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Prakhar Shrivastava

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बॉलीवुड के लीजेंड सिंगर अभिजीत अपनी यात्रा के दौरान ‘हे राम’ पुस्तक पढ़ रहे हैं... उम्मीद करता हूं सर आपको ये पुस्तक अवश्य पसंद आएगी... और हां, पुस्तक पढ़ने के बाद अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दीजिएगा... एक बार फिर आपको धन्यवाद #AbhijeetBhattacharya #Hey_Ram Jansabha जनसभा

बॉलीवुड के लीजेंड सिंगर अभिजीत अपनी यात्रा के दौरान ‘हे राम’ पुस्तक पढ़ रहे हैं... उम्मीद करता हूं सर आपको ये पुस्तक अवश्य पसंद आएगी... और हां, पुस्तक पढ़ने के बाद अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दीजिएगा... एक बार फिर आपको धन्यवाद #AbhijeetBhattacharya #Hey_Ram Jansabha जनसभा

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"एक दुखियारी माँ का श्राप" आज डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि है... कश्मीर की तत्कालीन शेख अब्दुल्ला सरकार की कैद में डॉ. मुखर्जी की रहस्यमयी मौत हो गई थी... नेहरू सरकार पर भी आरोप लगे थे... लेकिन कोई जांच न हुई... श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मां जोगमाया देवी ने अपने बेटे की रहस्यमयी मौत के बाद नेहरू को जो पत्र लिखा था उसे आज विशेष तौर पर पढ़ा जाना चाहिए... क्योंकि इस पत्र में एक मां का करुण क्रंदन है... एक प्रतिज्ञा है... और एक “श्राप” भी है… "नेहरू जी, मैंने अपने बेटे की रहस्यमयी मृत्यु पर एक निष्पक्ष जांच की मांग की थी ना कि आपका कोई निष्कर्ष मांगा था। आखिर आपको एक खुली और निष्पक्ष जांच से दिक्कत क्या है? मेरे पास पक्के सबूत हैं जिनसे काफी कुछ साबित हो सकता है। लेकिन आपने उन्हें जानने या समझने की कोई कोशिश नहीं की। आप सबूतों का सामना करने से डरते हैं। मैं जम्मू कश्मीर की सरकार को अपने बेटे की मौत का जिम्मेदार मानती हूं और ये आरोप भी लगाती हूं कि आपकी सरकार भी इसमें शामिल थी। मैं चाहती हूं कि भारत के लोगों को पता चले कि इस दुखद घटना के असली कारण क्या हैं, जिसे एक "स्वतंत्र देश" में अंजाम दिया गया और जिसमें आपकी सरकार ने भी एक भूमिका अदा की। लेकिन एक दिन सच सामने आएगा, एक दिन आपको भारत के लोगों को और स्वर्ग में भगवान को भी जवाब देना होगा।" - जोगमाया देवी (डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मां) दिनांक - 9 जुलाई 1953

Prakhar Shrivastava

21,046 次观看 • 3 天前

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"बंगाल का कसाई, नेहरू का भाई!" क्या आपको पता है कि आजादी के बाद नेहरू ने बंगाल के कसाई सुहरावर्दी का 50 लाख का इनकम टैक्स माफ कर दिया। कैसे हिंदुओं के "भक्षक" के "रक्षक" बने थे नेहरू? आज कोलकाता के सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर गोपाल मुखर्जी मार्ग कर दिया गया है। ये तो सब जानते हैं कि 16 अगस्त 1946 के डायरेक्ट एक्शन डे में सुहरावर्दी ने कैसे हिंदुओं का नरसंहार करवाया था... लेकिन भारत की आजादीके बाद सुहरावर्दी कहां गया और उसका क्या हुआ... ये कोई नहीं जानता... तो सुनिए... आजादी के बाद सुहरावर्दी पाकिस्तान नहीं गया, भारत में ही रहा... उसने गांधी और नेहरू का दामन थाम लिया... वो बदला नहीं था, बल्कि वो कोलकाता में अपने बिजनेस को बचाना चाहता था... आखिरकार नेहरू ने दिसंबर 1948 में सुहरावर्दी का 50 लाख रुपये का टैक्स माफ करवा दिया... बस फिर क्या था... मार्च 1949 पाकिस्तान चला गया और 1956 में जाकर पाकिस्तान का प्रधानमंत्री भी बन गया...

Prakhar Shrivastava

16,577 次观看 • 5 天前

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जो नेहरू नहीं कर पाए... वो आज के कांग्रेसी क्या खाक कर लेंगे? RSS के खिलाफ तीन नेताओं ने मोर्चा खोल दिया है... प्रियांक खड़गे, वीडी सतीशन और गहलोत जी तीनों आरएसएस के खिलाफ लगे पड़े हैं... यही दुस्साहस नेहरू ने भी किया था... वो अपने पत्रों में संघ को खतरा बताते थे, लेकिन जिन्ना की मुस्लिम लीग को क्लीन चिट देते थे... कांग्रेस का ये मुस्लिम लीग वाला प्यार आज भी केरल में दिखता है... केरल के सीएम नाराज़ हैं कि तीन वाइस चांसलर्स संघ के कार्यक्रम में क्यों गये... बोल रहे हैं कि इन तीनों को माफी मांगना चाहिए... कुछ ऐसा ही नेहरू भी करते थे... एक बार सर्वपल्ली राधाकृष्णन (जो बाद में राष्ट्रपति बने) संघ की शाखा में चले गये थे... तब नेहरू उनसे नाराज हो गये थे... और पत्र लिखकर बोले कि “हमारी समस्या यह नहीं है कि पाकिस्तान क्या करता है… बल्कि हमारी समस्या यह है कि हमारे अपने बहुत से लोग क्या करते हैं।”... यानी नेहरू की नज़र में पाकिस्तान से भी खतरनाक था संघ!!! नेहरू तो गांधी की हत्या से एक महीने पहले से ही संघ के खिलाफ प्लानिंग और प्लॉटिंग में जुट गये थे... हत्या हुई तो मौका हाथ लग गया... प्रतिबंध लगा दिया... लेकिन साबित कुछ नहीं हुआ... नतीजा संघ का कुछ नहीं बिगाड़ पाये... संघ 100 वर्ष का हो गया... कांग्रेस चार राज्यों में सिमट गई... अब आप बताइये जो दुरुह कार्य नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी नहीं कर पाये... क्या वो ये तीन लोग कर पाएंगे?

Prakhar Shrivastava

22,034 次观看 • 10 天前

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सच यही है कि 1947 में नेहरू 'इलेक्टेड' प्राइम मिनिस्टर नहीं बल्कि 'एक्सीडेंटल' प्राइम मिनिस्टर थे... इसीलिए उनका असली कार्यकाल 1952 से ही माना जाना चाहिए... वीडियो में कही गई बातों का स्रोत निम्नलिखित हैं :- 1. सरदार पटेल: एक समर्पित जीवन, राजमोहन गांधी, पृष्ठः 378 to 381 2. गांधी हिज लाइफ ऐंड थॉट्स, आचार्य कृपलानी, पृष्ठः 248 to 251 3. सेलेक्टेड वर्क्स ऑफ जवाहर लाल नेहरू, सीरीज 2, खंड 15, पृ. 457 4. संपूर्ण गांधी वांग्मय, खंड 84, पृष्ठ 408 5. सरदार पटेल्स कॉरेस्पॉन्डेंट, वॉ. 10, पृ. 38 6. सरदार पटेल्स कॉरेस्पॉन्डेंस, वॉ. 3, पृ. 153 7. आजादी की कहानी, मौलाना आजाद, पृष्ठः 146 8. इंडिया फ्रॉम कर्जन टू नेहरू एंड आफ्टर, दुर्गा दास, पृ. 237

Prakhar Shrivastava

26,333 次观看 • 15 天前

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जिस टीपू सुल्तान ने अपने 8 और 5 साल के बेटों को अंग्रेजो के पास गिरवी रख दिया था... ऐसे ‘सौदेबाज़’ टीपू के बारे में ओवैसी का कहना है कि टीपू सुल्तान ने वीर सावरकर की तरह अंग्रेजों को लव लेटर नहीं लिखे... दरअसल ओवैसी को थर्ड एंग्लो-मैसूर वार के बारे में कुछ पता नहीं है... इस युद्ध में जब अंग्रेज सेना ने टीपू सुल्तान की राजधानी श्रीरंगपट्टनम को घेर लिया था... तब टीपू ने गवर्नर लॉर्ड कॉर्नवालिस को पत्र लिखकर युद्ध रोकने, शांति और संधि करने की गुहार लगाई थी... जिसे अंग्रेजों ने स्वीकार किया... युद्ध के बाद हुई श्रीरंगपट्टनम संधि में टीपू ने बड़े ही शर्मनाक तरीके से समझौता करते हुए अपने दो बेटों को अंग्रेजों के पास गिरवी रख दिया। #TipuSultanControversy #TipuSultan

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44,134 次观看 • 4 个月前

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पहले भारत में रहकर पाकिस्तान के लिये वोट डाला...भारत में रहकर पाकिस्तान की नींव रखी... भारत में रहकर देश का बंटवारा करवाया... और फिर पूरी बेशर्मी के साथ यहीं रह गये... सोचिये, पाकिस्तान बनाने के बाद भी पाकिस्तान नहीं गये... और जब पाकिस्तान के पीड़ित हिंदुओं को नागरिकता देने की बात हो रही है तो ये इसमें भी कुछ लोग फच्चर फंसा रहे हैं... ध्यान से देखिये ये वीडियो... और समझिये कैसे 1945-46 के चुनावों में इन्होंने जिन्ना, मुस्लिम लीग और पाकिस्तान के पक्ष में एकतरफा बंपर वोट दिया और जब पाकिस्तान जाने की बारी आई तो सिर्फ और सिर्फ 72 लाख ही पाकिस्तान गये... बाकी यहीं रह गये... ये नारा लगाने के लिये कि – सभी का खून शामिल है यहां कि मिट्टी में !!! इनके कुकर्मों की सज़ा भुगत रहे पाकिस्तान के हिंदुओं को लेकर इन्हें कोई चिंता नहीं है... गज्जब बेशर्मी है !!! #CAA #Pakistan #CitizenshipAmendmentAct Vaad Arihant

Prakhar Shrivastava

150,222 次观看 • 2 年前

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नेहरू से सोनिया तक... सोमनाथ से अयोध्या तक... वही सनातन धर्म और हिंदू पुनरुत्थान से घृणा... पीढ़ियां बदल गईं, लेकिन नेहरू-गांधी परिवार की हिंदू विरोधी सोच नहीं बदली। जैसा कि तय था सोनिया गांधी ने श्रीराम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में शामिल होने से इनकार कर दिया... सोनिया जी नेहरू के ही पदचिन्हों पर चल रही हैं... नेहरू ने भी यही किया था... उन्हें 1951 में सोमनाथ मंदिर की प्राणप्रतिष्ठा में आमंत्रित किया गया था... लेकिन नेहरू ने सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट का अपमान करते हुए इस आमंत्रण को ठुकरा दिया था... नेहरू ने तर्क दिया था कि वो इस हिंदू पुनरुत्थान से बहुत परेशान हैं। सौजन्य - The Jaipur Dialogues Sanjay Dixit ಸಂಜಯ್ ದೀಕ್ಷಿತ್ संजय दीक्षित #Ayodhya #AyodhyaRamTemple #RamMandir #Sonia_Gandhi #Nehru #Somnath #Congress

Prakhar Shrivastava

134,739 次观看 • 2 年前