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अंबेडकरवाद बनाम मनुवाद

410,630 次观看 • 1 年前 •via X (Twitter)

10 条评论

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राजू वाल्मीकि1 年前

भाटी ने चैलेंज दिया था कि मनुस्मृति में ऐसा कोई श्लोक दिखाए जिसमें वर्ण योग्यता व कर्म के आधार पर तय होता है । मैं भाटी की चुनौती स्वीकार करता हु। प्रमाण नीचे दिया है । क्रॉस वेरिफाई कर सकते है । अब भाटी मेरी गुलामी स्वीकार करे। अगर मेरी गुलामी स्वीकार करते है तो भाटी से उसकी जीभ से अपना जूता साफ करवाऊंगा । मनु कहते हैं- जन्मना जायते शूद्र: कर्मणा द्विज उच्यते। अर्थात जन्म से सभी शूद्र होते हैं और कर्म से ही वे ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र बनते हैं।

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Rajkumar Bhati1 年前

यह प्रथम अध्याय का 110 वां श्लोक है l शुद्ध श्लोक स्क्रीनशॉट में दिख रहा है l लेखन में आपने शब्द बदल दिया है l संस्कार की जगह कर्म कर दिया है l अब यह मत कहना कि कर्म और संस्कार एक ही बात है l

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Solar Heavy1 年前

take the journey

राजू वाल्मीकि 的头像
राजू वाल्मीकि1 年前

लो भाटी , मनुस्मृति का श्लोक । जिसमें बताया गया है जन्मे से सब शुद्र होते है और संस्कार से दूसरा जन्म यानी उच्च वर्ण को प्राप्त होते है

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एक भारतीय 😎1 年前

कैसे सुधांशु जी ने बुद्धिहीन नमाजवादी @rajkumarbhatisp को मनुस्मृति पर जहर फैलाते हुए पेला था। इस जहरीले नमाजवादी के हर ट्वीट के नीचे ये पोस्ट करो। 😂

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Krishna Dubey 🚩1 年前

भाटी जी आप दोगले हैं, बुढ़ापे में अम्बेडकर बनने निकले है आप लेट हो गई पर सवाल ये है कि अम्बेडकर को मानने वाले लोग बिकाऊ और दोगले क्यों होते हैं,,,एक तरफ आप ब्राम्हणों के कार्यक्रम में शामिल होते हो,, ब्राम्हणों का महिमामंडन करते हो,, रामकथा का गुणगान करते हो,, कौन हैं आप? कहां से

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Kunal Meshram1 年前

दौड़ा दौड़ा भागा भागा सा कन्फ्यूज है थोड़ा थोड़ा सा निकम्मा मनुवादी 🔥🔥😃😃😃😩😩😩😩😩😩

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Gulab Singh1 年前

भाटी साहब आपने उस धूर्त मनुवादी को कितना शालीनता से, सकारात्मक, तर्कपूर्ण बात की किन्तु वह अमर्यादित भाषा बोलने पर उतर आया। ब्राह्मणवाद की यही पहचान है। धूर्तों के पास प्रमाणिक जवाब होते नहीं हैं, इसलिए गाली गलौज पर उतर आते हैं। शुक्रिया भाटी साहब।

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Adv Sunil Sharma1 年前

देख तू अंबेडकरवादी तो बिल्कुल नहीं हो सकता, क्योंकि अगर ऐसा होता तो अंबेडकर की प्रतिमा को भू-माफिया बताने वाले आजाम ख़ान की पार्टी से या तो आजाम ख़ान का छुटाकारा कराता या खुद ऐसी पार्टी को लात मारकर बाहर हो जाता! और मनुस्मृति को पढ़ने की ना तेरे पास काबिलियत है, ना संस्कृत पढ़ने लायक़ तेरी शैक्षिक योग्यता है! तू है दो विचारधाराओं के बीच की वो सत्ता-लोलुप लटकन जो सिर्फ सत्ता में आने की तड़पन फड़फड़ाती रहती है!

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GAURAV🇮🇳1 年前

इसको आपको गरियाना चाहिए था, इस गदही को आप भाटी साहब कहाँ तीन min दे दिए अपने ।

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