
Rajkumar Bhati
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पूर्णकालिक सामाजिक, राजनीतिक कार्यकर्ता। मूलतः पत्रकार। लेखन व अध्ययन में रुचि। प्रवक्ता समाजवादी पार्टी।
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संदीप चौधरी और गरिमा सिंह की डिबेट इसलिए निष्पक्ष मानी जाती है कि वे सभी पेनलिस्ट को बराबर समय देते हैं । आमतौर पर ये दोनों एंकर हर पेनलिस्ट को एक बार ही बुलवाते हैं लेकिन पूरी बात कहने का मौका देते हैं । न्यूज़ 24 में सबसे बड़ा सवाल करने आए श्री अखिलेश आनंद दो बार बीजेपी के प्रवक्ता को बुलवाकर शो के करीब 25 मिनट बाद मेरे पास आए । मैंने अपनी बात कही । उसके जवाब में फिर भाजपा प्रवक्ता को बुलवाया । उन्होंने कुछ आपत्तिजनक बात कही तो मैंने जवाब के लिए 10 सेकेंड मांगे । मैं बार-बार उंगली उठाता रहा और चीखता रहा लेकिन अखिलेश आनंद जी ने समय नहीं दिया । इस पर मैंने शो का बहिष्कार कर दिया । गेस्ट कोऑर्डिनेटर हिमांशु जी ने समझा बुझाकर पुनः मुझे बैठाया । उसके बाद जो हुआ आप खुद सुन लीजिए ।
Rajkumar Bhati101,860 次观看 • 9 天前

दिल्ली के जवाहर भवन में डॉ रफरफ शकील अंसारी और जावेद अनवर द्वारा लिखित पुस्तक 'जाति और साम्प्रदायिकता के विषाणु' का लोकार्पण था। लोकार्पण के बाद इसी विषय पर परिचर्चा थी। वक्ताओं में मेरे अलावा श्री योगेंद्र यादव जी, श्री आशुतोष, प्रो. रतन लाल, श्रीमती शीबा असलम फहमी और श्री बिलाल अहमद थे। मैंने अपने वक्तव्य में कहा कि हमारे समाज में जातियों को लेकर बहुत खराब मुहावरे, लोकोक्तियां और कहावतें बनी हुई है । मैंने यह भी कहा कि ऐसी कहावतें दोनों तरफ से हैं जो दूसरे समाज को अपमानित करती है । मैंने बताया कि एक पत्रकार महोदय मुझे एक दोहा सुनाकर चिढ़ाते थे - "गुर्जर अहीर कंजर कुत्ता बिल्ली बंदर ये छै ना होते तो खुले किवाड़ों सोते दूसरे पत्रकार ने मुझे एक दोहा बताया कि आप उन्हें यह सुना दिया करो । जिसमें ब्राह्मण और वैश्या का जिक्र है । साथ ही साथ मैंने यह भी बोला कि यह दोहा बहुत ज्यादा खराब था इसलिए मैंने कभी नहीं सुनाया । और मैं भी इसे ठीक नहीं मानता । क्योंकि ब्राह्मण भी बहुत भले होते हैं । लेकिन जिनके दिमाग में फितूर भरा होता है ऐसे लोग इसकी कुछ सेकंड की क्लिप चलाकर मेरे ऊपर निशाना साध रहे हैं । समझदार लोगों को पूरा वीडियो सुनकर सच्चाई की तह तक पहुंचना चाहिए ।
Rajkumar Bhati133,585 次观看 • 2 个月前

कई मीडिया संस्थानों में खबर है कि राममंदिर के चढ़ावे में गबन हुआ है। अखिलेश यादव जी ने तो सिर्फ उसकी जांच की मांग की है। एंकर्स को जांच की मांग इतनी खराब क्यों लग रही है कि शोर मचाकर असली मुद्दे को ही दबा देना चाहते हैं। ऐसे समय दो मुहावरे बार बार याद आते हैं:- 1.चोर मचाए शोर 2.चोर-चोर मौसेरे भाई
Rajkumar Bhati55,744 次观看 • 1 个月前

राष्ट्रीय चैनल की डिबेट में बहन जी बड़े गर्व के साथ पूरे देश को बता रही हैं कि वह अपर कास्ट यानी उच्च जाति हैं। तो बहन जी यह भी बता दें कि फिर लोवर कास्ट या नीच जाति कौन है। यह जातीय घमंड संविधान के लागू होने के 75 वर्ष बाद भी इनके दिमाग से नहीं निकला है। ये आज भी मनुस्मृति की सोच के अनुसार चल रहे हैं और ये सामंतवादी लोग सामाजिक, शैक्षिक रूप से पीछे रह गए लोगों को अगर सरकार कोई सुविधा देती है तो उसे जातिवाद मानते हैं। यानि इनका अहंकार जातिवाद नहीं है। एससी, एसटी, ओबीसी को न्याय मिलना जातिवाद है। दूसरी भूमिका एंकर की देखिए। अपर कास्ट बहन जी के पक्ष में तुरंत कूद के आ गए और मंडल, पिछड़े और दलितों की आलोचना करने लगे। खुद को अपर कास्ट कहने में इन्हें कोई समस्या नहीं। कान खोलकर सुनो-- "अपर कास्ट, उच्च जाति, सवर्ण, अवर्ण, लोअर कास्ट, नीच जाति गैर संवैधानिक और गैरकानूनी शब्द हैं और अपराध हैं। एससी, एसटी, ओबीसी और जनरल कैटेगरी ये संवैधानिक शब्द हैं। Paul Annesley
Rajkumar Bhati119,199 次观看 • 4 个月前