणाम... आपने सनातन धर्म और मां-बहिनो की रक्षा के लिए क्षत्रिय धर्म का पालन करते हुए बलिदान दिया और वीरगति को प्राप्त हुए... आपके रक्त की एक-एक बूंद सनातनियों पर ऋण हैं... ये बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा... 🙏🙏🙏 #NuhViolence #HindusUnderAttack #MewatTerrorAttack
Prakhar Shrivastava229,256 görüntüleme • 2 yıl önce

पहले भारत में रहकर पाकिस्तान के लिये वोट डाला...भारत में रहकर पाकिस्तान की नींव रखी... भारत में रहकर देश का बंटवारा करवाया... और फिर पूरी बेशर्मी के साथ यहीं रह गये... सोचिये, पाकिस्तान बनाने के बाद भी पाकिस्तान नहीं गये... और जब पाकिस्तान के पीड़ित हिंदुओं को नागरिकता देने की बात हो रही है तो ये इसमें भी कुछ लोग फच्चर फंसा रहे हैं... ध्यान से देखिये ये वीडियो... और समझिये कैसे 1945-46 के चुनावों में इन्होंने जिन्ना, मुस्लिम लीग और पाकिस्तान के पक्ष में एकतरफा बंपर वोट दिया और जब पाकिस्तान जाने की बारी आई तो सिर्फ और सिर्फ 72 लाख ही पाकिस्तान गये... बाकी यहीं रह गये... ये नारा लगाने के लिये कि – सभी का खून शामिल है यहां कि मिट्टी में !!! इनके कुकर्मों की सज़ा भुगत रहे पाकिस्तान के हिंदुओं को लेकर इन्हें कोई चिंता नहीं है... गज्जब बेशर्मी है !!! #CAA #Pakistan #CitizenshipAmendmentAct Vaad Arihant
Prakhar Shrivastava150,222 görüntüleme • 2 yıl önce

क्या आप सचिन मित्रा को जानते हैं? जिनकी शवयात्रा के मुद्दे पर गांधीजी ने अपनी शवयात्रा को लेकर अपनी इच्छा बताई थी। ये गांधीजी कि वो इच्छा थी, जो गांधीवादियों ने कभी पूरी नहीं की। आजकल डायरेक्ट एक्शन डे और उसके बाद हुई घटनाओं की बड़ी चर्चा हो रही है। ऐसे में ज़रूरी है कि हम सचिन मित्रा के बारे में भी जानें। जिन्होंने गांधीजी की आज्ञा का पालन किया और बदले में मजहबी भीड़ ने उनकी जान ले ली। फिर उसके बाद सचिन मित्रा की शवयात्रा को लेकर गांधीजी ने क्या कहा... ये आज के गांधीवादियों को ज़रूर पता होना चाहिए।
Prakhar Shrivastava55,129 görüntüleme • 9 ay önce

नेहरू से सोनिया तक... सोमनाथ से अयोध्या तक... वही सनातन धर्म और हिंदू पुनरुत्थान से घृणा... पीढ़ियां बदल गईं, लेकिन नेहरू-गांधी परिवार की हिंदू विरोधी सोच नहीं बदली। जैसा कि तय था सोनिया गांधी ने श्रीराम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में शामिल होने से इनकार कर दिया... सोनिया जी नेहरू के ही पदचिन्हों पर चल रही हैं... नेहरू ने भी यही किया था... उन्हें 1951 में सोमनाथ मंदिर की प्राणप्रतिष्ठा में आमंत्रित किया गया था... लेकिन नेहरू ने सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट का अपमान करते हुए इस आमंत्रण को ठुकरा दिया था... नेहरू ने तर्क दिया था कि वो इस हिंदू पुनरुत्थान से बहुत परेशान हैं। सौजन्य - The Jaipur Dialogues Sanjay Dixit ಸಂಜಯ್ ದೀಕ್ಷಿತ್ संजय दीक्षित #Ayodhya #AyodhyaRamTemple #RamMandir #Sonia_Gandhi #Nehru #Somnath #Congress
Prakhar Shrivastava134,739 görüntüleme • 2 yıl önce